डॉ. उदय प्रताप सिंह ‘गुरु जी’ की गरिमामय उपस्थिति में उनके ‘अभिनंदन ग्रन्थ’ के विमोचन समारोह के साहित्यमय क्षण!
बड़ो का आशीर्वाद और दिशा निर्देशन बना रहे।
माननीय मुख्यमंत्री जी उप्र की राजधानी-क्षेत्र के स्कूल की बदहाली का पहले हाल देखिए फिर 1 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी और अरबों-खरबों के निवेश का जुमला फेंकिए।
मेरठ मे किसान नेतृत्व के नाम पर ‘पीडीए’ पर प्रहार किया गया है। जिस प्रकार चुन-चुनकर दलित और गुर्जर समाज को निशाना बनाया गया है, उससे पता चलता है कि भाजपा में इन समाजों के प्रति कितना अधिक विद्वेष भरा हुआ है। भाजपा समझ गई है कि अब न तो दलित समाज उनके साथ है और न ही गुर्जर व पीडीए के अन्य ���माज, इसीलिए उन्हें डरा-धमकाकर अपनी तरफ़ लाने की कोशिश की जा रही है।
पीडीए एकजुट है और रहेगा!
स्कूलों की बदहाली का ख़स्ताहाल दिखाने की कोशिश करेनवाले ‘जंत���-मंतर के युवा आंदोलनकारियों’ पर राजस्थान में भाजपाइयों पर द्वारा किया गया जानलेवा हिंसक हमला और गाड़ियों के शीशे तक तोड़ने का कुकृत्य बेहद निंदनीय है।
‘हिंसा’ हताशा क�� ही उग्र रूप होती है। शिक्षा विरोधी भाजपा और उनके संगी-साथी कभी नहीं चाहते हैं कि लोग जागरूक हों और उनकी दक़ियानूसी सोच पर आधारित रूढ़िवादी-सामंतवादी सत्ता के ख़िलाफ़ खड़े होकर उसे उखाड़ फेंकें। शिक्षा भाजपाइयों के लिए व्यापार है, ‘मानव संसाधन विकास’ का मुद्दा नहीं।
छात्र कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!
किसान का अपमान, देश का अपम��न है!
भाजपा ने किसान के मुँह पर लात मरवाकर पूरे देश के किसानों को धमकाने का जो कुकृत्य किया है वो अक्षम्य है।
उप्र की भाजपा सरकार द्वारा किसान नेताओं पर थाने में थर्ड डिग्री की मार-पीट करके प्रताड़ना देना दर्शाता है कि हार के डर से वो कितनी बौखलाई है। जिन्हें भाजपा किसानों के आगे ढाल बनाकर साथ में खड़ा करना चाहती थी वो ढाल भी निम्नलिखित कारणों से, किसानों के आक्रोश की आग के कारण मोम की ढाल ही साबित हुई है।
जो भाजपा सरकार :
- कुछ लोगों के हाथ में खेती-किसानी, भंडारण, विदेशी बीज-खाद- पैदावार का व्यापार-विपणन देने के लिए विदेशियों से डील करती है।
- एमएसपी के लिए तै��ार नहीं होती है।
- ख़रीद के लिए मुकर जाती है।
- खाद की अंतहीन लाइन में किसानों को लगाती है।
- भूमि अधिग्रहण व तीन काले क़ानून लाकर, किसानों का सब कुछ हड़प लेना चाहती है।
- किसान आंदोलन में 700 से भी अधिक किसानों की शहादत पर चुप रहती है।
- किसानों की आत्महत्याओं पर शोक तक प्रकट नहीं करती है।
- किसानों पर गाड़ी चढ़ाकर मारनेवाले अपने लोगों का क्लीन चिट देती है…
उस भाजपा सरकार से इससे अधिक उम्��ीद क्या की जा सकती है कि वो किसानों के हित के नाम पर उनके तथाकथित हितैषियों से समझौता करके अपनी स्वार्थ सिद्धी में लगी रहकर ‘किसान नेताओं’ को थर्ड डिग्री देगी और कुछ नहीं।
देश भर के किसान देख लें कि भाजपा और उसके सहयोगी किस तरह सत्ता सुख में लीन रहकर किसानों पर अत्याचार कर रहे हैं।
इस मामले की गहरी जाँच हो और हर दोषी के ख़िलाफ़ सख़्त दंडात्मक कार्रवाई हो और बर्खास्तगी भी।
��ोर निंदनीय!
किसान कहे आज का , नहीं चाहिए भाजपा!
लो अब ‘सोशलमीडिया बंदी’ आ गई!
सोशल मीडियावालों को सरकारी स्कूलों में जाने से रोकना बताता है कि सरकारी स्कूलों के हालात सच में बदहाली की दुखभरी कहानी कह र��े हैं। स्कूलों में क्लासरूम, बोर्ड, पंखे-बिजली, पीने के पानी, दोपहर के खाने, टॉयलेट, लैब, कॉपी-किताब, यूनिफ़ॉर्म से लेकर कई विषय के टीचर्स की बेहद कमी है।
सोशल मीडिया को तो सरकार रोक लेगी लेकिन जेन अल्फा का क्या करेगी?
भाजपा में ‘पीडीए’ स्थान तो पा सकता है लेकिन ‘सम्मान’ नहीं।
यदि संपूर्ण पीडीए समाज के लोग अपने-अपने व्यक्तिगत स्व��र्थ और लाभ का त्याग करके एकजुट हो जाएं तो पीडीए सरकार सदैव के लिए आ जाए। फिर किसी भी समाज का कोई भी व्यक्ति ‘पीड़ित, दुखी, अपमानित’ नहीं होगा क्योंकि ‘पीडीए’ का मूल भावनात्मक सिद्धांत ही है : ‘प्रेम, दया, अपनापन’।
ये है प्रयागराज के गंभीर हालात। कोई और हो तो 1 लाख करोड़ प्रयागराज के विकास के नाम पर डकार जाने के बाद, वहाँ के हज़ारों घरों का ये जलमग्न हाल देखकर शर्मिंदगी से सत्ता ही छोड़ दे।
जनाब नाम बदलने से कुछ नहीं होता, बदलिए तो आप अपना भ्रष्ट काम और नीयत लेकिन अब वो भी नहीं बदलेगी, इसीलिए अब उत्तर प्र��ेश और देश की जनता ‘भाजपा सरकार’ ही हमेशा के लिए बदल देगी। भाजपा जाएगी फिर कभी नहीं आएगी।
बाढ़ के हवा-हवाई सर्वे से काम नहीं चलेगा अगर हिम्मत है तो सड़कों पर उतरकर जनता का सामना कीजिए। आपने जो 7-8 हज़ार करोड़ लिखा-पढ़ी में और जो बीसों हज़ार करोड़ बिना लिखा-पढ़ी के अपने छवि निर्माण में, अपने को दिव्य दिखाने के लिए द्रव्य के रूप में बहाये हैं, उनसे आपकी कितनी छवि बनी है, उसका सच आपको पता चल जाएगा।
��ोर निंदनीय!
खिलाड़ियों का सम्मान मतलब स्वस्थ, सक्रिय, अनुशासित हिंदुस्तान।
हम आएंगे और फिर से World Class Sports Infrastructure बनाएंगे और ओलंपिक ��� अन्य बड़ी प्रतियोगिताओं में पदक के लक्ष्य को International Level की Training के माध्यम से प्राप्त करने में खिलाड़ियों को हर संभव सुविधा प्रदान करेंगे।
हम अभी से उन सभी खिलाड़ियों, कलाकारों, चित्रकारों, समाजसेवियों, शिक्षाविदों, प्रोफ़ेशनल्स और अन्य क्षेत्रों की प्रतिभाओं की सूची बना रहे हैं, जिन्हें हम भविष्य में ‘यश भारती’ एवार्ड और 1 लाख रुपये प्रतिमाह की सम्मान राशि देंगे।
इसके अतिरिक्त हम जिन्हे�� अपने पिछले कार्यकाल में ‘यश भारती’ दे चुके हैं, उनकी भी सम्मान-राशि बढ़ाकर 1 लाख रुपये प्रतिमाह घोषित करके सम्मान-राशि की पुनर्बहा��ी करेंगे।
उप्र में फ़िल्म सिटी की शूटिंग चालू है। कथा-पटकथा लिखनेवाले भी पुलिस के लोग हैं, डायरेक्ट भी और वेश-भूषा सज्जावाले भी।
यूपी के इटाव��� जिले में पुलिस ने एनकाउंटर में अपराधी को पकड़ा और दरोगा जी ने हाथोंहाथ पट्टी बांधकर मौके पर ही सारी पूछताछ कर ली। शायद थाने तक पहुंचते–पहुंचते चार्जशीट भी तैयार कर देंगे। अपराधी का पकड़ा जाना सराहनीय है लेकिन पुलिस का स्वांग रचकर झूठ को सच दिखाने का नाटक घातक है, कुछ भ्रष्ट पुलिसवाले इसका दुरुपयोग करके उप्र में क़ानून-व्यवस्था को ही अपराधी बना दे रहे हैं।
उप्र में कोई गृहमंत्री है क्या?
शिक्षा, शिक्षक व शिक्षार्थी विरोधी, स्कूलबंद करवानेवाले भाजपाई और उनके संगी-साथी यूनिवर्सिटी बनानेवालों के ख़िलाफ़ ED की छापेमारी कर रहे हैं जिससे कि उनके 1-2% बचे हुए साम्प्रदायिक संकीर्ण सोच के कुतर्की समर्थकों को संतुष्ट कर पाएं, जबकि उन भ्रष्टाचारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही, जो निम्नांकित आपराधिक कांडों में संलिप्त हैं :
- राम मंदिर के चोर
- सत्ता सजातीय अपराधी
- कोडीन कांड���
- भाजपाकाल निर्मित बदहाल बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे
- भाजपाकाल निर्मित हिचकोले पूर्वांचल एक्सप्रेसवे
- भाजपाकाल निर्मित गड्ढायुक्त कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे
- भाजपाकाल निर्मित दरारी ग्रीन कॉरीडोर
- भाजपाकाल निर्मित खटपट सड़कें
- भाजपाकाल निर्मित गिरते पुल
- भाजपाकाल निर्मित ढहती टंकियाँ
- भाजपाकाल निर्मित टपकती छतें
- भाजपाकाल निर्मित स्टेशन की दीवार
- भाजपा की सत्तावाले, दूस��े राज्यों तक में पकड़े जानेवाले भ्रष्ट पुलिसकर्मी
- महाकुंभ में 1 लाख डकार गये भाजपाई ठेकेदार
- स्मार्ट सिटी के नाम पर खरबों का खेल करनेवाले भाजपाई
- अस्वीकृत भूमि पर अवैध निर्माण करनेवाले भाजपाई जन प्रतिनिधि
- दुर्व्यवहार और दुर्वचनों पर प्रचार की पुताई करके 7000 करोड़ रुपए में हिस्सा बाँट करनेवाले अधिकारी…
कौन है सही : सरकार या सलाहकार?
E20 से ख़राब हुई गाड़ियों को खींचकर ले जानेवाले बाइक-कारवाले पूछ रहे हैं, एक तरफ़ तो सरकार कह रही है ‘E20 में सब ठीक है’; दू��री तरफ़ सलाहकार कह रहे हैं ‘E20 गाड़ियों के लिए नुक़सानदेह है’, तो ये स्पष्ट कौन करेगा सही क्या है।
अरे बात-बात में सर्वे करानेवाली भाजपा सरकार, E20 के परिणाम भुगत रही आम जनता से सीधे संवाद करके क्यों नहीं पूछ लेती की सच क्या है।
E20 दुधारी ��लवार है, जिसकी जनता पर दोहरी मार है : महंगा पेट्रोल भी और महंगी मेनटेनेंस भी।