कुछ लोग कहते हैं कि यह जयघोष (नारा) बहुत जोर से लगाया जाता है और इससे हमें भय लगता है ।
हम कहते हैं - भय तो लगना चाहिए क्योंकि यह एक ही जयघोष -छूआछूत, जात��-पाति, देशद्रोह जैसे हजारों रोगों को समूल नष्ट करने में सक्षम है ।
सनातन धर्म को मूल, शुद्ध स्वरूप में जो जानना चाहते हैं उन सभी सज्जनों से अत्यन्त आग्रह है कि इस प्रपत्र को पढ़कर,अपना समय निकालकर सनातन धर्म और अपने इस राष्ट्र की यथार्थ परिस्थिति को जानने, विचार करने एवं समाधान प्राप्त करने हेतु मात्र जीवन के दो दिन लगाएं और आजीवन समाधान पाएं ।
हमारे ही कुछ लोग हजारों वर्षों की पराधीनता के फलस्वरूप यथा समय संस्कारों से परिचित नहीं हो पाते,तो हम आह्वान करते हैं कि आइए भूल सुधार कर सनातन धर्म के जीवन मूल्यों को जीवन में धारण कर लीजिए! 'आर्य प्रशिक्षण सत्र' में प्रथम सिद्धान्तों से परिचित हो, आजीवन वेद पथ का अवलम्बन कीजिए।
वेदाध्ययन यह एक बहुत बड़ा उत्तरदायित्व है। एक वेदाध्यायी बड़े परिश्रम से वेदपाठी बनता है। वेदार्थ के लिए शिक्षा,व्याकरण,निरुक्त आदि वेदांग, फिर छः उपांग, उपवेद, ब्राह्मण ग्रन्थ और उपनिषद् आदि पढ़ने पड़ते हैं और सारे ��ीवन संघर्षों की भट्टी में तपना-जलना पड़ता है ।
उत्तम परम्परा सन्ध्या की, पुष्ट करो हर बार इसे।
जब जब टूटी सुख अपने तब, छेदों से हर बार रिसे।
शुभ समय बीतता जाता है, नहीं हाथ से जाने दो।
धन्य पूर्व पुरुषाओं को जो, जीवन बारम्बार घिसे।।
#नियमित_सन्ध्या_अभियान#आर्य_महासंघ
ईश के ज्ञान ��े लोक में जांच के आर्य कार्य आगे बढ़ाते रहें।
नित्य है ना मिटे ना हटे ले चले प्रार्थना प्रेम से भाव लाते रहें।
द्वेष मेरा रहा दूसरे का भले आपके ज्ञान से ही मिटाते रहें।
है नम: आपके पूर्ण सामर्थ्य को पास तेरे सदा देव आते रहें।।
#नियमित_संध्या_अनुष्ठान
#आर्य_महासंघ
ईश्वर के सामर्थ्य का, नित्य करो अनुमान।
सृष्टि का कर्ता वही, पूरा शक्तिमान।
पूरा शक्तिमान, बनाता और मिटाता।
सच्चा है यह ज्ञान, पाप से हमें बचाता।
जो डूबे नित पाप, उधर के नहीं इधर के।
सन्ध्या का अभ्यास ,निकट करता ईश्वर के।।
#नियमित_सन्ध्या_अनुष्ठान
#आर्य_महासंघ
सन्ध्या के अभियान को करो मान निज काज।
ईश्वर पूजा है यही कल छोड़ो ना आज।
कल छोड़ो ना आज इसे अपनाओ जल्दी।
पुण्य कमाओ खूब फटकी लगे ना हल्दी ।
लोक और परलोक सधेगा पुरी अयोध्या।
मनोयोग से करें ��भी संयम से सन्ध्या।।
#नियमित_सन्ध्या_अनुष्ठान
#आर्यमहासंघ
@iamjasbirtanwar भाई अपने क्रोध को अभी लीजिए पाल।
नहीं चीख चिल्ला करो नहीं फुलावो गाल।
नहीं फुलावो गाल दिखाता यह मजबूरी।
लेकर कर सब साथ घटाओं निज की दूरी।
चल कर सारे साथ बुनो ऊँचे अब सपने।
दूजे आते साथ संग जब भाई अपने।।
देखो जूआ खेलकर, क्या होता है हाल।
धन सम्पत्ति मान संग, लुट जाती है खाल।
लुट जाती है खाल, निराशा होती भार��।
खुल जाती है पोल, मिटै चतुराई सारी।
इधर-उधर की छोड़, वेद की बात बिसेखो।
कर देता है नाश, समझ कर के मत देखो।।
राष्ट्रहित के लिए लगें सब बचें ना कोई।
आकर मिलें अनेक देख ठिठकें ना कोई।
सागर उठे जवार शान्त रहना ना अच्छा।
सर्वहित में लगें उधार रखना ना कोई।।
#स्वराज्य
अपनी बेटी बहन को, दो सैद्धांतिक ज्ञान।
जिससे सुरक्षा पूर्ण हो, और घटे नुकसान।।
और घटे नुकसान, विधर्मी सिर भी पटके।
बिन विद्या के सभी, उलट उल्लू से लटके।।
इधर उधर की छोड़, बनाओ वैदिक नपनी।
जग होगा सुख पूर्ण, घटेगी चिंता अपनी।।
#लवजिहाद