8 जनवरी,1945 उत्तरी भारत के किसानों के लिए वो ऐतिहासिक तारीख़ है जब किसान मसीहा चौधरी छोटू राम जी ने किसानो के लिए रातभर जागकर #भाखडा बाँध की फाईलों पर हस्ताक्षर किए और अगली सुबह 9 जनवरी,1945 को उनका स्वर्गवास हो गया। उन्होंने 1923 में ही भाखडा बाँध की रूप रेखा बना ली थी
@kbssidhu1961@PaulSalopek गधो को अक्ल नही आएगी
पैसे देकर लिखे हुए इतिहास को सचाई मान
क्यूँ सारे गोत्र का बेड़ा गर्क कर रहा हैं
जाकर खोजो गन्दपुत कब बने और जाट आदिकाल से है गन्दपुत 550 जातियो का समूह है
मुख्यमंत्री साहब !! ये हालत कर दी आपने हमारे युवाओं की? योग्यता से कम की नौकरी पर अप्लाई करना ला��ों युवाओं की मजबूरी बन कर रहा गया। ये हालात ��िश्चित रूप से बदलने चाहिए।
#रोजगार_मेरा_अधिकार
जननायक स्व. चौधरी देवी लाल जी को हम सब की ओर से नमन। आज उन्हें श्रद्धांजलि देने पहले उनकी समाधि पर पहुंचे उसके बाद संसद भवन परिसर में उनकी प्रतिमा पर भी उन्हें नमन किया।
ताऊ देवीलाल से हमनें दिल मे उतरना सीखा है,
डॉ अजय सिंहसे हमनें सड़कों पे चलना सीखा है,
चौटाला साहब से सीखा है हमनें काम करना,
कार्यकर्ताओं से हमनें हालात बदलना सीखा है।
काफिला बढ़ रहा है और संघर्ष ज��री है,
जो सच के साथ खड़े है उनका अहसान भारी है,
दौगुना करके दूँगा पसीने की कीमत,
आपके भविष्य की सुरक्षा मेरी जिम्मेदारी है।
दीनबंधु को घेर लिया आज मजहबी ठेकेदारों ने,
रहबरे आजम छुप गए भगवा दीवारों म��ं,
कल एक खबर छपेगी देश के अख़बारों में,
किसान मसीहा बेच दिया दिल्ली के दरबारों में ।
*कलम चला लो धरतीपुत्रों किसान क्रांति यात्रा पर मीडिया तो तुम्हे हताश करने के लिए ही है।तुम ���ो जोश भरो अपने आप मे ओर उन अपनो में जो इस किसान क्रांति का हिस्सा है ।*
*अपने अहम के खोखले ढाँचे से बाहर झांको देखो तुम्हारे किसान परिवारों के सदस्य सड़को पर भटक रहे है।* किसान की आवाज
इस बेरोजगारी की मार में एक और बड़ा इजाफा सरकार ने 1.5 लाख सैनिको और इसरो के 2500 कृषि वैज्ञानिकों को निकालने के पक्ष में हमारे देश मे अजीब विडम्बना है नेताओ के लिए भत्ते पे भत्ते देने के लिए पैसे है लेकिन जवानों और वैज्ञानिकों के लिए नही
देश बचाओ अभियान
जयहिंद,जयभारत
कैसी खुलेआम न्यायलय पर जातिगत टिप्पणी करते हुए जज को जलाने की धमकी दे रहा है पर किसी भी पार्टी ने एक शब्द नहीं बोला और न ही कोई प्रतिक्रिया हुई?
क्या यह तुष्टिकरण की पराकाष्ठा नहीं?
क्या जज को यह धमकी नही?
कि वो sc st के विरुद्ध किसी भी प्रकार का निर्णय दिए तो अंजाम भुगतने होंगे?