देश के छात्रों ने system के फैलाए अंधेरे के बीच, अपने डर का सामना कर, रौशनी की मशाल जलाई है।
ये मशाल अब पूरे देश को अपने अधिकारों का रास्ता दिखा रही है।
BJP-RSS और अडानी के System को अब खतम, tata, bye-bye कहने का वक्त आ गया है।
@BhaiPreetSingh मनुस्मृति को मान ते हो ना तुम अपने मुँह से संविधान की बात ना करो तो ही अच्छा है तुम्हारे लिए zen z को सब पता है अगर zen z बोलने लगे गा तो तू हगने लगेगा 😂
@BhaiPreetSingh अबे चूतिये जाके इतिहास पढ़ ले की अंग्रेज़ों के साथ क���न लोग थे जो अंग्रेज़ों की मुखबिरी करते थे
ये कोई नैरेटिव नहीं है ! यही सच्चाई है हज़म नहीं होगी
प्रधानमंत्री - आरएसएस से
गृह मन्त्री - आरएसएस से
परिवहन मन्त्री - आरएसएस से
लोकसभा स्पीकर - आरएसएस से
कृषि मन्त्री - आरएसएस से
रक्षा मन्त्री - आरएसएस से
��िजली मन्त्री - आरएसएस से
और अब शिक्षा मन्त्री - आरएसएस से
एक बात नहीं समझ आती, पदों पर नियुक्ति सरकार करती है या मोहन भागवत??
सब जानते हैँ आरएसएस एक जाहिल संस्थान है
फिर वहां से निकले लोग देश के सर्वोच्च पदों पर कैसे हैँ?? प्रहलाद जोशी को किसने चुना?
जवाब दीजिये 🤔
जंतर मंतर में भूख हड़ताल करने वाली नेहा ऐस ने अपने इंस्टाग्राम पर एक विडियो के जरिए कल पटना जाने का ऐलान किया!
उनका कहना है कि बिहार में चल रहे छात्र विरोधी दमन के ख़िलाफ कल में पटना आ रही हूँ!
हमार�� साथियों की रिहाई के बिना ये जीत अधूरी है, सरकार का छात्रों को दिया गया आश्वासन झूठ है!
क्या BJP सरकार ने स्टूडेंट्स के साथ फिर से धोखा किया है?
You are the one who has harmed the future of our youth the most.
You allowed and encouraged the total capture and destruction of our education system - and protected every person responsible for it.
The students’ demands are clear:
1. Sack Dharmendra Pradhan.
2. Apologise to the students.
3. Take action against those who assaulted them.
आपने ही हमारे युवाओं के भविष्य को सबसे ज़्यादा नुकसान पहुंचाया है।
आपने न सिर्फ हमारी education system पर पूरा कब्ज़ा होने और उसे बर्बाद होने दिया, उसे बढ़ावा भी दिया - और इसके ज़िम्मेदार हर व्यक्ति को संरक्षण दिया।
छात्रों की मांगें साफ़ हैं:
1. धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाएं।
2. छात्रों से माफ़ी मांगे।
3. छात्रों के साथ हिंसा करने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करें।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अपनी प्रेस कांफ्रेंस में कहा- जो पुलिस वाले मुझे घसीटकर ले जा रहे थे, वही मुझसे कान में कह रहे थे- ''इस सरकार को हटाइए''
@RahulGandhi
ये डेमोक्रेसी है!😳😲
पुलिस उनकी है, डंडे उनके है, सिस्टम उनका है सब-कुछ उनका है ।
तनख्वाह से पैसा कटता है ना, 100 रुपये कमाती हूं तो 30 रुपये देती हूं ना, फिर क्या होता है उसका, ये होता है।
आप लोग मेरे बच्चों को डंडे मारोगे सिर्फ इसलिए कि वो अपना हक मांग रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी भारत के इतिहास के सबसे युवा-विरोधी प्रधानमंत्री हैं - इतने युवा विरोधी कि एक नाकाम शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी नहीं ले सकते।
152 पेपर लीक। 7.5 करोड़ छात्र पीड़ित। और सज़ा एक दोषी को भी नहीं। सजा किसे मिली? मेहनती युवाओं को।
और जब इन बच्चों ने शिक्षा के जायज़ सवाल उठाए - तो जवाब में मिली लाठी और हिरासत। लीक करने वाले अपराधी आज़ाद - और वाजिब मुद्दे उठाने वाले छात्र घसीटे जाते हैं, पीटे जाते हैं।
यह सरकार सिर्फ़ युवाओं को नाकाम नहीं कर रही - उनपर टूट पड़ी है।
एक ऐतिहासिक घड़ी के गवाह बन रहे हैं।
आज संसद की ओर जाने वाली हर सड़क पर युवा हैं। पचास साल बाद उन्होंने फिर याद दिलाया है - संसद का ��ास्ता सड़क से होकर जाता है।
#संसद_मार्च #DharmendraPradhanResign
नागपुर में भी लोगों ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगा,
अब युवाओं के भविष्य बचाने की क्रांति की लौं पूरे देश में फैल चुकी है।
#DharmendraPradhanResign
सोनाक्षी सिन्हा ने सोनम वांगचुक के समर्थन में आज फिर वीडियो जारी किया है . दिल्ली पुलिस के रवैये पर एतराज जताया है . बहादुर लड़की है .
बॉलीवुड के बड़े - बड़े एक्टर्स मौन क्यों साधे हैं ? सबकी ज���बान पर ताला है .
लानत है .
पहली बार किसी रिपोर्टर को ' इंकलाब
ज़िंदाबाद ' जैसे नारे पर एतराज करते देख रहा हूं.
ABP न्यूज की इस रिपोर्टर को इंक���ाब ज़िंदाबाद जैसे नारे से दिक्कत है ?
टीवी चैनल का माइक थामने से पहले थोड़ी बहुत तो पढ़ाई की होगी ?
या बस ऐसे ही ?
आज़ादी की लड़ाई के वक्त हसरत मोहानी ने पहली बार ये नारा दिया था. भगत सिंह जैसे देशभक्त ये नारा लगाया करते थे . आज भी सत्ता और सिस्टम के खिलाफ सबसे बुलंद नारा है - इंकलाब जिंदाबाद
Popular Marathi actor Sayaji Shinde urges the Government to engage in dialogue with @Wangchuk66
Prominent citizens from all over India are uniting and speaking in one voice to demand accountability