अल्लाह ही है जिसने तुम्हें पैदा किया,फिर तुम्हें रोज़ी दी; फिर वह तुम्हें मृत्यु देता है; फिर तुम्हें जीवित करेगा। क्या तुम्हारे ठहराए हुए साझीदारों में भी कोई है, जो इन कामों में से कुछ कर सके?महान और उच्च है वह इस बात से जो साझी वे ठहराते है।
(Quran:Surah: 30 الروم Verse: 40)
भाजपा सरकारों के पास चुनाव में उतरने के लिये सिर्फ मुस्लिम समाज के उत्पीड़न के अलावा कोई और उपलब्धि नहीं है।
दशकों पुराने मदरसे को इस तरह येन केन प्रकारेण अवैध बताकर तोड़ा जाना सरकार की तानाशाही है।
आज सुबह पिपरा रामलाल गांव (डुमरियागंज) में लगभग 60 साल पुराने मदरसे पर बुलडोज़र कार्यवायी करते हुए योगी प्रशासन ने ज़मींदोज़ करदिया , मदरसे के के इहाते में एक मस्जिद भी थी।
वजह सरकारी ज़मीन पर अतिक्रमण बतायी जारही है।
क्या भाजपा RSS के पास विध्वंस के इलावा भी कोई समाधान है या नहीं?
लॉ ऑफ़ एडवर्स पज़ेशन (Law of adverse possession) के हिसाब से तो इस ढांचे को क़ानूनी तौर पर भी नहीं गिराया जासकता था?
फिर कैसे यूपी एडमिनिस्ट्रेशन @dmsid1 और सरकारी महकमा @UPGovt ऐसे मामलों में तातारियों की तरह विध्वंस पर टूट पड़ रहा है? क्या एक ही समुदाय के धार्मिक स्थल थोड़े बहुत सरकारी ज़मीनो पर बने हैं ?
यह यूपी सरकार का मुसलमानों के ख़िलाफ़ खुला नफ़रती एजेंडा है , सुप्रीम कोर्ट को चाहिए के CM और चीफ सेक्रेटरी को तलब करके उचित कार्रवाई करे।
#Buldozer #AntiMuslim #UttarPradesh
الوليد بن المغيرة المشرك الوثني الذي لا يؤمن بالبعث ولا بجنة ولا نار، قال لما سمع القرآن:
"والله إن له لحلاوة، وإن عليه لطلاوة، وإن أعلاه لمثمر، وإن أسفله لمغدق، وما يقول هذا بشر، وإنه ليعلو وما يعلى عليه".
..
-وهذا مزمار من مزامير هذا الزمان يتغنى بالقرآن.
-هاتوا لنا أحسن ما سمعتم من التلاوات.
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हमारे education system को फिर से संवारने की दिशा में बहुत बड़ा कदम है।
शाबाश देश भर के छात्रों, आप सभी पर गर्व है।
सड़कों पर आ कर लोकतंत्र, संविधान और अपने भविष्य की रक्षा में डट कर खड़े होने वाले हर एक युवा, हर छात्र को बहुत-बहुत बधाई।
2 मांगें अभी भी बाकी हैं - प्रधानमंत्री छात्रों और भारत के भविष्य को सम्मान देते हुए माफ़ी मांगें और छात्रों पर हिंसा के दोषियों पर कार्रवाई हो।
ये समाज के दूसरे वर्गों किसानों, मजदूरों, गरीबों, हर वो व्यक्ति जिसे इस सरकार ने दबाया है, कुचला है - अपने सम्मान के लिए संवैधानिक तरीके से डटकर खड़े होने में ही असली साहस है।
इस सरकार को हटाने का वक्त आ गया है।
डरो मत!
मूल बात क्या है? मूल बात है कि गोदी मीडिया लोकतंत्र का हत्यारा है।
आप अगर-मगर के सहारे इससे नहीं बच सकते। कुछ अच्छे लोग हमेशा हैं, रहेंगे।उन्हें निशाना मत बनाइये, हिंसा और हुड़दंग नहीं होनी चाहिए। तब भी गोदी मीडिया की सच्चाई नहीं बदल जाएगी। जनता को हर दिन जागना होगा। आज इस मीडिया पर आप गर्व नहीं कर सकते. इसके न्यूज़ रूम के लोग भी शर्म से सहमे रहते हैं। अभी भी ज़रूरत है कि देश की हर पंचायत में पोस्टर लगना चाहिए कि गोदी मीडिया लोकतंत्र का हत्यारा है।हर पार्टी के दफ्तर के बाहर यह पोस्टर लगा होना चाहिए। एयर पोर्ट पर स्पेस ख़रीद कर यह नारा लिखा जाना चाहिए। लोगों को अपनी कार के पीछे लिखना चाहिए। इस गोदी मीडिया ने लोकतंत्र के हर कोने में सड़न पैदा कर दी है। इसके कारण कुर्सी पर बैठा हर शख़्स ख़ुद को ख़ुदा समझ बैठा है। सांसद तक लूटे जा रहे हैं। विपक्षी पार्टियाँ लूट ली जा रही हैं। वोट का अधिकार छीना गया है। इसी मीडिया के सामने। इसलिए मूल बात है कि गोदी मीडिया लोकतंत्र का हत्यारा है।
प्रधानमंत्री मोदी भारत के इतिहास के सबसे युवा-विरोधी प्रधानमंत्री हैं - इतने युवा विरोधी कि एक नाकाम शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा भी नहीं ले सकते।
152 पेपर लीक। 7.5 करोड़ छात्र पीड़ित। और सज़ा एक दोषी को भी नहीं। सजा किसे मिली? मेहनती युवाओं को।
और जब इन बच्चों ने शिक्षा के जायज़ सवाल उठाए - तो जवाब में मिली लाठी और हिरासत। लीक करने वाले अपराधी आज़ाद - और वाजिब मुद्दे उठाने वाले छात्र घसीटे जाते हैं, पीटे जाते हैं।
यह सरकार सिर्फ़ युवाओं को नाकाम नहीं कर रही - उनपर टूट पड़ी है।
رحم الله الشيخ ربيع بن هادي المدخلي.. إمام مجدد، مجاهد، نادر الوجود، قل أن يرى له نظير في جهاده وصبره وثباته، وتحمله في مواجهة الباطل وأهله، ونصرته للحق والسنة وأهلها.
@WasiuddinSiddi1 अलहमदुलिल्लाह हम कुछ विद्यार्थी इन सुन्नतों से लोगों को करीब करने के लिए और उस पर अम्ल करने के लिए #sunnah_steps_initiative के नाम से एक WhatsApp channel बनाए हैं जिस में हर दिन एक हदीस भेजते हैं और उस पर टास्क देते हैं
https://t.co/YSgQzYduDA
@WasiuddinSiddi1 अलहमदुलिल्लाह हम कुछ विद्यार्थी इन सुन्नतों से लोगों को करीब करने के लिए और उस पर अम्ल करने के लिए #sunnah_steps_initiative के नाम से एक WhatsApp channel बनाए हैं जिस में हर दिन एक हदीस भेजते हैं और उस पर टास्क देते हैं
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इस्लाम और मुस्लिम समुदाय को पश्चिमी मीडिया और उनके नाम निहाद विद्वान अपने कुकर्मों को छिपाने के लिए लम्बे समय से बदनाम करते रहे । चूंकि इस्लाम ही उनके इन कुकर्मों पर मौत की सजा का प्रावधान रखता है।
#EpsteinFiles
In the Muslim world, paedophiles and rapists are usually shot, hanged, or beheaded.
In the West, paedophiles and rapists become presidents, politicians, and princes.
उत्तराखंड के दीपक भारत के हीरो हैं।
दीपक संविधान और इंसानियत के लिए लड़ रहे हैं - उस संविधान के लिए जिसे BJP और संघ परिवार रोज़ रौंदने की साज़िश कर रहे हैं।
वे नफ़रत के बाज़ार में मोहब्बत की दुकान का जीवित प्रतीक हैं और यही बात सत्ता को सबसे ज़्यादा चुभती है।
संघ परिवार जानबूझकर देश में आर्थिक और सामाजिक ज़हर घोल रहा है, ताकि भारत बँटा रहे और कुछ लोग डर के सहारे राज करते रहें। उत्तराखंड की BJP सरकार खुलेआम उन असामाजिक ताक़तों का साथ दे रही है जो आम नागरिकों को डराने और परेशान करने में लगी हैं।
नफ़रत, डर और अराजकता के माहौल में कोई भी देश आगे नहीं बढ़ सकता। शांति के बिना विकास सिर्फ़ एक जुमला है।
हमें और दीपकों की ज़रूरत है - जो झुकें नहीं, जो डरें नहीं, और जो पूरी ताक़त से संविधान के साथ खड़े रहें।
हम तुम्हारे साथ हैं भाई। डरो मत।
तुम बब्बर शेर हो। 🇮🇳
महात्मा गांधी की हत्या के बाद अगर सांप्रदायिकता का सिर सख़्ती से कुचल दिया जाता तो देश तबाह होने से बच जाता
आज़ादी के बाद कांग्रेस ने अपने शासन काल में धर्म के आधार पर नफ़रत की राजनीति पर जो लचकदार नीति अपानाई उसने देश और संविधान दोनों को बड़ा नुक़सान पहुंचाया। आज जिस तरह संविधान और लोकतांत्रिक चरित्रों को खुले तौर पर मिटाया जा रहा है इसकी कल्पना आज़ादी के हमारे पूर्वजों ने कभी नहीं क्या होगा, जिन रेखाओं पर आज़ाद भारत के संविधान की नींव रखी गई अगर इन्ही रेखाओं पर संविधान को भी पूरी ईमानदारी के साथ लागू कर दिया जाता तो आज हमें यह दिन न देखने पड़ते।
ऐतिहासिक रूप से यह एक दुखद सत्य है कि कांग्रेस के नेताओं ने न जाने किस भय से पहले दिन से धर्म के आधार पर नफ़रत की राजनीति के विरोध में एक लचकदार नीति अपनाई, सांप्रदायिक शक्तियों के साथ नर्मी बरती गई, संविधान के अनुसार उनके खिलाफ कड़ी क़ानूनी कार्रवाई से बचा गया जिसके नतीजे में सांप्रदायिक शक्तियों को खूब फलने फूलने का अवसर मिला।
महात्मा गांधी की हत्या के पीछे सांप्रदायिक शक्तियों का हाथ था, अगर उसी समय सांप्रदायिकता के सिर को कुचल दिया जाता तो देश को तबाही से बचाया जा सकता था, विभाजन के बाद देश भर में जब मुस्लिम विरोधी दंगे शुरू हुए तो उन्हें रोकने के लिए महात्मा गांधी ने उपवास रखा, सांप्रदायिक शक्तियां यहां तक कि कांग्रेस में मौजूद कुछ बड़े नेताओं को यह बात अच्छी नहीं लगी, वह उनके खिलाफ हो गए, अंततः उन्हें क़त्ल करदिया गया। हमारी नज़र में महात्मा गांधी जैसे महान व्यक्ति की हत्या देश की धर्मनिरपेक्षता की हत्या थी मगर अफसोस उस समय कांग्रेसी नेतृत्व को जो करना चाहिए था वह उसने नहीं किया।
जमीअत उलमा-ए-हिंद का नेतृत्व लगातार कांग्रेसी नेतृत्व से यह मांग कर रही थी कि सांप्रदायिकता के इस जुनून को रोकिए मगर अफसोस इस मांग पर गंभीरता से घ्यान नहीं दिया गया जिससे सांप्रदायिकों को बाढ़ावा मिल गया। आज की पीढ़ी उस इतिहास से भी अनभिज्ञ है कि आज़ादी से पहले ही जमीअत उलमा-ए-हिंद के नेतृत्व ने कांग्रेसी नेताओं से एक लिखित आश्वासन ले लिया था कि आज़ादी के बाद देश का संविधान सैक्यूलर होगा, जिसमें सभी धार्मिक अल्पसंख्यकों को पूर्ण धार्मिक आज़ादी होगी, लेकिन आज़ादी के बाद जब देश विभाजित हुआ तो कांग्रेसी नेताओं का भी एक बड़ा वर्ग उन उन्य नेताओं की इस मांग में शरीक हो गया कि अब जबकि मुसलमानों के लिए धर्म के नाम पर एक नया देश बन चुका है, हमारे देश का संविधान सैक्यूलर नहीं होना चाहीए.
इस अवसर पर जमीअत उलमा-ए-हिंद के नेतृत्व कांग्रेस के नेताओं का हाथ पकड़ कर बैठ गया और उनसे कहा कि अगर देश का विभाजन हुआ है तो इसके मसौदा पर हमने नहीं आपने हस्ताक्षर किए हैं, इस लिए आप अपना वादा पूरा करें। इस के बाद एक सैक्यूलर संविधान तैयार हुआ लेकिन सांप्रदायिकता की जड़ें अंदर ही अंदर गहिरी होती गईं। जमीअत उलमा-ए-हिंद के लगातार कहने के बाद भी इस पर नकेल नहीं कसी गई जबकि उस समय केंद्र और सभी राज्यों में कांग्रेस की ही सरकार थी, अगर वह चाहती तो उसके खिलाफ कड़ा कानून बन सकता था, मगर उसने जो लचकदार नीति अपनाई थी उसके नतीजे में सांप्रदायिक ताकतें और शक्तिशाली होती गईं।
अगर कांग्रेस ने 77 साल पहले सांप्रदायिकता के खिलाफ यही कड़ा रुख अपनाया होता, तो वह सत्ता से बाहर नहीं होती और देश बर्बादी के कगार पर नहीं पहुंचता।
#SaveConstitution #AssassinationofMahatmaGandhi
#SaveDemocracy
#Freedom_of_India
#ArshadMadani
पिछवाड़े से मूंगफली टूट नहीं रही, इन्हें अखरोट तोड़ना है।🤣
फिरौन और नमरूद जैसे ताकतवर लोगों ने भी यही भ्रम पाल रखा था, तू तो बस सत्ता द्वारा पोषित एक टुच्चा है, उनके हाथों तो सत्ता थी, लेकिन नतीजा क्या हुआ? इस्लाम आज भी कायम है, कयामत तक कायम भी रहेगा।
यही सत्य है, बाकी सब भ्रम।
@iu_edu#الجامعة_الاسلامية#العلا
अल्लाह की एक अद्भुत निशानी #alula जहां पहाड़ों के बीच हरे भरे बागीचे दिल को मोह लेते हैं। और यहां पर अल्लाह की शक्ति पर विचार विमर्श कर के इमान में बढ़ोत्तरी करते हैं
Does god exits इस विषय पर एक बहस जावेद अख्तर के साथ पंडित धीरेंद्र शास्त्री की भी होनी चाहिए, क्योंकि पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने तो हनुमान जी से बात भी की हुई है, हो सकता है वो और अच्छे से समझा दे..!
आप इसके पक्ष में हैं तो रिट्विट कीजिए..!