लगता है जीवन कितना
सुंदर हैं
कभी कभी मेरी कहानियों में तुम
धुंधली होने लगती हो
और कही दूर अपने को खोजते हुए दिखाई
देती हो
मैं कहानियों के दुनिया में रहता हूं...
~खुशी ठाकुर 🌸💌
मैं अभी भी
पैदल निकल जाता हूँ
अपनी तलाश ��ें
भटकता हूँ मीलो-मील
खाता हूँ दर-दर की ठोकरें
सुनता हूँ अनगिनत आवाजें
अथाह शोर और चीखें
फिर थककर लौट आता हूँ घर को
दुःखद...
मेर��� एक हिस्सा फिर कहीं खो जाता है।
—अभिषेक शुक्ल
मन न मिला तो कैसा नाता
चला अकेला ठोकर खाता
जितने थे, झूठे वादे थे
सुख पर सभी बिके प्यादे थे
जाने क्यों मैं समझ न पाया
जग के नियम बड़े सादे थे
अपना ही स्वर मैं दु���राता
चला अकेला ठोकर खाता
- कृष्ण मुरारी पहारिया ✨
भूल से तुमने मुझे पत्थर नहीं किया
भूल से हो ही नहीं सकते विश्वासघात
भूल से हम नहीं बिछड़े हैं,भूल से लोग नहीं बिछड़ते
भूल से केवल प्रेम हो सकता है
~शिक्षा पारिख 🌸💌
दुनिया इतनी छोटी तो नहीं कि मैं ना ढूंढ पाऊं दूसरा प्रेम..
मैं दूसरे इंसान में उसी की आँखें देखना चाहता हूं
तुम्हारी नहीं
उसी की हंसी,उसी की छुअन चाहता हूं
तुम्हारी नहीं
और एक दिन ये होगा...
~खुशी ठाकुर 🌸❤️
Read some interesting creative slogans of the girls' protest in Delhi -
- एक कचौरी दो समोसा,
इन मर्दों का क्या भरोसा
- एक सुट्टा दो चाय
मर्द जात हाय हाय
- तोड़ के रख दो वो समाज
नारी जिसमें बं��ी है आज
- मेरे सर में दर्द है
उसका कारण मर्द है
- आलू लो पूरी लो
इन मर्दों से दूरी लो
- ठंडे समोसे गर्म करो
मर्द जात शर्म करो
- शर्म नहीं है मर्दों में
नारी क्यों है पर्दों में
- चाय गरम दूध गरम
मर्द समाज बेशरम
- एक जीरा दो अजवाइन
मर्द जात टू रिजाइन
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