@SheetalGunjan24 ���ेरे गले लगूँ कब तक यूँ एहतियातन मैं
लिपट जा मुझ से कभी बद-हवास हो कर भी
तू एक प्यास है दरिया के भेस में मेरे यार
मगर मैं एक समुंदर हूँ प्यास हो कर भी
@SheetalGunjan24 कोई मायूस जो मिलता तो न रहता बे-आस
रंग चेहरे पे तबस्सुम का सजा देता था
उम्र भर रेत पे चलता रहा लेकिन वो शख़्स
तपती राहों पे हरी घास बिछा देता था
मिरी ग़लती पे बिगड़ता भी बहुत था लेकिन
और फिर मुझ को वो जी भर के दुआ देता था
@guriyapriti @SheetalGunjan24 जाने वाले ने हमेशा की जुदाई दे कर
दिल को आँखों में धड़कने के लिए छोड़ दिया
हम को मालूम था अंजाम-ए-मोहब्बत हम ने
आख़िरी हर्फ़ से पहले ही क़लम तोड़ दिया