आदरणीय बहन कुमारी मायावती जी, और आकाश आनंद के बिना इतनी भीड़ है।
गोरखपुर में #बसपा की विशाल जनसभा, चिल्लू पार सीट से #अस्मिता_चांद को बनाया अपना प्रत्याशी, लाखों की संख्या में पहुंचे लोग।
@Mayawati@AnandAkash_BSP
आज दिनांक 24-08-2026 को जनपद बहराइच में पार्टी के जिम्मेदार पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं के साथ सेक्टर बूथ समीक्षा के संदर्भ एक अतिमहत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई जिसमें शामिल हुआ।
#जयभीम#मिशन_2027#BSP#बहराइच
देश मे हेल्थ बजट 106570 करोड़ लगभग और उत्तरप्रदेश मे 37956 करोड़ जो की हेल्थ और मेडिकल पर ही खर्चा होता है और उसके बाद एक नागरिक की मौत अयोध्या में स्ट्रेचर समय पर ना मिलने पर हो जाति है दुर्भाग्य है देश का. स्वास्थ्य मंत्री जी अपना विभाग छोड़कर आरक्षण खत्म करने में लगें हैँ.स्वास्थ मंत्री जी को अपना विभाग बदलवा लेना चाहिए. या इस्तीफा देना चाहिए.जय भीम जय भारत
⚠️TW: Graphic & Disturbing Media⚠️
पुलिस के चश्मे से ये "स्कूटी एक्सीडेंट" है?
दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव को एसएसपी आफिस और एसओजी आफिस में बुरी तरह पीटा गया. करीब 12 घंटे बंधक बनाकर थर्ड डिग्री दी गयी. मामला खुला तो पुलिस ने बताया कि दोनों स्कूटी से गिर गये थे. तभी कुछ तस्वीरें सामने आयी.. ऐसी तस्वीरें जो ��ूह कंपा दे. पीठ पर लाठियों के निशान, पुलिस बूटों से आंख फोड़ दी गयी. पैरों को बांधकर तलवों को लाठियों और फट्टों से पीटा गया.
सबूत देख लीजिए-
📍मेरठ, उत्तर प्रदेश
संविधान सभा की अल्पसंख्यक समिति में आरक्षण पर निर्णय हुआ था। राजनीतिक आरक्षण को छोड़कर, अन्य सभी आरक्षणों के लिए समय-सीमा के विपक्ष में निर्णय हुआ था। इसलिए आरक्षण के लिए संविधान में कोई समय-सीमा नहीं है। बहुजन आरक्षण के लिए ‘आर्थिक’ और ‘जरूरतमंद’ जैसे शब्द भी संविधान में नहीं हैं। झूठे प्रचार के माध्यम से आरक्षण-विरोधी आरक्षण का आधार ही बदलना चाहते हैं।
1. दिल्ली के जंतर मंतर पर संविधान में एस.सी., एस.टी. व ओ.बी.सी. समाज को दिये गये आरक्षण के विरुद्ध अभी हाल ही में जमा हुये कुछ लोगों द्वारा आर्थिक आधार पर आरक्षण को लागू करने की उठाई गई यह नई माँग कतई भी उचित व देशहित में नहीं है। उन्हें आरक्षण के सम्बंध में ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिये जिसस�� समतामूलक समाज, विकसित व सम्मानित देश बनाने के संवैधानिक कार्यों को आघात पहुँचे।
2. वैसे भी देश में सदियों से जातिवाद की अमानवीयता का शिकार रहे एस.सी., एस.टी. व ओबीसी समाज के लोगों हेतु संविधान में की गई आरक्षण की व्यवस्था के बारे में परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर का यह कहना था कि ’जातिवाद का परित्याग ही सबसे बड़ी देशभक्ति है’। अतः लोग सही देशभक्ति का परिचय ज्यादा दें तो यही उचित होग��।
3. जहाँ तक आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की बात है, तो केन्द्र व राज्य सरकारों द्वारा भी ग़रीबी उन्मूलन के एक नहीं बल्कि अनेकों कार्यक्रमों पर काफी सरकारी धन हर वर्ष ख़र्च किया जाता है, किन्तु उसमें व्याप्त भ्रष्टाचार आदि के कारण इसका सही लाभ अगर देश के लोगों को नहीं मिलता है तो यह तो सरकारी व्यवस्था का सीधा-सीधा दोष है।
4. इसके अलावा, आर्थिक आधार पर आरक्षण की नई व्यवस्था भी देश में लागू है, जिसका भी सही लाभ अपरकास्ट समाज के ग़रीब परिवारों को नहीं मिल पा रहा है बल्कि इसमें छलावा अधिक है।
5. वास्तव में ख़ासकर यही वह भ्रष्ट व जातिवादी सरकारी व्यवस्था है जिसने आरक्षण के संवैधानिक रचनात्मक प्रावधान को कभी सही से ज़मीन पर लागू ही नहीं होने दिया है, जिस कारण एससी, एसटी व ओबीसी समाज के लोग, आज़ादी के इतने लम्बे अरसे के बाद आज तक भी, ग़रीबी, जातिवादी द्वेष, शोषण, अत्याचार व जातिवाद के ज़हर का दंश ���र दिन हर स्तर पर लगातार झेलते रहते हैं।
6. अतः सभी सरकारें भी आरक्षण विरोधी तत्वों को शरण व संरक्षण बिल्कुल भी ना दें तो यह व्यापक देश व जनहित में होगा। लोगों से भी अपील है कि वे आरक्षण जैसे अहम् एवं संवेदनशील मुद्दे पर सस्ती राजनीति ना करें और ना ही होने दें।
7. हालाँकि उसी ही दिन पार्लियामेन्ट थाना के बाहर एक पीड़ित व्यक्ति के मामले में एफआईआर दर्ज कराने के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता श्री र���हुल गाँधी कई घन्टों तक धरने पर बैठे रहे, जिसका पार्टी को कोई ऐतराज़ नहीं है।
ऽ लेकिन उसके बग़ल में जंतर-मंतर पर दल���त व शोषितों के जातीय आधार पर दिये जाने वाले आरक्षण को ख़त्म करवाने के लिए धरना-प्रदर्शन भी चल रहा था, वहाँ पर वे व उनका कोई भी कांग्रेसी साथी उन्हें समझाने तक के लिये भी नहीं गये, जिससे इन वर्गों के प्रति इनकी आरक्षण विरोधी मानसिकता अभी भी साफ झलकती है।
देश के युवाओं की यह हालत सरकार ने की ना शिक्षा दे पायी ना ही रोजगार.सरकार ने सिर्फ अमीरों पर ही नजरें इनायत रखीं.उनके लिये देश के खजाने के साथ-2 सारे संसाधनों को बाँट दिया.2200 करोड़ रूपये चंद घरानो को R&D और chip इनोवाशन के नाम पर बांट दिये और अब ISRO भी खत्म प्लान पक्का है.
बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अ��्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री आदरणीया सुश्री बहन कुमारी @Mayawati जी ने पूरे उत्तर प्रदेश में सर्वसमाज के इलाज के लिए बहुत ही शानदार पहल की थीं।
जब भी मुफ्त चिकित्सा की बात आती है तब ध्यान एकाएक बहनजी की ऐसी योजना पर चला जाता है जो पूरे भारत मे सबसे पहले लागू हुई। अथार्त एक "चलता फिरता अस्पताल"
एक्सीडेंट हुआ। कॉल करी। एम्बुलेंस आई। अस्पताल लेकर गयी। यह मरीज को उठाने से लेकर अस्पत���ल ले जाने के बीच का समय इतना महत्वपूर्ण होता है कि अधिकतर मौत इसी बीच मे हो जाती है। इसलिए बहनजी ने इस समस्या के निदान के लिए एक चलता फिरता अस्पताल ही बना दिया जो भारत में पहली बार विकसित देशों की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में बहनजी ने लागू किया।
मेरा पूर्व का लेख
*************
बहनजी द्वारा शुरू चलता फिरता अस्पताल जिसे श्री अखिलेश ने कबाड़ा बना दिया।
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उत्तर प्रदेश में वर्ष 2010 में बहन कुमारी मायावती जी ने "आधुनिक सुविधाओं से परिपूर्ण मुख्यमंत्री महामाया सचल अस्पताल योजना" चलाई थी, जो की एक चलता फिरता अस्पताल था. इस योजना के अंतर्गत एक बड़ी एम्बुलेंस में डॉक्टर सहित स्टाफ होता था जो;
1.एंबुलेंस के अंदर अल्ट्रासाउंड के साथ चिकित्सकीय परामर्श एवं प्राथमिक उपचार,
2.प्रसव पूर्व एवं प्रसव बाद स्वास्थ्य परीक्षण तथा आवश्यक दवाओं का वितरण।
3.किशोरवय बालिकाओं की स्वास्थ्य जांच तथा यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्��� शिक्षा,
4.मलेरिया एवं टीवी ज���ंच हेतु रक्त पट्टी संग्रहण, टीकाकरण एवं दवाइयों का वितरण।
5.परिवार नियोजन के विभिन्न माध्यमों के संबंध में जानकारी।
6.गम्भीर रोगियों को इस एम्बुलेस में भर्ती करके, उसे अस्पताल तक लेजाया जाता था. जब तक अस्पताल तक न पहुच जाए तब तक मरीज की देखभाल एम्बुलेंस के अंदर मोजूद डॉक्टर अपनी टीम के साथ करते थे.
अब इसकी मोनिटरिंग भी सीधा लखनऊ से होती थी.
अब इस चलते फिरते अस्पताल को अखिलेश यादव जी ने खर्चीला बताकर 2013 में पूर्ण तौर से बंद कर दिया. योगी सरकार तक इसे ले जाया ही नही गया अथार्त उससे पहले ही शटर डाउन।
इसके अलावा'
"आज कुछ समय पहले में इत्तेफाक से सहारनपुर के पिलखनी के पास बहनजी द्वारा बनवाए गये मेडिकल कॉलेज से गुजर रहा था. बहनजी ने इस मेडिकल कॉलज को बनाकर सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, के अलावा हरियाणा के सीमावर्ती जिले यमुनानगर, करनाल, व हिमाचल के पोटेशाह व् अन्य एरिया की कुल 50 लाख आबादी को सौगात दी थी. इसका 70% कार्य पूरा होते समय बहनजी की सरकार चली गयी, अखिलेश ने आते ही इसे बंद कर दिया, हाँ, इसका नाम मान्यवर कांशीराम बदल दिया गया इसकी वजह से बीजेपी विधानसभा व 2014 का लोकसभा चुनाव एससी वोटो से जीत गयी. आज भी सहारनपुर के लोग 100 किलोमीटर जोलिग्रांत, 140 किलोमीटर चंडीगढ़, या 150 किलोमीटर ऋषिकेश जाकर अपना इलाज करवाते है जबकि बहनजी ने उनके लिए ���त्याधुनिक यंत्रो से लेस मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था की थी, जो अखिलेश की व्यक्तिगत चिढ़ जो कि बहनजी की योजनाओं के प्रति थी ने इस एरिया के 50 लाख लोगो से उच्च स्तर की मेडिकल सुविधा को छीन ली"
अगर किसी को पिछले 20 सालो की सरकारों का तुलना करनी है तो कम से कम बहनजी द्वारा शुरू की गयी चिकित्सा सेवाओ, सामुदायिक केन्द्रों, अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों व एम्बुलेंस की तुलना अखिलेश सरकार में शुरू की गयी चिकित��सा सेवाओ से करनी चाहिए. मा��्र कह देने से नही चलेगा.
(उत्तर प्रदेश का चलता फिरता मिनी अस्पताल अखिलेश राज में किस प्रकार जर्जर कर दिया गया, यह तश्वीर बता सकती है)
विकास कुमार जाटव @vkjatav84 भैया
1. जैसाकि सर्वविदित है कि समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख द्वारा अपनी पुरानी सहयोगी पार्टी राष्ट्रीय लोकदल व उस पार्टी के नेता केन्द्रीय मंत्री के बारे में यह सार्वजनिक बयान देना कि ’हमने इनको चवन्नी से रुपया बना ���िया है’, यह कहना पूर्णतः अमर्यादित, अशोभनीय व अति-शर्मनाक है तथा इस प्रकार की अहंकारी व अलोकतांत्रिक बयानबाज़ी के लिये उन्हें उस पार्टी से व उनके नेता से ही नहीं बल्कि स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह जी के परिवार का अपमान करने हेतु पूरे जाट समाज से भी अविलम्ब माफी माँगनी चाहिये तो यह उचित होगा।
2. वैसे देश की राजनीति में सपा का चाल, चरित्र व चेहरा अपने विरोधी पार्टियों के लिये ही नहीं बल्कि अपने सहयोगियों के लिये भी हमेशा से राजनीतिक संकीर्णता व जातिवादी द्वेष आदि से ग्रसित ज़्यादातर अप्रिय और अविश्वसनीय ही रहा ��ै, जिस कारण इसका राजनीतिक एवं चुनावी लाभ भी अक्सर मौक़ों पर भाजपा ही उठाती रही है और सेक्युलर ताक़तें कमज़ोर होती रहीं हैं।
3. इस पार्टी के इसी प्रकार के अति-अहंकारी स्वाभाव के कारण पहले सन् 1993 में, यू.पी. में श्री मुलायम सिंह यादव के साथ सपा व बसपा का बना गठबन्धन जल्दी ही टूट गया, जिसके फलस्वरूप दिनांक 2 जून 1995 को मेरी हत्या करने के षडयन्त्र के तहत् मेरे विरुद्ध कुख्यात लखनऊ स्टेट गेस्ट हाऊस काण्ड हुआ।
और फिर आगे चलकर इनके बेटे श्री अखिलेश यादव द्वारा, इनके पिता की तरह पुरानी ग़लतियों को फिर से ना दोहराने का आश्वासन देते हुये, लोकसभा का चुनावी गठबन्धन हुआ जो चुनाव का नतीजा इनके अनुरुप ना आने की वजह से कुछ समय के बाद ही बी.एस.पी. के प्रति इनके अहंकारी व स्वार्थी आदि रवैये के कारण फिर यह गठबन्धन भी टूट गया, क्योंकि परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के आत्म-सम्मान व स्वाभिमान के कार���ाँ वाली पार्टी ��ी.एस.पी. व उसकी नेतृत्व ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की सर्वसमाज हितैषी अम्बेडकरवादी नीतियों व सिद्धान्तों से कदापि विमुख नहीं हो सकती है।
4. अब संक्षेप में यही कहना है कि यह पार्टी (सपा) गठबन्धन के मामले में केवल अपना काम निकालना जानती है और अपना काम निकलते ही फिर यह पार्टी गिरगिट की तरह अपना रंग बदल लेती है तथा दूसरी पार्टी के बारे में अनाप-शनाप भाषा का भी ख़ूब इस्तेमाल करती रहती है, जो कि य�� सपा का पुराना रवैया है। ऐसे में सर्वसमाज के लोग सपा की संकीर्ण व जातिवादी राजनीति से ज़रूर सावधान रहें।
5. इसके साथ ही, यह बात भी जग-ज़ाहिर है कि सपा मुखिया श्री अखिलेश यादव अपने राजनैतिक स्वार्थ के लिए अपने PDA में से P को कभी पिछड़ा वर्ग, तो कभी P को पण्डितों का हितकारी बता देते हैं, जबकि इनके बारे में सच्चाई तो यह है कि वे पिछड़े वर्गों में अपनी ख़ुद की जाति के अलावा बाकी पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्य���ों तथा अपरकास्ट समाज में से ख़ासकर ब्राह्मण समाज के भी क़तई ��ितैषी नहीं रहे हैं।
6. इतना ही नहीं बल्कि इस पार्टी (सपा) की सभी रही सरकारों में दलितों, पिछड़ों, अक़लियतों, अपरकास्ट समाज में से विशेषकर ब्राह्मण समाज का भी काफी शोषण व उत्पीड़न आदि किया गया है तथा ना ही इनके हितों में कोई भी सकारात्मक क़दम उठाये गये हैं, बल्कि इनकी सरकार में वास्तव में केवल गुण्डों, बदमाशों, माफियाओं व अन्य अराजक तत्वों का ही भला हुआ है और साथ ही इनकी सरकार में दिन-छिपने के बाद हमारी बहिन-बेटियाँ भी घर से बाहर नहीं निकल सकती थीं। ऐसे में सर्वसमाज के लोग यू.पी. आगामी विधानसभा आमचुनाव में इस पार्टी (सपा) को सत्ता में क़तई भी ना आन दें, जो यह उनके हित में होगा।
जब भी मुफ्त चिकित्सा की बात आती है तब ध्यान एकाएक बहनजी की ऐसी योजना पर चला जाता है जो पूरे भारत मे सबसे पहले लागू हुई। अथार्त एक "चलता फिरता अस्पताल"
एक्सीडेंट हुआ। कॉल करी। एम्बुलेंस आई। अस्पताल लेकर गयी। यह मरीज को उठाने से लेकर अस्पताल ले जाने के बीच का समय इतना महत्वपूर्ण होता है कि अधिकतर मौत इसी बीच मे हो जाती है। इस���िए बहनजी ने इस समस्या के निदान के लिए एक चलता फिरता अस्पताल ही बना दिया जो भारत में पहली बार विक��ित देशों की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में बहनजी ने लागू किया।
मेरा पूर्व का लेख
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बहनजी द्वारा शुरू चलता फिरता अस्पताल जिसे श्री अखिलेश ने कबाड़ा बना दिया।
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उत्तर प्रदेश में वर्ष 2010 में बहन कुमारी मायावती जी ने "आधुनिक सुविधाओं से परिपूर्ण मुख्यमंत्री महामाया सचल अस्पताल योजना" चलाई थी, जो की एक चलता फिरता अस्पताल था. इस योजना के अंतर्गत एक बड़ी एम्बुलेंस में डॉक्टर सहित स्��ाफ होता था जो;
1.एंबुलेंस के अंदर अल्ट्रासाउंड के साथ चिकित्सकीय परामर्श एवं प्राथमिक उपचार,
2.प्रसव पूर्व एवं प्रसव बाद स्वास्थ्य परीक्षण तथा आवश्यक दवाओं का वितरण।
3.किशोरवय बालिकाओं की स्वास्थ्य जांच तथा यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य शिक्षा,
4.मलेरिया एवं टीवी जांच हेतु रक्त पट्टी संग्रहण, टीकाकरण एवं दवाइयों का वितरण।
5.परिवार नियोजन के विभिन्न माध्यमों के संबंध में जानकारी।
6.गम्भीर रो��ियों को इस एम्बुलेस में भर्ती करके, उसे अस्पताल तक लेजाया जाता था. जब तक अस्पताल तक न पहुच जाए तब तक मरीज की देखभाल एम्बुलेंस के अंदर मोजूद डॉक्टर अपनी टीम के साथ करते थे.
अब इसकी मोनिटरिंग भी सीधा लखनऊ से होती थी.
अब इस चलते फिरते अस्पताल को अखिलेश यादव जी ने खर्चीला बताकर 2013 में पूर्ण तौर से बंद कर दिया. योगी सरकार तक इसे ले जाया ही नही गया अथार्त उससे पहले ही शटर डाउन।
इसके अलावा'
"आज कुछ समय पहले में इत्तेफाक से सह���रनपुर के पिलखनी के पास बहनजी द्वारा बनवाए गये मेडिकल कॉलेज से गुजर रहा था. बहनजी ने इस मेडिकल कॉलज को बनाकर सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, के अलावा हरियाणा के सीमावर्ती जिले यमुनानगर, करनाल, व हिमाचल के पोटेशाह व् अन्य एरिया की कुल 50 लाख आबादी को सौगात दी थी. इसका 70% कार्य पूरा होते समय बहनजी की सरकार चली गयी, अखिलेश ने आते ही इसे बंद कर दिया, हाँ, इसका नाम मान्यवर कांशीराम बदल दिया गया इसकी वजह से ��ीजेपी विधानसभा व 2014 का लोकसभा चुनाव एससी वोटो से जीत गयी. आज भी सहारनपुर के लोग 100 किलोमीटर जोलिग्रांत, 140 किलोमीटर चंडीगढ़, या 150 किलोमीटर ऋषिकेश जाकर अपना इलाज करवाते है जबकि बहनजी ने उनके लिए अत्याधुनिक यंत्रो से लेस मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था की थी, जो अखिलेश की व्यक्तिगत चिढ़ जो कि बहनजी की योजनाओं के प्रति थी ने इस एरिया के 50 लाख लोगो से उच्च स्तर की मेडिकल सुविधा को छीन ली"
अगर किसी को पिछले 20 सालो की सरकारों का तुलना करनी है तो कम से कम बहनजी द्वारा शुरू की गयी चिकित्सा सेवाओ, सामुदायिक केन्द्रों, अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों व एम्बुलेंस की तुलना अखिलेश सरकार में शुरू की गयी चिकित्सा सेवाओ से करनी चाहिए. मात्र कह देने से नही चलेगा.
(उत्तर प्रदेश का चलता फिरता मिनी अस्पताल अखिलेश राज में किस प्रकार जर्जर कर दिया गया, यह तश्वीर बता सकती है)
विकास कुमार जाटव
@Mayawati
@AnandAkash_BSP
@ramjigautambsp
जंतर-मंतर पर राजपूत लड़कियों के साथ धक्का मुक्की व छेड़खानी करने वाले लफंगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
नेहा दास, हर्ष दुबे, अनुराधा तिवारी, अजीत भारती.. किसी ने भी इस घटना पर एक शब्द नहीं बोला। वाह!
दलित समुदाय ने अनेकों बार भारत बंद ��ैसे प्रोटेस्ट किए हैं, जिसमें लाखों लड़कियां भी शामिल हुई हैं। चाहे 2 अप्रैल 2018 का भारत बंद रहा हो या 2019 का गुरु रविदास गुरुघर बचाओ आंदोलन या फिर 2024 का SC-ST उपवर्गीकरण आंदोलन... हमने अनेकों राष्ट्रीय स्तर के प्रोटेस्ट किए हैं और हमारे आंदोलनों में अलग-अलग जगहों से हजारों लड़कियां शामिल होती हैं, लेकिन कहीं भी छेड़खानी जैसी घटना नहीं होती है, क्योंकि हम बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों पर चलने वाले लो��� हैं। ��ड़कियों एवं महिलाओं का सम्मान करते हैं।
अभी हाल ही में CJP के प्रोटेस्ट में हजारों लड़कियां शामिल हुई थीं। छात्रों ने किसी भी छात्रा के साथ बदसलूकी नहीं की। छात्राओं ने वीडियो बनाकर Gen Z लड़कों का धन्यवाद किया कि उन्होंने उनके साथ कितना अच्छा व्यवहार किया। पुलिसिया लाठीचार्ज होने पर वे ढाल की तरह उनकी सुरक्षा में खड़े हो गए। पुलिस द्वारा लड़कियों के साथ मारपीट, दुर्व्यवहार एवं sexual assault के भी व���डियो सामने आए, लेकिन किसी भी छात्र ने किसी लड़की के साथ बदसलूकी नहीं की।
फिर आज जंतर मंतर पर आरक्षण विरोधी आंदोलन करने वाले द्विज हिंदुओं के कार्यक्रम में राजपूत समुदाय की लड़कियों के साथ बदतमीजी क्यों की गई? एक लड़की अपनी मां की कसम खाकर बता रही है कि उसे किस तरह छुआ गया। आलम यह था कि जाहिलों की भीड़ उस पर टूट पड़ी। लिहाजा उन्हें कार्यक्रम से बाहर निकलना पड़ा। राजपूत समाज के लोगों को ऐसा कृ���्य करने वाले लफंगों पर कार्रवाई करनी चाहिए।
दरअसल, ये लोग कोई आंदोलन नहीं ��ला रहे हैं। इनका बस एक एजेंडा है कि किस तरह SC-ST-OBC के खिलाफ जहर उगलकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक सकें।
बेचारे आरक्षण हटाओ आंदोलन चला रहे थे,
दिल्ली पुलिस ने इन्हें ��ी घसीटकर हटा दिया। 🤣🤣
प्रधान जी तो अपना भाषण और मीडिया बाइट की हवाबाजी करके पहले ही निकल लिए। अब क्रांति कौन लाएगा बे?
This is the time for the BSP to hold a massive pro-reservation rally at Delhi’s Ramlila Maidan in mid-September.
Believe me, this could be the moment for BSP to return to its own politics. And the answer to the question, “Modi ke baad kaun?” could emerge from this rally itself.
दिल्ली देवली में समता के साये में नीले अंबर के नीचे #नीला_झंडा_हाथी_निशान का #ध्वज लेकर निरंतर, निर्बाध और निस्वार्थ चलने वाले मान्य बहनजी के सच्चे कार्यकर्ता व सिपाही श्री हरकिशन जी हमारे बीच नहीं रहे।
ऐसे महान बीएसपी सिपाही मान्यवर हरिकिशन ब���बा जी को हृदय से कोटि कोटि नमन.
एक बार मुझे हरिकिशन जी के इंटरव्यू का मौका मिला गुरुद्वारा रकाबगंज रोड पर!
मैंने उनसे पूछा कि यहां तक कैसे आए क्या साधन लिया तो उन्होंने बताया कि वह 13-14 किलोमीटर पैदल ही आ गए!
बाबा साहब और मान्यवर कांशीराम साहब के ऐसे ही निस्वार्थ सिपाहियों का ऋण चुकाना है 2027 में
बेरोज़गारी, युवाओं-छात्रों, Gen Z, स्कूली बच्चों यानी Gen Alpha और बाढ़ से हो रही जान-माल की हानि जैसे वास्तविक जनहित के मुद्दों पर सरकारें ध्यान दें और फालतू बकवास बंद करें। ~ मायावती जी