लीजिए अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लोग वोट चोरी के ख़िलाफ़ चल रहे आंदोलन के साथ जुड़ने लगे हैं।
लंदन में ग्रेटा थनबर्ग ने प्रदर्शन में शिरकत की और आंदोलनकारियों के साथ सरकार की बर्बरता का पुरज़ोर विरोध किया���
12 वर्ष पहले आज के ही दिन मेरे नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा हुई थी।
उस दिन मैं अपने ऑफिस में कंप्यूटर पर अलग अलग वेबसाइटों पर जर्मनी के लिए सबसे सस्ता टिकट ढूँढ रहा था।
तभी दिल्ली के एक पत्रकार का फ़ोन आया। वह ख़ुशी के मारे लगभग चीखते हुए बोले ,'कैलाश जी, नोबेल प्राइज, नाबेल प्राइज।' अति उत्साह और जल्दबाज़ी में वे यह नहीं बोल पाए कि प्राइस किसे मिला है।
मैंने सोचा कि जिस किसी के पुरस्कार की घोषणा हुई है, उनके बारे में वे मुझसे कोई बाईट चाहते हैं। मैंने उनका फ़ोन होल्ड करके गूगल पर वह नाम ढूँढना शुरू किया, ताकि ठीक से अपना बाईट दे सकूँ। लेकिन तब तक वहाँ कोई जानकारी नहीं आई थी।
कुछ ही क्षणों में ऑफिस के कई साथी ख़ुशी के मारे पागल हुए ��ुझसे आकर लिपट गए। तब मैंने जाना कि वह हादसा तो मेरे साथ हुआ है। हालांकि मुझे तब भी विश्वास नहीं हो रहा था।
आख़िर नोबेल शांति पुरस्कार के इतिहास में पहली बार दुनिया के सबसे शोषित और पीड़ित बच्चों को सम्मानित किया गया था, भले ही मेरे माध्यम से सही।
मैं आज भी अपने सभी साथियों ,सहयोगियों, अनगिनत बच्चों और उनके माता पिताओं के प्रति बेहद कृतज्ञ महसूस करता हूँ।
Atleast 10000 people have been detained across the country across @Cockroachisback, various student orgs, Kisaan and Dalit Sangathans, political parties.
THIS IS EMERGENCY.
यह याद है? हैदराबाद यूनिवर्सिटी का टॉपर था। स्कॉलरशिप रोक दी गई थी। हॉस्टल से निकाल दिया गया था। सड़क पर रात बिताने को मजबूर किया गया था। गुनाह सिर्फ यह था कि यह एक दलित था।
जय भीम बोलता था।
रोहित वेमुला सबूत है देश में आज भी होते जातिव��द का। #We_support_UGC_Act
आइये, आपकी सोशल इंटेलिजेंस पर IQ चेक करते हैं।
देश के 5 टॉप लीडर्स के नाम बताइये। जो जीवित हैं, सक्रिय हैं। सवाल का जवाब अपने मन मे, या बुदबुदाकर कहें।नाम न याद हो तो जेहन मे तस्वीर उभरना भी चलेगा।
हो जाये, तब ही अगले सवाल पर जायें।
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5 प्रमुख क्रिकेटरो के नाम बताइये।
जीवित व सक्रिय
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5 प्रमुख एंकर या यू ट्यूब इन्���्लूऐंसर के नाम बताइये
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-अब पांच प्रमुख बाबाओ के नाम बताइये, जो जीवित हैं, सक्रिय हैं।
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भारत के पांच प्रमुख वैज्ञानिको के नाम बताइये।
जीवित व सक्रिय
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चलो, जाने दो।
5 इकांनमिस्ट??
इन्वेंटर??
एग्रोनोमिस्ट
एनी केटेगरी?
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रहने दीजिए।
मुझे पता है कि आपको नहीं पता है।
गलती नहीं है आपकी। हमारे सोशल डिस्कोर्स मे साइंस, इन्वेंशन, रिसर्च नहीं ह��। इसलिए कि वह समाज, सरकार औऱ परिवार की प्र��यरटी नहीं है।
जो प्रायरटी है, उसमे प्रसिद्ध लोगो के नाम आपको पता है।
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हां मगर, आपको यकीन है कि यह देश आगे बढ़ रहा है
विश्व गुरु बनेगा?
माई फुट!!
इनका राजतंत्र खतम ही नहीं हो रहा है। इनसे काम करवाना है तो सिर्फ 'निवेदन' करना होगा।
एक आम नागरिक ने कहा- "मेरा ये निवेदन है कि इस बार समय से पहले ये रोड डल जाए। अगर रोड नहीं बनेगी तो हम में से कोई भी वोट नहीं डलेगा।"
राजतंत्र का अवशेष बुरा मान गया। तैश में बोला - "ये भाषा मेरे साथ कभी उपयोग नहीं करना.... आप आकर निवेदन करो फिर मेरी जिम्मे��ारी है काम करना।
होगी जनता लोकतंत्र की मालिक, होगा जनतंत्र, संविधान में धूल चाटती रहेगी जवाबदेही, राजतंत्र के अवशेषों से सवाल नहीं, सिर्फ निवेदन की अनुमति है।
BBC हिंदी ने Instagram पर पोस्ट करके प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर लोगों से पूछा - “एक गिफ्ट जो आप देना चाहें”
ऐसे गिफ्ट आने लगे कि पहले BBC ने ल��खा - “भाषा की मर्यादा बनाए रखें”
इस पर भी लोग नहीं रुके, BBC को कमेंट बंद करने पड़े 😳😳
मोदी जी, वक़्त और जज़्बात सब बदल गए
1952 में मद्रास राज्य के मुख्यमंत्री सी राजगोपालाचारी ने प्राथमिक शिक्षा में Modified Scheme of Elementary व्यवस्था लागू की.
इस शिक्षा व्यवस्था में बच्चों को आधे दिन स्कूल में पढ़ाई करनी होती थी और ब���की समय परिवार का जातीय पेशा सिखाए जाने की योजना थी.
उदाहरण के तौर पर, बढ़ई के बेटे को बढ़ईगिरी, नाई के बच्चे को बाल काटने का काम. इस बहाने सी राजगोपालाचारी जाति वर्ण व्यवस्था को मजबूती प्रदान करना चाहता था.
महान समाज सुधारक पेरियार ने इस जातीय भेदभाव वाले शिक्षा व्यवस्था नीति के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया. पेरियार ने तर्क दिया जातीय पेशे को अगली पीढ़ी त��� ट्रांसफर करने की योजना है ताकि गरीबी, मजबूरी और जाति बनी रहे.
पेरियार से प्रेरणा लेकर DMK ने मद्रास में सबसे बड़ा आंदोलन चलाया इस शिक्षा नीति के खिलाफ. 1953 को इस योजना को रोक दिया गया. 1954 में महान नेता के.कामराज मुख्यमंत्री बने, उन्होंने इस फालतू योजना को खत्म कर दिया.
महान द्रविड़ दार्शनिक, महान नेता और महान सुधारक पेरियार की जयंती पर शीश झुकाते हुए उन्हें कोटि कोटि प्रणाम करता हूँ.
भारत में फ़िलहाल कुल तीन तरह के पत्रकार हैं.
- एक जो सत्ता से सवाल करता है
- दूसरा जो सत्ता के तलवे चाट रहा है
- तीसरा जो बैलेंस बना कर चल रहा है
शुभांकर मिश्रा और अभिनव पांडेय ये लोग बैलेंस बना कर चलने वाले पत्रकार हैं। ��ामला चाहे UGC का हो या स्वतंत्र भारद्वाज का।
ये बहुत महीन खेल खेलते हैं। थोड़ा सा सरकार से सवाल भी पूछ लेंगे और थोड़ा सिस्टम को सहला भी देंगे। ये लोग एकदम बैलेंस बनाकर चलने में माहिर हैं।
आप इन्हें कैसे देखते हैं और आपके नज़र में ये कैसे पत्रकार हैं आप बताइए। बाकी पिछड़ों/दलितों के हित से जुड़े फैसले में इनका असली रूप आप सभी को दिख जाता होगा।
सरकारी पैसों की बर्बादी देखिए..
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पैतृक घर में पिछले 20 साल से कोई नहीं रहता है लेकिन उस घर की सुरक्षा के ल���ए पिछले 20 साल से PAC का पूरा कैंप ड्यूटी देता है जिसमें 15 जवान चौबीसों घंटे तैनात रहते हैं!
टैक्स पेयर के पैसों की ऐसी बर्बादी इतिहास में आपने आज तक नहीं सुनी होगी.!
राजीव रंजन की पत्रकारिता को भी भी सलाम करता हूँ जिन्होंने ये सच दुनियां को दिखाया!
जिंदगी का जिंदगी से वास्ता जिंदा रहे
हम रहें जब तक हमारा हौसला जिंदा रहे
~ अशोक अंजुम
रागिनी के लिए ट्राईसाइकिल की व्यवस्था हो जाए तो उसे स्कूल जाने में आसानी होगी सरकार से निवेदन है कि बच्ची के लिए व्यवस्था कराई जाए 🙏
इस झंडू बाम का नाम सौरभ द्विवेदी है. इसको आरक्षण पर बहस कराने में मजा आता है.
इस झंडू बाम ने लालनटोप में रहते हुए एक भी OBC SC ST और मुसलमान को आगे नही किया.
जब नाना पाटेकर ने पूछा पत्रकारों की टीम में कोई मुसलमान है क्या, तब ये झंडू बाम बगलें झांकने लग���.
इस झंडू की मांग है आरक्षण में समीक्षा होनी चाहिए. झंडू बाम बोलता है SC-ST आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू किया जाना चाहिए.
झंडू बाम कभी अपनी जाति के ओवर प्रेजेंटेशन पर नही बोलता. झंडू बाम कभी सवाल नही करता है जहां आरक्षण नही हैं वहां अगड़ी जातियों का ओवर रिप्रजेंटेशन किस मैरिट पर है ?
झंडू बाम कभी इस मुद्दे पर बहस नही करता मीडिया में कुछेक जातियों का ओवर रिप्रजेंटेशन क्यों है ?
झंडू बाम को केवल आ���क्षण में डिबेट कराने में मजा आता है. डिबेट इस बात पर होनी चाहिए मीडिया में सवर्ण जातियों का ओवर रिप्रजेंटेशन क्यों है. कौन सी परीक्षा पास कर के ये लोग आज तक, जी न्यूज, एबीपी न्यूज और इंडियन एक्सप्रेस हिंदी में नौकरी पा जाते हैं ?