विश्व आदिवासी दिवस दुनिया भर के आदिवासी समुदायों के अधिकार और सम्मान से जुड़ा अवसर है। इसे “भेड़ चाल” कहना गंभीर और आपत्तिजनक टिप्पणी है।
#मदन_राठौड़_माफी_मांगो
आदिवासी समाज कोई राजनीतिक प्रयोगशाला नहीं है। उसकी संस्कृति और अस्मिता का सम्मान होना चाहिए। आपत्तिजनक बयान पर माफी मांगना ही उचित रास्ता है।
#मदन_राठौड़_माफी_मांगो
सवाल सीधा है—अगर विश्व आदिवासी दिवस मनाना “भेड़ चाल” है, तो आदिवासी समाज के सम्मान और अधिकारों की बात करना भी क्या गलत है? मदन राठौड़ अपने बयान पर सार���वजनिक माफी मांगें।
#मदन_राठौड़_माफी_मांगो