अर्ज किया हे.....
छोड़ दिये इफ्तारी, भूल गए सलाम 🤲
सोते जागते अब याद आ रहे हैं जय श्री राम 🚩
ज़िन्दगी भर किये अली अली अली अली ⛪
जब Fटी तो याद आ रहे हैं बजरंगबली 🚩🤔😂
जय श्री राम 🏹🚩
क्या करोगे इतनी संपत्ति कमाकर?
काबुल(अफगानिस्तान)का व्यापार सिक्खोंका था,आज उसपर तालिबानोंका कब्ज़ा है
70साल पहले सिंध सिंधियोंका था आज उनकी पूरी धन संपत्तिपर पाकिस्तानियोंका कब्ज़ा है
कश्मीर धनधान्य ऐश्वर्यसे पूर्ण पण्डितोंका था,महलों/झीलोंपर अब आतंकका कब्ज़ा होगया
😡🔥🚩1
मित्रो आज से 45 -50 पहले भारत मे कोई सोयाबीन नहीं खाता था !
फिर इसकी खेती भारत मे कैसे होनी शुरू हुई ??
ये जानने से पहले आपको मनमोहन सिंह द्वारा किए गए एक समझोते के बारे मे जानना पड़ेगा !
मित्रो इस देश मे globalization के नाम पर ऐसे-ऐसे समझोते हुये कि आप चोंक जाएंगे !एक समझोते के कहानी सुने बाकि विडियो में है ! एक देश है उसका नाम है हॉलैंड वहां के सुअरों का गोबर (टट्टी) वो भी 1 करोड़ टन भारत लाया जायेगा ! और डंप किया जायेगा !
ऐसा समझोता मनमोहन सिंह ने एक बार किया था !
जब मनमोहन सिंह को पूछा गया कि यह समझोता क्यूँ किया ????
तब मनमोहन सिंह ने कहा हॉलैंड के सुअरों का गोबर (टट्टी) quality में बहुत बढ़िया है !
फिर पूछा गया कि अच्छा ये बताये की quality में कैसे बढ़िया है ???
तो मनमोहन सिंह ने कहा कि हॉलैंड के सूअर सोयाबीन खाते है इसलिए बढ़िया है !!
मित्रो जैसे भारत में हम लोग गाय को पालते है ऐसे ही हालेंड के लोग सूअर पालते
है वहां बड़े बड़े रेंच होते है सुअरों कि लिए ! लेकिन वहाँ सूअर मांस के लिए पाला जाता है !
तो फिर मनमोहन सिंह से पूछा गया की ये हालेंड जैसे देशो मे सोयाबीन जाता कहाँ से है ???
तो पता चला भारत से जाता है !! वो मध्य प्रदेश से जाता है !!!
मित्रो पूरी दुनिया के वैज्ञानिक कहते हैं अगर किसी उपजाऊ खेत में आपने 15 से 20 साल सोयाबीन उगाया तो अगले कुछ सालों तक आप वहां कुछ नहीं उगा सकते ! जमीन इतनी बंजर हो जाती है !
अब देखिए इस मनमोहन सिंह ने क्या किया !???
हॉलैंड के सुअरों को सोयाबीन खिलाने के लिए पहले मध्यप्रदेश में सोयाबीन कि खेती करवाई !
खेती कैसे करवाई ??
किसानो को बोला गया आपको सोयाबीन की फसल का दाम का ज्यादा दिया जाएगा !
तो किसान बेचारा लालच के चक्कर मे सोयाबीन उगाना शुरू कर दिया !
और कुछ डाक्टरों ने रिश्वत लेकर बोलना शुरू कर दिया की ये सेहत के लिए बहुत अच्छी है
आदि आदि, इसके प्रचार के लिए टीवी रेडियो अखबार के द्वारा मशहूर फिल्मी कलाकारों से विज्ञापन करवाए गए।
तो इस प्रकार भारत से सोयाबीन हॉलेंड जाने लगी ! ताकि उनके सूअर खाये उनकी चर्बी बढ़े और मांस का उत्पादन ज्यादा हो !
और बाद मे हॉलैंड के सूअर भारत का सोयाबीन खाकर जो गोबर (टट्टी) करेगे वो भारत में लाई जाएगी ! वो भी एक करोड़ टन सुअरों का गोबर(टट्टी ) ऐसा समझोता मनमोहन सिंह ने लिया !
और ये समझोता एक ऐसा आदमी करता है जिसको इस देश में best finance minster का आवार्ड दिया जाता है !
और लोग उसे बहुत भारी अर्थशास्त्री मानते है !! शायद मनमोहन सिंह के दिमाग में भी यही गोबर होगा !
मित्रो दरअसल सोयाबीन मे जो प्रोटीन है वो एक अलग किस्म का प्रोटीन है उस प्रोटीन को शरीर का एसक्रिटा system बाहर नहीं निकाल पाता और वो प्रोटीन अंदर इकठ्ठा होता जाता है !
जो की बाद मे आगे जाकर बहुत परेशान करता है ! प्रोटीन के और भी विकल्प हमारे पास है ! जैसे उड़द की दाल मे बहुत प्रोटीन है आप वो खा सकते है ! इसके अतिरिक्त और अन्य दालें है !!
और अंत मे एक और बात मित्रो आपके घर मे अगर दादी - नानी हो तो आप उन्हे पूछे की क्या उनकी माता जी ने उनको कभी सोयाबीन बनाकर खिलाया था ??
आपको सच सामने आ जाएगा !!
ये सारा सोयाबीन का खेल इस लिए खेला गया है !
अधिक जानकारी के लिए देखें !
https://t.co/DWg9AfrqFn
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साभार 🙏
स्व. राजीव दीक्षित जी को शत शत नमन !
चीनी पर ₹20 क्या बढ़े, लोग घबरा गये! देशहित में ₹20 इतने बड़े हो गये कि मोदी जी का साथ छोड़ने की धमकी देने लगे। मित्रों, 2047 का लक्ष्य याद रखिये—तब तक साथ निभाना ही पड़ेगा।
₹500 का पिज़्ज़ा बच्चों को खिला देंगे, ₹150 का क्वार्टर हल्दीराम भुजिया के साथ पी लेंगे, ₹25 का विमल पान मसाला भी खा लेंगे, पंद्रह की छोटी एडवांस भी फूंक लेंगे लेकिन ₹20 महंगी चीनी नहीं खरीद सकते! शेर पालना महंगा तो पड़ता ही है, महंगे शौक जिगर वालों के होते हैं।
सौ-पचास रुपये के लिए मोदी जी का साथ नहीं छोड़ना है। 2047 ज़ेहन में उतार लो।
याद रखो दोस्तों—
कट जाओगे, मिट जाओगे, हो जाएगा अंत,
फिर न मिलेगा इस भारत को मोदी जैसा संत।🙏🙏
जब मुगलोंने मंदिरोंपर आक्रमण शुरू किए तब हिंदू सोचते थे,ये तो सिद्ध मंदिर हैं कोई इनको छुएगा तो भगवान उसे सज़ादेंगे
अब वो सोचते हैं कि मंदिर तोड़ने वालोंको सरकार सज़ादेगी
तब न भगवानने सज़ा दी/न अब सरकार देगी,जबतक हिंदू गीताके उपदेशको नहीं समझेंगे तबतक अत्याचार सहने अभिशप्त रहेंगे
जंगल में मोर नाचा किसने देखा?
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक और शानदार फैसला। लाखों लोगों को राहत मिलेगी।
एकांत में दिया गया जाति सूचक गाली एससी एसटी एक्ट की परिधि में नहीं आता। (गाली सार्वजनिक रूप से होनी चाहिए। पीड़ित के अलावा अन्य लोगों को भी सुनाई देना चाहिए)
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि SC/ST Act की धारा 3(1)(r) और 3(1)(s) के तहत अपराध के लिए “public view” यानी सार्वजनिक दृष्टि/उपस्थिति की शर्त महत्वपूर्ण है।
यदि कथित जातिसूचक अपमान एक बंद कमरे के भीतर हुआ हो और वहां जनता/सार्वजनिक रूप से देखने-सुनने वाले लोग मौजूद न हों, तो केवल उस आधार पर SC/ST Act का अपराध स्वतः नहीं बन जाता।
इसी आधार पर कोर्ट ने एक स्कूल मैनेजर के खिलाफ SC/ST Act की कार्यवाही रद्द कर दी।
प्रत्येक वर्ष गुलामी का एक सिस्टम बदलते तो
अब तक शिक्षा, चिकित्सा, पुलिस प्रशासन, न्याय, बैंकिंग, चुनाव, टैक्स और व्यापार सहित पूरा सिस्टम बदल चुका होता।
@PMOIndia@narendramodi
झारखंड सरकार के पास मइया सम्मान योजना के लिए पैसे हो जाते हैं;
लेकिन जब बात सरकारी शिक्षा व्यवस्था को सुधारने, स्कूलों की हालत बेहतर करने और शिक्षकों की कमी दूर करने की आती है, तो बजट की कमी नजर आने लगती है,
सवाल यह है कि बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता कब मिलेगी.??