@RajSampark@Rajsampark पर भाई साब अब तक 2 बार शिकायत दे चुका कोई निस्तारण नहीं होता है । अभी भी कुछ दिन पहले मैने मेरी gmail id [email protected] से एक शिकायत दर्ज करवाई थी उस पर आज तक इस पोर्टल के माध्यम से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है । फिर इस व्हाट्सप्प नंबर का क्या करे साहब।
@RajSampark समाधान तो होता नहीं है। गरीब लोगों को एक संपर्क नाम की लॉलीपॉप कब तक चुसवाते रहोगे। कृपया आप इस तरह का काम बंद करो और लोगों को न्याय दिलवाना शुरू करो। जब तक परिवादी की समस्या का हल ना हो तब तक ��िकायत बंद ना की जाए। ये दो बार असंतुष्टि वाला भद्दा मजाक बंद करो।
पत्रकार महोदय, कुछ तो शर्म करो,
जी हजूरी छोड़ो, अपना कर्म करो।
देश समस्याओं से देखो जूझ रहा,
लोगों को कुछ भी नहीं सूझ रहा।
रोजगार शिक्षा और महंगाई ,
समस्या जैसे आसमां छू आई।
हर तरफ देखो, पसरी लाचारी,
त्राहिमाम करती जनता बेचारी।
तुम्हारा तो धर्म ���ा सच दिखाना,
कर्म था वाजिब सवाल उठाना।
जनमानस की तकलीफ बताना,
सच्चाई लोगों तक था पहुंचाना।
तुम तो सत्ता से ऐसे डरने लगे,
सरकार का ही भजन करने लगे।
शान में उनकी कसीदे पढ़ते हो
उनके लिए लड़ते औ झगड़ते हो।
तुम्हे गलत कुछ लगता ही नहीं,
जो नेता जी कह दें, वो ही सही।
��ानून कैसे भी बनाए जा रहे,
तुम अभिनंदन गीत गाए जा रहे।
हर फैसले को सही ठहराते हो,
नुकसान को भी नफा बताते हो।
साहिब का गुण गाकर सुनाते हो,
लोगों को तुम तो बस भरमाते हो।
खबर बताते नहीं, तुम बनाते हो,
फरमान सरकार का सुनाते हो।
प्रचार में ऐसे तुम रम जाते हो,
पार्टी प्रवक्ता खुद बन जाते हो।
सरकार की दलाली में सब भूले,
सत्ता के झूले में तुम तो ऐसे झूले।
नेताओं की जूतियां तक उठाते हो,
जूठन भी उनकी शौक से खाते हो।
तुम्हें तनिक भी लाज ना आई,
अपनी रोज़ी की गरिमा बिसराई।
अब भी समय है, थोड़ा मनन करो,
पत्रकार महोदय, कुछ तो शर्म करो,
जी हजूरी छोड़ो, अपना कर्म करो।
~ हनुमान गोपे