जनता: चीनी महंगी हो गई
सरकार: बोलो वंदे मातरम्
जनता: E20 से ��रेशानी है
सरकार: बोलो वंदे मातरम्
जनता: स्कूल खराब हैं
सरकार: बोलो वंदे मातरम्
जनता: सड़क खराब है
सरकार: बोलो वंदे मातरम्
जनता: अस्पताल बेकार हैं
सरकार: बोलो वंदे मातरम्
इस सरकार की कैसेट एक जगह फंस चुकी है.
अंकिता भंडारी के परिवार से 2 दिन पहले मिला। चार साल बीत चुके हैं, लेकिन आज भी वो न्याय का इंतज़ार कर रहे हैं - अपनी बच्ची के ख़िला���़ एक ऐसे अपराध के लिए जिसकी कोई माफी नहीं।
सिर्फ 19 साल की अंकिता वनंतरा रिज़ॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट थीं जहां एक "VIP" मेहमान की शर्मनाक मांग का विरोध करने पर चीला नहर में डुबो कर उनकी हत्या कर दी गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने हिंसा और डुबोने के सबूतों की पुष्टि भी की।
मगर, रिज़ॉर्ट में अंकिता के रूम को किसी भी तरह की जांच होने से पहले ध्वस्त कर दिया गया जो खुद में संदेहपूर्ण है।
इस दुखद मामले में ���बसे शर्मनाक बात है कि राज्य सरकार खुद आज तक उस "VIP" को संरक्षण दे रही है। क्यों? क्योंकि वह BJP-RSS का बड़ा नेता है।
यही BJP की विकृत मानसिकता है बलात्कारियों और अपराधियों को बचाना, उनका राजनीतिक संरक्षण करना, यहां तक कि बलात्कार के दोषियों का फूल-मालाओं से स्वागत करना। दुनिया में सबसे घिनौने इंसान वो होते हैं जो बलात्कारियों की रक्षा करते हैं और BJP में ऐसे लोगों की भरमार है।
भारत तब तक आगे नहीं बढ़ सकता, जब तक महिलाओं को पुरुषों के इस्तेमाल की वस्तु समझने वाली यह अमानवीय मानसिकता खत्म नहीं होती। भारत तभी आगे बढ़ेगा, जब भारत की महिलाएं आगे बढ़ेंगी - सम्मान, सुरक्षा, समानता और न्याय के ���ाथ।
झारखंड में विरोध-प्रदर्शन कर रहे छात्रों के ख़िलाफ़ बल का इस्तेमाल ग़लत है।
छात्रों को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है और बातचीत से ही समाधान निकल सकता है।
झारखंड सरकार को इन छात्रों की बात सुननी चाहिए और हर समस्या का तुरंत समाधान करना चाहिए।
The use of force against students protesting in Jharkhand is wrong.
Students have a right to peaceful protest, and only dialogue can yield solutions.
The Jharkhand government must continue to hear these students out and resolve their issues immediately.
“जॉब नहीं मिलेगा, तो सिंहासन हिलेगा।”
कोट�� के बाद, देहरादून के बाद अब ‘छात्रों की गूंज’ प्रयागराज पहुंच रही है।
यह वो शहर है जहां लाखों नौजवान सालों से तैयारी कर रहे हैं - फ़ॉर्म भरते हैं, फीस देते हैं, और इंतज़ार करते रहते हैं।
पेपर लीक ने उनका आज छीना। रुकी हुई भर्तियों ने उनका कल। और अभी कुछ दिन पहले, दिल्ली में इन्हीं बच्चों पर लाठियां और पैलेट चलाए गए - सिर्फ़ इसलिए कि उन्होंने अपने हक़ की बात की।
हम उनकी आवाज़ उठाते रहेंगे और उन��हें इंसा��़ दिलाकर रहेंगे। अब बहाने नहीं चलेंगे - जवाबदेही लीजिए, या कुर्सी छोड़िए।
8 अगस्त - प्रयागराज में मिलते हैं।
#ChhatronKiGoonj
• जिसने गालियों की फैक्ट्री - IT सेल बनाई
• जो गालीबाजों को फॉलो करता है
अब वही बता रहा है कि सभ्य समाज में गालियों की जगह नहीं होती.
मने 100 चूहे खाकर बिल्ली हज को चली है.
AFTER 26 DAYS OF HUNGER DO I NEED TO PROVE MY SINCERITY !!!
Do please watch and help spread the word. Find the full 22 minutes video on my YouTube Channel: Sonam Wangchuk
प्रधानमंत्री मोदी भारत के इतिहास के सबसे युवा-विरोधी प्रधानमंत्री हैं - इतने युवा विरोधी कि एक नाकाम शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी नहीं ले सकते।
152 पेपर लीक। 7.5 करोड़ छात्र पीड़ित। और सज़ा एक दोषी को भी नहीं। सजा किसे मिली? मेहनती युवाओं को।
और जब इन बच्चों ने शिक्षा के जायज़ सवाल उठाए - तो जवाब में मिली लाठी और हिरासत। लीक करने वाले अपराधी आज़ाद - और वाजिब मुद्दे उठाने वाले छात्र घसीटे जाते हैं, पीटे जाते हैं।
यह सरकार सिर्फ़ युवाओं को नाकाम नहीं कर रही - उनपर टूट पड़ी है।
शांतिपूर्ण विरोध एक अटूट और मौलिक अधिकार है।
भारत के निर्दोष छात्रों पर हमला करने के आदेशों का आँखें बंद करके पालन करने वाले हर पुलिस अधिकारी और सरकारी कर्मचारी ये बात ध्यान रखें:
संविधान ही आपका मालिक है।
सत्ता हमेशा के लिए नहीं रहती।
जवाबदेही ज़रूर तय की जाएगी।
Peaceful protest is a sacred and fundamental right.
Every police officer and govt official blindly following orders to attack India’s innocent students should keep in mind:
The Constitution is your master.
Power is not permanent.
Accountability will follow.
5 साल रोज़ाना 10 घंटे की तैयारी और औसतन ₹9 लाख - हर छात्र की मेहनत और उसके परिवार का त्याग।
10 साल में 152 पेपर लीक, सीट-नौकरी का रेट कार्ड, 0 सज़ा, 7.5 करोड़ युवाओं का बर्बाद भविष्य - System की हालत।
इस भ्रष्ट Education System को जड़ से बदलना होगा - बनानी होगी 21वीं सदी की परीक्षा व्यवस्था, स्वतंत्र और जवाबदेह संस्था जहां छात्रों को मिले पूरी सुरक्षा।
#ChhatronKiGoonj
एक-एक वीडियो और पोस्ट के लिए लाखों रुपए दिए जा रहे हैं. इतना पैसा कहां से आ रहा है?
• जिन्होंने 700 किसानों की मौत पर नहीं बोला
• जो EVM, वोट चोरी, SIR की धांधली पर चुप रहे
• गंगा के लिए अनशन करते साधु मर गए, चुप रहे
• सरकार के हर जुल्म को देखते रहे और चुप रहे
ये सारे लोग कॉर्डिनेटेड तरीके से 24 घंटे के अंदर वीडियो और पोस्ट करने लगे. क्या आपको ये सामान��य लगता है?
ये PR एजेंसी सा काम है... जिसमें पैसे लेकर पोस्ट और वीडियो करवाए जाते हैं.
खुद सोचिए - आज तक जिनके लिए पैसा ही सब कुछ रहा, अचानक से वो देश की बात करने लगे.
अगर इस बात पर आप यकीन कर रहे हैं, तो बहुत बड़े भ्रमजाल में फंस रहे हैं.
ये प्रदर्शन, ये अनशन इसलिए चल पा रहा है - क्योंकि सरकार इसे चलवा रही है, चलने दे रही है.
सेलिब्रिटी लोग इसलिए बोल पा रहे हैं, क्योंकि सरकार की इसमें सहमति है.
इस प्रदर्शन का पहले दिन से एजेंडा रहा है कि मोदी को क्लीनचिट मिल जाए, विपक्ष को खारिज कर दिया जाए.
आप इनके बयान सुनें: पहले दिन से विपक्ष के खिलाफ, जैसे- CJP इसलिए आया क्योंकि विपक्ष नकारा है.
आप इनका आइडिया देखिए: मोदी सरकार में हमें शिक्षा मंत्री बना दो. मतलब सरकार अच्छी है, मोदी जी भगवान हैं, जो भी गलती थी, प्रधान की थी.
इनकी बात से, इनके आइडिया से किसी एक आदमी को फायदा हो रहा, तो वो है मोदी. ये पेपर लीक में मोदी को बचाकर निकालने के लिए एक गलियारा तैयार कर रहे हैं.
इसलिए कह रहा हूं - पहले दिन से इसके पीछे बहुत बड़ा तंत्र काम कर रहा है. आप जितना जल्दी समझ जाएं, उतना बेहतर है.
जो भी गिनती के लोग बिना पैसा लिए इसका समर्थन कर रहे हैं. आज से 3-4 साल बाद आप खुद को ठगा महसूस करेंगे. ये अन्ना हजारे के अनशन से बड़ा झोल है.
अन्ना के अनशन में RSS लगा था, इस अनशन में भी वही ताकत है, वही पैसा है.
• देहरादून में राहुल गांधी को कार्यक्रम करने की इजाजत नहीं मिलती.
• लेकिन दिल्ली में लोगों को प्रदर्शन करने की इजाजत मिल जाती है.
ये फर्क है
पूरा खेल है कि खुद का विपक्ष खड़ा किया जाए, जो सरकार के हिसाब का हो. जो मोदी से ध्यान भटकाकर, प्यादों को निशाना बनाए.
विनेश फोगाट ने वर्षों तक देश के लिए लड़कर तिरंगे का मान बढ़ाया है। एक ट्रायल का परिणाम उनके योगदान को कम नहीं कर सकता।
आज जो कुछ भी भारतीय कुश्ती में हो रहा है, उसे पूरा देश देख रहा है और समझ भी रहा है। खिलाड़ियों के साथ निष्पक्षता, सम्मान और पारदर्शिता हर खेल संस्था की जिम्मेदारी है।
विनेश, संघर्ष जारी रखो। चैंपियन हार से नहीं, हार मानने से हारता है। 🇮🇳