@ankitrawal5454@AmitShah अमित भाई ये दोहरा रवैया क्यों? सही तो कह रहे हैं ये लोग अगर 2047 तक भारत को विकसित भारत बनाना है तो आरक्षण व्यवस्था में सुधार आवश्यक है।
मौजूदा आरक्षण व्यवस्था kakistocracy को बढ़ावा देती है (rule by the least competent or worst citizens। आवश्यकता है meritocracy की।
@Adv_Anil_Mishra सही बात। दूबे तुम लखनऊ क्यों गये थे बिना अन्य संगठनों को विश्वास में लिए।तुम्हारे आचरण में विश्वासघात की बू आ रही है और अब विश्वास दुबारा पाना संभव नहीं लगता।
अब सभी संगठनों को एक मंच पर लाना चाहिए और फिर लीडिंग टीम का फैसला हो और वे सब मिलकर इस आंदोलन को आगे बढ़ाएं।
@Adv_Anil_Mishra अब सभी संगठनों को एक मंच पर लाना चाहिए और फिर लीडिंग टीम का फैसला हो और वे सब मिलकर इस आंदोलन को आगे बढ़ाएं।
इस आंदोलन में बहुत दम है।
जंतर-मंतर पर पुलिस कार्रवाई
जंतर मंतर पर पंकज धावरैया का दिल्ली पुलिस ने बुरी तरह मारपीट कर हाथ तोड़ दिया है; पंकज जी बता रहे हैं कि इन्हें चलती बस से धक्का देकर फेका गया।
बेहोश होने के बाद RML हॉस्पिटल में भर्ती हैं।
@NeerajNamas@MrParleG@Harshdubey9956 हर्ष तुम लखनऊ क्यों गये थे बिना अन्य संगठनों को विश्वास में लिए।तुम्हारे आचरण में विश्वासघात की बू आ रही है और अब विश्वास दुबारा पाना संभव नहीं लगता।
अब सभी संगठनों को एक मंच पर लाना चाहिए फिर लीडिंग टीम का फैसला हो और वे सब मिलकर इस आंदोलन को आगे बढ़ाएं।
इस आंदोलन में बहुत दम है
@MrParleG तुम लखनऊ क्यों गये थे बिना अन्य संगठनों को विश्वास में लिए।तुम्हारे आचरण में विश्वासघात की बू आ रही है और अब विश्वास दुबारा पाना संभव नहीं लगता।
अब सभी संगठनों को एक मंच पर लाना चाहिए और फिर लीडिंग टीम का फैसला हो और वे सब मिलकर इस आंदोलन को आगे बढ़ाएं।
इस आंदोलन में बहुत दम है।
@Avinash37033200@Harshdubey9956@WokeFuneral@RHAreforms@kalisenachief@rhamovement_01 तुम लखनऊ क्यों गये थे बिना अन्य संगठनों को विश्वास में लिए।तुम्हारे आचरण में विश्वासघात की बू आ रही है और अब विश्वास दुबारा पाना संभव नहीं लगता।
अब सभी संगठनों को एक मंच पर लाना चाहिए और फिर लीडिंग टीम का फैसला हो और वे सब मिलकर इस आंदोलन को आगे बढ़ाएं।
इस आंदोलन में बहुत दम है।
@ajeetbharti बहुत सही सुझाव/ मांग है।
सभी संगठनों को एक मंच पर लाना चाहिए और फिर लीडिंग टीम का फैसला हो और वे सब मिलकर इस आंदोलन को आगे बढ़ाएं।
इस आंदोलन में बहुत दम है।
RHA को ले कर सरकार से कुछ बात और माँगें
सरकार अपने स्तर से हर आंदोलन को फूट, समझौता, बल-प्रयोग, समझदारी, मिसइन्फॉर्मेशन कैम्पेन या कायरता दिखा कर कर समाप्त करना चाहती है। और वही उनका कार्य भी है। RHA का नाम ले कर कुछ लोगों ने आंदोलन के लिए जनता को बुलाया और लगभग 7000 की भीड़ जंतर मंतर पर भीतर दिखी, उतने को ही बाहर होल्ड किया गया या लौटा दिया गया।
मैंने केवल दिल्ली पुलिस की बकलोली की अवज्ञा के लिए इसमें भाग लेने की बात की और फिर बहुत लोग मेरे आने पर भी आए। फिर दुबे को पाठक जी ने नेता मान कर एक ऐसे पत्र पर चर्चा के लिए आश्वासन दिया जिसमें आरक्षण शब्द ही नहीं है।
खैर, मैं ये सब तकनीक देखता और जानता आया हूँ। मुझे इस विषय पर सरकार को भीड़ दिखाने की आवश्यकता न पहले थी, न आज है, पर जब चाहूँ वह भी कर सकता हूँ। अगली बार बिना अनुमति के भी ऐसा किया जा सकता है यदि प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट चाहिए, तो वह भी दिखा देंगे। पर मेरा लक्ष्य वह है ही नहीं।
सरकार को ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ से इसलिए नहीं डरना चाहिए क्योंकि एक भीड़ पूरे कनॉट प्लेस को घर कर पत्थरबाजी करते हुए संसद घेर लेगी। सरकार को इसलिए डरना चाहिए कि ऐसी कोई भीड़ ही नहीं है, न ही हम संसद को घेरने की योजना बना रहे हैं।
आंदोलन की तपन केवल जलती हुई कार की आग और अराजक भीड़ की ही नहीं होती। एक तपन ऐसी भी होती है जब जनमानस को वैचारिक रूप से इतना सक्षम बना दिया जाता है कि वह स्वयं ही अपने लिए वह निर्णय कर ले, जो वो कल तक किसी दूसरे बहकावे में आ कर कर रहा था।
हमारी माँगें:
१. आरक्षण पर श्वेत-पत्र: क्या लाभ हुआ, किन जातियों को अनुपात से अधिक लाभ लगातार मिला, कौन सी जातियाँ पूर्णतः छूट गईं। आरक्षण किस तरह से देश या समाज के उत्थान में सहायक है, उसके लिए आँकड़े क्या कहते हैं आदि आदि! इस से जुड़ी हर वह रिपोर्ट और सर्वेक्षण जो सार्वजनिक नहीं हुई।
२. EWS को हर वह आर्थिक सहायता दी जाए जो SC को मिलती है। निःशुल्क कोचिंग, निःशुल्क फॉर्म, शून्य हॉस्टल और कोर्स फीस। फिर भी लोन यदि लेना पड़े तो उसमें भी सुविधा।
३. तीनों ही आरक्षित वर्ग में ‘कोटा विदिन कोटा’ लागू हो ताकि वास्तविक दलित-पीड़ित-वंचित जातियों तक लाभ पहुँचे। अभी SC और OBC में हजार-हजार जातियाँ ऐसी हैं जिन्हें नगण्य आरक्षण मिला है। और 4-5 जातियाँ ऐसी हैं जो 70-80% आरक्षण खा रही हैं। इसका आधार पारिवारिक आय हो, न कि वैयक्तिक और दुरुपयोग की संभावना न रहे।
४. मेरिट का सम्मान हो। आरक्षित वर्ग का कटऑफ किसी भी हालत में सामान्य वर्ग के कटऑफ के (से नहीं) 10% के रेंज से बाहर न जाए। और यह भी आज की परीक्षा के अधिकतम आयु सीमा वाले बच्चों की आयु के बाद समाप्त किया जाए। न्यूनतम क्वालिफाइंग मार्क्स तो तय होना ही चाहिए।
५. सरकार यह सर्वेक्षण करे कि क्या गरीबी, भेदभाव या पिछड़ेपन से किसी की बौद्धिक क्षमता घट या बढ़ सकती है? इम्पीरिकल एविडेंस सार्वजनिक करें और उसी आधार पर आरक्षण की नीतियाँ बनें।
६. एक व्यक्ति को एक बार आरक्षण मिले। एक परिवार को एक बार आरक्षण मिले।
७. दशकीय समीक्षा हो। समाप्ति के लिए एक ‘सनसेट क्लॉज’ या रोडमैप कि कब तक रहेगा।
८. कॉलेज/यूनिवर्सिटी पुस्तकालयों में पुस्तकों के अलॉटमेंट का आरक्षण तत्काल निरस्त हो। इसका कोई लॉजिक नहीं है। यह आरक्षण से लड़ कर वहाँ पहुँचे बच्चों को सताने की व्यवस्था मात्र है। या आप पुस्तकों की मात्रा दोगुनी कीजिए और वहाँ ‘आरक्षित सेक्शन’ लिख दीजिए।
—-
अन्य माँगें:
९. यूजीसी नियमावली निरस्त हो या समीक्षा कर के हर जाति समूह को इसमें सम्मिलित किया जाए।
१०. SC/ST Act की तर्ज पर ‘सवर्ण उत्पीड़न (रोकथाम) कानून पास’ हो। दोनों ही कानून में केस झूठा पाए जाने पर, उस केस में होने वाला दंड आरोप लगाने वाले को झेलना पड़े। आर्थिक जुर्माना भी वसूला जाए।
—-
सरकार और सुधिजन देख लें। बाकी, चाहे आप दुबे, शेखावत या अन्य को मैनेज कर लें, आंदोलन चलता रहेगा।
@PracticalSpy बहुत सही फैसला।
देश में अशांति फैलाना चाहते हैं ये तिलचट्टे। सभी मुख्यमंत्रियों को अपनी जनता और समर्थकों को आगाह कर देना चाहिए। और अगर ये किसी प्रकार की जोर आजमाइश करना चाहे तो इसकी तशरीफ़ सबसे पहले तोड़ी जाए।
इनका मकसद है अशांति फैला कर अपनी और आकाओं की राजनीतिक रोटियां सेंकना।
@ManuvadiBrijesh@ajeetbharti आंदोलन की जड़ में मठ्ठा डाल गया है हर्ष दूबे। कारण ये नही बतायेगा। दूसरों को दोश देगा। इसको जंतर-मंतर सबसे पहले पहुंचने की जल्दी थी।
बिना विचारे जो करे, सो पीछे पछताय।
काम बिगाड़े आपनो, जग में होता हंसाय।
अब सब तरफ से हंसी का पात्र बन गया है।
आंदोलन की शुरुआत अच्छी दिख रही थी।
@BrahminComunity बहुत सही जवाब। ये भी साले बीजेपी की धरन में पलने वाले दीमक है। जिन पर जब भी दीमकरोधी कैमिकल का छिड़काव होगा। बाहर निकल कर बिलबिलाने लगेंगे।
सभी एक मत आरक्षण सुधार संगठनों को एक मंच पर लाना चाहिए।एक लीडिंग टीम का फैसला हो और वे सब मिलकर आंदोलन को आगे बढ़ाएं।आंदोलन में बहुत दम है।
That’s the irony people like @chiragpaswan have been contesting elections from reserved seats for decades and are now officially crorepatis.
The question is❓ On what basis should reservation be given caste, economic condition, or social backwardness?
Whether we debate eligibility in jobs,admissions,exams or marks or not, who deserves reservation and who doesn’t seems to be a matter only God can finally decide.
@ajeetbharti@jsaideepak@palkisu@MediaHarshVT
@NewsAlgebraIND Chirag Paswan a Union Minister himself, born to a Union Minister father Ramvilas Paswan, born to a Brahmin mother and former Airhostess Asha Sharma, roams in a BMW and still claims SC ST reservation calling himself Ati Pichda.
Shameless has crossed all limits in India ❌
@ajeetbharti बहुत सही जवाब। ये भी साले बीजेपी की धरन में पलने वाले दीमक है। जिन पर जब भी दीमकरोधी कैमिकल का छिड़काव होगा। बाहर निकल कर बिलबिलाने लगेंगे।
सभी एक मत आरक्षण सुधार संगठनों को एक मंच पर लाना चाहिए।एक लीडिंग टीम का फैसला हो और वे सब मिलकर आंदोलन को आगे बढ़ाएं।आंदोलन में बहुत दम है।
@Warlock_mohit आंदोलन की जड़ में मठ्ठा डाल गया है हर्ष दूबे। कारण ये नही बतायेगा। दूसरों को दोश देगा। इसको जंतर-मंतर सबसे पहले पहुंचने की जल्दी थी।
बिना विचारे जो करे, सो पीछे पछताय।
काम बिगाड़े आपनो, जग में होता हंसाय।
अब सब तरफ से हंसी का पात्र बन गया है।
आंदोलन की शुरुआत अच्छी दिख रही थी।
@ajeetbharti आंदोलन की जड़ में मठ्ठा डाल गया है हर्ष दूबे। कारण ये नही बतायेगा। दूसरों को दोश देगा। इसको जंतर-मंतर सबसे पहले पहुंचने की जल्दी थी।
बिना विचारे जो करे, सो पीछे पछताय।
काम बिगाड़े आपनो, जग में होता हंसाय।
अब सब तरफ से हंसी का पात्र बन गया है।
आंदोलन की शुरुआत अच्छी दिख रही थी।
@yogi1056@ajeetbharti आंदोलन की जड़ में मठ्ठा डाल गया है हर्ष दूबे। कारण ये नही बतायेगा। दूसरों को दोश देगा। इसको जंतर-मंतर सबसे पहले पहुंचने की जल्दी थी।
बिना विचारे जो करे, सो पीछे पछताय।
काम बिगाड़े आपनो, जग में होता हंसाय।
अब सब तरफ से हंसी का पात्र बन गया है।
आंदोलन की शुरुआत अच्छी दिख रही थी।
@shudarshan_936@ajeetbharti@neha_laldas@talk2anuradha आंदोलन की जड़ में मठ्ठा डाल गया है हर्ष दूबे। कारण ये नही बतायेगा। दूसरों को दोश देगा। इसको जंतर-मंतर सबसे पहले पहुंचने की जल्दी थी।
बिना विचारे जो करे, सो पीछे पछताय।
काम बिगाड़े आपनो, जग में होता हंसाय।
अब सब तरफ से हंसी का पात्र बन गया है।
आंदोलन की शुरुआत अच्छी दिख रही थी।
@shudarshan_936@ajeetbharti@neha_laldas@talk2anuradha Organise your move for the agitation, otherwise most of the times traitors from within will break the momentum.
सभी संगठनों को एक मंच पर लाना चाहिए और फिर लीडिंग टीम का फैसला हो और वे सब मिलकर इस आंदोलन को आगे बढ़ाएं।
इस आंदोलन में बहुत दम है।