@RahulGandhi हम तो सभी युवा से चाहेंगे इनकी चापलूसी भरी बातों में ना आए इन लोग��ं को सट्टा नहीं मिल रहा है जिसके कारण इन लोग अपना मानसिक संतुलन खो दिए हैं और अनाप-शनाप बोल रहे हैं इनको युवा से कुछ लेना देना नहीं है इनको देश से कुछ लेना देना नहीं है इनको सिर्फ कुर्सी चाहिए कुर्सी हड़पना चाहते
@RahulGandhi साहब क्यों युवा युवा क्यों बाहर आएगा आपके कहने पर अपने दिए अपने पूरे परिवार के लिए सब कुछ किए हैं युवा के लिए किया क्या है आप ही के सरकार में 70 साल तक रहा था भारत में फिर भी युवक बेरोजगार है इसका कारण कौन है आप आपकी सरकार आपका नेट आपका मंत्री कभी भी देश हित में बोल दिया कीजिए
@RockWithboAt
I bought nirvana x tws yesterday but its battery is not working at all, so that I went to Patna boat service center told me to go to the shop from where I bought it. I bought these ear buds for 3400 rupees just to go from here to there.
भजन के प्रताप से आत्मा सद्गुरु-भेद रहस्य रूपी ऊँची भूमि पर आसन करके बैठी है और परमानन्द महासागर महान् सुख में अनुरक्त है, जिसके कारण सारे देह-संघात और आत्मा सम्बन्धी सभी तत्त्वों से एकाकार ध्वनि प्रकट हो रही है, यह योग का महान् महत्त्व है
🌹🙏 *जय सद्गुरु देव* 🙏🌹
#vihangamyog
अन्तर पूरणानन्द है, विहवल विमल शरीर।
मगन निरन्तर हरि भजन, सन्त स्वभाव अभीर ।।
सन्त ��पने स्वभाव से पवित्र, क्लेशरहित होते हैं और अपने विमल शरीर के थक जाने पर भी अन्तर से पूर्णानन्द में निमग्न हो निरन्तर भजन करते रहते हैं।
🌹🙏 *जय सद्गुरु देव* 🙏🌹
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#Swarved
धीर ज्ञान विज्ञान में, शिल सन्तोष असंग।
दया क्षमा वेशन रहित, अन्तर प्रेम अभंग ।।१६।।
विरक्त सन्त धैर्य, ज्ञान, वैराग्य, शील, सन्तोष, त्याग, दया एवं क्षमा सहित और व्यसनों से रहित हो कर आत्मा के पूर्ण प्रेम से भक्ति में लवलीन रहते हैं।
🌹🙏 *जय सद्गुरु देव* 🙏🌹
#vihangamyog
दुख ��ुख एक समान है, हानि लाभ नहिं कोय।
निन्दा अस्तुति अस्त सम गिने, हर्ष विषाद न होय
विरक्त सन्त के लिए दुःख-सुख एक समान होते है उनमें हानि-लाभ का भाव नहीं होता। ये निन्दा एवं स्तुति को समान गिनकर हर्ष और विषाद से रहित हो जाते हैं।
🌹🙏 *जय सद्गुरु देव* 🙏🌹
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शत्रु मित्र नहिं जगत् में, सब को एक समान।
भजन विवेक विचार में, सब से रहें अमान।।
विरक्त सन्त भजन, विवेक में निमग्न हो स्वतन्त्र, निर्भय हो कर जगत में विचरण करते हैं। संसार में उनका कोई शत्रु और कोई मित्र नहीं है। वे प्राणीमात्र को एक समान देखते हैं।
🌹🙏 *जय सद्गुरु देव* 🙏🌹
सुख व शान्ति संसार में, विचरत सन्त स्वभाव।
दया भला मय जीव का, महिमा भजन प्रभाव ।।
विरक्त सन्त अपने भजन के प्रभाव से सन्त स्वभाव से जगत् में भ्रमण कर सबको सुख-शान्ति प्रदान करते हैं और सब जीयों पर दया करके ज्ञान और सदुपदेश से उपकार करते हैं। यह विरक्त सन्त की महिमा है।
विरक्त सन्त, शम, दम एवं तितिक्षा से युक्त हो. गृह में न रहकर वृक्ष तर निवास करते हैं और जो प्रारब्धवश प्रभु इच्छानुकूल रूखा सूखा मोजन उन्हें मिल जावे, वे उसे पाकर अपने भजन में लग रहते हैं। इस दोहे में विरक्त सन्त का नियम बतलाया गया है।
वीतराग मायारहित, अनघ अमान अचाह।
अकीञ्चन अनुराग रत, सदा रहें प्रभु चाह
विषय, राग से रहित, मान, कामना एवं धन की इच्छा से विरक्त प्रभु-अनुरागी, मुमुक्षु ही प्रभुप्राप्ति के लिए सदा प्रयत्न करता है।
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काम क्रोध मद लोभ नहिं, मत्सर मोह न सन्त।
अविचल अगम सनेह में, सदा भजे भगवन्त ।।
सन्त में काम, क्रोध, मद, लोभ, मत्सर और मौह नहीं होता। वे प्रकृतिपार स्थिर चेतन से युक्त हो कर सदैव महाप्रभु का भजन करते हैं
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राग द्वेष कोइ से नहीं, समदर्शी संसार।
परहित सहज स्वभाव है, शुद्ध व सरल विचार
सन्तजन शुद्ध और सरल विचार एवं सहज स्वभाव से दूसरे का उपकार करते हैं एवं किसी से राग-द्वेष न रखकर संसार में समदर्शी होकर रहते हैं। सन्त की राग, द्वेषरहित सबकी हितकारी समान दृष्टि रहती है।
नहिं कान्क्षा नहिं द्वेष है, आश वासना नाश।
सुरति शब्द मेला रहे, अन्तर अगम विकाश ।।
सन्तु, राग, द्वेष तथा आश् वासना से रहित हो कर अपने अन्तर के अनुभव विकास द्वारा सुरति-शब्द का योग करते है।
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शुद्ध हृदय सत्य भाव है, झूठ कपट छल त्याग।
भक्ति निरन्तर लगन है, संयुत ज्ञान विराग । ।
विवेकी सन्त झूठ, छल-कपट का त्याग कर शुद्ध हृदय, सत्यभाव ��े ज्ञान और वैराग्ययुक्त हो कर भक्ति में निरन्तर लगे रहते हैं।
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वैराग्यवान् सन्त माया मोह की विडम्बना, धोखा एवं कुबुद्धि, कुमार्ग का विनाश करके दुःख-सुख को समान जानकर अन्तर आत्मा से सुखी हो, ब्रह्मसुख की आशा में लगे रहते हैं अर्थात् निशिदिन प्रभुप्राप्ति एवं उसके आनन्द उप��ोग में निमग्न रहते हैं।
🌹🙏 *जय सद्गुरु देव* 🙏🌹
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