"I'm the type of people who feel hurt easily. Especially when I don't do anything wrong and people do the same against me, I can't overcome it so easily. But I will transform these bad feelings by showing my best. Take care of me kindly" —Kim Junmyeon
#수호#SUHO#준면#金俊勉
نايم ومتمدد وينظّر عليك:
ليش تتبرعون للبنان وايران وعايفين أيتام العراق ؟!
- عزيزي الـ "نص ردن"
بشهر رمضان وقبل أيام، شيعة الحسين أهل الكرم تبرعوا لأيتام العراق في مؤسسة العين بـ 35 مليار و 230 مليون دينار عراقي
تصرف على مشاريع الصدقة الجارية وعلاج الأطفال الأيتام
ونفسهم ذوله كافلين بمؤسسة العين أكثر من 100 ألف يتيم رواتبهم الشهرية توصل 10 مليار دينار
يعني بالسنة تقريبا 120 مليار
يستلمها اليتيم بماستر كارد وهو يم بيته مُعزز مُكرّم
فلو تسويلك شغلة بيها حظ، لو تعيف التنظير
وغلس الشغلة مو يمك
د ـ زيد الشريفي
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@Circcle4 ولا يهمك حبيبي اخويه البطل انته ولاعبينا الابطال عدنا اهم من كل قارة آسيا وبنظرنا تبقى انته هداف البطولة ولا يهمكم ان شاء الله نلتقي بكأس العالم ونثبت للكل منو همه أسود الرافدين
تشجع 💪
इजराइल जो कर रहा है उसकी वैश्विक निंदा होनी चाहिए और दुनिया भर के इंसाफ़ पसंद लोग यह कर भी रहें हैं। फलस्तीन के नागरिकों को महज़ चंद किलोमीटर के इलाके में समेट करके इजराइल धीरे धीरे सभी की निर्मम हत्या ��र रहा है। गाज़ा के लोगों को पीने तक का पानी मुहैया नहीं कराया जा रहा है, बिजली तक नहीं दी जा रही है। पूरी दुनिया के साम्राज्यवादी, पूंजीवादी ताकतवर लोग इजरायल के साथ खड़े है। ऐसा लगता है मानों यह दुनिया अपने वीभत्स रूप में हमारे सामने आ रही है। साम्राज्यवादी ताकतें अब सामने से खेल रही हैं, उन्होंने नैतिकता को त्याग दिया है। हर संस्थान, हर विधान जो दुनिया में शांति और न्याय की स्थापना के लिए बन��� था, ऐसा लगता है वह धोखा था। उसको बड़ी ताकतों ने इसलिए बनाया था ताकि वह अदृश्य रूप से कमज़ोर मुल्कों पर हुकूमत चला सकें। आपने एक 20 लाख की बसी बड़ी आबादी का पानी रोक दिया है, उनकी बिजली काट दी है, उनके इलाके में भारी बमबारी कर रहें हैं और उनके अस्पतालों को भी ढहा दे रहें हैं। आपके नरसंहार की मंशा एकदम स्पष्ट है। आप नहीं चाहते कि फलस्तीन का कोई नामों निशान रहे। इतिहास ऐसे तमाम किस्सों से पटा पड़ा है जब साम्राज्यवादियों को लगा कि वह सब मिटा देंगे लेकिन कितनी भी बर्बर हुकूमत आ जाए वह सच को नहीं मिटा सकती हां कुछ वक्त के लिए दबा ज़रूर सकती है। एक बादशाह ने सोचा था कि वह हज़रत हुसैन को शहीद करके अपने सामने की हर नैतिक चुनौती को ख़त्म कर देगा, लेकिन हुआ क्या? हुसैन और उनके साथी अपनी प्यास के साथ अमर हो गए। इसी तरह हम डंके की चोट पर कहना चाहते हैं कि फलस्तीन था, फलस्तीन है और फलस्तीन रहेगा। इंसान ख़त्म हो जाते हैं पर जो नहीं ख़त्म होती वह हैं स्मृतियां। हम अपनी रीढ़ में जज्ब कर लेंगे इजरायल के अत्याचार को और जाने से पहले सुना देंगे इन किस्सों को आने वाली पीढ़ियों को, कि कैसे अमरीका, ��जरायल, यूरोप जैसे मुल्कों ने एक बड़ी आबादी का नरसंहार किया। #IStandWithPalestinians