मिर्ज़ापुर में सत्ता के संरक्षण प्राप्त गुंडों ने सरेआम अहरौरा के व्यापारी नंदलाल केसरी का मार-मार कर पैर तोड़ दिया।
और प्रशासन व्यवस्था इतनी लचर, कि 24 घंटे हो जाने के बाद भी ना तो मेडिकल जांच हुई, ना ही पुलिस ने FIR दर्ज किया - जबकि बच्चे-बच्चे को उन गुंडों का नाम पता है।
उत्तर प्रदेश में अराजकता चरम पर है, कानून व्यवस्था ध्वस्त है, पर किसे पड़ी है? सरकार तो अपने मद में चूर हो कर "लॉ एंड ऑर्डर" जैसी धारणा को भूल ही चुकी है।
और 'सोने पर सुहागा' सुनिए, केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री के ज़िले में मंडल अस्पताल और मेडिकल कॉलेज, दोनों में, कुछ तकनीकी खामियों के चलते पीड़ितों को एक्स-रे करवाने भदोही जाना पड़ा।
पता नहीं जनता को किसके भरोसे डबल इंजन की सरकार ने छोड़ रखा है!