भरत भूषण तिवारी कोई बड़ा अपराधी नहीं थे , हिस्ट्रीशीटर नहीं थे फिर भी इनका एनकाउंटर कर दिया गया। आज उनकी मौत हो गई।
पुलिस ने ख़ुद उनको मानसिक विक्षिप्त बताया, भारत तिवारी ने सरेंडर कर दिया था, फिर भी उन्हें 4 गोली मार दी गई……क्यों? आख़िर क्यों?
किसी बाप के बुढ़ापे की लाठी छीन लिए, किसी माँ के जिगर का टुकड़ा उससे अलग कर दिया। किसने हक दिया तुम्हें? कौन हो तुम? भगवान हो?
मीडिया को चुप करा देना, पत्रकारों के मुँह ठूँस देना, लेकिन इस ग़रीब के एनकाउंटर को अब पूरा देश जानेगा।
पूरी मशीनरी लगा दो लेकिन नहीं दबा पाओगे इस केस को। मामला बिहार के भोजपुर के शाहपुर थाना क्षेत्र का।
कड़वा है मगर सच है। दुख के साथ लिखना पड़ रहा है कि भारत भूषण तिवारी की जगह अगर:-
- भरत भूषण पासवान होते
- भरत भूषण पटेल होते
- भरत भूषण कुशवाहा होते
- भरत भूषण मांझी होते तो
- भरत ख़ान होते तो
अब तक:-
चिराग पासवान, नीतीश कुमार, सम्राट चौधरी, जीतन राम माँझी से लेकर असदुद्दीन ओवैसी तक न्याय के लिए आवाज उठा चुके होते।
लेकिन गरीब की मौत पर सब चुप्पी साधे हैं। भरत अगर अपराधी होते, मर्डर किए होते, हिस्ट्रीशीटर होते तो आक्रोश कम रहता। लेकिन एक समाजसेवी राष्ट्रभक्त का एनकाउंटर कर दिया।
@VoiceOfBrahmins ओबीसी आरक्षण का सबसे ज्यादा फायदा यादव ही ले रहे हैं नहीं तो देख लो ओबीसी कैटेगरी में कितने यादव हैं और कितने ओर ओबीसी है कितने जाट है गुर्जर है कुशवाहा है पटेल इत्यादि है
@ambar_parmindar UPSC exam को JEE की तरह कर दो सिर्फ दो चांस फिर। देखते कितना दम किसके अंदर ना तुमको age relaxation भी चाहिए चांस भी ज्यादा चाहिए फॉर्म फीस भी कम देना है
@JaikyYadav16 बेरोजगारी की बात करता कौन है सभी नेता तो आरक्षण की बात करते हैं आरक्षण मांगने तो सभी नेता आ जाते हैं लेकिन क्या कभी किसी नेता ने रोजगार मांगने के लिए हंगामा मचाया अगर सभी पार्टियों रोजगार मांगने लगे तो आरक्षण की जरूरत ही नहीं रह जाएगी हर आदमी को रोजगार मिल जाएगा
वर्ल्ड कप जीत के बाद अर्शदीप सिंह को मिल गई सजा
फाइनल में Arshdeep Singh की एक थ्रो सीधे Daryl Mitchell को लग गई, जिसके बाद मैदान पर थोड़ी गर्मागर्मी भी देखने को मिली
ICC ने एक्शन लेते हुए अर्शदीप सिंह पर मैच फीस का 15% जुर्माना लगा दिया और इसे लेवल-1 माना
ब्राह्मण और सवर्ण पैदाइशी बुद्धिमान हैं ??
ऊँची जाति में जन्म लेते ही मनुष्य ज्ञानी हो जाता है ??
ये “मनुस्मृति” नहीं
भारत का “संविधान” और “सरकारें” मानती हैं
वरना जो काम SC/ST
37 वर्ष की उम्र तक अनगिनत प्रयासों में कर पाते हैं
OBC 35 वर्ष की उम्र तक 9 प्रयासों में कर पाते हैं
वो सवर्ण 32 वर्ष की उम्र में 6 प्रयासों में कैसे कर सकते हैं ??
मतलब संवैधानिक व्यवस्था सवर्णों को जन्मजात ज्ञानी मानती है ??
मुझे लगता है इस तरह की व्यवस्थाएँ
SC/ST/OBC समाज को नीचा दिखाने के लिए बनाई गई हैं….
🙏🙏🌹जय श्री राम 🌹🙏🙏
*कर्मभूमि की दुनिया में श्रम*
*सभी को करना है।*
*भगवान सिर्फ लकीरें देता है।*
*रंग हमें हीं भरना है।*
*सिर्फ बातें नहीं,*
*किरदार अच्छे रखो।*
🙏🙏🌹🌹*सप्रेम नमस्कार*🌹🌹🙏🙏
IT सेल के अंधभक्तों के हिसाब से मोदी जी ही 2014 के पहले विक्की डोनर थे! 🤣🤣🤣
शाहीन बाग की बिल्लियों को पद्म श्री देने की मंशा और योगी के ख़िलाफ़ IT सेलियों की साज़िश का पर्दाफाश किया @ajeetbharti भाई ने.
@JaipurDialogues#UGCrollback#UGCExposedModi
14 जनवरी से अगले दस दिन तक @BJP4India ने मीडिया को फोन कर-कर के, यूजीसी पर कोई भी समाचार चलाने से मना किया। पर सोशल मीडिया के कारण, उन्हें इस पर समाचार चलाना ही पड़ा।
आज भी मोदी जी की रैली है दिल्ली में। सुबह से कीनिया में बाढ़ के समाचार और ईरान में हो रहे हमले से ले कर इलाहाबाद का रैंडम न्यूज चलाया जा रहा है। यूजीसी पर हो रहे हाउस अरेस्ट पर कुछ नहीं।
यही न्यूज चैनल एक मजार तोड़ने पर न्यूज चला लेते हैं, पर आज ये कहाँ हैं? क्या पत्रकारों का हाउस अरेस्ट कोई न्यूज नहीं? या अनिल जी का फोन आ गया कि ये सब मत चलाओ, मोदी जी ₹35,000 करोड़ की योजनाओं का लोकार्पण करेंगे, उसकी भूमिका बाँधो?
या ये तो नहीं कहा कि रैली में दिव्यांग व्यक्ति मोदी जी की पेंटिंग ले कर आएगा तो वो जरूर दिखाना है कि मोदी जी केयर कर रहे हैं, भीड़ में पहचान रहे हैं? अब ये स्क्रीनशॉट अनिल जी को मत भेज देना कि देखिए क्या-क्या लिख रहा है ये!
मेरा यूट्यूब के गैरवामपंथी चैनलों से आग्रह है कि सोशल मीडिया से वीडियो क्लिप लीजिए, और अपने-अपने शो में इस पर बोलिए कि सरकार को शांतिपूर्वक प्रदर्शन करते सवर्ण पसंद नहीं।
सवर्णों का केवल टैक्स चाहिए ताकि दलितों के फ्री कोचिंग, हॉस्टल, फी माफी फायनेंस हो सके। सवर्णों का केवल वोट चाहिए और बाकी समय सवर्णों को @narendramodi जी के गार्डन में तैयार बाँस मिलता रहेगा।
मेनस्ट्रीम मीडिया के पत्रकारों को कुछ घंटे बाद ये समाचार चलाना ही पड़ेगा। हम चलवाएँगे।
और हाँ भाजपा समर्थक मित्रों से, जो कहते थे नंबर एक और दो को छोड़ कर चलो, एक प्रश्न है: अब मैं क्या करूँ? क्या मैं संवैधानिक अधिकार मोदी की झोली में डाल दूँ?
सवर्ण एकता जिंदाबाद! फट्टू मोदी सरकार मुर्दाबाद!
#March8DelhiChalo #रामलीला_मैदान_चलो