बहुत से लोगों का यह मानना है कि मिड-डे मील में प्रोटीन के स्र��त के रूप में अंडे का विकल्प दाल, पनीर, टोफू, सोयाबीन इत्यादि हो सकते हैं, और इस पर देश में बहस चल ही रही है।
इस पर दिल्ली के गंगाराम अस्पताल की आहार विशेषज्ञ साफ कह रहीं है कि अंडे को किसी एक खाद्य पदार्थ से बदला नहीं जा सकता...यदि स्कूलों में बच्चों को सप्ताह में एक या दो बार अंडा दिया जाता है, तो उसकी जगह समान मात्रा में प्रोटीन देने के लिए अन्य खाद्य पदार्थों की काफी अधिक मात्रा देनी होगी, जिसे सभी बच्चे पर्याप्त मात्रा में खा भी नहीं पाएंगे...
इसलिए जो लोग पूरी तरह से शाकाहारी हैं या अंडा नहीं खाना चाहते, उनके लिए शाकाहारी विकल्प उपलब्ध होने चाहिए। लेकिन इसमें किसी तरह का सांस्कृतिक या नैतिक एंगल जोड़कर बच्चों के पोषण से समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
कुछ बचाने के लिए 'उम्र गँवाते हुए लोग,
ख़र्च हो जाएँगे ये ख़्वाब कमाते हुए लोग !!
भूल जात�� हैं कि अब याद नहीं रखना मुझे,
मेरा क़िस्सा मुझे आ आ के सुनाते हुए लोग !!
छोड़ जाएँगे किसी दिन ये बताते ही नहीं,
ये बताते ही नहीं अपना बनाते हुए लोग !!
~ अंफ़ाल रफ़ीक़
#शेर #शायरी
राज्य के सभी बच्चों को अच्छी और गुणवतापूर्ण शिक्षा मिले, इसे लेकर हमारी सरकार लगातार प्रयासरत है। इस दिशा में आज शिक्षा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में निम्न निर्देश दिये गये हैं :-
• अगले 5 वर्षों में 1 लाख शिक्षकों की नियुक्ति की जायेगी जिसके अन्तर्गत प्रत्येक वर्ष कम से कम लगभग 20 हजार शिक्षकों की नियुक्ति की जायेगी। इसके लिये हर वर्ष जुलाई महीने में नियुक्ति संबंधी विज्ञापन जारी किया जायेगा।
• शिक्षकों के स्थानान्तरण को पारदर्शी एवं सुगम बनाने को लेकर शिक्षा विभाग को निदेशित किया गया है कि महिला शिक्षकों का स्थानान्तरण यथासंभव गृह जिले के अपने प्रखण्ड के गृह पंचायत के बगल के पंचायत में तथा पुरूष शिक्षकों को गृह जिले के अपने गृह प्र���ण्ड के बगल के प्रखण्ड में स्थानान्तरण क���ने हेतु नीति बनायी जाय।
• राज्य के सभी विद्यालयों में छात्र-छात्राओं को पोशाक की आपूर्ति जीविका के माध्यम से किया जाय। इससे पोशाक की ससमय आपूर्ति के साथ महिला स्वावलंबन को भी बल मिलेगा।
राजधानी पटना समेत राज्यभर में भवन निर्माण सामग्री की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों के लिए घर बनाना मुश्किल कर दिया है। खासकर बालू, सीमेंट और एल्युमीनियम के दामों में तेज उछाल से निर्माण लागत में भारी बढ़ोतरी हुई है।
पिछले दो महीनों में सीमेंट की कीमतें भी बढ़ी हैं, जबकि मानसून से पहले बालू की बढ़ती मांग और आगामी खनन रोक ने बाजार में और अस्थिरता पैदा कर दी है। निर्माण सामग्री कारोबारियों के अनुसार, 15 जून से 15 अक्टूबर तक बालू खनन पर रोक लगनी है।
मानसून के दौरान हर वर्ष घाटों से बालू निकासी बंद रह��ी है। इसका असर अभी से बाजार में दिखने लगा है। 15 दिन पहले ��क जो एक ट्रैक्टर टाली (करीब 100 सीएफटी) बालू 5000 से 5500 रुपये में मिल रही थी, उसकी कीमत अब 7000 से 8000 रुपये तक पहुंच गई है। कई इलाकों में इससे भी अधिक कीमत वसूली जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बालू की कृत्रिम कमी दिखाकर ट्रैक्टर संचालक और अवैध कारोबार से जुड़े लोग मनमाने दाम वसूल रहे हैं। जगनपुरा, फोर्ड हॉस्पिटल इलाके और अन्य स्थानों पर सुबह से बड़ी संख्या में ट्रैक्टर और ट्रक खड़े रहने के बावजूद ग्राहकों को ऊंचे दाम चुकाने पड़ रहे हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि बिल मांगने पर कई विक्रेता साफ मना कर देते हैं।
एल्युमीनियम की कीमतों में भी पिछले कुछ समय में करीब 70 प्रतिशत तक वृद्धि बताई जा रही है। कारोबारियों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई चेन प्रभावित होने और आयात लागत बढ़ने का असर स्थानीय बाजार पर पड़ा है।
इसका सीधा असर खिड़की, दरवाजे, फ्रेम और अन्य फिटिंग सामग्री ��र दिखाई दे रहा है। निर्माण सामग्री बाजार से जुड़े कुछ व्यापारियों का कहना है कि पेट्रोलियम संकट के बावजूद अभी सरिया, गिट्टी और कुछ अन्य सामग्रियों की कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई हैं।
उनका कहना है कि मार्च और अप्रैल में सीमेंट की कीमतों में 4 से 8 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई थी। उस दौरान प्रति बोरी 40 से 50 रुपये तक दाम बढ़े थे, जबकि हाल के दिनों में बाजार कुछ हद तक स्थिर हुआ है।
मीठापुर के कारोबारी आदित्य ने बताया कि मार्च और अप्रैल में सीमेंट महंगा हुआ था, लेकिन अभी गिट्टी, बालू और सरिया के दाम अपेक्षाकृत स्थिर हैं। वहीं शाहगंज के पप्पू सिंह के अनुसार, सीमेंट की बोरी पर 20 से 25 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई थी।
बबलू गुप्ता ने बताया कि पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद बाजार में तेजी आई और सीमेंट की बोरी 50 से 60 रुपये तक महंगी हुई। जबकि शनिचरा मोड़ के बसंत कुमार का कहना है कि फरवरी के बाद कुछ समय तक क���मतें बढ़ीं, लेकिन अभी बाजार में कई सामग्रियों के दाम स्थिर या कुछ कम हुए हैं।
निर्माण क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि बालू, सीमेंट और एल्युमीनियम की बढ़ती कीमतों का सबसे अधिक असर मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ रहा है, जो सीमित बजट में घर बनाने की योजना कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून के दौरान आपूर्ति और परिवहन व्यवस्था प्रभावित हुई तो आने वाले महीनों में निर्माण लागत में और बढ़ोतरी हो सकती है।
#Patna #Construction #Bihar
थाने में वीडियो-फोटो बनाना अपराध नहीं, नागरिक का अधिकार है: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट में एक सुनवाई के दौरान न्याय की वह तस्वीर उभरी, जो पूरे देश में पारदर्शिता और नागरिक अधिकारों की मिसाल बन गई है।
माननीय जस्टिस निरजर एस. देसाई की अदालत में जब पुलिस पक्ष की महिला अधिवक्ता ने तर्क दिया कि थाने के अंदर आम नागरिक वीडियो रिकॉर्डिंग या फोटोग्राफी नहीं कर सकते, तो न्यायाधीश ने सख्त स्वर में पूछा – “बताइए, किस कानून की धारा के तहत वीडियोग्राफी प्रतिबंधित है?”
यह सवाल केवल एक वकील से नहीं, बल्कि पूरे पुलिस तंत्र से था। मामला हिरासत में यातना से जुड़ा था। पुलिस ने अपने बचाव में कहा कि शिकायतकर्ता लोग घटना की वीडियो बना रहे थे। जस्टिस देसाई ��े इस दलील को पूरी तरह खारिज करते हुए तीखे सवाल पूछे। उन्होंने पूछा कि अगर पुलिस अपना कानूनी काम कर रही है तो वीडियो से उसे क्या आपत्ति हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के 80 प्रतिशत CCTV कैमरे काम नहीं कर रहे हैं, फिर नागरिकों को रिकॉर्डिंग करने से कैसे रोका जा सकता है।
जब सरकारी वकील ने बार-बार CCTV का हवाला दिया, तो कोर्ट ने साफ कहा कि यह तर्क तभी दिया जा सकता है जब 100 प्रतिशत CCTV कार्यरत हों। लेक���न हकीकत यह है कि 80 प्रतिशत कैमरे खराब पड़े हैं।
भरी अदालत में न्यायाधीश ने स्पष्ट घोषणा की कि थाने में वीडियोग्राफी या फोटोग्राफी करना कोई अपराध नहीं है। कोई भी पुलिसकर्मी या सरकारी कर्मचारी आम नागरिक को सबूत के रूप में वीडियो बनाने या फोटो खींचने से नहीं रोक सकता। थाना सार्वजनिक स्थान है।
यह बयान न केवल उस मामले में निर्णायक साबित हुआ, बल्कि पूरे देश के लिए एक मजबूत संदेश बन गया। सोशल मीडिया पर वायरल हुई इस क्लिप को देखकर लाखों नागरिकों ने न्यायाधीश की तार्किक और स��हसिक बहस की सराहना की।
यह फैसला इसलिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पुलिस जवाबदेही मजबूत होगी और हिरासत में मारपीट या दुरुपयोग के खिलाफ ठोस सबूत आसानी से तैयार किए जा सकेंगे। साथ ही नागरिकों के अधिकारों को भी मजबूती मिली है। थाना किसी प्रतिबंधित स्थान की श्रेणी में नहीं आता, इसलिए Official Secrets Act भी यहां लागू नहीं होता।
थाने या किसी सरकारी कार्यालय में शांतिपूर्वक, बिना ड्यूटी में बाधा डाले रिकॉर्डिंग करना कानूनी है। लेकिन हमेशा सावधानी बरतें – शांत रहें, आक्रामक न हों और यदि जरूरी हो तो दूसरे व्यक्ति की मदद लें।
यह सुनवाई सिर्फ एक मुकदमे की नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक सशक्तिकरण की बड़ी जीत है। जस्टिस निरजर एस. देसाई ने एक बार फिर साबित किया कि अदालत आम आदमी की आवाज और संवैधानिक मूल्यों की रक्षक है।
जागरूक रहिए। सजग रहिए। जब हर नागरिक अपने अ���िकारों को जानता और इस्त���माल करता है, तभी लोकतंत्र सही मायने में मजबूत होता है।
~ साभार: @NCIBHQ
कुणाल गौरव, जिला शिक्षा पदाधिकारी, मुंगेर के द्वारा मुझे मानहानि के मुकदमे का नोटिस भेजा गया है। जवाब में मैं भी उन्हें मानहानि के दो अलग-अलग मामले में 2 नोटिस भेज रहा हूं। और उनके द्वारा मुंगेर जिले में किया जा रहे भ्रष्टाचार के संबंध में नामजद मुकदमा भी दर्ज करवाऊंगा। मुंगेर जिला शिक्षा पदाधिकारी के भ्रष्टाचार के संबंध में मेरे पास ठोस सबूत हैं। इसलिए मैं इस मामले में अपने कदम पीछे नहीं खींचने वाला! ऐसे भ्रष्ट पदाधिकारी को जेल तक पहुंचा कर दम लूंगा!
I have sent this representation for the immediate release of Shri Sonam Wangchuk to the President of India, Prime Minister of India, Home Minister, Law Minister of India, and the LG of Ladakh, with a cc to DC Leh.
क्या समाज मुकदर्शक बन कर बैठी रहेगी
एक शिक्षिका के साथ इस तरह का बर्ताव हो रहा है जो खुलेआम दिख रहा है लेकिन जिला शिक्षा पदाधिकारी जहानाबाद के द्वारा उसी शिक्षिका पर स्पष्टीकरण निकाल कर दिखा दिया गया है कि तानाशाही कितना चर��� पर है।
क्या शिक्षक समाज इस मुद्दे पर एकजुट नहीं होंगे।
इस पत्र को माफी के साथ जिला शिक्षा पदाधिकारी को वापस लेना ही होगा
@narendramodi जी क्या इस पत्र को आप उचित मानते है?
क्या ये महा अन्याय नहीं है।
@umashankarsingh
@yadavtejashwi @DrMadanMohanJha @iamnarendranath @ShyamMeeraSingh @NitishKumar @ANI सभीलोग संज्ञान ले इस अन्याय को रोके।
बुद्ध और गाँधी के देश में हिंसा का इतना उन्माद, बताता है ; नाथूराम गोडसे ज़िंदाबाद का नारा दिमाग़ में कितनी गहराई से बस गया है।
युद्ध की विभीषिका से सावधान रहिए।
•देश से प्रेम कीजिए । युद्ध से नहीं ।
नेहा दीक्षित से पूर्णतः सहमत ।
पु��: दोहराता हूँ,मैं युद्ध के विरुद्ध हूँ।
लोकप्रियता वाद से बचना दुनिया का सबसे कठिन काम है। भारत को सबसे ज़्यादा इसे समझने की ज़रूरत है।
युद्ध का विरोध कोई नया वि��ार नहीं है। संदर्भ के लिए बताना ज़रूरी है; सुपरिचित दार्शनिक , तर्कशास्त्री, नोबल पुरस्कार विजेता बर्ट्रेंड रसेल (Bertrand Russell) ने प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) के दौरान अपने शांतिवादी विचारों की प्रतिबद्धता और युद्ध-विरोधी गतिविधियों के कारण जेल की सजा भुगती थी। प्रखर शांतिवादी रसेल ने ब्रिटिश सरकार की युद्ध नीतियों की आलोचना की थी।
रसेल को 1916 में No-Conscription Fellowship के समर्थन में लेख लिखने और भाषण देने के लिए £100 का जुर्माना लगाया गया।उनकी किताबें जब्त कर ली गईं। उन्होंने 1918 में फिर एक लेख में ब्रिटिश और अमेरिकी सैन्य नीतियों की आलोचना की, जिसके कारण उन्हें Defence of the Realm Act के तहत छह महीने की जेल की सजा सुनाई गई। उन्होंने ब्रिक्सटन जेल में सज़ा काटी।
भारत में बहुत क�� लोग युद्ध के विरुद्ध दिख रहे हैं लेकिन इससे शांति और मनुष्यता का महत्व कम नहीं हो जाता। भारत में जिस तरह से सांप्रदायिकता को राजनीति और मीडिया का केंद्रीय विचार बना दिया गया । खुला समर्थन मिला, उसके बाद युद्ध के विरुद्ध होने के लिए जिस नैतिक साहस की ज़रूरत है, वह समाज में इतनी आसानी से नहीं आएगा।
हमें बार-बार युद्ध के विरुद्ध होने की घोषणा को दोहराना होगा। इससे पहले; सरकार युद्ध को शांति घो��ित कर दे।
@nehadixit123 @harsh_mander
बढ़ते वजन के कारण 24 साल के पृथ्वी शॉ मुंबई की रणजी टीम से हुए बाहर
◆ मुंबई क्रिकेट चयन समि���ि ने लिया फ़ैसला
Prithvi Shaw | Mumbai | #Mumbai | #PrithviShaw
बिहार में जमीन सर्वे का काम शुरू हो चुका है। ऐसे में अगर आप राज्य के बाहर रहते हैं तब भी आप अपनी जमीन का सर्वेक्षण करवा सकते हैं। इसके लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने खास तरह का ट्रैकर ऐप लॉन्च किया है। ��ेखिए ये रिपोर्ट।
#Bihar #LandSurvey #BiharLandSurvey | @RichaSharmaa18