भाजपा के “डबल इंजन” राज में बहुजन समाज न्याय के लिए अपनी जान देने को मजबूर है।
17 अप्रैल को मुजफ्फरनगर में हिमांशु जाटव के साथ जातंकवादी द्वारा बेरहमी से मारपीट की गई और जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया गया। पीड़ित द्वारा पुलिस को सूचना देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। यह प्रशासन की संवेदनहीनता और मिलीभगत को उजागर करता है।
हिमांशु ने इंसाफ की उम��मीद में आरोपी के परिजनों से भी दो बार शिकायत की। वहाँ से निराश होने पर 17 अप्रैल की ही रात तीसरी बार आरोपी के घर पहुँचकर उसने खुद को आग लगा ली। दिल्ली के अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझने के बाद 22 अप्रैल को उसकी मृत्यु हो गई।
मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी, यह मौत नहीं, बल्कि एक सुनियोजित सामाजिक हत्या है, जिसमें दोषी केवल आरोपी ही नहीं, बल्कि वह तंत्र भी है जिसने समय पर न्याय नहीं दिया।
यह घटना अत्यंत द���खद और दंडनीय है। हम शोकसंतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं और प्रकृति से प्रार्थना करते हैं कि उन्हें इस असहनीय दुख को सहने की शक्ति प्रदान करे।
@UPGovt से हमारी माँगें:- सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी हो।SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत कड़ी धाराओं में मुकदमा दर्ज हो।लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो।पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा और सरकारी सुरक्षा प्रदान की जाए।
@CMOfficeUP
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा घोषित हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षा परि���ाम में सफल हुए सभी विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामनाएँ।
यह सफलता आपकी लगन, आपके माता-पिता के विश्वास और शिक्षकों के मार्गदर्शन का परिणाम है।
साथ ही, जो विद्यार्थी इस बार अपेक्षित सफलता प्राप्त नहीं कर पाए हैं, उनसे कहना चाहता हूँ कि निराश होने की आवश्यकता नहीं है। जीवन में एक परिणाम सब कुछ तय नहीं करता। यह केवल एक पड़ाव है, जो आपको और मजबूत बनने तथा आगे बेहतर करने का अवसर देता है।
विशेषकर, इस वर्ष कक्षा 10वीं और 12वीं के ट��प-3 में बालिकाओं का स्थान प्राप्त करना न केवल गर्व की बात है, बल्कि क्रान्तिज्योति माता सावित्रीबाई फूले जी के उस ऐतिहासिक कदम का परिणाम है, जब उन्होंने भारत में बालिकाओं के लिए पहला विद्यालय खोला था।
यह अवसर भारतीय संविधान के निर्माता, आधुनिक भारत के शिल्पकार एवं शोषितों-वंचितों के मसीहा, महिलाओं के मुक्तिदाता, ज्ञान के प्रत���क, विश्व रत्न परम पूज्य बाबा साहेब के उस महान संविधान की जीवंत अभिव्यक्ति है, जिसमें उन्होंने लिंग, जाति और धर्म के हर भेदभाव को समाप्त कर एक समतामूलक राष्ट्र की नींव रखी।
हम सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं।
जय भीम। जय फूले। जय संविधान। जय भारत।
आज देश राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मना रहा है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि लोकतंत्र की असली ताकत गांव, गरीब, किसान और पंचायतों में निहित है, लेकिन यह भी एक कड़वी सच्चाई है कि इस व्यवस्था के भीतर ‘आधी आबादी’ आज भी अपने पूरे अधिकार से वंचित है।
पंचायत स्तर पर ‘आधी आबादी’ को ‘आधी हिस्सेदारी’ न देकर उनके साथ वर्षों से अन्याय क���या जाता रहा है, और अब भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार विधायिकाओं में भी महिलाओं को उनकी आधी भागीदारी से वंचित कर न केवल उसी अन्याय को दोहरा रही है, बल्कि महिला आरक्षण के भीतर वंचित वर्ग की मातृशक्ति के लिए अलग से हिस्सेदारी का प्रावधान न कर उन्हें उनके उचित प्रतिनिधित्व से भी वंचित कर रही है।
आज इस पंचायती राज दिवस पर यह संकल्प लेने की जरूरत है कि ‘आधी आबादी को आधी हिस्सेदारी’ केवल नारा न ���हे, बल्कि इसे हर स्तर (पंचायत से लेकर संसद तक) तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए, और इसके साथ ही वंचित वर्ग की मातृशक्ति को सुनिश्चित हिस्सेदारी दी जाए, ताकि सामाजिक न्याय और वास्तविक समानता दोनों सुनिश्चित हो सकें।
जय भीम, जय भारत
जय संविधान, जय मातृशक्ति।
कल नोएडा, फरीदाबाद, पलवल और भिवाड़ी के औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों का उभरा यह व्यापक आक्रोश कोई अचानक हुई घटना नहीं है, बल्कि वर्षों से चले आ रहे शोषण, कम वेतन, असुरक्षित कार्य परिस्थितियों और लगातार अनसुनी की गई आवाज़ों का विस्फोट है। जब मेहनतकश अपने हक के लिए सड़कों पर उतरते हैं, तो उसे सिर्फ “कानून-व्यवस्था” के चश्मे से देखना असल समस्या से आंखें चुराना है।
आज श्रमिक सिर्फ वेतन नहीं मांग रहे, बल्कि सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार मांग रहे हैं- कम से कम 20 हजार रुपये वेतन, ओवरटाइम का दोगुना भुगतान, समय पर वेतन ���र बोनस, साप्ताहिक अवकाश और स���रक्षित कार्यस्थल। क्या ये मांगें इस देश के विकास की रीढ़ माने जाने वाले श्रमिकों के लिए ज्यादा हैं?
हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि हिंसा किसी भी आंदोलन का रास्ता नहीं हो सकती, लेकिन यह भी उतना ही बड़ा सच है कि जब व्यवस्था लगातार बहरी बनी रहती है, तो आक्रोश सड़कों पर फूटता ही है। इसकी जिम्मेदारी सिर्फ श्रमिकों पर डालकर सरकार और उद्योगपति अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकते।
यह सिर्फ मजदूरी का सवाल नहीं है, यह इंसाफ, गरिमा और संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई है।
अगर आज भी इस आवाज़ को नहीं सुना गया, तो यह असंतोष और व्यापक होगा, क्योंकि इतिहास गवाह है जब मेहनतकश खड़ा होता है, तो सत्ता के सबसे मजबूत ढांचे भी हिल जाते हैं।
“रोटी, सम्मान और अधिकार-ये भीख नहीं, मेहनतकशों का हक है।”
उत्तर प्रदेश में किसानों के सामने एक गंभीर और बहुआयामी संकट खड़ा हो गया है। प्रदेश सरकार द्वारा फार्मर रजिस्ट्री (फार्मर आईडी) को विभिन्न योजनाओं के लिए अनिवार्य किया गया है, जिसके चलते क्रय केन्द्रों पर बिना फार्मर रजिस्ट्री के किसानों की फसल की तौल नहीं हो पाएगी, जबकि करोड़ों किसान अभी तक इस रजिस्ट्री से वंचित हैं और इसके कारण वे न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर अपनी फसल बेचने से भी वंचित हो जाएंगे। वहीं दूसरी ओर, हाल ही में हुई बेमौसम बारिश, तेज हवाओं, ओलावृष्टि और आकाशीय बिजली ने प्रदेश में जन-धन का भारी नुकसान पहुंचाया है, जिससे रबी की तैयार फसलें खेतों में बिछ गई हैं और किसानों की महीनों की मेहनत बर्बाद हो रही है, तथा गेहूं, सरसों, ���लू, चना और दलहन जैसी फसलों को व्यापक नुकसान हुआ है।
ऐसे कठिन समय में सरकार राहत देने के ब��ाय नई शर्तें थोप रही है। बिना पर्याप्त तैयारी, जागरूकता और तकनीकी सुविधा के फार्मर रजिस्ट्री को अनिवार्य करना किसान विरोधी और असंवेदनशील निर्णय है। इसका सबसे ज्यादा नुकसान छोटे, सीमांत और गरीब किसानों को झेलना पड़ रहा है।
हम @UPGovt से मांग करते हैं कि जब तक सभी किसानों की फार्मर रजिस्ट्री सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक किसी भी किसान को एमएसपी, किसान सम्मान निधि या अन्य योजनाओं से वंचित न किया ��ाए। गांव-गांव अभियान चलाकर सरल और पारदर्शी तरीके से रजिस्ट्री कराई जाए और जिन किसानों की फसल बर्बाद हुई है, उन्हें तत्काल मुआवजा दिया जाए।
किसानों के हक और सम्मान से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि सरकार ने इस अन्यायपूर्ण नीति पर तुरंत पुनर्विचार नहीं किया, तो हम सड़क से सदन तक अपनी आवाज बुलंद करने को मजबूर होंगे।
@CMOfficeUP
@myogiadityanath
राजस्थान के जिला भीलवाड़ा में घटित मामला इस बात का प्रमाण है कि भाजपा के डबल इंजन राज में पीड़ित बहुजन को ही आरोपी बना दिया जाता है और उसकी कहीं कोई सुनवाई भी नहीं होती। यह बेहद चिंताजनक और ���र्मनाक है।
दिनांक 28.11.2024 को सुबह करीब 8:30 बजे दलित युवक जीवन ऐरवाल के साथ मीरा सर्कल स्थित एक चिट फंड कंपनी में चोरी का झूठा आरोप लगाकर कंपनी के लोगों द्वारा मारपीट की गई, जातिसूचक गालियां दी गईं और उसे अपमानित किया गया। इसके बाद जब पीड़ित ने न्याय के लिए 100 नंबर पर कॉल किया, तो सहायता मिलने के बजाय थाना प्रतापनगर पुलिस उसे थाने ले गई, जहाँ पुलिस कस्टडी में उसके साथ लात-घूसों और पट्टे से बेरहमी से ��ारपीट की गई, जातिगत अपमान किया गया और जबरन खाली कागजों पर हस्ताक्षर कराए गए। यह कृत्य न केवल मानवाधिकारों का उल्लंघन है बल्कि संविधान की आत्मा पर सीधा हमला है।
दिनांक 29.11.2024 को पीड़ित द्वारा एसपी भीलवाड़ा को लिखित शिकायत दी गई, लेकिन इसके बावजूद कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं की गई, जिससे स्थानीय प्रशासन की भूमिका संदिग्ध प्रतीत होती है।
इसके पश्चात, दिनांक 15.01.2026 को सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में भी भ्रामक और गोलमोल उत्तर दिया गया, जिससे स्पष्ट होता है कि मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
न्याय की आशा में पीड़ित द्वारा दिनांक 09.02.2026 को प्रथम अपील भी दायर की गई, किंतु आज तक न तो जांच का परिणाम सार्वजनिक किया गया और न ही दोषियों के विरुद्ध FIR दर्ज की गई।
यह पूरा घटनाक्रम दर्शाता है कि कैसे एक दलित युवक को पहले प्रताड़ित किया गया और फिर न्याय की प्रक्रिया में भी लगातार उपेक्षा और अन्याय का सामना करना ��ड़ा।
हम @RajGovOfficial से मांग करते हैं कि इस पूरे प्रक���ण की निष्पक्ष जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए, दोषी पुलिसकर्मियों एवं संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध SC/ST एक्ट के तहत तत्काल FIR दर्ज की जाए तथा पीड़ित और उसके परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए।
@RajCMO
@BhajanlalBjp
चित्रकूट जनपद के पहाड़ी थाना क्षेत्र में न्याय न मिलने के कारण सिर्फ एक बहुजन नाबालिग बच्ची ने ही नहीं, बल्कि बहुजन समाज की न्याय की उम्मीद ने भी आत्महत्या कर ली।
दिनांक 04/03/2026 को गांव से कुछ दूरी पर स्थित एक कुएं से पानी भरने गई दलित नाबालिग बच्ची के साथ गांव के ही तीन जातंक��ादियों द्वारा उसे जबरन खेत में ले जाकर सामूहिक दुष्कर्म किया।
परिजनों के अनुसार, शिकायत देने के बावजूद कोई पुलिस द्वारा कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। लगातार हो रही प्रताड़ना और न्याय न मिलने की स्थिति से आहत होकर, दिनांक 14/04/2026 को पीड़िता ने आत्महत्या कर ली।
यह घटना अत्यंत दुखद, शर्मनाक और दंडनीय है। हम शोकसंतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं और प्रकृति से प्रार्थना करते ���ैं कि उन्हें इस असहनीय दुख को सहने की शक्ति प्रदान करे।
@UPGovt से हमारी माँग हैं कि:- इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष, उच्च स्तरीय और समयबद्ध जांच कराई जाए तथा किसी भी प्रकार के दबाव या प्रभाव से मुक्त होकर सच्चाई सामने लाई जाए।यदि प्रारंभिक स्तर पर पुलिस या प्रशासन की लापरवाही, उदासीनता या अनुचित कार्यवाही पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों पर कड़ी विभागीय एवं दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। पीड़ित परिवार को तत्काल सुरक्षा, आर्थिक सहायता एवं उचित मुआवजा प्रदान किया जाए।आरोपियों के विरुद्ध मामले को गंभीरता से लेते हुए SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम तथा POCSO एक्ट के अंतर्गत कठोरतम कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने हेतु फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई कर शीघ्र न्याय सुनिश्चित किया जाए।
@CMOfficeUP
@myogiadityanath
जिला लखीमपुर खीरी के गोला गोकर्ण थाना क्षेत्र के बांकेगंज में मोतीपुर गांव में भारतीय संविधान के निर्माता, आधुनिक भारत के शिल्पकार एवं शोषितों-वंचितों के मसीहा, महिलाओं के मुक्तिदाता, ज्ञान के प्रतीक, विश्व रत्न ,परम पूज्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी की जयंती की जयंती के दिन हुई घटना केवल एक विवाद नहीं, बल्कि बहुजन समाज की आस्था और सम्मान पर सीधा हमला है।
यहां कई वर्षों से खाली पड़ी बौद्ध विहार की भूमि पर परम पूज्य बाबा साहेब की मूर्ति स्थापित की जानी थी। ग्राम प्रधान भी मौजूद थे, दोपहर के बाद गांव वालों ने मूर्ति स्थापित कर दी। ग्राम समाज की भूमि पर शांतिपूर्ण तरीके से प्रतिमा स्थापना और भंडारे का आयोजन चल रहा था, लेकिन शाम होते-होते सुनियोजित तरीके से माहौल बिगाड़ा गया। परम पूज्य बाबा साहेब की जयंती के दिन ही मूर्ति हटाने की कार्रवाई एक गहरी साजिश को दर्शाती है, और इसी दौरान छीना-झपटी में परम पूज्य बाबा साहेब की प्रतिमा का टूटना पूरे समाज के लिए अत्यंत पीड़ादायक और अस्वीकार्य है।
आरोप है कि पुलिस ने संवेदनशीलता दिखाने के बजाय लाठीचार्ज किया और महिलाओं, बुजुर्गों व बच्चों तक को नहीं बख्शा। हैरानी की बात यह है कि घटना के 24 घंटे बाद भी पुलिस की बर्बरता जारी है ,घर-घर घुसकर मारपीट, तोड़फोड़ और निर्दोष लोगों को डराने-धमकाने का काम किया जा रहा है।निर्दोष लोगों पर झूठे मुकदमे दर्ज कर उन्हें जेल भेजना न्याय नहीं, बल्कि अन्याय की पराकाष्ठा है।
@UPGovt से हमारी मांग हैं कि :इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच हो, दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो और सभी निर्दोष लोगों को तुरंत रिहा किया जाए।
बहुजन समाज अब अन्याय सहने वाला नहीं है यह संघर्ष सम्मान, संविधान और अधिकारों की रक्षा का है।
“बाबा साहेब का अपमान, किसी भी की���त पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
@CMOfficeUP
@myogiadityanath
लखनऊ के विकास नगर में हुआ भीषण अग्निकांड सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि व्यवस्था की लापरवाही और गरीबों की ज़िंदगी की सस्ती सम��� का दर्दनाक उदाहरण है।
इस आग ने 1200 से अधिक झोपड़ियों को जलाकर राख कर दिया, सैकड़ों परिवारों को बेघर कर दिया और इस दर्दनाक घटना में दो मासूम बच्चों और कई मवेशियों की जलकर मौत हो गई, जबकि 6 बच्चे लापता हैं।
हमारा सवाल है मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी से-आखिर इतनी बड़ी बस्ती में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं थे?
स्थानीय लोगों के आरोप बेहद गंभीर हैं कि झोपड़ियां खाली कराने के दबाव में आग लगवाई गई। यदि यह सच है, तो यह गरीबों के खिलाफ एक संगठित अन्याय है। वहीं, दमकल गाड़ियां समय पर नहीं पहुंच सकीं, प्रशासनिक समन्वय की कमी साफ दिखी और पूरा इलाका अफरा-तफरी में डूबा रहा।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि लखनऊ में पहले भी कई बड़े अग्निकांड हो चुके ���ैं, लेकिन इसके बावजूद फायर सेफ्टी के नियम आज भी कागजों तक सीमित हैं।
@UPGovt से हमारी स्पष्ट मांग है कि लापता बच्चों की जल्द सुरक्षित बरामदगी सुनिश्चित की जाए, घटना की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और सभी पीड़ित परिवारों को मुआवजा व स्थायी पुनर्वास दिया जाए।
भीम आर्मी–आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) की लखनऊ की टीम घटना के बाद से ही पीड़ितों के साथ मौजूद है।
@CMOfficeUP
13 अप्रैल को नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों का उभरा यह व्यापक आक्रोश कोई आकस्मिक घटना नहीं है, बल्कि वर्षों से चले आ रहे शोषण, कम वेतन, असुरक्षित कार्य परिस्थितियों और लगातार दबाई गई आवाज़ों का विस्फोट है।
लेकिन 13 अप्रैल के बाद जो सामने आया, वह और भी भयावह ���र्मनाक व चिंताजनक है- सड़कों पर पुरुष पुलिसकर्मियों द्वारा खुलेआम महिलाओं और बच्चियों को बेरहमी पीटना और उन पर लाठियां बरसाना “कानून व्यवस्था” नहीं, बल्कि भाजपा के डबल इंजन सरकार का निर्मम चेहरा है।
भाजपा एक तरफ सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम के नाम पर “नारी सम्मान” का दावा करती है और दूसरी तरफ महिलाओं और बच्चियों को सड़कों पर कुचला जाता है।
मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी ,क्या यही है नारी वंदन?
@UPGovt
@CMOfficeUP
'युवा तुर्क' के नाम से प्रसिद्ध श्रद्धेय चंद्रशेखर जी ने संघर्ष, सिद्धांत और सामाजिक न्याय को भारतीय राजनीति का केंद्र बनाने का कार्य किया। उन्होंने सत्ता के बजाय विचार और जनता के बीच रहकर नेतृत्व को परिभाषित किया। देश के सबसे कठिन दौर ��ें उन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में सादगी, निष्ठा और आत्मबल का परिचय दिया।
आज उनकी जयंती पर हम उनके लोकतांत्रिक मूल्यों, जनसरोकारों और सामाजिक बदलाव के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को नमन करते हैं।
भारतीय संविधान के निर्माता, आधुनिक भारत के शिल्पकार एवं शोषितों-वंचितों के मसीहा, महिलाओं के मुक्तिदाता, ज्ञान के प्र��ीक, विश्व रत्न परम पूज्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी की 135वीं जयंती के पावन अवसर पर आगरा के ग्यासपुरा में आयोजित 31वीं भीम नगरी के भव्य कार्यक्रम में कल शामिल होकर उन्हें विनम्र आदरांजलि एवं शत-शत नमन अर्पित किया।
इस गरिमामय एवं ऐतिहासिक आयोजन के लिए भीमनगरी समारोह आयोजन समिति के सभी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं एवं सहयोगियों को हार्दिक साधुवाद। आप सभी के समर्पण, परिश्रम और प्रतिबद्ध���ा के कारण यह कार्यक्रम अत्यंत सफल एवं प्रेरणादायी बना।
परम पूज्य बाबा साहेब के विचारों को जन-जन तक पहुँचाने का यह प्रयास निश्चित ही सामाजिक जागरूकता और परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मुरादाबाद जिले के ठाकुरद्वारा क्षेत्र के नारायनपुर छंगा गांव में अपनी बर्थडे पार्टी में नशे में धुत होकर आपकी पार्टी के नेता द्वारा परम पूज्य बाबा साहेब की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त करना और प्रतिमा के साथ अमर्यादित कृत्य करना, विरोध करने पर दलित समाज के लोगों-खासकर एक बहन के सिर पर डंडे बरसाकर उसे लहूलुहान करना, घरों से खींच-खींचकर मारपीट करना, छतों से पथराव और फायरिंग करना- ये सब भाजपा के दोगलेपन का उदाहरण है।
घायल युवती का बयान इस बर्बरता की सच्चाई खुद बयां करता है “डंडे मारकर मेरा सिर फोड़ दिया, घर से घसीटकर दलितों को बेरहमी से पीटा गया।”
यह बेहद शर्मनाक और चिंताजनक है कि जिन महापुरुष ने इस देश को संविधान दिया, उनके सम्मान को सरेआम रौंदा गया और आवाज उठाने वालों को बेरहमी से कुचला गया।
मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी, आप सामाजिक न्याय के योद्धाओं के संबंध में 403 करोड़ रुपये देने का ढोल पीट रहे हैं उसे आप ही संभाल कर रखिए। पूरे बहुजन समाज की तरफ से साफ-साफ कहना चाहता है कि हमें दिखावे की नहीं, सम्मान और सुरक्षा की ज़रूरत है। हमारे स्वाभिमान से खिलवाड़ मत कीजिए।
हम यह भी स्पष्ट कहना चाहते हैं कि परम पूज्य बाबा साहेब की मूर्तियों पर छत डालने या दिखावटी काम कराने से ज्यादा जरूरी है उनकी वास्तविक सुरक्षा सुनिश्चित करना। बार-बार प्रतिमाओं को तोड़ा जाना और दोषियों पर प्रभावी कार्रवाई न होना सरकार की विफलता को दर्शाता है।
हम साफ शब्दों में कहना चाहते हैं अगर इस मामले में तत्काल और कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह अन्याय पूरे बहुजन समाज के आत्मसम्मान पर चोट मानी जाएगी।
@UPGovt से हमारी मांगें: मामले पर सख्त कार्रवाई की जाए ।पीड़ित परिवारों को सुरक्षा और उचित मुआवजा दिया जाए। घायल बहनों का समुचित इलाज और न्याय सुनिश्चित किया जाए।
भीम आर्मी और आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के साथी मौके-ए-वारदात पर मौजूद हैं और पीड़ित परिवारों के साथ मजबूती से खड़े हैं।
@CMOfficeUP
महिला आरक्षण, नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023 के माध्यम से 2023 से ही भारत में लागू है, लेकिन भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार नारी शक्ति को उनकी वास्तविक और न्यायपूर्ण हिस्सेदारी देने के बजाय इसे जनगणना-2011 के पुराने आंकड़ों और बिना समुचित परिसीमन के लागू करने की मंशा रखती थी। इसी दुर्भावनापूर्ण नीति के तहत 16-18 अप्रैल को 131वां संविधान संशोधन (परिसिमन) बिल 2026 लाया गया, जो महिलाओं विशेषकर बहुजन, दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग की महिलाओं के अधिकारों को सुनिश्चित करने के बजाय एक राजनीतिक दिखावे तक सीमित नजर आया।
नारी के नाम पे फिर एक छल रचा गया,
हक़ को सियासत में तोल दिया।
जो “आधी आबादी” कहकर भीड़ से तालियाँ लेते हैं,
उन्हीं ने आधे हक़ पर बात आते ही मुँह मोड़ लिया।
जो कहते थे “कोटे के अंदर कोटा” से ही न्याय पूरा होता ह��ं,
उन्हीं ने उसी हक़ को सबसे पहले कुचल दिया।
जय भीम! जय संविधान! जय मातृशक्ति!
उत्तर प्रदेश के जिला गाजीपुर के मरदह क्षेत्र में संत शिरोमणि जगतगुरु सतगुरु रविदास महाराज जी के मंदिर के पास क���या जा रहा दीवार निर्माण केवल एक साधारण निर्माण कार्य नहीं है। इस दीवार के माध्यम से उस पवित्र स्थल को ढकने, सीमित करने और उसकी पहचान को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है, जो सीधा-सीधा सामाजिक न्याय, समानता और भारतीय संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।
संत रविदास महाराज जी का स्थान करोड़ों लोगों की आस्था, आत्मसम्मान और अधिकारों का प्रतीक है। ऐसे में इस प्रकार की कोई भी कार्रवाई न केवल अनुचित ���ै, बल्कि यह बहुजन समाज की भावनाओं को आहत करने वाला कृत्य भी है।
मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी ,किसी भी “सुंदरीकरण” के नाम पर धार्मिक स्थलों की पहचान के साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
हम @UPGovt से मांग करते हैं कि इस मामले में जल्द, निष्��क्ष और न्यायसंगत निर्णय लिया जाए, ताकि सामाजिक सौहार्द बना रहे और किसी भी प्रकार का तनाव न बढ़े। साथ ही, संबंधित विभाग इस निर्माण कार्य की पारदर्शी जांच कर तत्काल स्थिति स्पष्ट करे। यदि दीवार से मंदिर की दृश्यता या पहुंच प्रभावित हो रही है, तो निर्माण कार्य को तुरंत रोका जाए और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
भीम आर्मी और आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) के साथी मौके-ए-वारदात पर मौजूद हैं और ���्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
सामाजिक सम्मान, आस्था और समान अधिकारों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
@CMOfficeUP
संविधान लागू होने के 77 साल बाद भी, महिलाओं के सवाल पर माननीय उच्चतम न्यायालय को यह कहना पड़ रहा है कि “महीने में तीन दिन तक अछूत मानना, ये नहीं हो सकता” यह न सिर्फ इस देश की सामाजिक सच्चाई पर करारा तमाचा है, बल्कि हमारी संवैधानिक प्रतिबद्धताओं की विफलता का भी स्पष्ट प्रमाण है।
और इससे भी बड़ी विडंबना यह है कि भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध का समर्थन कर रही है ऐसी सरकार का महिलाओं को विधायिकाओं में आरक्षण देने का दावा महज़ ढोंग और दिखावा ही प्रतीत होता है।
एक तरफ भारतीय संविधान समानता और गरिमा की गारंटी देता है, दूसरी तरफ उसी भावना के खिलाफ खड़े होकर महिलाओं के साथ भेदभाव को संरक्षण दिया जा रहा है।
महिलाओं को “अछूत” जैसा व्यवहार झेलना पड़ता है-विशेषकर उनकी जैविक प्रक्रिया के आधार पर। एक ऐसी प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया है, जिसे सबसे पवित्र माना जाना चाहिए, क्योंकि यही नव-जीवन की उत्पत्ति का आधार है। इसके बावजूद, भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार भेदभाव पर ठोस बदलाव की बजाय उसे वैध ठहरा रही नजर आती है।
यही कारण है कि महिलाएं भी बहुजन हैं, क्योंकि वे भी उसी भेदभाव और अपमान को झेलती हैं, जिसे अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) सदियों से “अछूत” बनाकर सहते आए हैं।
इसीलिए भीम आर्मी और आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) आधी आबादी के लिए विधायिकाओं में 50% आरक्षण और व��चित वर्गों की महिलाओं के लिए “कोटे के अंदर कोटा” की पुरज़ोर समर्थक हैं।
“नारी वंदन” नहीं, यह नारी के नाम पर भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार द्वारा विपक्ष के खिलाफ नैरेटिव सेट करने का सुनियोजित राजनीतिक प्रबंधन है।
उत्तर प्रदेश के गाज़ीपुर जनपद के करंडा थाना क्षेत्र में पिछड़े काष्ठ-शिल्पी कामगार समाज की एक नाबालिग बेटी के साथ 14 अप्रै�� को चार जातंकवादियों युवकों द्वारा सामूहिक दुष्कर्म कर उसकी निर्मम हत्या करने की घटना अत्यंत दुखद, शर्मनाक और दण्डनीय है।
इस जघन्य अपराध के बावजूद पीड़ित परिवार को न्याय के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। सबसे हैरानी और आक्रोश की बात यह है कि घटना के कई दिन बाद, 18-19 अप्रैल की रात को जाकर किसी तरह FIR दर्ज हो पाई। यह देरी साफ तौर पर प्रशासन और पुलिस की लापरवाही और संवेदनहीनता को दर्शाती है।
यदि ऐसे ��ंभीर मामलों में भी पुलिस तत्परता नहीं दिखाती, तो यह न्याय व्यवस्था पर गहरा सवाल खड़ा करता है।
हम @UPGovt से मांग करते हैं कि: सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए और उन पर सख्त से सख्त धाराओं में कार्रवाई हो।मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराकर जल्द से जल्द दोषियों को कड़ी सजा दी जाए। पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा, सुरक्षा और हर संभव सहा��ता प्रदान की जाए। इस मामले में लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
@CMOfficeUP
तमिलनाडु के जिले विरुधुनगर के कट्टनारपट्टी इलाके
में पटाखा फैक्टरी में हुआ भीषण विस्फोट बेहद दुखद, पीड़ादायक और चिंताजनक है। इस हादसे में 16 मजदूरों की मृत्यु और कई लोगों के घायल होने की खबर अत्यंत हृदय विदारक है। हम शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदन�� व्यक्त करते हैं।
कुछ दिनों पहले भी इसी जिले में ऐसा हादसा हुआ था। यह सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाता है।आखिर कब तक मजदूरों की जान यूं ही जोखिम में डाली जाएगी?
हम @TNeGA_Official मांग करते हैं कि: इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए। दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा और एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।सभी पटाखा फैक्ट्रियों की सुरक्षा ऑडिट कर कड़े मानकों को लागू किया जाए
@CMOTamilnadu
@mkstalin