कल मेरठ से दो खबरें आई:
1) गजेंद्र शर्मा नामक सिपाही ने आम गरीब जनता को धमकाते हुए उनके मुंह में "मूत देने" की बात कर रहा था।
2) SSP अविनाश पांडेय जातीय विद्वेष में आकर हत्या के एक केस में न्याय मांग रहे दलितों को थप्पड��� मार रहा था।
एक शर्मा है, दूसरा पांडेय। दोनों मेरिटधारी मिलकर यूपी पुलिस और योगी सरकार की असलियत सबके सामने प्रस्तुत कर रहे हैं। सिपाही से लेकर SP-SSP तक, खाकी वर्दी पहने हुए ब्राह्मण सरनेम वाले लोग अपनी मेरिट का प्रदर्शन करने में कोई कोताही नहीं बरत रहे हैं। अगर आप गरीब हैं, दलित हैं, पिछड़ा हैं, मुसलमान हैं.. फिर देखिए इनका बर्ताव!
इन जैसे वर्दीधारी गुड़ों की वजह से कभी लोगों को न्याय नहीं मिल पता है. इस गुंडे को तुरंत बर्खास्त किया जाना चाहिए. सभी अम्बेडकरवादी नेताओं को तुरंत मेरठ पहुँचना चाहिए ताकि इनकी अक्ल ठिकाने आए फिर देखते है ये कितनों को थप्पड़ मारता है…
कप्तान SSP अविनाश पांडेय को पुलिस वैन में जाकर आंदोलन में डिटेन किए गए लोगों को थप्पड़ नही मारना चाहिए था.
पुलिस को Crowd Control की बाकायदा ट्रेनिंग दी जाती है.
पुलिस भीड़ पर हल्का बल प्रयोग कर सकती है. लेकिन पुलिस कस्टडी में किसी को भी पीटने का अधिकार पुलिस के पास नही है.
जब मामला शांत हो चुका था. आंदोलनकारि���ों पकड़कर पुलिस वैन बंद कर दिया, तो वैन का दरवाजा खोलकर थप्पड़ क्यों मारा ?
UPSC को भंग करना चाहिए. इस देश को आईएएस आईपीएस से कभी कोई भला नही हुआ है. आईपीएस आईएएस आम जनता से मिलते भी हैं तो एक राजा की तरह. आम नागरिक को थप्पड़ मारना कोई बहादुरी नही है.
2013 बैच के युवा IPS अधिकारी जगमोहन मीणा का मात्र 37 वर्ष की आयु में, लगभग 13 वर्ष की सेवा के बाद इस्तीफा देना कई सवाल खड़े करता है।
IIT से पढ़ाई, पहले ही प्रयास में IPS, कई संवेदनशील जि���ों में बेहतरीन सेवा और राष्ट्रीय पुलिस पदक जैसे उपलब्धियों के बाद अचानक इस्तीफा… जबकि कोई स्पष्ट कारण भी सार्वजनिक नहीं किया गया।
ईमानदारी के साथ चलना बहुत कठिन मार्ग है !
नेहा भारती वायरल क्या हो रही है मनुवादियों के पेट में दर्द हो रहा है.
नेहा भारती ने जमा मस्जिद के बाहर दही भल्ला बांट दिया. इस वीडियो को करोड़ों लोग देख चुके हैं.
नेहा शर्मा या नेहा पांडेय नाम की लड़की अगर जामा मस्जिद के बाहर दही भल्ला बांटती तो लिबरल सेक्युलर और वामपंथी सब जय जयकारा करते.
नेहा भारती बहुजन समाज से है इसलिए आलोचना की जा रही है. नेहा शर्मा ने केवल इतना कहा मस्जिद में कोई जाति नही पूछता.
क्या गलत कहा, क्या आज तक कभी आप लोगों ने मस्जिद के अंदर या बाहर जातीय भेदभाव का वीडियो देखा है ?
कहाँ हो @ajeetbharti ? इसलिए हम सबको सामाजिक भेदभाव जैसी घृणित परंपराओं पर गंभीरता दिखाने की जरूरत है ताकि समाज में बदलाव आए ना कि कुतर्क करके इसे डिफेंड करने की जरूरत है…
जीतन राम मांझी ने मंच पर भाषण देते कहा, Schedule Caste के लोगों को बौद्ध धर्म अपना लेना चाहिए.
दलित समाज के नेता जनता को एडवाइस तो बहुत देते हैं ये करो वो करो.
जीतन राम मांझी खुद क्यों नही पहले बौद्ध धम्म अपना लेते.
दलित बौद्ध बनें या ईसाई या मुसलमान. दलित कहीं भी चला जाए उन्हें दलित ही रखा जाता है.
केरल में दलित ईसाईयों का अलग कब्रिस्तान है. धर्म बदलने से समस्या का समाधान नही होगा. समस्या जाति है. SC समाज की कई जातियां ग्रामीण इलाकों अब दबंगई कर रही हैं. इन जातियों को जाति विनाश और सामाजिक परिवर्तन से कोई लेना देना नही है.
दलितों पर आतंकी हमला बंद करो।
पंजाब के मुक्तसर में मोबाइल चोरी की शक में दलित युवकों के साथ बर्बर पिटाई एवं निर्वस्त्र कर पूरे गांव में घुमाने की घटना पर पूरा देश मौन क्यों है? आखिर कब तक दलितों को यूं ही कुछ भी आरोप लगाकर मारा-काटा जाता रहेगा?
खान सर जैसा पूरा आदमी पूरे देश में दूसरा कोई नही मिलेगा. खान सर ने जो किया है उसके लिए उन्हें उम्रकैद की सजा मिलनी चाहिए ?
खान सर कौन कौन से अपराध किए हैं यह रही पूरी लिस्ट.
खान सर 200 रुपए फीस में छात्रों को पढ़ाकर दरोगा, असफर और इंजीनियर बनाया.
खान सर गरीबों के इलाज के लिए अस्पताल बनाया जहां MRI 10,000 में नही, 1000 रुपए में किया जा रहा है. CT स्कैन 8000 में नही, केवल 900 रुपए किया जा रहा है.
ब्लड टेस्ट CBC 7 रुपए, ECG 25 रुपए, X-रे 35 और किडनी डायलीसिस 350 रुपए में किया जा रहा है.
महंगी शिक्षा लॉबी और महंगी स्वास्थ्य लॉबी को नुकसान पहुंचाने के आरोप में खान सर को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए.
��िहार में शिक्षा में क्रांति की शुरुआत आनंद कुमार सर ने की थी.
गणित विषय के महाज्ञानी आनंद कुमार ने देखा अमीर घरों ने बच्चे महंगी कोचिंग हासिल कर IIT में पहुंच रहे हैं.
बिहार में ऑफलाइ�� कोचिंग माफिया का वर्चस्व था जो IIT और UPSC के नाम पर लाखों रुपए छात्रों से लूट रहे थे.
आनंद कुमार सर ने 2002 में गरीब बच्चों के लिए सुपर-30 क्लास की शुरुआत की. 2018 तक 510 में से 422 छात्र IIT में पहुंचे.
KHAN SIR ने आनंद कुमार सर की तरह 200, 500, 1000 और 2000 रुपए में गरीब घरों के बच्चे को पढ़कर दरोगा और अफसर बनाने का काम किया है. इन दोनों के शिक्षकों के कारण बिहार के शिक्षा माफिया की कमर टूट गयी.
10 वर्ष की महादलित बच्च्ची की रोने की आवाज सुनकर भीड़ इकट्ठा हो गयी, देखा पुजारी अश्लील हरकत कर रहा है। भीड़ ने पुजारी को पुलिस को सौंप दिया। पुलिस ने बेहतरीन तरीके से जाँच करके पुजारी को हिरासत में ले लिया। ।।
इसके विरोध में पहली बार मंदिरों के कपाट बंद अथार्त हड़ताल हो रही है।
क्या कभी सुना कि ऐसा कंही मस्जिद, गुरुद्वारा, सिनेनागा(यहूदी), बुद्ध विहार, गिरजाघर में विरोध के रूप में बन्द किया गया ह���?
लेकिन सहरानपुर में यह अजीब विरोध हो रहा है। इससे बेइज्जती किसकी हो रही है?
देश की सबसे बड़ी खबर होनी चाहिए. लेकिन OBC SC ST खुद बेखबर हैं.
हाई कोर्ट के 4 सिटींग चीफ जस्टिस और एक सीनियर एडवोकेट को कोलेजियम ने सुप्रीम कोर्ट में जज बना दिया.
1990 में जब OBC SC ST ने विधायिका और कार्यपालिका यानी पार्लियामेंट और सरकार पर आधिपत्य स्थापित बनाना शुरू किया,
1993 में सुप���रीम कोर्ट के जजों ने कोलेजियम सिस्टम की स्थापना की, जिसमें जज ही जजों को चुनते हैं.
भारत में हर दूसरा नागरिक OBC है, हर तीसरा नागरिक SC-ST हैं. सुप्रीम कोर्ट में कितने जज OBC SC ST हैं. क्या डाइ��र्सिटी की बात करना गुनाह है ?
विजय पंडित नाम के एक पुजारी ने एक मंदिर के अंदर 10 साल की दलित लड़की से बलात्कार का प्रयास किया। जब आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की गई तो पूरे पुजारी समर्थकों ने आरोपी के समर्थन में थाने का घेराव कर दिया,
यह एक शर्मनाक स्थिति है जहां ब्राह्मण अपनी जाति के आधार पर POCSO आरोपियों का समर्थन कर रहे हैं। घटना उत्तर प्रदेश के सहारनपुर की है।
हम जाति नही बात नही कर रहा हूँ. हम डाइवर्सिटी की बात कर रहा हूँ.
पीयूष मिश्रा
संजय मिश्रा
कुमुद मिश्रा
पंकज त्रिपाठी
मनोज बाजपेयी
यह सब कलाकार इसलिए सफल ह��� कारण इन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिला. किसी दलित, आदिवासी और पिछड़े के लिए दरवाजा क्यों बंद है.
भारत का पूरा इको सिस्टम सवर्णों के फेवर करता है. सवाल है ऊंचा मुकाम हासिल करने वाले ये कलाकार डाइवर्सिटी के मुद्दे पर कभी बात नही करते.
अमेरिका में 15% लीड रोल ब्लैक समुदाय के एक्टर को मिलता है. हॉलीवुड की हर फिल्म में ब्लैक, एशियाई और लैटिनो किसी न किसी किरदार में जरूर होते हैं.
अमेरिका में हर सेक्टर की डाइवर्सिटी रिपोर्ट जारी होती है. भारत में भी हर सेक्टर को डाइवर्सिटी रिपोर्ट जारी करने के लिए बाध्य करना चाहिए. ��मारे नेता केवल MP MLA और CM बनने के चक्कर में रहते हैं. डाइवर्सिटी पर राष्ट्रीय बहस होनी चाहिए.
IMAGE : Pankaj Tripathi & Idris Elba
1915 में गांधी जी जब दक्षिण अफ्रीका से भारत आए तब मोहम्मद अली जिन्ना बहुत बड़े नेता थे.
गांधी जी ज्यादा लोकप्रिय नेता नही थे. गांधी जी को इन उद्योगपतियों का जब��दस्त समर्थन मिला,
घनश्याम दास बिड़ला
जमुनालाल बजाज
अंबालाल साराभाई
वालचंद हीराचंद
प��रुषोत्तमदास ठाकुरदास
इन उद्योगपतियों ने कांग्रेस पार्टी और गांधी जी बहुत सहयोग किया. गांधी जी देश के सबसे बड़े नेता बन गए.
मोदी जी प्रधानमंत्री इसलिए बन पाए क्यों कि उनकी जाति और प्रांत के अडानी अंबानी उद्योगपति हैं. राहुल गांधी को PM in Waiting इसलिए कहा जाता है,
इनकी जाति के लोग भी उद्योग जगत, मीडिया, न्यायपालिका और ब्यूरोक्रेसी में मौजूद हैं.
बहन मायावती, अखिलेश यादव या अन्य OBC SC और आदिवासी ने���ा तभी इस देश का नेतृत्व कर पाएंगे जब इनकी जाति के लोग भी उद्योगपति, मीडिया और न्यायपालिका में होंगे.
राजकीय कवि कुमार विश्वास ने युवाओं के सटायर मूवमेंट कॉकरोच जनता पार्टी का अपमानजनक टिप्पणी की है.
कुमार विश्वास ने मीडिया से बातचीत में कहा, कॉकरोच की उत्पत्ति हो रही है तो HIT का भी आविष्कार हुआ है.
कुमार विश्वास कहना चाहते हैं कॉकरोच मूवमेंट को कुचल देना चाहिए.
कॉकरोच जनता पार्टी की आइडेंटिटी पर बहस हो सकती है, लेकिन जो पार्टी जनता से जुड़े हुए जरूरी मुद्दे उठा रही है.
पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके दलित समाज से हैं इसी कारण पंडित विश्वास कुमार शर्मा का पेट पीरा रहा है. जबकि यह आदमी खुद अन्ना आंदोलन के समय रामलीला मैदान में बने मंच पर डांस और ताली बजाकर फेमस हुआ, नही तो यह 500 रुपए वाला हस्य कवि था.
धीरेंद्र शास्त्री ने नागपुर में जाकर छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान किया. आए दिन आरक्षण पर टिका टिप्पणी करते हैं.
डॉली चायवाला ने धीरेंद्र शास्त्री का पैर छूकर आशीर्वाद लिया. डॉली चायवाला को एक बार भी एहसास नही वो क्या करने जा रहा है. आशीर्वाद प्राप्त करना था, तो अपने माता पिता का पैर छूता.
डॉली चायवाला को सोशल मीडिया पर आगे बढ़ाने में सबसे ज्यादा योगदान बहुजन समाज और माइनॉरिटी समाज का है.
इस हरकत के लिए सोशल मीडिया पर डॉली चायवाले का विरोध किया जा रहा है. जस्टिस बीआर गवाई, और अब डॉली ���ायवाला. आखिर बहुजन समाज के नायकों को क्या हो गया है ?