भाई बहन ,भा���ी ,भतीजा भतीजी ,ममिया ससुर फूफिया चाचा, बहनोई ,साढ़ू सबके नाम ज़मीन ख़रीदेगा तेरा मोहन🤡
मुख्यमंत्री हो तो ऐसा हो वरना ज़िंदा तो….खैर हटाओ!!
#WATCH | Patna, Bihar: After being released on bail in the 'Khan Sir' coaching centre vandalism case, Gyan Bindu GS Academy director Raushan Anand says, "The room owner's son has opened a gym worth crores of rupees. Where does that money come from? He deals in cash. An attempt was made to kill me in jail through a guard. Faisal Khan is a liar; statements were forcibly extracted from specific guards—guards who didn't even work for him but for the coaching centre... I have two demands for the government: a CBI inquiry into my brother's murder and a fresh post-mortem examination. Faisal Khan conspired with the room owner; he has ruined the careers of many teachers and plotted to destroy mine as well... He had me sent to jail as part of a conspiracy, and it was Faisal Khan who orchestrated my brother's murder. Regarding Faisal Khan's arrest... Which politician is shielding Faisal Khan? Faisal Khan spent crores of rupees to get me thrown into jail... I cannot reveal the name, but he has political protection. I don't know if he is in the government or the opposition, but he has political protection... The Patna Police harassed me relentlessly.... There was no illness; my brother was healthy...."
"ट्रस्ट में प्रत्येक आदमी भ्रष्ट है।.... चम्पत राय और नृपेंद्र मिश्रा लुटवा रहे हैं।.... अनिल मिश्रा अयोध्या जनपद के अकेले आदमी हैं जिनके घर में लिफ्ट लगी है। अरबों की संपत्ति है।.... ट्रस्ट में भगवान राम के रघुवंशी परम्परा के एक भी लोग नहीं।..... "
- संतोष दुबे, धर्म सेना प्रमुख
संघ प्रमुख को राज्य के मुख्यमंत्री ‘रिसीव’ करने गए। मैं जानना चाहता हूँ कि क्या @RSSorg स्वयं इसका अनुमोदन करता है? क्या पहले कोई परंपरा ऐसी रही है? मेरी जानकारी में संभवतः नहीं।
Ranveer Singh was locked for Bombay velvet with budget of 28cr
Then Ranbir with his nepo connections snatched Bombay Velvet and was replaced. Ranveer had all chances to sue producers and Ranbir for wasting his time. In Don, Farhan wasted Ranveer’s time
Mohammed Siraj is sitting here with Majid Hussain, the guy who openly hates Hindus
This is the same guy who supports 15 minute speech. Every one of them has same mentality
प्रधान, सरकारी नाकामी और CBSE स्कूलों की नई SMC
धर्मेंद्र प्रधान @dpradhanbjp जाते-जाते एक और कांड कर के जा रहा है। वैसे प्राइवेट स्कूल, जिसमें सरकार एक पैसा नहीं देती, उनमें SMC (स्कूल मैनेजमेंट कमिटी) में 75% अभिवावकों का होना अनिवार्य कर दिया गया है। यानी, स्कूल के मालिक अब यह तय नहीं करेंगे कि स्कूल कैसे चले।
ऊपर से आपको लगेगा कि यह तो अच्छी बात है, स्कूल मनमानी फीस लेते हैं, अब नकेल बँधेगी। हालाँकि ऐसा कुछ नहीं है। फीस नियंत्रित करना है तो ब्रैकेट बना दो, फ्रेमवर्क बना दो कि कितनी फैसिलिटी पर कितनी फीस मान्य है।
एसी और स्वीम��ंग वाले स्कूल की फीस आपके बगल के आठ कमरों वाले स्कूल के फीस के बराबर नहीं होगी। हाँ, यूनिफॉर्म और किताब के नाम पर बाध्यता बंद होनी चाहिए। और ये कार्य वहाँ करो जहाँ सरकार पैसे देती है।
खैर, अब ये जो SMC है, उसमें 75% अभिभावक होंगे, तो स्कूल का पैसा कहाँ खर्च होगा, वह��� तय करेंगे। कौन से शिक्षक पढ़ाएँगे, वही तय करेंगे। किस शिक्षक की कितनी सैलरी होगी, वही तय करेंगे।
इस कमिटी में वस्तुतः स्कूल के मालिक के अलावा सब हैं। 8% स्थानीय प्रशासन के लोग, 8% शिक्षक, 8% में आंगनवाड़ी, आशा बहू एवम् अन्य स्थानीय लोग होंगे। सरकारी बना नहीं सकते, वहाँ से पैसा आता नहीं, तो प्राइवेट का दोहन करो।
और तो और, ये कमिटी ही यह तय करेगी कि स्कूल अपनी बाउंड्री बनाने से ले कर लैब बनवाने, स्म���र्ट क्लास का काम या अन्य बड़े कार्य किस ठेकेदार को दे। यानी, अब अभिभावक यह बताएँगे कि स्कूल जिस ठेकेदार से कम में काम करा रहा है उसकी जगह वो अभिभावकों के बीच के किसी व्यक्ति को ठेका दें, वह भी PWD रेट पर!
सरकार इस पर यही कहेगी कि ‘ये स्कूल और स्कूल के ट्रस्टी की मनमानी रोकने के लिए है’। फिर तो सरकार को हर दुकान, हर कम्पनी में ‘उपभोक्ता की कमिटी’ बना देनी चाहिए कि पारले का बिस्कुट कितने में बिकेगा, मारुति की कार कितने में आनी चाहिए। प्राइवेट का मतलब फिर क्या होता है?
सरकार नकारी है, घटिया शिक्षा देती है इसलिए उसका लोड प्राइवेट स्कूल उठाते हैं। वो मनमानी न करें, इसलिए आप एक रेगुलेशन ले कर आते हैं। प्राइवेट स्कूल को @cbseindia29 तब रिकग्नाइज करती है जब उसके पास कुछ मूलभूत सुविधाएँ हों: लैब है, स्मार्ट क्लास है, सीसीटीवी है, ग्रा���ंड है, शिक्षकों की डिग्री क्या है, कितने बच्चों पर कितने शिक्षक हैं आदि।
क्या यह फ्रेमवर्क काफी नहीं है? या अब माता-पिता ही तय करेंगे कि उनके बच्चे को जिस शिक्षक ने डाँटा, अब उसे निकाला जाए? क्या माता-पिता बताएँगे कि स्मार्टबोर्ड का टेंडर फलाने की जगह ढिमका को दिया जाए क्योंकि वो इनके मित्र हैं? जब सरकार वित्तीय सहायता नहीं देती, तो वह उसके आर्थिक विषयों में इतना हस्तक्षेप क्यों करना चाहती?
तुमने गाँव के स्कूलों में पंचायत समिति का बवासीर डाल रखा है जो ग्रामीण राजनीति के कारण वहाँ भी नकारापन फैलाती दिखती है। सरकारी शिक्षक जनगणना से ले कर चुनाव ड्यूटी और सामूहिक विवाह तक में ड्यूटी दे रहे होते हैं। दाल-चावल का हिसाब रखना होता है, वह अलग।
RTE के माध्यम से, अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए आपने प्राइवेट में भी गरीब बच्चों के लिए व्यवस्था की। सरकारी में क्यों नहीं डालते? क्योंकि आप जानते हो वहाँ रद्दी शिक्षा मिलती है। प्राइवेट आपका लोड कम करता है, और आप वहाँ 75% माता-पिता के हाथों में नियंत्रण देना चाहते हैं।
अब ये जो गुलाबी बात कही जा रही है, उसका फॉलआउट ये नहीं जानते। स्कूल बंद होने लगे, तो क्या सरकार स्कूल खोलेगी? जिस माता-पिता को विद्यालय मनमानी वाला लगता है, उनके पास विकल्प है कि वो दूसरे विद्यालय में चले जाएँ। आपको एसी चाहिए बच्चों के लिए तो आपको पैसे भी द��ने पड़ेंगे।
पुनः कहूँगा कि यूनिफॉर्म-पुस्तक का केवल डिजाइन, नाम और सिलेबस स्कूल को देना चाहिए। बच्चों को स्वतंत्रता हो कि वो कहाँ से लें। फीस का ब्रेकेट तय करे सरकार स्कूल की सुविधाओं के आधार पर। इससे इतर यदि निजी स्वामित्व के विद्यालयों में माता-पिता को 75% नियंत्रण दिया गया तो समाजवाद तो आ जाएगा, पर समाजवादी पैरेंट्स के बच्चों को पढ़ाने के लिए विद्यालय नहीं बचेंगे।
कैसा चमन शिक्षा मंत्री है जो चार दिन गाली सुनने के बाद हाय लेवल मीटिंग करता है! लगता है मोदी जी ने कहा होगा कि तुमको नहीं हटाएँगे, मीटिंग-वीटिंग करो, दस-पाँच को सीबीआई पकड़ लेगी, एग��जाम हो जाएगा, हम दो कार में घूम लेंगे, मीडिया दो दिन चिल्ला लेगी, सब ठीक हो जाएगा।
पतित! पतित!! पतित!!!
#UttarPradesh: आगरा में कथित धर्मांतरण नेटवर्क से जुड़े खुलासों में कई चौंकाने वाले दावे सामने आए हैं। जांच में पता चला कि प्रोफेसरों, आर्मी अधिकारियों और बिजनेसमैन परिवारों की लड़कियों को कथित ��ौर पर टारगेट कर “रिवर्ट” नेटवर्क से जोड़ा गया। बच्चों और युवाओं के पास से ऐसी किताबें मिलीं, जिनमें परिवार और दोस्तों को “रिवर्ट” करने की बातें लिखी थीं।
आगरा कमिश्नर दीपक कुमार ने आजतक से क्या कुछ कहा?
#ReporterDiary #Agra | Religious Conversion | @ashishaajtak
Shocking. @talk2anuradha has received legal notice from Delhi Police for her three year-old sarcastic tweets after Scheduled Castes Commission took suo motu cognisance of them. The draconian SC/ST Act has been invoked. She could be arrested any moment.
I stand with Anuradha.