आधार बनाने वाले नंदन नीलेकणी के ने���ृत्व में परीक्षा सुधारों के लिए एक उच्चस्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया गया है।
प्रधानमंत्री ने इसकी घोषणा एक और वीडियो संदेश के जरिए की है।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और आज केंद्रीय मंत्रियों के साथ CJP के प्रवक्ताओं की बैठक के बाद, Cockroach Janta Party ने अपना आंदोलन ��ापस लेने की घोषणा कर दी है।
मोदी कैबिनेट रवनीत सिंह बिट्टू का इस्तीफा, छोड़ा रेल राज्यमंत्री का पद
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ���ी सलाह पर केंद्रीय मंत्रिपरिषद से रवनीत सिंह का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीक���र कर लिया है.
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देखना होगा कि आज शाम जंतर-मंतर पर कितनी भीड़ जुटती है।
सोनम वांगचुक द्वारा भूख हड़ताल खत्म करने और प्रधानमंत्री के वीडियो संदेश के बाद आज कितनी भीड़ जुटती है, इस पर सबकी नजर रहेगी।
वीकेंड शुरू हो रहा है। इसके बावजूद अगर भीड़ कम आई, तो माना जाएगा कि आंदोलन अपने अंत की ��र बढ़ रहा है।
आज केंद्रीय मंत्री जे. पी. नड्डा से CJP के प्रतिनिधियों की भी बातचीत हुई है। उन्होंने 24 घंटे का समय मांगा है। संभवतः एक-दो और मांगें मान ली जाएंगी।
सरकार भी चाहेगी कि यहां से सबको सम्मानजनक एग्जिट का मौका मिले।
फिर एक ही बात रह जाएगी-एल्गोरिथम की!!
यह हैं हरियाणा के मोहित जाट, जो दिल्ली पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के पद पर तैनात थे।
मोहित का कह���ा है कि जब उन्हें पता चला कि छात्र जंतर-मंतर से संसद तक प्रदर्शन करें��े, तो उन्होंने पहले ही मेडिकल लीव ले ली। छुट्टी खत्म होने के बाद उन्हें कई बार ड्यूटी जॉइन करने के लिए बुलाया गया, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। जब उन पर लगातार दबाव बढ़ा, तो उन्होंने दिल्ली पुलिस के सब-इंस्पेक्टर पद से इस्तीफा देना उचित समझा और छात्रों के बीच जंतर-मंतर पहुंच गए।
उनका कहना था— "मैं अपने भाई-बहन जैसे छात्रों पर लाठी नहीं उठा सकता। मेरे शिक्षकों ने मुझे इस काबिल बनाया है कि मैं म��हनत करके अपना पेट पाल लूंगा।"
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर जाट पुलिसकर्मियों को उनकी जाति के नाम पर लगातार निशाना बनाया जा रहा था, मानो हर जाट पुलिसकर्मी एक जैसा हो। आज मोहित के फैसले ने यह साबित कर दिया कि किसी व्यक्ति का चरित्र उसकी जाति से नहीं, बल्कि उसके अपने फैसलों और सिद्धांतों से तय होता है।
किसी भी समाज या जाति को एक घटना के आधार पर कटघरे में खड़ा करना गलत है।सवाल सत्ता से करो, आदेश देने वालों से करो, नीतियों से करो। पूरे समाज को बदनाम करके अपनी राजनीति चमकाने की कोशिश मत करो।
#StudentPower #StudentProtest
छात्रों पर हमला हर भारतीय परिवार पर हमला है।
प्रधानमंत्री मोदी को लगता है कि वो बिना जवाब दिए, बिना किसी नतीजे का सामना किए बच निकलेंगे - नहीं कर पाएंगे, इस बार तो बिल्कुल नहीं।
मैं हर उस देशभक्त भारतीय से अपील करता हूं जो मानता है कि हमारे छात्रों को न्याय मिलना चाहिए - प्रधानमंत्री आवास के सामने हमारे धरने में शामिल हों।
भारत के छात्रों की आवाज़ को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
An attack on students is an attack on every Indian family.
PM Modi believes he can get away without answers, without consequences. He cannot. Not this time.
I ask every patriotic Indian who believes our students deserve justice - join us in dharna in front of the Prime Minister’s residence.
The voice of India’s students will not be ignored.
इतने दिनों तक सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल और शिक्षा व्यवस्था व पेपर लीक को लेकर, खासकर सोशल मीडिया पर बने माहौल के कारण अधिकांश नौजवान छात्र प्रदर्शन में पहुंचे थे। वे ऑर्गेनिक तरीके से आए थे।
प्रदर्शन में शामिल लोगों का केवल एक छोटा-सा हिस्सा ही चंद्रशेखर रावण की पार्टी, आम आदमी पार्टी और वामपंथी संगठनों द्वारा मोबिलाइज़ किया गया था। आंदोलन मूलतः स्वतःस्फूर्त था।
CJP के दो-तीन कथित नेतृत्वकर्ता जे.पी. नड्डा को ज्ञापन देने के नाम पर प्रोटेस्ट और मार्च छोड़कर चले गए।
प्रोटेस्ट लगभग नेतृत्वविहीन हो गया था, लेकिन उसके बाद भी युवाओं में खूब जोश था।
बड़ी संख्या में Gen Z युवा पहली बार किसी प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे ��े। वे रचनात्मक तरीके से विरोध दर्ज करा रहे थे।
"बांग्लादेश बना देंगे ,नेपाल बना देंगे" जैसे नारे लगाने वाले दो-चार लोग रहे होंगे। उसके आधार पर पूरे आंदोलन को उसी नज़र से देखना या वैसा ठप्पा लगा देना उचित नहीं है।
भीड़ द्वारा पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ और हिंसा की घटनाएं आंदोलन के बिल्कुल ��ंत में हुईं। उससे पहले पुलिस लगातार लाठीचार्ज करती रही और आंसू गैस के गोले छोड़ती रही।