अगर सवर्णों का जानवर भी नहा रहा होता है तो दलितों को इंतजार करना होता है।
खीर खाने और मैल से बच्चा पैदा करने वाली कहानियों से दिल बहल गया हो तो ये वाली कहानी भी देख लेना @ajeetbharti
करोड़ों रुपए की रामचरितमानस चोरी हुई है तो इसकी जांच होनी चाहिए।
लाख डेढ़ लाख सैलरी पाने वालों ने कई करोड़ रुपए का चढ़ावा कैसे दिया, इन दानदाताओं की भी जांच होनी चाहिए।
मंदिर से चोरी बुरी बात है मगर मंदिर तक जनता से चोरी का माल पहुंच रहा है तो और बुरी बात है।
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला अभी शांत नहीं हुआ है. पूरे देश में इस पर बवाल मचा हुआ है. अभी अयोध्या में आग बुझी नहीं कि उत्तराखंड के विश्वप्रसिद्ध श्री बद्रीनाथ धाम से ऐसा ही एक मामला सामने आया है. बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे और दान से जुड़ी कथित अनियमितताओं के आरोप लगे हैं.
पहले ये आरोप सोशल मीडिया तक सीमित थे. लेकिन सोशल मीडिया पर मामला तूल पकड़ने और शिकायत मिलने के बाद श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ ��ंदिर समिति ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं.
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Badrinath | Ram Mandir | Donation Scam
भूटान की भी आंखे खुल गई लेकिन हमारे देश के लोगों की आँखें कब खुलेगी..? हमारे नेताओं मंत्रियों को ये कब समझ आएगा..? इथेनॉल से गाड़ियों को कबाड़ कब तक बनाया जाता रहेगा..?
शेखर सुमन जैसे व्यंग्य करने के लिए आपको कपिल जैसी 300 करोड़ की नेटवर्थ नहीं चाहिए.
इस बार तो बीजेपी को सीधा ही लपेट दिया है. 😊
बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना का एक बयान आया था कि वो बांग्लादेश वापिस लौटना चाहती हैँ
तो शेखर सुमन ने कड़ा व्यंग्य करते हुए कहा कि मैडम को SIR के बारे में बता दिया है किसी ने
मैडम बंगाल चुनाव हो गए हैँ, बांग्लादेशी घुसपैठियों वाले मुद्दे की जरुरत अगले इलेक्शन से पहले नहीं पड़ने वाली है अभी.
इसलिए आप आराम से रहिये यहाँ.चिल कीजिये
आपको बांग्लादेश वापिस नहीं भेजा जायेगा.
क्या ऐसे सरकार से सीधे टकराव वाले व्यंग्य कपिल शर्मा या सुनील ग्रोवर या समय रैना कर सकेंगे??
बिलकुल भी नहीं.. इसलिए शेखर सुमन सभी से आगे चल रहें हैँ बिना डरे. 👊👊
अजित, @ajeetbharti
तुमने यह कुतर्क किया कि यदि दलित और वंचित समुदाय ठाकुरों के कुएँ खोद सकते थे, तो अपना कुआँ खोदकर पानी क्यों नहीं पी लेते थे?
इसका सीधा जवाब है कि कुआँ खोदने के लिए केवल फावड़ा और मेहनत ही नहीं, बल्कि जमीन, पूँजी और सामा���िक अधिकार भी चाहिए होते हैं।
सवाल यह नहीं है कि वे कुआँ खोद सकते थे या नहीं, बल्कि यह है कि संसाधनों और अधिकारों तक पहुँच किसके पास थी।
कुआँ खोदना और कुएँ का मालिक होना दो अलग बातें हैं।
अजित, तुम्हारा तर्क वैसा ही है जैसे कोई पूछे कि महल बनाने वाले मजदूर ने अपना महल क्यों नहीं बना लिया, या खेत जोतने वाले किसान ने अपनी ज़मींदारी क्यों नहीं खड़ी कर ली।
जिन ��ोगों के पास अपनी जमीन नहीं थी, जो आजीविका के लिए दूसरों पर निर्भर थे, और जिन्हें सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ता था, उनके लिए अपना कुआँ बनाना केवल तकनीकी नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक प्रश्न भी था।
और जब कहा जाता है कि सदियों तक उन्हें पानी नहीं पीने दिया गया, तो इसका अर्थ यह नहीं कि वे बिना पानी के जीवित थे।
इसका अर्थ यह है कि उन्हें अनेक कुओं, तालाबों और सार्वजनिक जलस्रोतों तक समान पहुँच न���ीं थी, या उन्हें अपमान और भेदभाव के साथ पानी लेने के लिए मजबूर किया जाता था।
जीवित रहना और बराबरी के अधिकार के साथ संसाधनों तक पहुँच होना, दोनों अलग बातें हैं।
इसलिए “अपना कुआँ क्यों नहीं खोद लिया?” कहना वास्तविक सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों को नज़रअंदाज़ करना है।
यह कुतर्क केवल व्यक्तिगत मेहनत को केंद्रित कर बोला गया है, जबकि संसाधनों के असमान वितरण और सामाजिक जकड़नों की अनदेखी किए हो तुम।
@rajkumarbhatisp @DrLaxman_Yadav
राम मंदिर तो अब लूटा है, लौह पुरुष सरदार पटेल को बेंच कर पहले ही खा गए थे..कथित राष्ट्रभक्त!
3000 करोड़ की बताई गई सरदार साहब की मूर्ति मात्र 324 करोड़ की थी और बाकी कमीशन राष्ट्रवादी पार्टी और गुजरातियों की जेब में चल गया।
बहुत बड़े बड़े चमत्कार कर रखें है इन संघियो ने!
संलग्न पोस्ट की फैक्ट चेकिंग करके बताओ ये कितना गपोड़ हांक रहा है क्योकि संलग्न मूर्ति डुप्लीकेट है ये सिंधु घाटी में पायी नहीं गई है तो किसने ये फर्जी मूर्ति बनाई? @grok
2 मिनट 30 सेकंड के इस वीडियो में सोनू शर्मा ने मोदी सरकार की बैंड बजा दिया।
सरकार कहती है कि
"पढ़ेगा इंडिया तभी तो बढ़ेगा इंडिया"
लेकिन जब आप लाखों की संख्या में स्कूल बंद क�� रहे हैं तो कैसे पढ़ेगा इंडिया और जब नहीं पड़ेगा इंडिया तो कैसे बढ़ेगा इंडिया??
हमारे देश में लाखों ऐसी गाड़ियां भी हैं जिनके मालिक उन्हें महीने में 500 KM भी नहीं चलाते, लाखों ऐसे मालिक हैं जो अपनी गाड़ी को बहुत अच्छी तरह मेंटेन करके रखते हैं, पूरी गाड़ी की कीमत दे रखी है, सारे सरकारी टैक्स भर रखे हैं तो फ���र 10 या 15 साल में कोई कैसे कह सकता है कि यह अवैध व्हीकल है??
तेल में भी धांधली? संदीप चौधरी ने खोल दिया एथेनॉल के खेल का पूरा सच!
कोई परिवार रात में कहीं जा रहा हो महिलाओं समेत और गाड़ी बंद हो जाए सुनसान रास्ते पर तो सोचो क्या दिक्कतें आएंगी उनको कौन ज़िम्मेदार होगा?
गडकरी के काम को लोग सबसे बढ़िया मानते थे, इन्होंने ने भी अपना असली चेहरा दिखा दिया इतने महंगे टोल रोड पहली ही बारिश में दम तोड़ दे रहे है गन्न��� के रस को बेचकर बेटों को की कंपनियों ये फायदा करा रहे है
किसी भी पत्रकार में इतनी हिम्मत नहीं वह नितिन गडकरी के बेटों को नाम ले
आपके बेबाक पत्रकारिकता के लिए आप को अभिनंदन संदीप जी🙏