पोलैंड में रामायण के मंचन का इतिहास
आरम्भ साहित्य से हुआ।
19वीं सदी में अनुवाद हुए,
1909 में Antoni Lange ने विस्तृत रूप दिया। 1974 में पहला टीवी नाटक “Ramajana” आया।
लेकिन असली स्टेज परंपरा 1989-91 के आसपास शुरू हुई।
ISKCON के Festival of India में पोलिश कलाकार खुद भारतीय वेशभूषा पहनकर राम-सीता के प्रसंग नृत्य-नाट्य के रूप में पेश करने लगे।
Viva Kultura ने इसे और संगठित किया। आज 34 साल बाद भी ये परफॉर्मेंस चल रहे हैं।2013 में पूरा पोलि�� अनुवाद भी आया और स्कूलों में रामलीला होने लगी।पोलैंड में रामायण सिर्फ किताब नहीं, जीवंत संस्कृति बन चुकी है।