जैसा कि मैंने कहा है, हर आंदोलन के लिए जंतर मंतर नहीं चाहिए। वो भी जा कर हमने दिखा दिया, पर कई आंदोलन घर बैठे, केवल सूचित करने से भी होते हैं। आंदोलनों में गर्मी केवल जलती बस की आ�� से नहीं आती, गर्मी हम दूसरे तरह से भी उत्पन्न कर सकते हैं।
यह आंदोलन हमारा है ही नहीं, या आंदोलन हर उस प्रताड़ित व्यक्ति का है जो कभी SC/ST एक्ट, तो कभी UGC तो कभी आरक्षण के कारण घुटता रहता है। कानपुर, आगरा, प्रयागराज, नागपुर, दिल्ली आदि में जो भी सड़क पर हैं, मेरा पूर्ण समर्थन है आपको। जब तक जागरूकता नहीं आएगी, सरकार आपका चूतिया बनाती रहेगी।
आज देशभर में आरक्षण व्यवस्था, उसके लाभ, उसकी पात्रता और उसमें सुधार को लेकर अलग-अलग स्तर पर चर्चा हो रही है। मेरा व्यक्तिगत मत है कि इस विषय को केवल “आरक्षण के पक्ष या विपक्ष” के रूप में देखने के बजाय हमें सामाजिक न्याय क�� साथ-साथ आर्थिक न्याय और समान अवसर के दृष्टिकोण से भी देखना चाहिए।
भारत में सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए अनेक संवैधानिक एवं सरकारी व्यवस्थाएं हैं। इसी प्रकार अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग तथा अन्य वंचित वर्गों के लिए केंद्र और राज्यों में विभिन्न आयोग, निगम, योजनाएं एवं वित्तीय सहायता उपलब्ध हैं।
ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर सवर्ण एवं अनारक्षित वर्ग के परिवारों के लिए भी ऐसी मजबूत और संस्थागत व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे केवल इसलिए कोई युवा, विद्यार्थी, किसान, छोटा उद्यमी या जरूरतमंद परिवार पीछे न रह जाए कि वह आरक्षण की किसी श्रेणी में नहीं आता।
गुजरात का मॉडल देश के लिए उदाहरण बन सकता है;
गुजरात में अनारक्षित वर्ग के आर्थिक एवं शैक्षणिक विकास के लिए निगम/आयोग जैसी संस्थागत व्यवस्थाएं बनाई गई हैं। इनके माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों को शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, स्वरोजगार तथा अन्य क्षेत्रों में सहायता देने का प्रयास किया जाता है।
मेरा मानना है कि इसी प्रकार केंद्र सरकार के स्तर पर भी एक मजबूत व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।
केंद्र सरकार द्वारा “राष्ट्रीय आर्थिक रूप से कमजोर अनारक्षित वर्ग आयोग” और “राष्ट्रीय आर्थिक रूप से कमजोर अनारक्षित वर्ग विकास निगम” जैसी संस्थागत व्यवस्था बनाने पर विचार किया जाना चाहिए।
इसके लिए प्रारंभिक तौर पर लगभग ₹2,500 करोड़ का वार्षिक बजट निर्धारित किया जा सकता है, जिसे आवश्यकता और परिणामों के आधार पर आगे बढ़ाया जा सके।
इस व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह होना चाहिए कि इसका लाभ जाति के आधार पर नहीं, बल्कि स्पष्ट आर्थिक एवं सामाजिक-शैक्षणिक मानकों के आधार पर दिया जाए।
आय, संपत्ति, परिवार की आर्थिक स्थिति, शिक्षा और अन्य वस्तुनिष्ठ मानकों को ध्यान में रखकर पात्रता तय की जा सकती है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि वास्तव में जरूरतमंद परिवारों तक सहायता पहुंचे।
साथ ही, EWS के लिए संविधा��� में उपलब्ध 10% आरक्षण की व्यवस्था अपनी जगह बनी रहे, लेकिन उसके साथ-साथ शिक्षा, रोजगार की तैयारी, स्वरोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए अलग से मजबूत सहायता तंत्र विकसित किया जाए।
आरक्षण व्यवस्था का मूल उद्देश्य जिन सामाजिक एवं ऐतिहासिक असमानताओं को दूर करना है, उसे समझना और उसका सम्मान करना आवश्यक है। इसलिए इस विषय को किसी वर्ग के खिलाफ खड़ा करने के बजाय हमें ऐसी नीति की दिशा में आगे बढ़ना चा���िए जिसमें सामाजिक न्याय, आर्थिक न्याय और समान अवसर—तीनों का संतुलन हो।
मेरा मानना है कि किसी गरीब विद्यार्थी की प्रतिभा केवल इसलिए ��हीं रुकनी चाहिए क्योंकि वह ऐसी श्रेणी से आता है जिसे आरक्षण का लाभ नहीं मिलता।
इसलिए देश में आरक्षण व्यवस्था पर व्यापक और तथ्यात्मक चर्चा के साथ-साथ आर्थिक रूप से कमजोर अनारक्षित वर्ग के लिए ₹2,500 करोड़ के प्रारंभिक बजट वाली राष्ट्रीय संस्था बनाने पर भी गंभीरता से विचार होना चाहिए।
RHA कानपुर में UGC Rollback और Reservation Reform को लेकर सैकड़ों लोगों ने निकाला मशाल जुलुश,,मोदी सरकार को खुली चेतावनी @ajeetbharti धरने की परमिशन ना मिलने के बाद लोगों ne निकाला मशाल जुलुश,,इसी शहर में हुई थी 1857 ki क्रांति मोदी जी #UGC#kanpur
बिहार की तर्ज पर बीजेपी सांसदों ने की सवर्ण आयोग की मांग
जनवरी से ही अलग-अलग समूहों और व्यक्तियों द्वारा UGC रोलबैक तथा सवर्ण समाज से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाया जा र���ा था। इसी क्रम में 21 अगस्त को जंतर-मंतर से शुरू हुए सवर्ण आंदोलन की प्रमुख मांगों में सवर्ण आयोग के गठन की मांग भी शामिल है। आंदोलन से जुड़े लोग लगातार सवाल उठा रहे हैं कि जब SC, ST और OBC के लिए आयोग हैं, तो सवर्ण समाज के लिए आयोग क्यों नहीं?
अब इस मांग को बीजेपी सांसद भी उठा रहे हैं। देशभर में जारी सवर्ण आंदोलन के बीच सवर्ण आयोग की मांग ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
बड़ी खबर 🚨
भाजपा के कुछ सवर्ण सांसदों ने भारी विरोध के चलते सवर्ण आयोग की मांग रखी है, उन्होंने तर्क दिया है कि जब SCST आयोग है और OBC आयोग है तो सवर्ण आयोग क्यों नहीं।
🚨 सिद्धार्थनगर में सवर्ण समाज का हल्लाबोल! जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर उमड़ा विशाल जनसैलाब
आरक्षण से लेकर SC/ST एक्ट तक... सवर्ण समाज के हजारों कार्यकर्ताओं ने सड़को पर उतरकर अपनी आवाज़ बुलंद की और जिलाधिकारी के माध्यम से माननीय राष्ट्रपति महोदय को ज्ञा��न सौंपा।
💥 प्रमुख माँगें:
• आर्थिक आधार पर मिले आरक्षण
• UGC RollBack (यूजीसी के नए नियमों की वापसी)
• SC/ST Act को किया जाए समाप्त
• तुरंत हो 'सवर्ण आयोग' का गठन
हिंदुत्व के नाम पर सवर्णों को देश और धर्म की ठेकेदारी और दलितों और पिछड़ों को मलाई।
> आरक्षण और कानून दलितों और पिछड़ों के लिए 👇
1- NCBC को संवैधानिक दर्जा (2018) - OBC आयोग को ताकत मिली।
2- SC/ST एक्ट मजबूत (2018 संशोधन) - कानून को पहले जैसा सख्त बनाया।
3- NEET में OBC को 27% आरक्षण (2021) - मेडिकल की ऑल इंडिया सीटों में पहली बार OBC कोटा लागू।
4- केंद्रीय विद्यालय / नवोदय में OBC कोटा बढ़ाना।
> लोन और बिजनेस में दलितों और पिछड़ों को खैरात 👇
1-स्टैंड-अप इंडिया (2016) - ��र बैंक ब्रांच से एक SC/ST को 10 लाख से 1 करोड़ तक लोन।
2- मुद्रा योजना (2015) - बिना गारंटी 10 लाख तक लोन, 68% लाभार्थी SC/ST/OBC।
3- PM विश्वकर्मा योजना (2023) - नाई, लोहार, बढ़ई, कुम्हार जैसी 18 OBC जातियों को 3 लाख लोन + 15 हजार औजार के लिए।
4- SC के लिए वेंचर कैपिटल फंड - SC युवाओं को स्टार्टअप के लिए 50 लाख से 15 करोड़ तक।
5- स्वच्छता उद्यमी योजना - सफाई कर्मचारी / SC को JCB, ट्रक खरीदने के लिए लोन।
> पढ़ाई और स्कॉलरशिप वाली योजनाएं दलितों और पिछड़ों को खैरात 👇
1- प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप SC - राशि बढ़ाई और DBT से सीधा खाते में।
2-0OBC के लिए प्री और पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप - 2021 में गाइडलाइन बदलकर पैसा 60:40 में केंद्र देने लगा।
3- नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप SC/ST के लिए - विदेश में पढ़ने का पूरा खर्च सरकार देती है।
4- टॉप क्लास एजुकेशन फॉर SC - IIT, IIM, AIIMS जैसे संस्थानों में SC बच्चों की पूरी फीस सरकार देती है।
5- डॉ. अंबेडकर पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप OBC/EBC/DNT के लिए।
6- बाबू जगजीवन राम छात्रावास योजना - SC छात्रों के लिए हर जिले में हॉस्टल बनाने को पैसा।
7- SHREYAS योजना - OBC और SC के छात्रों को उच्च शिक्षा में फ्री कोचिंग।
> कौशल और गांव वाली योजनाएं👇
1- PM दक्ष योजना (2021) - SC, OBC, सफाई कर्मचारियों को फ्री स्किल ट्रेनिंग + 3000 महीना स्टाइपेंड।
2- PM आदर्श ग्राम योजना - जिन गांवों में 50% से ज्यादा SC आबादी है, उन गांवों को मॉडल गांव बनाना।
3- अंबेडकर सोशल इनोवेशन एंड इनक्यूबेशन मिशन (2020) - SC युवाओं के आइडिया को पेटेंट और फंडिंग में मदद।
यह सब तोहफा हिंदुत्व के नाम पर दलितों और पिछड़ों को मिला है, जो 2014 से पहले इस रूप में नहीं थीं, या तो नई बनी हैं या इनका बजट / दायरा 2014 के बाद कई गुना बढ़ाया गया है, और सामान्य वर्ग यहां हिंदुत्व पर झुनझुना बजा रहा है, देश और धर्म की ठेकेदारी निभा रहा है, कोई भी एक ऐसी योजना सामान्य वर्ग या सवर्णो के लिए 2014 से 2026 तक नहीं बनी है।
जंतर-मंतर के उपद्रवियों की FIR हट सकती है…
तो स्वर्ण समाज पर लगाए गए झूठे SC/ST Act के मुकदमे क्यों नहीं?
अगर सरकार के पास FIR हटाने का रास्ता है,
तो न्याय सिर्फ कुछ लोगों के लिए क्यों?
तीन सप्ताह पहले, नीब करोली बाबा पर आधारित "हनुमान अंश" नामक फिल्म 400 सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी।
फिल्म ने पहले हफ्ते में 80 लाख रुपये कमाए!!
दूसरे सप्ताह में, स्क्रीन की संख्या घटाकर 200 कर दी गई और कलेक्शन 2 करोड़ से कम रहा!!
सबने इसे फ्लॉप घोषित कर दिया!!
तीसरे सप्ताह में गाना "मैंने तो तेरे ही भरोस�� हनुमान सागर में नैया डार दयी" वायरल हो गया और फिल्म का कलेक्शन 8 करोड़ तक पहुंच गया और ब्लॉकबस्टर बन गयी!!
वायरल गाना एक बुन्देलखंडी लड़के सुनील लोधी ने गाया है ।
जानते है, सुनील नेत्रहीन है, देख नहीं सकता!!
@romita_tiwari ये तलवे चाटने वाले नेता है , इनका व्यक्तित्व सिर्फ मोदी जी के नाम तक ही सीमित है , मोदी के बाद ये किसके चेहरे पर चुनाव लडेगे..?
धर्म और संस���कृति के गद्दार है ऐसे नीच नेता ।
समाज को बार-बार जातियों में बाँटकर राजनीति की जा सकती है, लेकिन समाज की असली ताकत तब है जब हर वर्ग अपने हिस्से के न्याय की बात करे।
सवाल आरक्षण का ही नहीं, सवाल ये भी है, क्या उसका लाभ सच में सबसे ज़रूरतमंद तक पहुँच रहा है?
क्या बात है इंस्पेक्टर साहब बहुत अच्छा किया आपने
इस कार्य के लिए आपको मेडल मिलना चाहिए....👍🏻
लेकिन जिनको आप मार रहे हैं उन्होंने ऐसा कौन सा अपराध कर दिया जो आप इतने ज्यादा गुस्से आग बबूला हो गए और लोगों पर लाठियां बरसा रहे हो
शर्मनाक बेहद शर्मनाक ��
@MrMishra@Jai_Shree_Ram_G अजीत भारती गये थे क्या ब्रिजेश पाठक के यहाँ कांफ्रेंस करने ..?
अजीत भारती गये थे क्या नीली स्याही से चिट्ठी लिख कर देने ..?
अजीत भारती चोरी से भाग गये थे मिलने के लिये .?
अजीत भारती मुख्य बिंदु ही ग़ायब कर दिये आरक्षण हटाने वाले..?
ये हरामखोर बहुरूपिया है ।
उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में सवर्ण समाज के लोग UGC & SCSTACT और आरक्षण के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे, वहां पर पुलिस ने उन पर जो बर्बरता पूर्वक लाठीचार्ज किया है इससे साफ संकेत हो रहा है कि सरकार सामान्य वर्ग के सीधे सीधे विरोध में है।
वैसे जो पुलिस कर्मी लाठीचार्ज कर रहा है उससे लग रहा है कि महोदय शायद व्यक्तिगत दुश्मनी निकाल रहे हैं, या हो सकता है आरक्षित श्रेणी के हों तो उन्हें बुरा लग रहा हो कि उनके कोटे का विरोध हो रहा है क्योंकि जिस तरह से उनका वीडियो वायरल हो रहा है उससे तो यही लगता है कि साहब ड्यूटी कम कर रहे हैं और अदावट ज्यादा निभा रहे हैं।
वैसे पुलिस कर्मी का नाम नहीं पता चल पाया है पूरा नाम पता चलते ही तयं हो जाएग�� कि मंशा क्या थी, बांकी सरकार में बैठे सामान्य वर्ग के आंदोलन से रत्तीभर भी फर्क नहीं पड़ता है।
साथियों देखिए हर्ष दुबे कितना झूठ मीडिया में फैला रहा है कि मेरी ब्रजेश पाठक से कोई संबंध नहीं था जबकि उनके पिता खुद कह रहे है कि ब्रजेश पाठक से मेरा व्यक्तिगत संबंध है और मुझे अभद्र भाषा का प्रयोग करके गाली दे रहे है ।
आप सभी RHA से ज्यादा से ज्यादा जुड़े और मिस्ड कॉल दे: 8586872930
UP में आज की तारीख में एक भी सवर्ण नेता नहीं है। अगर होता, तो पिछले कई महीनों से मैं भागीदारी भवन का मुद्दा उठा रही हूँ, जहाँ निःशुल्क आवासीय कोचिंग सिर्फ SC/ST/OBC छात्रों को दी जाती है। लेकिन सबके सब मुँह छुपाए बैठे हैं।
जो कल तक बीजेपी के साथ खड़े थे, आज वही “गद्दार” बताए जा रहे हैं, सिर्फ इसलिए क्योंकि उन्होंने सवाल पूछने की हिम्मत की।
राजनीति में वफ़ादारी विचारों से होती है या सत्ता के साथ खड़े रहने से?
(पूरी चर्चा देखें, भटके हुए युवा की 70वीं कड़ी में...)