Reservation does not oppose merit; it creates opportunities for those who were denied them for generations.
Social justice, equal representation, and inclusive development are the pillars on which a strong and resilient nation is built.
जब भी आपको कोई पत्रकार मि��े, उससे ये जरूर पूछिए कि आपके ऑफिस में कितने दलित हैं, कितने आदिवासी और ओबीसी हैं? कितनी महिलाएं हैं, कितने मुसलमान हैं, क्या कोई एलजीबीटी समुदाय से है? अगर हैं तो वे किस तरह का काम कर रहे हैं, क्या वे डिसाइसिव पॉजिशन पर हैं? आपको खुद पता चल जाएगा कि ये सारा खेल कौन खेल रहा है और इस खेल में आपकी बिसात क्या है.
लड़के की उम्र अभी 16 साल की है, इसलिए अभी ये रील की दुनिय��� में खोया हुआ है इसने जय भीम के अर्थ को नहीं समझा है और ना ही बाबा साहेब के विचारों से प्रभावित हुआ हैं, जिस दिन प्रभावित होगा उस दिन शिक्षा को प्राथमिकता देगा।
The Yogi govt has restored Bhadohi dist as Sant Ravidas Nagar. Earlier, it also restored Babasaheb Dr. B. R. Ambedkar's name to the Kannauj Medical College.
The Union govt has named Jalandhar Airport after Guru Ravidas Ji, while Ayodhya Airport already bears the name of Maharshi Valmiki Ji. These are welcome steps.
Behen Mayawati had named several districts, hospitals, and institutions after Bahujan icons and India's great champions of equality. However, the Akhilesh Yadav-led SP government changed many of those names. That is why Behen Mayawati publicly thanked CM Yogi Adityanath for restoring Sant Ravidas Nagar.
I also humbly request the government to restore the names of Ramabai Nagar (Kanpur Dehat), Kanshiram Nagar (Kasganj), Mahamaya Nagar (Hathras), Bhim Nagar (Sambhal), Prabuddha Nagar (Shamli), Panchsheel Nagar (Hapur), Chhatrapati Shahuji Maharaj Nagar (Amethi), and Jyotiba Phule Nagar (Amroha). It would be a fitting tribute to our great icons.
#DalitVirodhiSP
भगवान के घर में ही डाका! 🚨
बद्रीनाथ धाम तीर्थ से देवी-देवताओं के लाखों के सोने के मुकुट चुराने वाला कोई बाहरी चोर नहीं, बल्कि भजन-कीर्तन करने वाला 'पुजारी' राघवराम पाठक निकला।
जब रखवाले ही चोर बन जाएं तो घर की सुरक्षा कौन करेगा?
स्वास्थ्य मंत्री का काम देश की स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारना है, लेकिन जेपी नड्डा जी संसद में मनुस्मृति को बचाने में व्यस्त दिखे। जब सत्ता के शीर्ष पदों पर बैठे लोग ही सड़ीयल व्यवस्था के पैरोकार बन जाएं, तो बदलाव मुश्किल है।
BJP बताए कि देश संविधान से चलेगा या म���ुस्मृति से?
देश का संविधान समानता और न्याय की बात करता है, लेकिन जब संसद के भीतर मल्लिकार्जुन खरगे जी ने म��ुस्मृति के जातिवादी एवं हिंसक श्लोकों को एक्सपोज किया तो पूरी बीजेपी बौखला उठी। BJP सांसदों का हंगामा इस बात का साफ प्रमाण है कि वे किस वैचारिक एजेंडे के साथ खड़े हैं।
जहां एक ओर चीन के युवा अत्याधुनिक रिसर्च, स्पेस प्रोग्राम और इनोवेशन की दुनिया में आगे बढ़ रहे हैं, वहीं हमारे देश में जब युवा अपनी शिक्षा के लिए बुनियादी सवाल पूछते हैं, तो उन पर लाठियाँ बरसाई जाती हैं। यह शर्मनाक है।
बेतहाशा बेरोजगारी, लाचारी एवं पेपर लीक से परेशान युवाओं का भरोसा अब पूरी तरह इस जर्जर सिस्टम से उठ चुका है। इस विश्वास को दोबारा कायम करने के लिए सरकार को सही मायने में ठोस प्रयास करने होंगे। लेकिन अफसोस, BJP स��कार इस ज़मीनी हक़ीक़त से पूरी तरह आँखें मूंदे बैठी है।
Dalit kid thrashed for drinking water.
A Dalit boy in Shivpuri, MP, was viciously beaten by teacher Lokesh Sharma, who hurled caste slurs while thrashing him.
This horrific act is a stark reminder of caste hatred that still exist in our classrooms today.
"You Cham**ar, don't touch my bottle."
Lokesh Sharma, a govt teacher, hurled caste slurs and thrashed a Dalit boy in Shivpuri, MP, after he drank water from classroom bottle.
The entire world must see the heinous caste humiliation our kids face since childhood.
छुआछूत का खौफनाक सच द��खिए।
ताज़ा मामला मध्य प्रदेश के शिवपुरी के प्राइमरी स्कूल का है, जहाँ एक दलित बच्चे द्वारा क्लास की बोतल से पानी पीने भर से शिक्षक लोकेश शर्मा का जातीय दंभ ऐसा भड़का कि उसने बच्चे को जातिसूचक गालियां देते हुए बेरहमी से पीटा।
मध्य प्रदेश के शिवपुरी के एक स्कूल में कक्षा 4 में पढ़ने वाले एक दलित बच्चे को महज इस बात के लिए शिक्षक लोकेश शर्मा ने जातिगत गालियां दी और डंडो से पीटा क्योंकि उसने क्लास में रखी बोतल से पानी पी लिया था। यह पीड़ादायक घटना है।
आरक्षण हटाओ आंदोलन करने वाले बेशर्मों, चुप्पी तोड़ो।
छात्रों पर लाठीचार्ज या FIR दर्ज करने की बजाए सरकार इस पर चिंतन करे कि देश का युवा आज सड़क पर क्यों है?
अगर ��रकार को लगता है कि गोदी मीडिया की डिबेट्स और महंगे विज्ञापनों से युवाओं का गुस्सा शांत हो जाएगा तो यह उनकी गलतफहमी है। युवाओं की वेदना सुननी होगी।
निकम्मी न्याय व्यवस्था!
कोयला ब्लॉक आवंटन केस में 2015 में दिल्ली की एक ट्रायल कोर्ट ने पूर्व पीएम डॉ. मनमोहन सिंह को आरोपी मानकर समन भेजा था। सीबीआई ने भी कुछ नहीं किया।
दिसंबर 2024 में वे दुनिया छोड़कर चले गए और अब सुप्रीम कोर्ट ने केस रद्द कर उन्हें क्लीन चिट दी है। बधाई हो!
Dear milord,
Suspending and taking legal action against the violent cop should be your foremost judicial priority to maintain basic justice.
'Stop discrediting the institution' won't help.
Reservation is our constitutional right to representation, and we are not backing down. Get used to seeing us at the table, becoz we are here to stay, lead & change the system.
युवाओं के लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचलने के लिए BJP सरकार किस हद तक गिर सकती है, ���सकी मिसाल नई दिल्ली और बिहार के आंदोलनों में देखने को मिली।
देश इस अत्याचार को कभी माफ नहीं करेगा।
जब छात्र अपनी डिग्रियों और भविष्य की भीख मांगने के बजाय हक की मांग के लिए दिल्ली की सड़कों पर उतरे, तो उन्हें बाबासाहेब के विचारों से 'लड़ने की ताकत' मिली।
सरकार ने छात्रों पर एके-47, पैलेट गन, वाटर कैनन, इलेक्ट्रिक शॉक का इस्तेमाल किया। नतीजन उन्हें हारना पड़ा।