BA MA MBA
37Yr Experience of Police Service
Ntl. Award Achievers,
Sanyojak JSM Delhi
National Gen Sec ABGAS Delhi
State Patron of Ntl NGO
Renowned Social Worker
"राजनीति और सहानुभूति के शिकार CAPF के पदाधिकारियों के लिए मुश्किल की घड़ी" ---
केंद्र सरकार के सशस्त्र बलों के पदाधिकारीयों का करियर प्रोग्रेशन हमेशा से अनिश्चितताओं का शिकार रहा है।
CAPF को शीर्ष नेतृत्व प्रदान करने वाले अधिकारियों को बहुत कम समय के लिए नेतृत्व का दयीत्व प्राप्त होता है इसलिए उन सभी अधिकारियों का ध्यान केवल उनके अपने पोस्ट रिटायरमेंट कैरियर प्रबंधन पर केंद्रित होकर रह जाता है। उनको किसी भी बल या बलकलर्मियों के साथ कोई भावनात्मक लगाव नहीं होता है जबकि बल का नाम ऊंचा रखने के साथ साथ बलकलर्मियों का मनोबल सदैव उंचा रखने के लिए यह एक बहुत ही निर्णायक और महत्वपूर्ण पहलू है।
विषम परिस्थितियों में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सीमा प्रबंधन, आतंकवाद, नक्सलवाद व उग्रवाद के विरुद्ध सैन्य अभियान, राज्यों के संवेदनशील क्षेत्रों में विधी व्यवस्था कायम करना, शांति पूर्ण तरीके से चुनाव सुनिश्चित करना, वीआईपी सुरक्षा जैसे दायित्वों के बीच संघर्ष और चुनौतियों से भरे कार्य इनके लिए हमेशा संकट की स्थिति जैसी होते हैं।
CAPF कैडर के ��दाधिकारीयों का अपने परिवार, अपने सगे संबंधियों और समाज से छः छः महीनों तक दुर रहकर अपनी ड्यूटी तथा घरगृहस्थी व सामाजिक दायित्वों के निर्वहन में संतुलन बनाए रखना इनके लिए बहुत ही चुनौतीपूर्ण कार्य हैं। ये सब परिस्थितियां इनके दैनिक जीवन में तनाव का मुख्य कारण बनती हैं।
देश की सीमा पर अपने राष्ट्र की शान तीरंगा की रक्षा करते करते सशस्त्र बलों के ये पदाधिकारी एक दिन स्वयं देश की आन बान और शा��� के लिए अपने प्राणों की आहुति दे देते हैं तथा उसी तीरंगे से लिपट कर इन्हें इस दुनिया से विदा हो जातें हैं
इन जांबाज देशभक्तों द्वारा इतना सारा त्याग करने के बावजूद भी भारत सरकार के शीर्ष नेतृत्व का भावनात्मक ध्यान इनकी तरफ नहीं जा रहा है।
सरकार द्वारा इन्हीं के विरुद्ध CAPF (सामान्य प्रशासन) एक्ट, 2026 के नाम से एक काला कानून लागू किया गया है जो किसी भी तरह से न्यायोचित व तर्कसंगत नहीं ��ै।
इसलिए सरकार को उस काले कानून को तत्काल रद्द करते हुए इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय को लागू करना चाहिए ताकि CAPF में कार्यरत पदाधिकारियों का दैनिक जीवन एवं भविष्य संतोषप्रद हो तथा इनका अपने सरकार के प्रति भरोसा और विश्वास कायम हो सके।
जय हिन्द, जय भारत, जय सीएपीएफ।
Visited Nizamuddin Railway station, New Delhi on 24th May'26 at 2355hrs to oversee the departure of our friends to different destinations after completion of Historical function at Lal kila Ground.
जय भगवान बिरसा मुंडा जी,
जय बड़ादेव,
जय जोहार!
आज 09 जून 2026 कोजल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए विदेशी हुकूमत के दांत खट्टे करने वाले, महान स्वतंत्रता सेनानी और आ��िवासी अस्मिता के प्रतीक,अबूआ दिशुम रे अबूआ राज" (हमारे देश में हमारा राज) के प्रणेता महान क्रांतिकारी, धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा जी के सहादत दिवस पर हम उनको शत् शत् नमन करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित है💐🙏✨
भगवान बिरसा मुंडा जी ने न सिर्फ अन्याय और शोषण के खिलाफ उलगुलान (क्रांति) का शंखनाद किया, बल्कि समाज को कुरीतियों से मुक्त कराकर एक नई चेतना भी दी। उनके विचार और उनका अदम्य साहस हमें हमेशा अपनी धर्म, संस्कृति, सभ्यता, परंपरा, रीति-रिवाजों, समृद्ध इतिहास और अधिकारों के लिए लड़ना सिखाता रहेगा। 🏹🌿
Delhi: Ahead of the “Janjati Sanskriti Samagam” scheduled for the 24th, State Coordinator of the Janjati Suraksha Manch Ashok Kumar Gond says, "May 24, 2026, is going to be a historic, unique, remarkable, and extraordinary day..."
CAPF के सैनिकों के लिए भारत के मुख्य- मुख्य सभी ट्रेनों में विशेष आरक्षित कोच की व्यवस्था ----- ---- ---
आदरणीय प्रधानमंत्री जी,
आदरणीय गृहमंत्री जी, एवं
आदरणीय रेल मंत्री जी,
विदित है कि देश में जितनी संख्या *भारतीय सेना* की है उतनी ही संख्या लगभग CAPF के सैनिकों की है,
जितने हार्डशीप में भारतीय सेना अपने दायित्वों का निर्वहन करती है उतने ही हार्डशीप में लगभग CAPF के सैनिक भी काम करते हैं।
देश के एक छोर से दूसरे छोर तक जितना मूवमेंट भारतीय सेना का होता है उससे कहीं ज्यादा मूवमेंट CAPF के सैनिकों को करना पड़ता है���
लेकिन दोनों संगठनों के मूवमेंट के हालातों में जमीन आसमान का अंतर है।
भारतीय सेना के जवान निश्चिंत होकर आरामदायक, सहज व सरल तरीके से बिन किसी कष्ट के यात्रा करते हैं क्योंकि उनके लिए देश के सभी ट्रेनों में भारत सरकार द्वारा विशेष आरक्षित कोच की व्यवस्था की गई है
जबकि CAPF के सैनिकों के लिए इस प्रकार की कोई व्यवस्था नहीं है। इसलिए CAPF के जवान यात्रा के दौरान सबसे ज्यादा असहज, असुरक्षित, कष्ट और ��नाव ग्रस्त महसूस करते हैं।
जब भी कोई CAPF के जवान ट्रेन में छुट्टी या ड्यूटी के लिए सफर करते हैं तो उनको सीट कन्फर्म ना होने की वजह से बहुत ही कष्ट और परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
उन्हें पूरी रात एक बर्थ या बैठने की जगह पाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
लम्बे सफर में खड़े होकर या नीचे बैठकर रात काटना बहुत मुश्किल होता है।
कभी कभी तो उन्हें ट्रेनों में शौचालयों के सामने बैठकर यात्रा पूरी करनी पड़ती है।
इसलिए उपरोक्त सभी निर्णायक मंडल से विनम्र आग्रह है कि
रेल मंत्रालय द्वारा कम से कम मुख्य-मुख���य मार्गों पर सभी ट्रेनों में CAPF जवानों के लिये एक विशेष आरक्षित कोच की व्यवस्था होनी चाहिए ताकि जिन सैनिकों का रिजर्वेशन नहीं हो पाता है या जिन्हें रिज़र्व टिकट नहीं मिल पाता है वो सैनिक आराम से, सहजता के साथ तनाव रहित होकर सुरक्षित तरीके से अपनी यात्रा पूरी कर सकें।
जय हिंद, जय भारत, जय सीएपीएफ।
@RailMinIndia
Making provision of marking Coach No. (e.g. H1, A1, A2, A3 etc) inside the coaches of each train at a prominent place.
Dear Mr Railway Minister,
Greetings of the day.
This morning I arrived at Hajrat Nizamuddin Railway station from Jabalpur by JBP NZM SF EXP (A1-21). I found a lady with two kids and luggage boarded the train in the wrong coach struggling to find the coach in which her seat was reserved but no one was able to guide her to move in the right direction inside the train.
Had the coach number been marked with airo showing the number of next coach with Arrow signage, it would have been helpful to the lady to choose the correct direction of her movement.
To overcome such situations, your R&D team must think on this issue.
I know, it is difficult work but not impossible.
Where there is a will, there is a way.
Common people requested to think of this problematic issue and express your views.
Making provision of marking Coach No. (eg H1, A1, A2, A3 etc) inside the coaches of each train at a designated place.
Dear Mr Railway Minister,
Greetings of the day.
This morning I arrived at Hajrat Nizamuddin Railway station from Jabalpur by JBP NZM SF EXP (A1-21). I found a lady with two kids and luggage boarded the train in the wrong coach struggling to find the coach in which her seat was reserved but no one was able to guide her to move in the right direction from inside the train.
Had the coach number been marked with the direction of the number of other coaches, it would have been helpful to the lady to choose the correct direction of her movement.
To overcome such situations, your R&D team should work on this.
I know, it is difficult work but not impossible.
Where there is a will, there is a way.
*नेपाल की नई सरकार द्वारा भारत के कुछ सीमावर्ती इलाकों पर दावा*
नेपाल में अभी कुछ ही दिनों पहले बनी बालेन्द्र शाह सरकार द्वारा उत्तराखंड में भारत चीन सीमा के नीकट कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर स्थित लिपुलेख दर्रा, लिम्पियाधुरा और कालापनी क्षेत्रों पर नेपाल का हीस्सा होने का दा��ा करना किसी भी तरह से वैध या उचित नहीं है।
भारत के लिपुलेख दर्रा से कैलाश मानसरोवर-यात्रा का संचलन पिछले लगभग 70 - 72 वर्षों से भारत की देखरेख में ही होते आ रहें है। ये सीमावर्ती क्षेत्र हमेशा से भारत के अभिन्न अंग रहें हैं। इसलिए नेपाली सरकार का यह दावा बिल्कुल निराधार एवं अनुचित है।
भारत को इन क्षेत्रों में हमेशा यह ध्यान रखना चाहिए कि नेपाल किसी भी तरह से इन सीमावर्ती इलाकों में किसी भी प्��कार की कोई अनावश्यक गतिविधियां प्रारंभ नहीं करे।
*नेपाल की नई सरकार द्वारा भारत के कुछ सीमावर्ती इलाकों पर दावा*
नेपाल में अभी कुछ ही दिनों पहले बनी बालेन्द्र शाह सरकार द्वारा उत्तराखंड में भारत चीन सीमा के नीकट कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर स्थित लिपुलेख दर्रा, लिम्पियाधुरा और कालापनी क्षेत्रों पर नेपाल का हीस्सा होने का दावा करना किसी भी तरह से वैध या उचित नहीं है। भारत के लिपुलेख दर्रा से कैलाश मानसरोवर यात्रा का संचालन भारत के देखरेख में पिछले लगभग 70 - 72 वर्षों से होते आ रहा है। ये सीमावर्ती क्षेत्र हमेशा से भारत के अभिन्न अंग रहें हैं। इसलिए नेपाली सरकार का यह दावा बिल्कुल निराधार एवं अनुचित है। भारत को हमेशा यह ध्यान रखना चाहिए कि नेपाल किसी भी तरह से इन सीमावर्ती इलाकों में किसी भी तरह की कोई अनावश्यक गतिविधियां प्रारंभ नहीं करे।
@AmitShah सुरक्षाबलों के जीन अधिकारियों/कमांडरों पर सरकार को गर्व है उनकी बहुप्रतिक्षित मांग उन्हें *आर्गनाइज्ड ग्रुप ए सर्विसेज का दर्जा* देने की याद सरकार को क्यों नहीं आती। अब बिल्कुल सही समय आ गया है जब इनके मौलिक मांगो को सरकार द्वारा लागू किया जाना चाहिए ताकि इनका भी मनोबल कायम रहे।
अगर यही काम करना था तो चुनाव आयोग द्वारा पोर्टर की व��यवस्था करनी चाहिए थी या होमगार्ड को तैनात करना चाहिए था। चुनाव के दौरान राज्य में कानून व्यवस्था की संवेदनशीलता को ध्यान में रखकर ए. के. 47 राइफल के साथ सीएपीएफ की तैनाती की गई है। इसलिए इस अधिनस्थ अधिकारी द्वारा किया गया यह अनप्रोफेशनल कार्य किसी भी तरह से सराहनीय नहीं है
Central Police Armed Forces are not meant for such work, especially when deployed with AK 47 Rifle on protection as well as Law and Order duty. It is purely an unprofessional approach. Bringing voters to the polling booth on the back pack is not the responsibility of the CAPF. CAPF is not deployed for such purpose in a highly sensitive state.