Raushan Anand News: भाई प्रिंस यादव के निधन के बाद रौशन आनंद सर पहली बार क्लास लेने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने छात्रों को संबोधित किया और अपने भाई को याद करते हुए भावुक भी हुए। कठिन व्यक्तिगत परिस्थितियों के बीच उनकी यह वापसी चर्चा का विषय बनी हुई है। #RaushanAnand#PrinceYadav #BiharNews #Patna #Education #Emotional #BiharTak #BreakingNews
माननीय शिक्षा मंत्री @mkrtiwari_bjp जी सभी शिक्षकों की मांग है स्कूल का टाइमिंग बदला जाए । विद्यालय का समय 8 बजे से 2 बजे तक किया जाए जिससे बच्चों को भी शाम में ���ेलने का पर्याप्त समय मिलेगा और शैक्षणिक गतिविधि पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा । @samrat4bjp
पटना: भाजपा विधायक ने फैजल खान पर निशाना साधते हुए कहा, "इनका कोचिंग बंद होना चाहिए और इनकी संपत्ति की भी जांच होनी चाहिए।" उन्होंने आरोप लगाया कि "खान फर्जी व्यक्ति हैं और उत्तर प्रदेश से आकर बिहार के लोगों को ठगने का काम कर रहे हैं।"
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अन्तरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चा तेल 72 डालर पर आ गया है।अमेरिका - ईरान युद्ध के चलते पेट्रोल और डीज़ल पर भारत में लगभग 8 ₹ की बढ़ोतरी की गई थी।जब कच्चा तेल 100 $ पर पहुँच गया था।तो क्या अब देश की जनता को राहत मिलेगी !
Raushan Anand News: रौशन आनंद ने अपने भाई की हत्या मामले में गंभीर आरोप लगाते हुए बड़ा बयान दिया है।
उन्होंने दावा किया कि वे अपने आरोपों को सबूतों के साथ साबित करेंगे।
रौशन आनंद ने कहा कि न्याय मिलने तक उनकी लड़ाई जारी रहेगी।
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पटना में मुसल्लहपुर हाट स्थित फैसल खान उर्फ खान सर की कोचिंग खान ग्लोबल स्टडीज में आग लगने की खबर है. हालांकि ये राहत की बात है कि सभी स्टूडेंट्स सुरक्षित बाहर निकाल लिए गए थे और दमकल विभाग के लोगों ने समय रहते ही आग पर काबू भी पा लिया.
फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है. कदमकुआं थाना की पुलिस के शॉर्ट सर्किट का अ��देशा लगा रही है. उधर फायर विभाग पूरे मामले की जांच में जुटा हुआ है.
आपको याद होगा 2 जून को ज्ञानबिंदु कोचिंग वालों से हुई झड़प और गोलीबारी की घटना के बाद 7 जून को फायर सेफ्टी विभाग की ऑडिट टीम ने खान ग्लोबल स्टडीज और उनके अस्पताल में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की जांच के लिए निरीक्षण किया था. जांच के दौरान फैसल खान की कोचिंग संस्थान और अस्पताल में अग्नि सुरक्षा मानकों से जुड़ी कई गंभीर कमियां पाई ���ई थीं. विभाग ने कोचिंग और अस्पताल प्रबंधन को आवश्यक सुधार करने के लिए 7 से 10 दिनों का समय दिया था. आज 18वें दिन कोचिंग में आग लगी है, इस बीच वहां फायर सेफ्टी के मानकों में कितना सुधार हुआ इसकी सुध किसी के पास नहीं है.
वैसे खान कोचिंग सेंटर में लगी इस आग की जांच दो और पहलुओं पर भी होनी चाहिए, क्या ये आग जानबूझकर लगाई गई है या फिर ये वाकई शॉर्ट सर्किट था? दूसरा ये कि क्या इस आग में कोचिंग के भीतर के कुछ ज़रूरी ���स्तावेज भी जले हैं जो मौजूदा वक्त में फैसल खान की कोचिंग को लेकर चल रहे विवाद में अहम हो सकते थे?
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अरे भाई, कुछ नहीं होना है फैजल खान का!
मान लीजिए ये बात कि अब बिहार के हजारों लाखों बच्चों का मुस्तकबिल पटना के मुसल्लहपुर हाट में,
फैजल खान उर्फ खान सर के नाम बेच दिया गया है,
और ये काम बिहार के शासन, प्रशासन और एक बड़े बेरोजार, ब्रेनवॉश्ड,उत्पाती छात्र-छात्रों की फौज ने मिलकर किया है...
आप कहिएगा कैसे, तो आप नेक्सस समझिए.
पहले तो बिहार का ये सरकारी तंत्र बिहार के युवाओं को सिर्फ सरकारी नौकरी वाली सनक का बुखार लगाती है क्योंकि प्राइवेट सेक्टर में नौकरी पैदा करने की हैसियत इस बिहार सरकार में कभी रही ही नहीं. अब ये हैसियत क्यों नहीं बन पाई वो अलग कहानी है, लेकिन शॉर्ट में इतना समझिए कि ये भी साइकिल बांट कर बिहार की बेटियों को पढ़ाने वाले नीतीश क���मार की ही करामाती है..
खैर, आगे बढ़िए.
सवाल उठा कि अब इस सरकारी नौकरी के बुखार का दवा कहां मिलेगा?
आप कहेंगे किताब में.
बस, यहीं असल खेल हुआ.
किताब नहीं, बिहार में इस सरकारी नौकरी वाला दवाई बेचने के लिए फिर कुकुरमुत्तों की तरह खुला कोचिंग का दुकान.
यहां ये कहना जरूरी है कि इस सरकारी नौकरी वाले बुखार को उतार कर, बेरोज़गार बिहारियों का मन हरा करने के लिए कुछ मास्टर ऐसे ��ी आएं जिन्होंने बच्चों को किताब के पन्नो को दवा बना कर पीने की नसीहत दी और अपनी कक्षाओं में भी यही कराया. लेकिन ये किताब के पन्नो वाली दवाई, असल पढ़ाई वाली दवाई थोड़ी कड़वी थी. सबके बस की बात नहीं थी कि इसको पीकर सरकारी नौकरी वाले बुखार पर जीत हासिल कर लें.
ऐसे में उन मास्टरों की तादाद बढ़ने लगी जो अलग-अलग राज्यों और जिलों से उठ उठकर भी बिहार के पटना पहुंचे थे, इस सरकारी नौकरी वाली बीमारी का सस्त��� मीठा दवाई लेकर, जो असल में दवाई नहीं जहर था. फूहड़पने और जालसाजी का जहर.
अब ये मास्टर सही-सही किताब पढ़ा कर तो अपना अलमारी भर नहीं पाते क्योंकि उनको भी पता है कि सही शिक्षा का सौदा ज्यादा मिलेगा नहीं और फिर सही से पढ़ाने के लिए उनके पास कुछ एक रटे-रटाए क्रम बिंदु के अलावा और कुछ था भी तो नहीं!
तो बस ये मास्टर बोले कि हम सरकारी नौकरी वाली बीमारी का पुराना किताबी दवा ही बदल देंगे, हम अपने कोचिंग म��ं वो विशुद्ध बकलोली कर���ंगे जो बच्चा लोग को पसंद आए, जहां उनको ढेर मेहनत भी न करना पड़े और सस्ता फीस के नाम पर मेरे यहां खूब भीड़ बढ़ता रहे. बाकी पढ़ने वाला तो कहीं भी पढ़ लेगा, ईश्वर चंद विद्यासागर तो बिजली के खंभे के नीचे पढ़ लिया था. कोई न कोई रिजल्ट दे ही देगा.
इन मास्टरों को शुरू से पता था कि ऐसा करके हमलोग 300-400 रुपया के नाम पर करोड़ों का उगाही कर लेंगे तब भी बिहारी बोगस लोग हमको करोड़पति नहीं बल्कि मसीहा ही बोलेगा.
लीजिए माने मात्र 300 रुपया में फुल टाइम बकैती के साथ हॉफ टाइम क्वेश्चन आंसर फ्री.. फिर आ गया Jio, बनने लगा रील, फिर जब दौड़ने लगा वीडियो तो बकलोली बतियाने में आने लगा और भी फील. व्यूज बढ़ते गया और ई मास्टर लोग न्यूज में आते गया.
लेकिन रुकिए, सरकार को भूलिये मत आपलोग. वो तो शुरू से सब देख रही थी. ये नेक्ससबाज मास्टर जैसे-जैसे सरकारी नौकरी वाली बीमारी का घटिया दवाई ब���ँट कर अपनी अलमारी भरते गए, शासन और प्रशासन दोनों अपना-अपना दराज खोल-खोल कर माल निकालते रहे.
इस बीच बिहार में साल दर साल सरकारी नौकरी वाला बीमारी महामारी में परिवर्तित होते चला गया. पेपर लीक, परीक्षा में धांधली, वैकेंसी में देरी, ये सब प्रकरण बढ़ते चले गए. इन सब के बीच सरकारी नौकरी वाले बुखार में तड़पते बिहार के लाखों बच्चों के माथे पर ये अलमारी भरने वाले मास्टर नकली पट्टी से नकली बाम रगड़ते रहे. योद्धा बैच से लेकर एवेंजर बैच बना बना कर बकलोली और फूहड़बाजी की पराकाष्ठा दिखाते रहे. अलमारी से नोट निकाल-निकाल कर बिहार के मेहनतकश स्टूडेंट्स की सफलता खरीदते रहे, फिर उसी को अपने नाम से बेचकर और अलमारी भरते रहे. ऐसा करते-करते ये कब इतने बड़े सेटिंगबाज हो गए ये शासन-प्रशासन भी नहीं पकड़ पाई, बिहारी बोगस बेरोजगार क्या पकड़ पाएंगे.
खैर, लिखने को तो हम लिख दिए, बता दिए लेकिन ये नेक्सस का खेल शा��द ही आपको Pinch कर पाए. क्योंकि जब फैजल खान ��ैसे मास्टरों की फूहड़बाज़ी और व्हाट्सएपिया मनगढंत ज्ञानवाजी से अबतक आपको फर्क नहीं पड़ा तो ये खेल समझ कर आप क्या ही कर लीजिएगा.
मुझे तो यकीन हो गया है कि फैजल खान ने अपने खान होने के बावजूद राखी बांधवाने वाली प्रदर्शनी लगाकर, फिर मछली चावल का भोज रखवाकर, PR कंपनी से लेकर पॉडकास्ट पत्रकारों के अकाउंट में नोटों की खेप भिजवाकर अपना साम्राज्य सेट कर लिया है. उनको कोई Pinch नहीं कर सकता.
पावर कब तक चलेगा Khan Sir तुमसे पहले भी कोई था तुम्हारे बाद भी लोग आएँगे - Shashi Sharan Sir
पटना के हाई-प्रोफाइल कोचिंग वॉर (Patna Coaching War) और ज्ञान बिंदु जीएस एकेडमी के रौशन आनंद सर (Raushan Anand Sir) के विवाद के बीच, द ऑफिसर्स एकेडमी (The Officer's Academy) के संचालक शशि शरण सर (Shashi Sharan Sir) का एक बेहद कड़ा और हिला देने वाला बयान सामने आया है।
शशि शरण सर ने खान सर (Khan Sir / Faisal Khan) के कथित रसूख और घमंड पर सीधा हमला बोलते हुए एक बड़ी बात कह दी है। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है कि "पावर कब तक चलेगा खान सर? इस भ्रम में मत रहिए, क्योंकि तुमसे पहले भी यहाँ कोई था और तुम्हारे बाद भी लोग आएंगे।
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पटना से लेकर नोएडा तक फैसल खान मामले में नोटों की गड्डी लेकर
हिंदू मुस्लिम एंगल वाला सिम्पैथी कार्ड बांटने वाले तमाम तथाकथित पत्रकारों से सवाल है ..
कि अगर ये मसला आपसी विवाद का ही था तो फिर
आज भी फैसल खान के वकील रौशन आनंद की
जमानत का विरोध क्यों कर रहे थे?
जब मसला आपसी विवाद का ही है तो फिर रौशन आनंद के भाई की मौत पर फैसल खान उर्फ खान सर वीडियो बना कर विलाप क्यों कर रहे थे?
इसलिए क्योंकि उनको ��ालूम चल गया कि आज रौशन आनंद की जमानत तय है और मीडिया के सामने कड़े सवालों की बौछार भी तय है?
इस आपसी विवाद में सिर्फ एक पक्ष की तरफ से इतना दोगलापन क्यों नज़र आ रहा है?
क्या इसलिए क्योंकि ये महज आपसी विवाद नहीं
बल्कि एक बड़े कोचिंग सिंडिकेट के ध्वस्त होने की शुरूआत है?
यही सवाल हम शुरू से लेकर अबतक पूछ रहे हैं कि आखिर @PatnaPolice24x7 फैसल खान की गिरफ्तारी क्यों नहीं कर सकी?
नोएडा में बैठे-बैठे इस पूरे मामले को हिन्दू-मुस्लिम वाला एंगल देकर फैसल खान उर्फ खान सर को मुस्लिम कार्ड का सिम्पैथी बैंगल पहनाने वाले पत्रकारों को आज रौशन आनंद के ये सवाल Pinch नहीं कर रहे हैं क्या?
जो पत्रकार ये कह रहे थे कि ये तो सिर्फ दो लोगों के बीच का आपसी विवाद है, इसमें क्यों कूदना वो सभी फिर खाली खान वाला सॉफ्ट सिम्पैथी का खदान खोद कर रौशन आनंद के सवाल पर क्यों चुप हो जा रहे थे? वो बताएंगे कितने की डील थी?
रौशन आनंद ने अपनी जमानत के बाद जो सवाल पूछा है वही सवाल हम लगातार पूछते रहे हैं कि आखिर @PatnaPolice24x7 फैसल खान के गार्ड का कबूलनामा होने के बावजूद, उसके खिलाफ FIR दर्ज करने के बावजूद भी उसको गिरफ्तार क्यों नहीं कर पाई?
क्या फैसल खान की गिरफ्तारी को रोकने के लिए पटना पुलिस पर बिहार सरकार के किसी मंत्री का दबाव था या फिर स्टूडेंट्स को हथियार बना कर पुलिस को खरीदने की कोशिश हुई?
रौशन आनंद जिस तरह किसान कोल्ड स्टोरेज परिसर के मालिक पर षड्यंत्र रचने काआरोप लगा रहे हैं, उनके बेटे के करोड़ों की जिम के खर्च को लेकर सवाल कर रहे हैं.. क्या अब भी ये सिर्फ दो लोगों के बीच की लड़ाई ही लग रही है या फिर किसी बड़े सिंडिके�� के पर्दाफाश होने की सुगबुगाहट है?
ये सवाल क्या उन पत्रकारों को पिंच कर पाएगा कि आखिर फैसल खान ने फायरिंग क��� बात क्यों छुपाई, क्यों अपने बयानों से पलटे, क्यों स्टूडेंट्स को ढाल बना कर गिरफ्तारी से बचते रहे?
ये सवाल क्या कभी पॉडकास्ट वाले पत्रकारों को पिंच कर पाएगा कि आखिर सस्ती कोचिंग देने की बात करने वाले सिंडिकेट के पास इतना पैसा कहां से आ रहा है कि बड़ा-बड़ा अस्पताल खुल जा रहा है, लाखों करोड़ों का भोज हो जा रहा है.. कोचिंग पर कोचिंग का विस्तार हो जा रहा है?
या तो फिर सस्ती कोचिंग का दावा फर्जी है या फिर सस्ती कोचिंग की आड़ में महंगी कमाई का कोई दूसरा गुणा गणित है?
रौशन आनंद को फैसल खान से सुलह करने की नसीहत देने वाले जो लोग इस मामले में पटना पुलिस के पक्षपाती रवैये और फैसल खान की क्रियाकलापों पर सवाल उठाने के बजाय इस मामले पर मुखर अन्य पत्रकारों को भेड़िया बता रहे थे, क्या उनको कभी ये बात पिंच कर पाएगी कि असल में वो खुद सियारों की फौज में शामिल हो चुके हैं?
खैर, सियारों का हुआं हुआं EXPOSE हो चुका है
और आगे बहुत कुछ EXPOSE होना बाकी है.
#bihar #RoushanAnand #KhanSir #KhanCoachingCentre #PatnaPolice
जमानत मिलने के बाद रौशन आनंद ने मीडिया को साफ कहा ���ै कि इस पूरे मामले में षडयंत्र के तहत पहले उन्हें जेल भेजा गया और फिर बाहर उनके भाई प्रिंस यादव की हत्या करवा दी गई. खबर है कि रौशन आनंद ने अपने भाई प्रिंस यादव की दुबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग की है, साथ ही वो इसको लेकर फैसल खान उर्फ खान सर पर हत्या के आरोप के तहत केस करने वाले हैं.
जेल से निकल कर रौशन आनंद ने इस पूरे घटनाक्र�� के लिए खान कोचिंग सेंटर के मालिक फैसल खान और किसान कोल्ड स्टोरेज के मालिक आर.एस प्रसाद को जिम्मेवार बताया है. आपको शायद मालूम हो कि पटना के मुसल्लहपुर हाट में किसान कोल्ड स्टोरेज परिसर के भीतर ही ये तमाम कोचिंग संस्थान चलते हैं. इस परिसर में खान कोचिंग सेंटर और ज्ञानबिंदु कोचिंग सेंटर के बीच पहले भी कई बार विवाद की स्थित बनी है.
2021 में भी खान कोचिंग सेंटर की तरफ से एक FIR दर्ज कराई गई थी जिसमें ��्रिंस यादव पर क्लासरुम में घुस कर मारपीट करने के आरोप लगाये गए थे. साथ ही इसी किसान कोल्ड स्टोरेज परिसर में कुछ साल पहले प्रिंस यादव पर भी हमला हो चुका है जिसमें मारपीट के बाद उसका सिर फोड़ दिया गया था. यानी कि पटना के मुसल्लहपुर हाट के कोचिंगगिरी में ये अदावत की कहानी बहुत पुरानी है.
लेकिन गौरतलब है कि हर बार विवाद के बाद हमेशा एक पक्ष पर ही पुलिसिया कार्रवाई हुई है, हर बार कानूनी दबाव एक पक्ष पर ही लगाए गए हैं. लेकिन इस बार मामला बिगड़ गया, षडयंत्र के तार खुल गए और सबको समझ आ गया कि मुसल्लहपुर हाट में बमबाजी और गोलीबारी का काम असल में कौन कर रहा है. लेकिन फिर भी उससे हुआ कुछ ��हीं जैसे इससे पहले भी कभी कुछ नहीं हुआ.
वैसे रौशन आनंद के इस बयान पर अगर उसकी दोबारा गिरफ्तारी हो जाए कि रौशन ऐसा कह कर हिंसा भड़का रहे थे, तब भी कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी क्योंकि इससे थोड़ी न कोई फर्क पड़ता है कि दूसरे पक्ष के फैसल खान अपने ऊपर FIR दर्ज होने के बाद भी इसी तरह रौशन आनंद और उनके लोगों पर खुद को जान से मारने का आरोप लगा कर बच्चों को बरगला रहे थे.
फैसल खान ऐसा कर सकते हैं लेकिन रौशन ���नंद को इससे बचना चाहिए. इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि उनके भाई प्रिंस यादव की संदेहास्पद स्थिति में मौत हो चुकी है नेपाल के किसी होटल में और वो दोबारा पोस्टमार्टम की मांग कर रहे हैं. बात बस ये है कि रौशन आनंद को ऐसे बयान से बचना चाहिए क्योंकि अब तक की कार्रवाई से तो इतना साफ है कि उनके लिए और फैसल खान के लिए पटना पुलिस, कानून और न्याय का पैमाना अलग-अलग है.
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अच्छा! फैजल खान की गिरफ्तारी न होने को लेकर पटना पुलिस से सवाल पूछना रौशन आनंद के पक्ष में होना हो गया ? फिर इस लिहाज से तो आप फैजल खान की सेना के पक्के सिपाही हुए न?
अरे यार! एक बात बताओ, आज पूरी दुनिया को पता चल गया है कि कैसे कोचिंग सेंटर अलग-अलग छोटे-छोटे एकेडमी वालों के स्टूडेंट्स को बुला-बुला कर उनके मेहनत की क्रेडिटचोरी करते हैं और फिर खान और रौशन आनंद के बीच के पूरे विवाद का तो जड़ ही यही ह��.. लेकिन क्या आप या किसी और ने एक बार भी ये सवाल पूछा कि जब रौशन आनंद को इसी मामले में गिरफ्तार कर लिया गया तो फैसल खान की गिरफ्तारी क्यों नहीं हो रही?
क्या आप में से कोई ये पूछ रहा है कि 2 जून की रात फैसल खान क्यों चिल्ला रहे थे ये कहते हुए कि उनके कोचिंग पर गोली चलाई गई है और ये काम विरोधी कोचिंग सेंटर ने किया है, फिर अगले दिन सुबह अपनी ही बात से मुकर गए? जबकि हकीकत में खान सर के सुरक्षा गार्ड ने ही गोली चलाई थी वो भी फैसल खान के ही कहने पर. तो फिर ये सवाल क्यों न पूछा जाए कि इस गोलीबारी कांड में क्या रौशन आनंद को ही फंसाने की तैयारी थी, वीडियो वायरल न हुआ होता तो ये थ्योरी चलती कि नहीं?
एक सवाल का जवाब दीजिए न,
फैसल खान गोली चलवा कर, गालीबाजी करके भी खान सर हैं और रौशन आनंद बिना ये सब किए ही क्या हो गए, अपराधी?
मोहम्मद रब्बानी भाई, फैसल खान फिलहाल कानून के नजर में आरोपी ही है जिसकी गिरफ्तारी न हो पाने पर पुलिस से सवाल तो पूछा जाएगा.
PR और पॉडकास्ट वाले पत्रकारों को ये बात समझ नहीं आएगी कि बेमतलब का शोर तो उनके उन सवाल में ह��ं, जिसमें वे लोग इस पूरे विवाद में सिर्फ 'खान सर' को 'फैसल खान' कहे जाने पर हिन्दू-मुस्लिम एंगल वाला सॉफ्ट सिम्पैथी कार्ड लेकर बवाल कर रहे हैं..
लेकिन ये सवाल पूछने में उनकी PR वाली पत्रकारिता की पतलून गीली हो जा रही है कि क्या पटना पुलिस ने इस पूरे मामले में ढीली और एक तरफा कार्रवाई नहीं की है?
बैलेंसवादी PR पत्रकारों को छोड़िये, आप बताइए,
ये सवाल पूछना कैसे नाजायज है कि जब खुद पुलिस की तरफ से लिखी गई FIR में फैसल खान का नाम ये कहते हुए दर्ज है कि उसके ही कहने पर दोनों सुरक्षा गार्ड ने इलाके में फायरिंग की, वो भी दहशत फैलाने की नियत से, तब भी राजधानी की पुलिस फैसल खान को गिरफ्तार नहीं कर पाई है?
वहीं दूसरे पक्ष के आरोपी रौशन आनंद को 24 घंटे के भीतर-भीतर गिरफ्तार कर बेऊर जेल भेज दिया जाता है और उसके ऊपर किए गए FIR की कॉपी किसी मीडिया पोर्टल पर नहीं तैरती है कि लोग देख सकें कि आखिर रौशन आनंद पर दर्ज धाराएं क्या हत्या की कोशिश की धाराओं से ज्यादा जघन्य हैं?
ये सवाल क्यों न पूछा जाए कि इस मामले में शुरू से लेकर आखिर तक पटना पुलिस और फैसल खान के बयान क्यों बदलते रहे हैं?
क्या गोली चलने की बात से लेकर पुलिस के घटनास्थल पहुंचने के समय तक की बात पर फैसल खान का बयान विरोधाभासों से भरा हुआ नहीं है?
पटना पुलिस के SSP कार्तिकेय शर्मा बताएं���े कि आखिर क्यों उनकी SIT फैसल खान को 5 दिनों के बाद तक भी गिरफ्तार नहीं कर सके? क्या इसलिए क्योंकि फैसल खान बच्चों को हथियार बनाकर कानून व्यवस्था को खराब करने की धमकी दे रहा था या फिर वाकई फैसल खान उर्फ खान सर पटना छोड़ फरार हो गए?
@PatnaPolice24x7 @bihar_police
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बताइए!
ये खान सर, अपनी तथाकथित आत्मरक्षा में,
जहां आपके बच्चे रहते हैं, चलते फिरते हैं,
वहां गोली तक चलवा देते हैं.
लेकिन यही खान सर अपनी कोचिंग में, जहां आपके बच्चों को सस्ती शिक��षा के नाम पर ठूंस-ठूंस कर बिठाते हैं, चार सवाल का हल लिखकर दुनिया भर की बकलोली बतियाते हैं, उस क्लासरुम में FIRE NOC की खामियों को दूर नहीं कर पाते हैं.
अब आप बताइए कि फैसल खान उर्फ खान सर को कितनी ज्यादा चिंता है आपके बच्चों की?
#KhanCoachingCentre #PatnaPolice #bihar
सीधे मुद्दे की बात तो यही है कि इतना कुछ होने के बाद भी पटना के फैसल खान उर्फ 'खान सर' को जो डि���िटल पत्रकार और कंटेंट क्रिएटर, अभी भी आदरण��य और अविस्मरणीय बताने में लगे हुए हैं, उन्हें @VistaarNews पर @gyanendrat1 और @HimanshuDhari10 की ये रिपोर्ट बहुत ध्यान से देखने और सुनने की जरूरत है.
ताकि वो ये समझ जाएं कि अब पटना में जारी इस मौजूदा विवाद के बीच ऐसे गालीबाज और गोलीबाज व्यक्ति की पैरोकारी करने के लिए उन्हें थोड़ी ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी.
अब सिर्फ 'खान' वाला खदान खोदने से ही काम नहीं चलेगा, हिन्दू-मुस्लिम का एंगल ढूंढ कर फैजल खान जैसे फूहड़ मास्टरों ��ो सहानुभूति का बैंगल पहनाने वाला ट्रिक भी पुराना हो गया है. अब कानून के मुताबिक कार्रवाई की बात तो होकर रहेगी.
मतलब ज्ञानबिंदु वाले रौशन आनंद की गिरफ्तारी पर दबी जुबान में सिर्फ ये कहकर आगे बढ़ जाना कि हां, वो गिरफ्तारी भी गलत है! ऐसा होना तो नहीं चाहिए था! ये कहकर काम नहीं चलेगा...और फिर इस फैसल खान के हिस्से बिहार के सिस्टम और शासन प्रशासन की बपौती सौंपने वाले लहजे में ये कह कर भी काम नहीं बनेगा कि 'खान सर' को पुलिस से कह कर रौशन आनंद को भी छुड़वा लेना चाहिए.. कि जैसे फैसल खान मुसल्लहपुर हाट वाले खान सर नहीं हुए कि गैंग्स ऑफ वासेपुर वाले फैजल खान हो गए!
न न न न , ये PR स्टंट तो अब बच्चा भी पकड़ लेगा।
सीधे मुद्दे की बात तो ये भी है कि जो बात आज भोपाल के न्यूज़रूम से निकल कर दिल्ली और पटना तक पहुंच रही है, वो बात नोएडा के स्टूडियो में बहुत पहले ही हो जान��� चाहिए थी और बिल्कुल इसी लहजे और एटीट्यूड में कही जानी चाहिए थी.. लेकिन नोएडा से ये इसलिए भी संभव नहीं हो पाया क्योंकि कभी इसी नोएडा ने फैजल खान को अपना मंच दिया था..पॉडकास्ट के नाम पर जब यही फैजल खान इस देश के पत्रकारों को लेकर घटिया, गलीच और धमकी भरी बकवास करता था तब उसके सामने बैठे नोएडा के इसी न्यूज़रूम से निकले हुए पॉडकास्टर पत्रकार खीखी कर दांत निकाल रहे होते थे... सब खाली व्यूज के चक्कर में!
बाकी @Abhinav_Pan भैया,
आपको तो ये पूरी रिपोर्ट दो बार देखनी चाहिए.
आप कहां अदाणी और अनिल अग्रवाल पर चले गए! आप फैसल खान और रौशन आनंद के बीच की इस कोचिंग क्लैश को सिर्फ 'खान' के नाम पर फ्लैश मार कर कैसे दिखा सकते हैं?
#bihar #patna #KhanCoachingCentre #GyanbinduCoachingCentre #PatnaPolice
फैजल खान के 'खान' होने का विरोध होता तो वो 'खान सर' बन कर ��ोगों को अब तक अपने फूहड़बाज़ी का चूरन नहीं बेच रहे होते।
फैजल खान की फूहड़बाज़ी और दादागिरी का विरोध हो रहा है और अब वो एक्पोज हो चुके हैं. आंख खोल कर देखे वो उनकी सेटिंगबाजी से लेकर छात्र छात्राएं तक उनकी सड़कछाप भाषा और उनके शातिर षड़यंत्र तक का जाल अब फट चुका है.