संत्री पर सिर्फ आरोप था....
मंत्री क्या सिद्द कर रहे है.....
संत्री को तो कोई भी मंत्री बर्खास्त करवा सकता है सवाल यह की लेकिन मंत्री को कोन बर्खास्त करेगा...
राजस्थान के सहकारिता मंत्री गौतम कुमार दक ने 3 मिनट में दीं 17 गालियां…
ऑडियो भी है लेकिन में सभ्य हूं ��ेयर नही करूंगा।
रेड कारपेट देखकर जोधपुर ग्रामीण पुलिस श्रीमान SP साहिबा ने अपने कदम रोक लिए साइड से गई और चौकी को साइड में कर दिया जमीन पर खड़े होकर सलामी ली
अंग्रेजी व्यवस्था दूर तो होगी लेकिन थोड़ा वक्त लगेगा बदलाव में....
@PoliceRajasthan@JdprRuralPolice
खाकी पहनने वाला कांस्टेबल सिर्फ एक कर्मचारी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की सबसे मजबूत नींव है।
त्योहार हो या आपदा, रात हो या कड़ाके की ठंड — जब पूरा समाज अपने परिवार के साथ होता है, तब कांस्टेबल अपने परिवार से दूर, दूसरों की सुरक्षा में खड़ा होता है।
लेकिन सबसे बड़ा अन्याय वेतन और पदोन्नति में हो रहा है।
ग्��ाम सेवक, पटवारी और कृषि पर्यवेक्षक जैसे पद, जिनकी भर्ती 2400 ग्रेड पे पर होती है, उन्हें 9 वर्ष की सेवा के बाद प्रथम ACP में 3600 ग्रेड पे दिया जा रहा है।
वहीं दूसरी ओर, कांस्टेबल जो 24 घंटे कानून-व्यवस्था संभालता है, अपराधियों से सीधे भिड़ता है, उसे इस समान अधिकार से वंचित रखा गया है।
क्या ��ाकी पहनना उसकी गलती है?
क्या कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी सजा है?
और हाल ही में मेस भत्ते में मात्र ₹2.5 की डाइट वृद्धि करके मानो जले पर नमक छिड़कने का काम किया गया है।
जिस जवान की ड्यूटी 12–16 घंटे तक चलती है, उसके भोजन और सम्मान के साथ यह मज़ाक आखिर कब तक चलेगा?
का कांस्टेबल विशेषाधिकार नहीं, सिर्फ समानता और न्याय मांग रहा है।
क्योंकि मजबूत कानून-व्यवस्था वही होती है, जहां सबसे निचले स्तर का जवान भी मजबूत और सम्मानित हो।
अब समय आ गया है कि इस अन्याय को समाप्त किया जाए और कांस्टेबल को उसका हक दिया जाए।
@BhajanlalBjp (माननीय मुख्यमंत्री, )
@RajGovOfficial
@DIPRRajasthan
@PoliceRajasthan
@BJP4Rajasthan
#JusticeForConstables #RajasthanPolice #Khaki #PoliceReforms #EqualRights
राजस्थान पुलिस की न्यायोचित मांगें—
✅ कांस्टेबल भर्ती: ग्रेजुएशन + कम्प्यूटर सर्टिफिकेट अनिवार्य
✅ प्रथम ACP: GP 3600 (पटवारी/ग्राम सेवक की तर्ज पर)
✅ DPC से टाइम-स्केल पदोन्नति लागू
✅ आर्म्ड पुलिस कोर व अन्य राज्यों की तर्ज पर ASI पद का विलोप
#RajasthanPolice#Budget2026_27
खजूर
1. ऊर्जा का बेहतरीन स्रोत
खजूर में प्राकृतिक शुगर ग्लूकोज़, फ्रक्टोज़ होती है, जो तुरंत ऊर्जा देती है।
इसे सुबह या वर्कआउट के बाद खाने से थकान दूर होती है।
2. पाचन शक्ति को मजबूत करता है
इसमें फाइबर की मात्रा ज़्यादा होती है, जो कब्ज़ से राहत देता है और पाचन तंत्र को ठीक रखता है।
3. खून की कमी एनीमिया में फायदेमंद
खजूर आयरन से भरपूर होता है। नियमित सेवन से हीमोग्लोबिन बढ़ता है।
4. हड्डियों को मजबूत करता है
खजूर में कैल्शियम, मैग्नीशियम और फॉस्फोरस मौजूद होते हैं, जो हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाते हैं।
5. दिल की सेहत के लिए अच्छा
इसमें मौजूद पोटैशियम और कम सोडियम दिल और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखते हैं।
6. इम्युनिटी को बढ़ाता है
खजूर में विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो शरीर की र���ग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं।
7. दिमाग और नसों के लिए फायदेमंद
खजूर में विटामिन-B और अन्य पोषक तत्व होते हैं जो दिमाग की कार्यक्षमता और मूड बेहतर करते हैं।
8. त्वचा और बालों के लिए लाभकारी
इसमें मौजूद विटामिन C और D त्वचा को ग्लो देते हैं और बालों को मजबूत बनाते हैं।
ज्यादा मीठा खाने वालों के लिए ये एक बेहतरीन विकल्प है।
पीह ग्राम पंचायत मुख्यालय, परबतसर पर स्थित डॉ. बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर सर्किल पर लगी हुई बाबासाहेब की प्रतिमा को रात्रि में किसी असामाजिक तत्व द्वारा खंडित किया जाना अत्यंत निंदनीय एवं दुर्भाग्यपूर्ण है।
ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए
पशु परिचर पिंकी मीणा की सेवाएं समाप्त 🧐
संस्था में साफ सफ़ाई नहीं करने व पशुधन निरीक्षक श्री शिवराज मीणा के साथ मारपीट करने के मामले में …..
इसलिए उन सभी लोगों से निवेदन है जो अपने आप को ज्यादा ही बुद्धिमान समझते हैं वो लोग चतुर्थ श्रेणी में सोच समझ के ज्वॉइन करें
क्योंकि आपको ऑफिस में काम तो करना ही पड़ेगा अगर नहीं कर सकते हो तो फिर जिनको इस पद की बहुत ज्यादा जरूरत है उनके लिए छोड़ देना चाहिए 🙏
I genuinely feel bad for Pratika Rawal.
- Scored 308 runs in the WC with an avg of 51.33.
- Played a brilliant 122-run knock against New Zealand.
- Was the fourth-highest run-getter in the tournament.
- Got injured just before the semi-final and missed out.
- Didn’t receive a medal since she wasn’t in the final 15.
- As per ICC regulations, only players in the final squad receive winner’s medals
Honestly, that rule sucks.
24 फरवरी 1988, मुंबई का आज़ाद मैदान। दोपहर की धूप ज़रा तेज़ थी, भीड़ में शोर था, और मैदान के बीच दो लड़के इतिहास लिख रहे थे। एक चौदह साल का, दूसरा सोलह का। बॉलर आते रहे, गेंदें गायब होती रहीं, और स्कोरबोर्ड मानो थककर रुक जाना चाहता था।
664 !!!! एक विश्व रिकॉर्ड बन चुका था।
पूरा मैदान बस दो नाम पुकार रहा था! सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली। लेकिन मैदान की रेखा के उस पार, एक और लड़का था जो पैड पहने, हेलमेट लगाए, अपनी बारी का इंतज़ार करता हुआ। वो देख रहा था, कैसे इतिहास बन रहा है, और कैसे उसका नाम उसमें नहीं है। उस दिन वो नहीं खेल पाया, और शायद ज़िंदगी ने वहीं तय कर लिया था कि ये लड़का हमेशा थोड़ा इंतज़ार करेगा।
वो बड़ा हुआ शिवाजी पार्क की मिट्टी में, जहाँ क्रिकेट ही धर्म था और बल्ला ही दीक्षा। रामाकांत ��चरेकर की सख़्त निगाहों के नीचे उसने वही सीखा जो बाकी चूके थे और वो था अटल धैर्य!
आगे चलकर उस बालक ने पहले ही मैच में मुंबई के लिए 260 रन ठोके। दो दशक तक मैदान उसका घर रहा। 11,000 से ज़्यादा रन, 30 शतक, औसत करीब 48 किन्तु.....
हर साल वो बस इंतज��र करता रहा। हर साल लोग कहते, “अगला वही है, इंडिया की जर्सी उसी को मिलेगी।” पर वो फोन कभी नहीं आया। दूसरे बुलाए गए, उसके सामने न जाने कितने आये, हीरो बने और चले गए। उसने बस खेलना जारी रखा।
ना शिकायत, ना अफ़सोस।वो सिर्फ मुस्कुराता रहा और इंतजार करता रहा। आख़िरकार साल 2014 में उसने अपना बल्ला रख दिया, पर खेल से नहीं जा पाया।
अब वो कोच बन चुका था। पहले मुंबई का, फिर आंध्र का, फिर राजस्थान रॉयल्स का। वो ��्ट्रोक नहीं सुधारता था, सोच सुधारता था।
हर खिलाड़ी को सिखाता ,“दुनिया भले भूल जाए, तुम तैयार रहो।”
फिर 2023 में, किस्मत ने आख़िरकार दस्तक दी। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कमान उसके हाथ में आई। कई लोगों ने तब यही कहा था “जिसने इंडिया के लिए नहीं खेला, वो कोच कैसे बनेगा?”
वो मुस्कराया, वही पुरानी मुस्क��न , जिसमें जवाब नहीं, सुकून था।
2025 वर्ल्ड कप शुरू हुआ तो हालात अच्छे नहीं थे। मैच हारे, कैच छूटे, भरोसा डगमगाया। वो चुपचाप टीम के बीच बैठा और बस एक लाइन कही, “हम अंत अच्छा करते हैं… क्योंकि हम ऐसे ही हैं।” फिर जो हुआ, वो जादू था। टीम बदली नहीं, बल्कि जागी।
स्मृति की टाइमिंग, हरमनप्रीत का जोश, दीप्ति की स्थिरता, शफाली की बेख़ौफ़ी सब एक अमोल धागे में बंध गए। वो धागा था उनके कोच के विश्वास का। और जब भ��रत ने फाइनल में दक्षिण अफ्रीका को हराया, तो पूरा स्टेडियम गूंज उठा।
कैमरे खिलाड़ियों के पीछे दौड़े, पर अगर आपने ध्यान से देखा होता तो डगआउट के किनारे एक शख़्स खड़ा था, बाँहें मोड़े, आँखें भीगीं, होंठों पर हल्की सी मुस्कान। उसने ज़िंदगी भर इंतज़ार किया, शायद खेलन��� के लिए नहीं पर यकीन दिलाने के लिए। उसने कभी नीली जर्सी नहीं पहनी थी पर उस नीली जर्सी को आज फिर इज़्ज़त दिलाई।
उसका नाम?
अमोल मजूमदार।
वो लड़का जो हमेशा इंतज़ार करता रहा और वो आदमी, जिसने आख़िरकार वक़्त को इंतज़ार करवाया।
Kane Williamson has called time on his 93-game T20 International career.
Thank you for everything you gave the team in the shortest format 🖤🤍
Full story at https://t.co/itPtNwMPLK
📸 @PhotosportNZ
बोर्ड ने आज निम्न लिखित एजेंडा का अनुमोदन किया;
1. NHM के तीन ट्रेड्स CHO, Women Health Worker, Data Entry Opr के प्री डीवी रिजल्ट्स।
2. वीडीओ 2021 के लिए डीवी लिस्ट।
NHM एग्जाम्स में सभी सफल हुए कैंडिडेट्स को बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं।