जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ @Shivsharan4BJP जी!
जीवन में कुछ लोग पद से नहीं, अपनी उपस्थिति से बड़े लगते हैं। कुछ लोग भाषणों से नहीं, अपने आचरण से प्रेरणा देते हैं। और कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनसे मिलकर संगठन, सेवा और समर्पण जैसे शब्द किताबों के नहीं, जीवन के लगने लगते हैं।
करीब 13 साल पहले गुलाब बाग कार्यालय के उस छोटे से कमरे में आपसे पहली मुलाकात हुई थी। वह समय आज भी आंखों के सामने है। न बड़ा कार्यालय था, न बड़े संसाधन थे, न सत्ता का कोई वैभव था। एक साधारण सा कमरा, सीमित व्यवस्था और संघर्षों से भरा संगठनात्मक वातावरण था।
लेकिन उसी छोटे से कमरे में एक चेहरा ऐसा था, जो व्यवस्था से बड़ा दिखाई देता था।
रिसेप्शन पर बैठना देखने में सामान्य काम लग सकता है, लेकिन आपने उसे भी साधना बना दिया था। जो भी कार्यकर्ता आता, जो भी अतिथि आता, जो भी व्यक्ति पहली बार कार्यालय में प्रवेश करता-उसे आपकी मुस्कान, आपकी सजगता और आपके अपनत्व में संगठन की आत्मा का पहला परिचय मिलता था।
आप केवल आने-जाने वालों का नाम नहीं पूछते थे, आप उनमें विश्वास जगाते थे। आप केवल बैठकर व्यवस्था नहीं संभालते थे, आप माहौल को गरिमा देते थे। आपसे मिलकर लगता था कि यह संगठन केवल राजनीति का केंद्र नहीं, बल्कि अच्छे लोगों की तपस्या से खड़ा हुआ परिवार है।
उन दिनों जलपान भी कितना सहज था-अखबार के बंडलों पर भूंजा, लाई या नमकीन रख दिया जाता था। लेकिन आश्चर्य यह था कि साधन छोटे थे, फिर भी मन छोटे नहीं थे। व्यवस्था कम थी, लेकिन उत्साह कम नहीं था। कमरे सीमित थे, लेकिन सपने विशाल थे। सत्ता दूर थी, लेकिन संकल्प बिल्कुल पास खड़ा था।
समय ने लंबी यात्रा तय की। परिस्थितियाँ बदलीं। संघर्ष से विस्तार आया। सत्ता आई, संसाधन आए, बड़े कार्यालय बने, तकनीक आई, डिजिटल मंच बने, रथ यात्राएँ निकलीं और आज चारों ओर कमल का विस्तार दिखाई देता है।
लेकिन इस पूरे परिवर्तन के बीच अगर कोई व्यक्ति अपनी मूल प्रकृति में वैसा ही रहा, तो वह हैं आप।
न पद का अहंकार, न सुविधा का आकर्षण, न समय के साथ स्वभाव में कोई भारी बदलाव। वही अनुशासन, वही समयबद्धता, वही कर्मनिष्ठा, वही शांत ऊर्जा और वही कार्यकर्ता वाला तपस्वी भाव।
आज भी आपकी दिनचर्या अपने आप में प्रेरणा है। सुबह की नियमितता, व्यायाम के प्रति प्रतिबद्धता, भोजन में संयम, कार्य में स्पष्टता और जीवन में संतुलन,ये सब केवल आदतें नहीं हैं, ये आपके व्यक्तित्व की रीढ़ हैं। आज के युवाओं को भी आपसे यह सीख मिल सकती है कि संगठन के लिए काम करने वाला व्यक्ति पहले स्वयं को अनुशासित करता है।
आपकी एक और विशेषता हमेशा प्रभावित करती है-अध्ययन के प्रति आपका आग्रह। हर दिन कुछ पढ़ना, समझना, सीखना और फिर उसे व्यवहार में उतारना। अनुभव और अध्ययन जब साथ मिलते हैं, तभी व्यक्ति केवल कार्यकर्ता नहीं रहता, वह मार्गदर्शक बन जाता है।
आपको देखकर बार-बार यही लगता है कि किसी भी बड़े संगठन की असली नींव वे लोग होते हैं जिनका नाम मंचों से कम लिया जाता है, लेकिन जिनकी निष्ठा के बिना मंच खड़ा ही नहीं हो सकता। ऐसे लोग शोर नहीं करते, पर इतिहास के पीछे उनकी मौन तपस्या खड़ी रहती है।
संगठन की इस यात्रा में कई ऐसे दधीचि रहे जिन्होंने अपना जीवन, समय, सुख और सुविधा सब कुछ अर्पित कर दिया। कुछ अब हमारे बीच नहीं हैं, और कुछ आज भी वैसी ही सरलता, स्थिरता और तप के साथ हमें दिशा दे रहे हैं। आप उन्हीं प्रेरक व्यक्तित्वों में से एक हैं।
@Shivsharan4BJP जी, आपके नाम में ‘शिव’ है और कर्म में सचमुच ‘शरण’ का भाव दिखाई देता है। आपके भीतर संयम है, सेवा है, अध्ययन है, अनुशासन है और सबसे बढ़कर संगठन के प्रति अटूट निष्ठा है।
आपका जन्मदिवस केवल शुभकामना देने का अवसर नहीं है। यह उस जीवन-शैली को प्रणाम करने का अवसर है, जो बताती है कि सच्चा कार्यकर्ता चमक में नहीं बदलता, वह अपने चरित्र से समय की दिशा बदल देता है।
महादेव से प्रार्थना है कि आप सदैव स्वस्थ रहें, दीर्घायु हों और अपनी इसी शांत, संयमित और प्रेरणादायी उपस्थिति से हम सबका मार्गदर्शन करते रहें।
पुनः जन्मदिवस की अनंत शुभकामनाएँ!
भारत तरक्की कर रहा है..!
आज भुसावल से गोवा ट्रेन से यात्रा करते समय एक अनुभव हुआ..!
अचानक, मेरे दोस्त के 2 साल के बेटे को बुखार आ गया। हमारे पास कोई दवा नहीं थी, और हमारी मंज़िल, मडगांव, पहुँचने में अभी भी 7 घंटे बाकी थे। हमने सोचा कि अगले स्टेशन पर उतरकर डॉक्टर से सलाह लेंगे और फिर सड़क मार्ग से यात्रा जारी रखेंगे..!
मैंने यूँ ही ट्रेन में सामान बेचने वाले एक वेंडर से कहा..!
"हमें कुछ दवा चाहिए। क्या आप अगले स्टेशन पर इसका इंतज़ाम कर सकते हैं ? मैं आपकी मेहनत के लिए ₹500 दूँगा"
वेंडर ने जवाब दिया..!
"इसकी कोई ज़रूरत नहीं है। TTE (टिकट परीक्षक) से मिलिए; आपकी समस्या हल हो जाएगी"
हम तुरंत TTE से मिले..!
मैंने अपनी पूरी ज़िंदगी में किसी सरकारी कर्मचारी से इतनी तत्परता का अनुभव नहीं किया था..!
उन्होंने अपना काम रोका, तुरंत फ़ोन किया, हमारी सीट नंबर और बीमारी की स्थिति नोट की, और हमें अपनी सीट पर वापस जाने के लिए कहा..!*
सच कहूँ तो, हमें ज़्यादा उम्मीद नहीं थी। हमने पहले ही तय कर लिया था कि अगर ज़रूरत पड़ी तो हम अगले स्टेशन पर उतरकर बच्चे को डॉक्टर के पास ले जाएँगे..!
हमने सोचा था कि शायद कोई कागज़ में लिपटी कुछ गोलियाँ ही लाएगा..!
लेकिन ठीक अगले स्टेशन पर, एक डॉक्टर अपने असिस्टेंट के साथ हमारी सीट पर आए। TTE भी वहाँ मौजूद थे। बच्चे की जाँच करने के बाद, डॉक्टर ने तुरंत अपने असिस्टेंट को हमें सिरप की कुछ बोतलें देने का निर्देश दिया। उन्होंने दवा देने का तरीका समझाया और फिर TTE से पैंट्री से थोड़ा नमक मँगवाने को कहा..!
TTE ने तुरंत एक और फ़ोन कॉल किया। डॉक्टर ने हमें बच्चे के माथे पर नमक के पानी में भीगा हुआ कपड़ा रखने की सलाह दी और चले गए..!
जब हमने आवाज़ देकर पूछा कि हमें कितने पैसे देने हैं, तो हमें बताया गया कि यह सब पूरी तरह से मुफ़्त था..!
हम अभी भी हैरान और चकित थे कि जब तक हम अपनी सीट पर वापस पहुँचे, पैंट्री का एक कर्मचारी नमक लेकर आ गया..!
मेरा देश सचमुच बेहतर के लिए बदल रहा है..!
इतनी सारी आलोचनाओं का हम क्या करें..!
क्या उन्हें पेट्रोल के साथ पी जाएँ..!
मीडिया या अख़बारों में अक्सर ऐसे सकारात्मक बदलावों को उजागर नहीं किया जाता है..!
बदलाव हो रहा है। हमें भी इन अनुभवों को अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ साझा करना चाहिए..!
इसमें समय लगेगा, लेकिन हम उस बदलाव को देख और महसूस कर रहे हैं जो हो रहा है..!
राष्ट्रहित सर्वोपरि..
🪷 🇮🇳 🙏 🇮🇳 🪷🇮🇳
कहानी - 42
योध्दाओं की रक्षक: सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन की प्रेरणादायक गाथा
भारतीय सशस्त्र बलों के 75 वर्षों के गौरवशाली इतिहास में, एक ऐसी कुर्सी थी जिस पर कभी कोई महिला नहीं बैठी थी। यह कुर्सी थी—सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा (Armed Forces Medical Services - AFMS) के प्रमुख की। लेकिन, इतिहास तब बदला जब सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन ने इस जिम्मेदारी को संभाला।
यह सफलता कोई संयोग नहीं, बल्कि चार दशकों (40 वर्षों से अधिक) की अटूट तपस्या का परिणाम है। एक सैन्य डॉक्टर के रूप में अपने करियर की शुरुआत से लेकर, चुनौतीपूर्ण सैन्य अस्पतालों में सेवा देने तक, आरती सरीन ने हर कदम पर यह साबित किया कि नेतृत्व केवल रैंक से नहीं, बल्कि सेवा के प्रति समर्पण से आता है। उनका सफर उन रास्तों से होकर गुजरा है जहाँ बहुत कम लोग चल पाते हैं। उन्होंने न केवल चिकित्सा के क्षेत्र में अपनी दक्षता दिखाई, बल्कि सैन्य अनुशासन और नेतृत्व के उच्चतम मानकों को भी परिभाषित किया।
आज, उनके कंधों पर लाखों लोगों की जिम्मेदारी है। वे केवल एक अधिकारी नहीं हैं, बल्कि वे उस सुरक्षा कवच का हिस्सा हैं जो हमारे सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों की सेहत की रक्षा करता है। थल सेना, नौसेना और वायु सेना-तीनों अंगों के चिकित्सा तंत्र का नेतृत्व करना एक विशाल और चुनौतीपूर्ण कार्य है, जिसे उन्होंने बड़ी कुशलता से अपने हाथों में लिया है।
उनकी इस अद्वितीय निष्ठा और अनुकरणीय सेवा के लिए, राष्ट्र ने उन्हें परम विशिष्ट सेवा मेडल (PVSM) से सम्मानित किया है। यह पदक केवल एक धातु का टुकड़ा नहीं है, बल्कि उस 'ग्लास सीलिंग' को तोड़ने की मान्यता है जिसे दशकों तक कोई छू भी नहीं पाया था। यह उनके नेतृत्व का प्रमाण है जिसने न केवल चिकित्सा प्रणाली को मजबूत किया, बल्कि भारतीय सेना के भीतर समावेशिता (inclusivity) की एक नई मिसाल कायम की।
सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन की कहानी आज भारत की उन लाखों बेटियों के लिए एक मशाल की तरह है जो बड़े सपने देखने की हिम्मत रखती हैं। उन्होंने दिखाया कि योग्यता, लिंग की बाधाओं से कहीं ऊपर है। उनकी सफलता ने उन गलियारों के दरवाजे खोल दिए हैं, जहाँ कभी महिलाओं के प्रवेश की कल्पना करना भी कठिन था।
सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन का सफर हमें याद दिलाता है कि जब दृढ़ संकल्प, सेवा की भावना और कठोर परिश्रम मिलते हैं, तो इतिहास खुद-ब-खुद लिखा जाता है। वे न केवल सैनिकों का इलाज करती हैं, बल्कि वे आने वाली पीढ़ियों के सपनों को भी नई दिशा और उम्मीद देती हैं।
𝐈𝐧𝐝𝐢𝐚’𝐬 𝐛𝐢𝐠𝐠𝐞𝐬𝐭 𝐞𝐱𝐩𝐨𝐫𝐭 𝐬𝐡𝐨𝐮𝐥𝐝 𝐧𝐞𝐯𝐞𝐫 𝐡𝐚𝐯𝐞 𝐛𝐞𝐞𝐧 𝐢𝐭𝐬 𝐛𝐫𝐢𝐠𝐡𝐭𝐞𝐬𝐭 𝐦𝐢𝐧𝐝𝐬. 🧠
For decades, India’s top researchers and innovators built the future for other nations.
Today, under PM Modi’s leadership, the focus is on bringing that talent home and building a world-class innovation ecosystem.
🔹 PM Research Chair Scheme to attract 120 distinguished researchers in 5 years
🔹 Research across 14 national priority sectors, including AI, semiconductors and quantum computing
🔹 ₹1 lakh crore RDI Scheme to accelerate research and deep-tech innovation
🔹 India ranks 3rd globally in scientific research output and 6th in patent grants
🔹 1.7 lakh+ registered startups, including 6,000 deep-tech ventures
From brain drain to brain gain, India is laying the foundation for technological leadership and an innovation-driven future.
👉 Watch how India is creating opportunities for global Indian talent to return, empowering young researchers, and building India into a global innovation powerhouse. 🏭
Prices of the 19 KG Commercial cylinder have been slashed by Rs 183.50 from today. A 19 Kg cylinder will cost Rs 2930 in Delhi from today. Prices of 5 kg FTL have also been reduced by Rs 13 from today. 5 kg FTL will cost Rs 808.50 in Delhi: Sources
सेशेल्समधील व्हिक्टोरिया इथले प्रमुख हिंदू मंदिर अरुलमिगु नवशक्ती विनायगार इथे प्रार्थना केली. भगवान श्री गणेश सर्वांना बुद्धी, शक्ती आणि समृद्धी देवो हीच कामना.
Today, we mark 11 years since the Digital India initiative was launched. This initiative has redefined governance, empowered citizens and accelerated all-round development. It has touched every aspect of life. From seamless digital payments and direct benefit transfers reaching beneficiaries with transparency to the expanding digital public infrastructure, technology has become a powerful instrument for furthering ‘Ease of Living.’
Digital India has taken the wave of innovation to all parts of India, especially villages, Tier-2 and Tier-3 cities. Young entrepreneurs, StartUps and innovators from every corner of the country are creating solutions to the pressing challenges that our planet faces. This initiative has strengthened education, healthcare, agriculture, commerce and public service delivery, making governance more transparent, efficient and accessible.
Our strides in the digital world have ensured that India is making rapid progress in emerging technologies such as AI, semiconductors, quantum computing and more. This too will open new avenues for growth and opportunity. Our focus will remain on creating a future where technology serves humanity, empowers every citizen and drives sustainable development.
#11YearsOfDigitalIndia
डिजिटल इंडिया विकसित और आत्मनिर्भर भारत की सशक्त नींव है। बीते 11 वर्षों में इसने गरीबों और वंचितों के सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ ही देशवासियों के जीवन को आसान बनाया है। ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क के विस्तार से लेकर डिजिटल ट्रांजैक्शन तक इस अभियान की अभूतपूर्व सफलता ने दुनियाभर का ध्यान भारत की ओर खींचा है।
#11YearsOfDigitalIndia
डिजिटल इंडिया के 11 वर्षों की सफलता से भारतवर्ष को दुनियाभर में एक नई पहचान मिली है। इससे इनोवेशन और टेक्नोलॉजी को अपनाकर देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की देशवासियों की संकल्पशक्ति का पता चलता है।
विज्ञानसारथिर्यस्तु मनःप्रग्रहवान्नरः।
सोऽध्वनः पारमाप्नोति तद्विष्णोः परमं पदम्॥
#11YearsOfDigitalIndia
🚨 FACT CHECK: Viral reports claiming the Govt called its E20 ethanol programme an "experiment" in the Supreme Court are FALSE.
The Attorney General’s office clarified that no such submission was made. The hearing was actually about consolidating multiple High Court petitions at the SC to ensure consistent legal rulings and keep the 20% blending supply chain undisrupted. Status quo is maintained for 2025-26.
जब हमारे संकल्प, विचार और मन की भावनाएं एक होती हैं, तब हर कार्य सफल होता है। आइए, एकजुटता के साथ आगे बढ़ें और मिलकर भारतवर्ष के हर लक्ष्य को हासिल करें।
समानो मन्त्रः समितिः समानी समानं मनः सह चित्तमेषाम्।
समानं मन्त्रमभि मन्त्रये वः समानेन वो हविषा जुहोमि॥