#Mysterious_Prophecies#Great_Prophecies_2024
नास्त्रेदमस ने अपनी भविष्यवाणी में कहा था कि स्वतंत्रता के चार वर्ष बाद 1951 में भारत में एक महान संत का जन्म होगा जो विश्व को नए ज्ञान से परिचित कराएगा।
वर्ष 1951, 8 सितम्बर संत रामपाल जी महाराज का जन्म दिवस है।
उसी नाम वाले (हिन्दुस्तान) देश में जन्म लेगा। वह ना क्रिश्चन, ना मुस्लमान, ना ज्यू होगा वह निःसंदेह हिन्दू होगा। अन्य भूतपूर्व धार्मिक नेताओं से महतर बुद्धिमान होगा और अजिंकय होगा। उस से सभी प्रेम करेगें। उसका बोल बाला रहेगा। उसका भय भी रहेगा।
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नास्त्रेदमस ने अपनी भविष्यवाणी की किताब सेंचुरी में लिखा है कि
वह शायरन (धार्मिक नेता) नया ज्ञान आविष्कार करेगा। व��� सत्य मार्ग दर्शन करवाने वाला तारणहार एशिया खण्ड में जिस देश के नाम महासागर (हिन्द महासागर) है।
अर्थात् सर्व जगत में उसकी चर्चा होगी। उस समय उस हिन्दू धार्मिक संत (शायरन) की आयु 50 व 60 वर्ष के बीच होगी। परमेश्वर ने नास्त्रेदमस को संत रामपाल जी महाराज के अधेड़ उम्र वाले शरीर का साक्षात्कार करवा कर चलचित्र की भांति सारी ��टनाओं को दिखाया और समझाया।
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नास्त्रेदमस जी ने अपनी भविष्यवाणी के शतक पांच के अंत में तथा शतक छः के प्रारम्भ में लिखा है कि आज अर्थात् इ.स. (सन्) 1555 से ठीक 450 वर्ष पश्चात् अर्थात् सन् 2006 में एक हिन्दू संत (शायरन) प्रकट होगा
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नास्त्रेदमस ने अपनी भविष्यवाणी की किताब सेंचुरी में लिखा है कि
'पांच नदियों के प्रख्यात द्वीप राष्ट्र में एक महान राजनेता का उदय होगा। इस राजनेता का नाम 'वरण' या 'शरण' होगा। वह एक शत्रु के उन्माद को हवा के जरिए समाप्त करेगा
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नास्त्रेदमस ने अपनी भविष्यवाणी की किताब सेंचुरी में लिखा है कि
तीन ओर से सागर से घिरे द्वीप (हिन्दुस्तान देश) में उस महान संत का जन्म होगा उस समय तत्व ज्ञान के अभाव से अज्ञान अंधेरा होगा। नैतिकता का पतन होकर हाहाकार मचा होगा।
वह शायरन (धार्मिक नेता) गुरुवर अर्थात् गुरुजी को वर (श्रेष्ठ) मान कर अपनी साधना करेगा तथा करवाएगा। वह धार्मिक ��ेता (तत्वदर्शी सन्त) अपने धर्म बल अर्थात् भक्ति की शक्ति से तथा तत्वज्ञान द्वारा सर्व राष्ट्रों को नतमस्तक करेगा।
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संत अच्युतानंद की पुस्तक भविष्य मालिका में लिखा है कि वर्तमान में सतयुग की शुरूआत है।
संत अच्युतानंद 2023 से 550 वर्ष पूर्व कबीर परमेश्वर के समकालीन थे।
उन्होंने लिखा कि लगभग 550 वर्ष बाद कलयुग का अंत व सतयुग की शुरुआत होगी।
कि हरि अर्थात परमात्मा हरियाणा में प्रकट होंगे। उनके द्वारा बताई शास्त्रोक्त भक्ति की साधना से मोक्ष का मार्ग प्राप्त होगा तथा निराशों की आशा जागेगी कि अब हमें यहाँ भी सुख मिलेगा तथा प्र��ोक में भी तथा मोक्ष प्राप्ति अवश्य होगी। यह वाणी संत रामपाल जी महाराज पर खरी उतरती है।
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विष्णु-विष्णु भण अजर जरी जै, धर्म हुवै पापां छुटिजै।
हरि पर हरि को नाम जपीजै, हिरयालो हरि आण हरूं हरि नारायण देव नरूं।आशा सास निरास भइलो, पाइलो मोक्ष दवार खिंणू
विश्नोई धर्म के संस्थापक संत जम्भेश्वर जी ने शब्द वाणी सं. 102 में कहा है
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भक्त प्रह्लाद जी ने एक महापुरुष के विष��� में भविष्यवाणी की है कि वह महापुरुष पंजाब की धरती पर जाट वर्ण में जन्म लेगा उसका प्रचार क्षेत्र बटाला (बरवाला) होगा।
प्रमाण प्रसिद्ध पुस्तक "जन्म साखी भाई बाले वाली" हिंदी वाली पुस्तक, पृष्ठ 305
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धरती पर अवतार संत रामपाल जी महाराज
इजरायल के प्रो. हरार के अनुसार भारत देश का एक दिव्य महापुरूष मानवतावादी विचारों से सन् 2000 ई. से पहले-पहले आध्य��त्मिक क्रांति की जड़ें मजबूत कर लेगा व सारे विश्व को उनके विचार सुनने को बाध्य
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संत रामपाल जी महाराज का जन्म 8 सितम्बर हुआ जिनके विषय में हंगरी की महिला ज्योतिषी ‘‘बो��िस्का’’ ने लिखा है कि 21 वीं सदी में मानवीय सद्गुणों का विकास एक भारतीय संत के द्वारा होगा, जो चिरस्थाई रहेगा,
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ना��्त्रेदमस ने कहा था स्वतंत्रता के चार वर्ष बाद 1951 में भारत में एक महान संत का जन्म होगा जो विश्व को नए ज्ञान से परिचित कराएगा। वह महान संत बंदीछोड़ सतगुरु रामपाल जी महाराज जी हैं जिनका जन्म 8 सितंबर 1951 को हुआ