इथेनॉल पेट्रोल का खेल ���ेखिए, जनता को मूर्ख कैसे बनाया जा रहा है, नितिन गडकरी देश के लोगों को कैसे अंधकार में झोंके हुए हैं और मोदी जी की आँख देख नहीं पा रही है।।
इसके बावजूद भी ��ेट्रोल मंहगा हो रहा है!
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Authentic Himalayan yoga
Swami Sundaranand enlightens viewers on how chanting om, the inner music and sound, your yoga Om or an aum yoga mantra can transform your life.
Yoga meditation explained for advanced yoga practitioners and beginners.
त्राटक योग की शक्ति बहुत गहन है , त्राटक क्या है ?
आचार्यों ने क���ा है कि मनुष्य एकाग्रचित्त निश्चल दृष्टि से किसी सूक्ष्म लक्ष्य अथवा लघु पदार्थ को तब तक देखें जब तक कि अश्रुपात ना हो जाये।
त्राटक तीन प्रकार के कहे गये है-
१. बाह्य त्राटक - चन्द्रमा, नक्षत्र, तारा, व दूरवर्ती लक्ष्य पर दृष्टि रखकर त्राटक करे तो वह बाह्यत्राटक कहलाता है। जिस साधक की पित्त प्रधान प्रकृति हो, नेत्र कमजो�� हो, नेत्र में फूला, जाला, या अन्य रोग हो वह यह त्राटक नहीं करे।
२. मध्य त्राटक - काली स्याही से कागज पर लिखे हुये ॐ, बिन्दु, देवमूर्ति अथवा समीप लक्ष्य या मोमबत्ती, तिल के तेल की अचल बत्ती, लैम्प बत्ती के प्रकाश से प्रकाशित धातुमूर्ति पर त्राटक करने को मध्य त्राटक कहते है।
जिनकी नेत्र ज्योति पूर्ण हो, त्रिधातु सम हो, कफ प्रधान प्रकृति होवे वह इस त्राटक को करे।
उदाहरण :- साधक अपने सामने एक दर्पण ���खें। फिर घी का एक दीया इस तरह रखें कि उसकी ज्योति दर्पण के मध्य में प्रतिबिम्बित होवे। दर्पण के मध्यभाग में सुगंधित तेल की एक बून्द डाल देवें। दर्पण मध्य में तेल की बूंद के पास जो ज्योति दिखे उस पर दृष्टि एकाग्र करे। बाहरी आवाज सुनाई नही देवें तथा ध्यान में तल्लीनता बढ़े इसके लिये दोनों कानों में कपड़े की दो गुटिका रख लेवें। केसर, इलायची, व जायफल का समभाग चूर्ण तैयार करे उसे रुई व कपडे की पोटली में सिलकर गुटिका बना लेवे ।। उससे कानों में रखने से आवाजें सुनाई नहीं देगी बल्कि अन्दर का नाद खुलेने लगेगा। शुरु-शुरु में आँखों से गर्म पानी आयेगा एक सप्ताह बाद कम हो जायेगा। इस तरह धीरे-धीरे आधा घण्टा का अभ्यास करने पर भूत- भविष्य का ज्ञान होने लगेगा।
३. आन्तर त्राटक - आन्तर त्राटक व ध्यान मे�� बहुत कुछ समानता है। हृदय अथवा भ्रूमध्य में नेत्र बन्द कर एकाग्रता पूर्वक चक्षुवृति की भावना को आन्तर त्राटक कहा जाता है।
भ्रूमध्य में आन्तर त्राटकर करने से आरम्भ के कुछ दिन कपाल में दर्द हो सकता है, नेत्र की बरौनी में चञ्चलता
प्रकट होगी, परन्तु कुछ समय बाद नेत्रवृति सामान्य हो जाती है।
उपमहाविद्या रह��्य - हृदय देश में वृत्ति की स्थिरता के लिये प्रयत्न करने वालों को उपर्युक्त बाधा नहीं होगी।
जिसको नेत्ररोग हो, आँखा में जाला, फूला होवे मस्तिष्क, नासिका व हृदय में दाह रहता हो पित्त प्रधान प्रकृति वाला हो वह अन्य त्राटक नहीं करें। यही अभ्यास करें।
॥ ध्यान समाधि ॥
ध्यान के दो प्रयोजन है। प्रथमतया सभी साधक सिद्धियों की ओर दौड़ते है अन्य कुछ विरले साधक है जो मोक्ष कामना रखते है। ध्याता वैरा��्ययुक्त क्षमाशील, श्रद्धालु तथा मोहादि से रहित होना चाहिये। ध्याम, ध्येय, ध्यानप्रयोजन को जानकर उत्साह पूर्वक अभ्यास करे। ध्यान से थक जाये तो जप करे। पुनः ध्यान करे, इस तरह क्रमश: कर अजपा जप का अभ्यास करें।
१२ प्राणायामों की एक धारणा होती है, १२ धारणाओं का एक ध्यान होता एवं १२ ध्यान की समाधि कही जाती है। समाधि में साधक स्थिर भाव में स्थिर रहता है और ध्यान स्वरूप से ��ून्य हो जाता है। सर्वत्र बुद्धि प्रकाश फैलता
है विज्ञानमय शरीर में प्रवेश कर बाद में आनन्दमय कोश शरीर में प्रेवश कर परमानन्द को प्राप्त करता है।
8 minutes to reset phone addiction and clear brain fog explained through neuroscience and psychology.
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Just 7 minutes of conscious breath fasting can activate cellular autophagy the body’s natural repair system.
No diet. No pills. Just breath.
When the breath pauses, the body heals.
7 minutes of breath fasting activates autophagy
what science calls ‘cellular renewal’ and yoga calls prāṇa shuddhi.
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