दयनीय:
आर्थिक मंदी का सामना व्यापारी ओर देश दोनों ही कर रहे हैं अब भगवान पर भी मंदी का असर दिखेगा क्यूंकि अब तो राम मंदिर की तर्ज पर अब लगभग हर एक बड़े मन्दिरों के काले कारनामे सामने आने लगे हैं।
अभी हाल में माँ वैष्णो देवी मंदिर में 550 करोड़ की चाँदी का केस भी सामने आगया है।
इसे एक विडंबना ही कहेंगे,Statue of Unity बनाने में 2989 करोड़ रुपये खर्च हुए जिसमें केवल 1347 करोड़ मूर्ति निर्माण में हुए
ओर मंगलयान में 450 करोड़, चंद्रयान-1 में 386 करोड़, चंद्रयान -2 में 978 करोड़, चंद्रयान-3 में 615 करोड़।
इन सभी मिशन का टोटल 2429 करोड़
ज्ञान कहां मिला।
सरकारों का वही चरित्र है जो अंग्रेजों का हुआ करता था वो राजा उसी को बनाते थे या बनाना चाहते थे जो उनकी हाँ में हां मिलाये।
वही शौक सरकारों को हो गया है प्रशासनिक अधिकारी वही बनाओ जो उनकी आवाज बने वो अपनी खुद की आवाज को बंद रखे।
उसका प्रमाण होगा Prilims का Result.
आखिर सरकार के मन में है क्या, पहले NEET का पेपर आउट हुआ फिर UPSC का पेपर इतना कठिन आया जो इतिहास बन गया,
ऐसा लगता है कि सीधा ओर सरल फंडा यही है कि मिडिल क्लास ओर General Category को उच्च पदों से दूर रखो।
अभी जो UPSC का RESULT आएगा उसमें ये बात भी CLEAR हो जाएगी।
शायद भारत इकलौता ऐसा देश ��ोगा जो स्कूल की पुस्तकों पर टैक्स लेता है।
जिस देश में स्कूल की शिक्षा को टैक्स में ले लिया जाए तो उस देश में अंधभक्त ही पैदा होंगे।
ओर जो भी इस बात को नकारता है वो स्वयं किसी की गुलामी कुबूल कर चुका है।
क्योंकि नकारने वाला राष्ट्रभक्त हो ही नहीं सकता।
नेपाल के PM ने Privet School बंद किए ओर सभी को सरकारी स्कूलों में पढ़ने का आदेश कर दिया,
यदि ये भारत में होता है तो भारत के नेता ओर उनके रिश्तेदारों को तो गुरुद्वारे के लंगर में जाना पड़ जाएगा।
इसलिए ये असंभव है।
मेरा भारत महान।
@HousebotGuy एक बहुत सुंदर गाना है, जिसे मोह.रफी साहब ने अपने सुरों से संजोया था वो याद आ गया:
चल उड��� जा रे पंछी कि अब ये देश हुआ वे दाना।
भूल जा अब वो मस्त हवा वो उड़ना डाली डाली।
लेकिन उद्योग, लघु उद्योग, निम्न स्तर के धंधे जो LPG से ही चलते हैं उन्हें बंद कर दिया तो बेरोजगारी फैलेगी इस प्रकार से तो घरों के चूल्हे किसी से भी नहीं जल ��ाएंगे, सरकार को चाहिए उद्योग चालू रखे ओर अधिक समस्या है तो 20 दिन का लॉक डाउन करदे
भारत में LPG की किल्लत वास्तविकता है जिसे सरकार हल्के में ले रही है ओर जबतक समस्याएं विकराल नहीं हो जाती उससे पहले किसी को समस्याएं ही नहीं दिखती।
कारखाने, छोटे उद्योग बंदी के कगार पर हैं, अगर ये बंद हुए तो भुखमरी आएगी, घ��ों के चूल्हे तो ��कड़ी कोयला इससे भी जलाए जा सकते हैं।
Amezon की धोखाधड़ी ये item जिसे Amezon से मंगाया था जिसकी MRP.150.00 है जिसका amezon ने मुझसे ₹167.00 मुझसे लिया है मतलब कि MRP से भी अधिक Price में product को बेचा जा रहा है साथ ही फोटो भी दे रहा हूं।
सरकार को या संबंधित विभाग को संज्ञान लेना चाहिए।
लूट का खेल: प. दीन दयाल उपाध्याय पशु विश्व विद्यालय के अंदर मेडिकल से मिलने वाली दवाएं बाहर मिलने वाली दवाओं की तुलना में तीन गुना अधिक रेट से मिलती है,
50 रूपये का IV Set अदंर से 200रूपये का दिया और वाहर कोई दुकान ये लोग होने नहीं देते। शिकायत की तो बोला ऊपर के खर्चे बहुत हैं।
एक फिल्म में अमरीशपुर एक गांव में मुफ्त में खाना ओर अनाज बटवाता है कुछ दिन बंटवाने के बाद उसका गुंडा पूछता हैं ठाकुर सब लोगों के अंगूठ��� लगवालूं।
ठाकुर कहता है अभी नहीं, अभी ओर इन्हें हराम की खाने की आदत होने दो।
यही अब भारत का होना है,अंगूठे लगने का वक्त आने वाला है।
मुबारक हो।
भारत जो विश्व की अर्थव्यवस्था में अग्रणी होना चाहता है विश्व गुरु बनना चाहता है, क्या इसी तरह? कौनसा ऐसा देश है जो अपने यहां हानिकारक उत्पाद���ं को टैक्स की लिस्ट में रखते हैं ओर जो रखते भी हैं भारत से बहुत छोटे हैं।
सरकार को चाहिए हानिकारक उत्पादों पर शुल्क ना लगाकर इन्हें बंद करे
रेलवे स्टेशन ह��� या भिंडी बाजार:
नहीं साहिब ये स्टेशन ही है बो भी भारत का ओर बो भी भारत की राजधानी दिल्ली का।
चलिए अब इसके नाम से परिचय कराते हैं तो ये है आजाद पुर रेलवे स्टेशन है जिसपर सरकार ने अवैध लोगों को अवैध निवास बनाने की छूट दे रखी है।
मेरा भारत महान, विश्वगुरु जिंदाबाद।
कथनी,करनी,संतुलन में जो फेल है उसका ��ाम जरा सोचकर बिचारीये ओर अपने मन में ही मंथन कीजियेगा किसी को कोई जवाब देने की आवश्यकता नहीं है।
कि क्या हम सभी आम जन गलत राह पर चलपड़े हैं
जिसका आभास हमें हो ही नहीं रहा है।
बिहार चुनाव में सभी पार्टियों की रणनीति ओर रूपरेखा से साफ है कि देश की जनता को गुलामी ही पसंद है ओर नेता उसके अनुरू�� ही कार्य कर रहे है।
अब बो दिन दूर नहीं जब कुछ खास पार्टियों के दिन अच्छे आयेंगे ओर जनता के दिन की तो फिर बात ही क्या कहें।