"बिहार में मुझे किसी सभा में यह नहीं लगा कि तेजस्वी चुनाव हार रहे हैं। एक पहलू तो ईवीएम का भी हो सकता है।
- माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी
"अगर 10 हज़ार से सरकार बनती है तो हम 40 हज़ार देने जा रहे ��ैं। हम गरीब माताओं बहनों को 40 हज़ार रुपए देने का काम करेंगे।"
- माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी
मैनपुरी के किसान भीषण संकट से जूझ रहे हैं।
जहाँ धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य ₹2368/- निर्धारित है, वहीं मंडी भाव ₹2100-₹2200 तक सिमट गए हैं — जबकि अन्य मंडियों में यही ���र ₹2500-₹2600 तक पहुँच रही है।
खाद की काला बाज़ारी, सुनियोजित अभाव और विपणन तंत्र की अव्यवस्था ने किसानों की कमर तोड़ दी है।
डबल इंजन सरकार की किसानों की आय डबल करने की दोहरी नीति पूर्णतः विफल और खोखली सिद्ध हुई है।
किसानों को उनकी उपज का न्यायसंगत मूल्य और खाद की निर्बाध उपलब्धता मिलना अनिवार्य है।
श्रद्धेय नेताजी की पुण्यतिथि का यह दिन मेरे जैसे लाखों-करोड़ों अनुयायियों के लिए केवल एक तिथि नहीं, बल्कि भावनाओं, स्मृत���यों और श्रद्धा का सागर है। आज भी जब नेताजी का नाम स्मरण करता हूँ, तो हृदय गर्व और वेदना से भर उठता है — गर्व इस बात का है कि हमने उनके युग में जीवन जिया, और वेदना इस बात की कि अब वे हमारे बीच साक्षात नहीं हैं।
नेताजी केवल एक राजनेता नहीं थे — वे एक युगदृष्टा, एक विचारधारा, और इस देश के नौजवानों की प्रेरणा का शाश्वत स्रोत थे। उन्होंने हमें सिखाया कि राजनीति सत्ता का नहीं, सेवा का माध्यम है; पद प्रतिष्ठा का नहीं, संघर्ष और समर्पण का मार्ग है। उन्होंने यह विश्वास जगाया कि मध्यमवर्गीय परिवारों के साधारण युवा भी यदि संकल्प लें, तो समाज की धारा मोड़ सकते हैं, इतिहास लिख सकते हैं।
नेताजी हमारे लिए किसी ईश्वरीय शक्ति से कम नहीं थे — उनके जीवन में अनुशासन था, उनके आचरण में विनम्रता थी, और उनमें वह नेतृत्व था जो हर युवा के भीतर छिपी प्रतिभा को पहचानता और उसे संवारता था। उन्होंने हम सबको केवल राजनीति नहीं सिखाई, बल्कि यह भी सिखाया कि कैसे जनता के आंसू पोंछना ही सबसे बड़ी पू���ा है, और जनता का विश्वास ही सबसे बड़ा पुरस्कार।
आज उनकी पुण्यतिथि पर जब मैं उनकी स्मृतियों को नमन करता हूँ, तो ऐसा प्रतीत होता है मानो वे आज भी हमारे सिर पर हाथ रखकर मुस्कुराते हुए कह रहे हों — “संघर्ष करते रहो, जनता के साथ बने रहो, यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।”
श्रद्धेय नेताजी को शत-शत नमन।
आपका मार्गदर्शन, आपका आशीर्वाद और आपकी प्रेरणा सदा हमारे साथ रहे —
क्योंकि नेताजी नहीं गए हैं, वे आज भी हमारे विचारों में, हमारी आत्मा में, और हमारे कर्मों में जीवित हैं।
शत-शत नमन।
विनम्र श्रद्धांजलि।
सवाल: बैरिकेडिंग फांद कर जाने की क्या आवश्यकता थी?
जवाब: जहां लोकतंत्र खत्म हो रहा हो वहां बैरिकेडिंग तो छोड़िए हम समाजव���दी लोग सीने पर चढ़कर जाएंगे.
चुनाव आयोग पहले ���िछले एफ़िडेविट्स का जवाब दे जब हमने 18 हज़ार वोट कटने पर, शपथपत्र दिये थे। चुनाव आयोग बताए उस मामले में क्या कार्रवाई हुई?
चुनाव संबंधित मामलों और मसलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट नहीं, फास्टेस्ट ट्रैक कोर्ट की आवश्यकता है। यहाँ भी समयबद्ध कार्यवाही और कार्रवाई होनी चाहिए, तब ही लोकतंत्र बचेगा। चुनाव आयोग में क्या कोई सिटीज़न चार्टर नहीं होता है।
चुनाव आयोग गति के संबंध में कच्छप का प्रतिद्वंद्वी न बने।
भाजपा S.I.R को लागू करके संविधान का ही विरोध कर रही है। जबकि हमारे द्वारा S.I.R का विरोध ‘संविधान’ को ही बचाने की कोशिश है। ये हारती हुई भाजपा की निशानी है। जनता भाजपा के ख़िलाफ़ वोट न डाल सके, इसीलिए व�� जनता से वोट देने का अधिकार छीनना चाहती है।
वर्चस्ववादी भाजपा की एकतंत्री विचारधारा में चुनाव की अवधारणा है ही नहीं। वहाँ तो मनमर्ज़ी का मनोनयन चलता है।
घोर निंदनीय!