बिहार तकनीकी सेवा आयोग द्वारा पिछले वर्ष हीं नियुक्ति हेतु विज्ञापन प्रारूप पर सहमति के सन्दर्भ में विज्ञप्ति जा��ी की थी परन्तु अभी तक 10-15 वर्ष पूर्ण होने के बावजूद सरकार द्वारा एक भी बहाली नहीं हो पायी है l
सरकार इस पर मंतव्य कर छात्रहित me निर्णय ले
#RELEASE_BTSC_JE_VACANCY
जब देश का हर तीसरा युवा बेरोज़गारी का शिकार है, तब प्रधानमंत्री ने एक बार फिर उनके साथ बड़ा धोखा किया है।
इस बार धोखा आम परिवार से आने वाले, 18-18 घंटे मेहनत करने वाले उन छात्रों के साथ है जो छोटे छोटे ���िराए के कमरों में रह कर बड़े सपने देखते हैं।
जहां रेलवे में लाखों पद खाली हैं, वहां 5 वर्षों के इंतजार के बाद मात्र 5696 पदों की भर्ती, प्रतियोगी छात्रों के साथ अन्याय है।
रेलवे में भर्तियों को कम करने की नीति आखिर किसके फायदे के लिए बनाई जा रही है?
कहां गया हर साल 2 करोड़ नौकरियों का वादा? कहां गया रेलवे का निजीकरण न करने का भरोसा?
एक बात बिल्कुल सा�� है - मोदी की गारंटी, युवाओं के लिए खतरे की घंटी है।
हमें उनके हक़, उनके साथ न्याय के लिए आवाज़ उठानी ही होगी।
#NyayForYuva
5-6 साल से रेलवे की कोई वैकेंसी नही आयी, रेलवे मे लाखों पद खाली हैं, देश के युवा बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं फिर भी ALP की इतनी कम सीटों पर वैकेंसी क्यों ? #InccreaseRailwayALPVacancy
जीवन के हर द्वंद्व और मर्म को रंगमंच की हर विधा में अपनी महारत से सटीक रूपांतरण और प्रदर्शन करने व करवाने वाले महान लोक कलाकार, लोक जागरण के महान सन्देश वाहक, नाटककार, गीतकार, नर्तक, गायक, सामाजिक कार्यकर्ता तथा कला-संस्कृति के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान देने वाले अभिनेता एवं भोजपुरी के शेक्सपियर स्व० भिखारी ठाकुर जी की जयंती पर कोटि कोटि नमन व भावभीनी श्रद्धांजलि। #बिहा�� #Bihar #Bhojpuri
मुंबई इंडियंस ने सूर्यकुमार यादव को धोखा दिया है। सूर्यकुमार यादव एक टॉप क्लास बैट्समैन और कप्तान हैं। कल ही उन्होंने ऑस्ट्रेलिया जैसी वर्ल्ड चैंपियन टीम से भारत को सीरीज जितवा दी है।
रोहित शर्मा के बाद सूर्यकुमार यादव को ही मुम्बई के भविष्य का कप्तान माना जा रहा था, उन्होंने IPL में इस साल कुछ मैचों में मुम्बई की कप्तानी की भी थी मगर अब मुम्बई इंडियंस ने हार्दिक पांड्या को वापस बुला ��िया है।
आप हैरान मत होना अगर 2025 में सूर्यकुमार यादव मुम्बई के अलावा किसी और टीम की कप्तानी करते दिखाई दें।
18 नवंबर 1962 का वो ऐतिहासिक दिन जब 120 वीर अहीर जवानों ने चीन के 1300 जवानों के छक्के छुड़ा दिए थे उन वीर शहीदों की बहादुरी व् शहादत को शत् शत् नमन।
जय हिन्द जय भारत 🙏🏻🇮🇳
#यादव_शौर्य_दिवस
हेलो, मैं नौवीं फेल…
ना, बिल्कुल मत चौंकिए। मुझे कोई एतराज़ नहीं है। क्योंकि ये आपका ग़ुस्सा नहीं है। उपहास नहीं है। तंज नहीं है। ये व��� तमग़ा है, प्यार है जो आपने मुझे दिया है।
शायद आप मुझसे कभी नहीं मिले। मेरे काम को क़रीब से नहीं देखा। मुझे ठीक से नहीं जाना। लेकिन फिर भी जाने-अनजाने में सही, किसी की बातों में आकर, आप मुझे जिस नाम से जानते हैं, वही मेरे लिए उपलब्धि है।
आप यक़ीन करेंगे, जब से होश सम्भाला है। अपने पिता को, माँ को, दीदी को…सबको लड़ता हुआ देखा है। एक समय पापा देश के सबसे मज़बूत नेता थे। पटना से दिल्ली तक उनकी चलती थी। सबसे बड़े सोशलिस्ट लीडर थे। आज भी हैं।
लेकिन एक समय ऐसा भी आया जब हमारा परिवार अकेला पड़ा। पार्टी के कई लोग साथ छोड़ के गए। पापा जेल गए। माँ सीएम बनी। उन्हें अनपढ़ कहकर चिढ़ाया गया। अंगूठा छाप मुख्यमंत्री कहा। तरह-तरह की बात��ं की। मैं सब देखता था, अख़बारों में, कभी टीवी में। सब मेरे परिवार के ख़िलाफ़ थे।
लेकिन कोई पीछे नहीं हटा। पापा जेल में रहे लेकिन टूटे नहीं। बीमार हुए लेकिन झुके नहीं। कुछ लोग पूछते हैं क्या किया, मुझे बिहार के सात बड़े विश्वविद्यालय नज़र आते हैं। पंद्रह ज़िले नज़र आते हैं। सामाजिक न्याय का धरा नज़र आता है।
जब उन्हें गद्दी मिली। बिहार सबसे पीछे था। दंगे हो रहे थे, जातीय नरसंहार हो रहा था। दल��तों को मारा जा रहा था। एक तरफ़ पलायन था तो दूसरी तरफ़ दमन। लोकतंत्र स्थापित था लेकिन सामन्तवाद की जड़ें जम चुकी थी। तो पापा ने उसे जड़ सहित काट दिया। पापा दोषी हो गए। मीडिया, ब्यूरोक्रेसी, सरकारें सब ख़िलाफ़ हो गई।
ये सब बताने में कई दिन बीत जाएंगे। लेकिन आप सुनेंगे कहाँ, आपने तो पहले ही जंगल राज का तमग़ा दे दिया है। यक़ीन मानिए, मेरे लिए या मेरे परिवार के लिए आपके व्यक्त ��िचार मुझे दुखी नहीं करते। मैं मुस्कुराता हूँ। अपना काम करता हूँ।
आपने मेरी बेटी की तस्वीर देखी होगी। कात्यायनी नाम रखा है। तब मेरी पत्नी पेट से थी। सीबीआई वाले आए थे। पंद्रह घंटे बैठाया। पूछताछ की। हमनें सहयोग किया। कहीं संशय नहीं, माँ के साथ बेटी भी डटी रही। ये नहीं होना था। उनलोगों ने किया। कोई बात नहीं।
जब भी सज़ा मिली क़ुबूल किया। फर्जी केस में फँसाया, खड़े रहे, लड़ते रहे। हर फ़ैसलें क��� स्वीकार किया। मैं आज भी चार्जशीटेड हूँ। ज़मीन के एक फर्जी केस में, तब मैं 12 साल का था।
हाँ, तब मैं क्रिकेट खेलता था। दिल्ली के लिए खेला। कप्तानी की। फर्स्ट क्लास भी खेला। इन सब के बीच मेरी पढ़ाई छूटी। मैंने सारा ध्यान क्रिकेट पर लगाया। मेरी उम्र के ज़्यादातर क्रिकेटर यही कर रहे थे… आप देख आइए। कोई मुश्किल से आपको ग्रेजुएट मिलेगा। लेकिन ये मसला है ही नहीं। ��ैं कोई स्पष्टीकरण नहीं देना चाहता, मैं चाहता तो दुनिया की बेशक़ीमती डिग्रियाँ मेरे चौखट पर रखी होती।
मैंने ठुकरा दिया। ये जानते हुए कि आप मेरा उपहास करेंगे। मैं ख़ामोश था। लेकिन मैं ये भी चाहता हूँ कि आप मेरा उपहास करें। मुझे चुनौती दे। मेरे काम पर सवाल उठाए, मुझे कटघरे में खड़ा करे। अगर मैं आर्थिक न्याय के वादे से मुकर जाऊँ, माइक लगाकर मेरा विरोध कीजिए।
मैं तैयार हूँ। मैंने 10 लाख नौकरियों का वादा किया, समय से पहले पूरा करूँगा। जातीय जनगणना की उम्मीद दी, आर्थिक डाटा जारी कर के आरक्षण के स्लॉट में बदलाव कर दिया।
मुझे अस्पताल अच्छे नहीं लगे, हालत नाज़ुक थी। मैंने ख़ुद से दौरा किया, मिशन 60 लागू किया। अब सब ठीक है।
मैं चाहता हूँ आप मुझे ट्रॉल करे। शिक्षा पर, स्वास्थ्य पर, नौकरी पर। मेरे घर का दरवाज़ा खुला होता है। जनता दरबार लगता है। सबकी शिकायत सुनी जाती है। तत्काल कार्रवाई होती है।
यहाँ कोई भेदभाव नहीं है। कोई नफ़रत नहीं। सब बराबर हैं। जितनी बड़ी लेगेसी है, जितना बड़ा साम्राज्य है। जितनी बड़ी सियासत है, उससे कई ज़्यादा बड़ी सेवा है, समर्पण है, भरोसा है।
आपने मेरे आंदोलन देखें है। सड़क पर संघर्ष देखा है। जब गांधी मैदान में लाठियाँ चली, आप सब साथ थे। जब सदन में विधायकों को पीटा गया, आप संबल देने आए।
तब मैंने एक दिन में 16 रैलियाँ की। मैंने हाथ बढ़ाया, आपने साथ दिया। मैंने झोली फैलाई, आपने 80 सीटें डाल दी। तो ये शासन आपका है। ये सत्ता आपकी है। ये कुर्सी आपकी है।
आपको जब भी मौक़ा मिले, आ जाइए। एक हांक लगाइए। मुझे आवाज़ दीजिए।नौवीं फेल बाहर आएगा। एक पैर पर खड़ा रहेगा।
आपके लिए। बिहार के लिए। हमेशा।
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