मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि इतनी क्रूरता तो आपातकाल के दौरान भी नहीं हुई होगी जितनी आजकल दिल्ली की सड़कों पर देखने को मिल रही हैं। पुलिस तो पुलिस कुछ तथाकथित धर्म रक्षक भी लोगों को यहां तक की बहन बेटियों को बीच रास्ते पर मारपीट रहे हैं। जो ज्ञानेश कुमार वोट देते हुए बेटियों और बहनों का सीसीटीवी जारी नहीं किया पर उन्हें बचाने के लिए बहन बेटियों को बीच सड़क पर मारा जा रहा है और ज्ञानेश का मुँह नहीं खुल रहा। ज्ञानेश ने जो किया है उसकी सजा तो उन्हें मिलेगी पर ये जो आजकल सत्ता की दलाली में लोगों पर हाथ चला रहें हैं उनको भी बख्शा नहीं जाएगा। आज कोई सरकार है कल कोई और होगी।
क्या बात है तो क्या ही बात है ये लोकतंत्र की परिभाषा है कि "लोकतंत्र तभी रहेगा जब देश रहेगा"। पर अब ऐसा होगा जब तक देश रहेगा तब तक देश लोकतांत्रिक तरीके से चलेगा फिर उसके लिए 10 ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सड़क पर रोज उतरना पड़े। खुलेआम धांधली है और लोकतंत्र सीखा रहे हो। हद होती है बेवकूफ बनने और बनाने की।
कायदे से उस व्यक्ति का इस्तीफा उसी वक्त ले लेना चाहिए था जब उसने कहा था कि " हम वोट देते समय किसी बहनो, मताओ या किसी भी नागरिक का सीसीटीवी वीडियो सार्वजनिक नहीं करेगें" अगर सार्वजनिक नहीं करना तो सीसीटीवी लगाया क्यों गया है क्या आप उसे सिर्फ अकेले में देखते हैं ? ये एक ही बयान ही इस घटिया व्यक्ति के हटाने का प्रयाप्त कारण था। चुनाव आयोग जिस तरह भाजपा की तरफ से खेल रहा है उसे देखते हुए लोकतंत्र को ‘ लोकचंद‘ मान लेना चाहिए। माननीय प्रधानमंत्री के सपनों का ‘लोकचंद्र‘। ऐसा लोकचंद जिसमें मोदी ही सबकुछ है।
उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव भाजपा के महज एक चुनाव है लेकिन सपा के लिए अपने अस्तित्व की लड़ाई है। जब 2017 में सपा चुनाव हारी तो लगा सत्ता विरोधी लहर है। लेकिन जब 2022 का चुनाव आया तो लगा सपा के लिए करो या मरो की लड़ाई है और सपा की हार कहीं पार्टी को अलग थलग ना कर दे। लेकिन सपा ने जिस तरह 2022 की हार के बावजूद अपनी उपस्थित बनाए रखी उसका सारा क्रेडिट माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव जी जाता है। उसके बाद 2024 तो किसी करिश्में से कम नहीं था अखिलेश जी को उनकी मेहनत का फल मिला और बात हर एक के दिलोदिमाग में बैठ गई समाजवादी पार्टी के असली हकदार अखिलेश जी है उनका कोई सानी नहीं है। अब आतें है 2027 के विधानसभा चुनाव में जहां अखिलेश PDA के नारे के साथ मैदान में हैं और जो एक सफल नारा है। वहीं सरकार पर एक जाति की सरकार का आरोप लग रहा है। इससे अच्छा मौका विपक्ष को फिर नहीं मिलेगा जब कुछ हमारे पक्ष में है PDA पक्ष में है बस जरूरी है तो जमीन पर उतरने की। ये भाजपा के लिए एक राज्य का मात्र एक विधानसभा चुनाव है पर सपा और अखिलेश जी के लिए अपने अस्तित्व कि लड़ाई है। अगर जरा भी चूक हुई तो इसका खामियाजा उत्तर प्रदेश के साथ पूरा देश देखेगा। जिस तरह संवैधानिक संस्थाओं पर पर भाजपा कब्जा कर रही है उसके देखते हुए ये आखिरी चुनाव है जो इतने अंधकार में भी लड़ा जा सकता है इसके बाद भाजपा मौका नहीं देगी।
सुनने में आ रहा है कि ऊपर से आदेश आया है कि सपा के प्रदेश अध्यक्ष को नेशनल मीडिया और पॉडकास्ट में न बुलाया जाए ताकि लोगों को तक उनकी आवाज पहुंचे। श्यामलाल पाल की बढ़ती लोकप्रियता से भाजपा बौखलाई हुई है। कभी पूजा पाल कभी प्रकाश पाल कभी एसपी सिंह बघेल को आगे कर रही है। ये श्यामलाल पाल जी की लोकप्रियता का कमाल है कि पाल समाज के प्रकाश पाल राज्यसभा भेज रही है। इसको ऐसे समझते है जब कोई अच्छा गेंदबाज बल्लेबाज को बाँध के रखता है पर विकेट दुसरे गेंदबाज को मिलता है जो औसतन पहले गेंदबाज से कम अच्छी बोलिंग करता है। यही भाजपा कर रही है जब से श्यामलाल पाल जी प्रदेश अध्यक्ष बने हैं तब से भाजपा रोज किसी न किसी पाल को आगे ला रही है पर इस बार समाज अपने नेता के पीछे लामबंद हो चुका है। आप आप मीडिया या पॉडकास्ट बुलाए या न बुलाएं लोगों के घर घर जाकर अपनी आवाज बुलंद करेंगे और भाजपा को सत्ता से बाहर करेंगे। समाज इस लॉलीपॉप के चक्कर में नहीं पड़ेगा। उत्तर प्रदेश में पाल/बघेल/धनगर/गड़ेरिया समाज का सबसे बड़ा नेता श्यामलाल पाल जी है समाज अपनी पूरी ताकत के साथ उनके साथ है।
श्यामलाल पाल जी पूरे उत्तर प्रदेश में इकलौते ऐसे नेता है जिन्होंने अब तक पूरा उत्तर प्रदेश नाप चुके हैं। अखिलेश जी दिल्ली में हैं और अपनी ताकत के साथ लोकतंत्र बचाने की लडाई लड़ रहें हैं। पर लखनऊ से बेफिक्र है क्योंकि उन्हें पता उनका प्रदेश अध्यक्ष यूपी की गली गली घूम रहा है। PDA की सरकार आने पर श्यामलाल पाल जी को उनकी इस मेहनत का फल मिलेगा। फिलहाल तो श्यामलाल पाल जी का अभी एक ही सपना है कि भाजपा को सत्ता से बाहर करना और अखिलेख जी को फिर से उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाना। बिना इसके वो रुकेंगे नहीं। PDA आ रहा है। लडाई 80-20 की है और 80 वाला जितेगा।
ये बात बिल्कुल सही है कि PDA की बढ़ती लोकप्रियता से भाजपा सशंकित तो है। गड़ेरिया, लोधी, सोनकर समाज के व्यक्ति को राज्यसभा भेजकर भाजपा अखिलेश के ही PDA को टैकल कर रही है। जब उत्तर प्रदेश की दो बड़ी और प्रमुख पपार्टी सपा और बसपा के प्रदेश अध्यक्ष पाल/गड़ेरिया समाज के तो भाजपा को किसी न किसी को आगे लाना ही था जिसकी भरपाई उसने उसी समाज प्रकाश पाल को राज्यसभा में भेजकर कर रही है। भाजपा ने भले ही पाल/गड़ेरिया समाज के व्यक्ति को राज्यसभा भेजा हो पर सभी जानते हैं उसका कारण अखिलेश जी का PDA और उनके प्रदेश अध्यक्ष माननीय श्यामलाल पाल जी है। अब समाज को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है कहीं ऐसा न हो कि एक राज्यसभा सीट के चक्कर में पूरा यूपी विधानसभा चुनाव निकल जाए और समाज के हाथ कुछ न आए। अभी की राजनैतिक समझ यही कहती है कि आप अपने प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल जी के कंधा से कंधा मिलाकर खड़े रहें विधानसभा में अधिक से अधिक सीटों की मांग करे क्योंकि ऐसा मौका दुबारा नहीं आएगा न ही परिस्थितियां ऐसी मिलेगी। ये भी तय है भाजपा किसी भी ओबीसी जाति को उतनी टिकट नहीं देगी जितनी सपा देगी। इसीलिए पाल/बघेल/धनगर/गड़ेरिया समाज के लोगों से कहना है अभी नजर सिर्फ लखनऊ पर रखिए ये लडाई समाज के लिए बहुत ज्यादा जरूरी है। यही एक लडाई है जिससे समाज को राजनैतिक भागेदारी और पहचान मिल सकती है। सतर्क रहिये और एकजुट रहिए।
@NarendraYadavX इसके अलावा .... क्या है ? आप जिस विधानसभा की बात कर रहें है वहां पाल मतदाता तीसरी सबसे बड़ा समूह है। सही जानकारी दीजिए।
लोधीकरीब 85,000
यादवकरीब 72,000
पाल करीब 40,000
मुस्लिम. करीब 31,000
ब्राह्मणकरीब 30,000
क्षत्रियकरीब 25,000
वैश्य करीब 15,000
@NarendraYadavX इसके अलावा .... क्या है ? आप जिस विधानसभा की बात कर रहें है वहां पाल मतदाता तीसरी सबसे बड़ा समूह है। सही जानकारी दीजिए।
लोधीकरीब 85,000
यादवकरीब 72,000
पाल करीब 40,000
मुस्लिम. करीब 31,000
ब्राह्मणकरीब 30,000
क्षत्रियकरीब 25,000
वैश्य करीब 15,000
अखिलेश जी अगर यूपी फतह करनी है तो तैयारी शुरू कर दीजिए। संजय निषाद , ओम प्रकाश राजभर, अनुप्रिया पटेल और पूरी की पूरी कांग्रेस को दरकिनार करें। अब इनके पास देने के लिए ज्यादा कुछ नहीं है। अब आप एक नया गठबंधन बनाइए और उन्हें ताकत दीजिए जिनमें प्रमुख चेहरे निम्न हैं -
1.चंद्रशेखर रावण - इस समय यूपी में जितना वोट अकेले चंद्रशेखर के पास है उसका एक तिहाई भी कांग्रेस के पास नहीं है। आप आजाद समाज पार्टी को 15-25 सीट दीजिए एक मजबूत गठबंधन बनाइए।
2. पल्लवी पटेल- इस समय पल्लवी पटेल आपके ही सिंबल से विधायक हैं और लग रहा है कि चुनाव भी साथ में लड़ेगी पर उनको थोड़ा मंच दीजिए और कुर्मी वोट पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए कहिए। क्योंकि एक पल्लवी पटेल ही है जो अनुप्रिया पटेल की काट हो सकती हैं।
3. बाबूसिंह कुशवाहा- बाबूसिंह कुशवाहा पहले से ही अपना काम बखूबी कर रहें है उनको कोई बड़ा पद देकर कोयरी वोटों के लिए खुली छूट देनी होगी और उस समाज के लगभग लगभग 10 से अधिक टिकट भी देना होगा।
4. डॉ अयूब - पीस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को समाजवादी पार्टी में एक अल्पसंख्यक चेहरे के रूप में आगे करने की जरूरत है भविष्य में फायदा होगा। और अवेसी की फोबिया से मुसलमान को बाहर निकलने में मदद रहेगी।
अब ये लड़ाई सिर्फ अखिलेश यादव या समाजवादी पार्टी की नहीं है बल्कि करोड़ों बेरोजगार घूम रहें युवाओं, महंगाई से पीड़ित महिलाओं और न्यूनतम वेतन के लिए लड़ रहें पुरुषों का है जो इस तानाशाही भाजपा से त्रस्त है। इस लड़ाई आप अपने लिए नहीं बल्कि उस समाज के लिए लड़िए जो सामाजिक रूप से अंतिम पायदान पर है उस PDA को उसका हक दिलाओ।
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