"पहले मैं सोचता था कि पैसे से ज्यादा जरूरी परिवार है, लेकिन मैं गलत था। काफी ठोकरें खाने के बाद समझ आया कि पैसा सबका बाप है। जिस इंसान के पास भर-भर के पैसे नहीं हैं, समझो लोग उसके मुंह पर थूक कर चले जाएंगे। परिवार भी तभी पूछेगा जब आपके पास पैसा होगा। पैसा बूढ़े को जवान और काले को गोरा बना देता है। पैसा है तो सुख है, वरना दुख ही दुख है, दुख ही दुख है।" ✍🏻🖤
मैं 25 वर्ष का हूँ, मेरी प्रेमिका 22 वर्ष की है
बिहार सरकार से मैं यह पूछना चाहता हूँ कि
अगर मैं रात को उसके साथ सड़क पर रहूँ,
तो क्या साथ में एक गैर-कानूनी हथियार भी रखूँ?
पंचायत चुनाव में वोट उसे दे
जो गाँव के छोटे छोटे झगड़े,
पंचायत में बैठा कर निपटा सके
उस दलाल को वोट ना दे,
जो झगड़ो के बहाने राजनीति करे,
और थाने में दलाली करके अपना पेट भरे।
अगर ये सब देख के भी आपका खून नहीं खोल रहा तो, आप मर चुके है.
इस देश में सरकार से आप क्या उम्मीद कर सकते है, जहाँ महिलाओ के साथ ऐसा व्यवहार किया जाता है।
किसी की चमचागिरी करने से पहले
यह ज़रूर सोच लेना,
सामने वाला तुमको अपने घर का
सदस्य नहीं बना लेगा।
कुत्ता कितना भी महंगा हो,
भौंकने के लिए ही पाला जाता है।
वक्त आ गया ���ै राजनीति बदलने का
युवा साथियों,
जातियों और पार्टियों के गुलाम मत बनो।
अपने क्षेत्र के विकास के लिए खुद मैदान में उतरो।
जब जनता तुम्हारे साथ खड़ी होगी,
तो बड़े से बड़े नेता का गुरूर टूट जाएगा।
सड़क टूटी हो तो सवाल करो।
पानी की समस्या हो तो सवाल करो।
सरकारी काम अधूरा हो तो सवाल करो।
विकास का पैसा कहाँ गया, यह भी सवाल करो।
क्योंकि चुप रहने से व्यवस्था नहीं ब��लती,
"सवाल उठाने से बदलाव की शुरुआत होती है।"