दोस्तों, बिहार में छात्रों के साथ जिस तरह की पुलिसिया बर्बरता हुई है, वह बेहद निंदनीय है.
हमारे NSUI पटना विश्वविद्यालय के अध्यक्ष शांतनु शेखर को पुलिस ने हिरासत में रखा, उनके साथ मारपीट की गई और उन्हें गंभीर चोटें आई हैं.
हमारी NSUI की एक महिला पदाधिकारी के घर रात लगभग 2 बजे भारी पुलिस बल पहुंचा. उनके घर की तलाशी ली गई और उनका फोन भी चेक किया गया. मैं पूछना चाहती हूं कि ऐसा कौन-सा अपराध हो गया था कि आधी रात को यह कार्रवाई करनी पड़ी? क्या सुबह तक इंतजार नहीं किया जा सकता था?
आज सैकड़ों ऐसे छात्र हैं, जिनके माता-पिता को यह तक नहीं पता कि उनके बच्चे कहां हैं, किस थाने या जेल में हैं और किस हालत में हैं.
हमारे एक साथी साहिल की तबीयत खराब होने के बावजूद उन्हें हिरासत में रखा गया. स्वास्थ्य बिगड़ने पर छोड़ा गया, लेकिन बाद में फिर से हिरासत में ले लिया गया. उनकी स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है.
महिलाओं को भी निशाना बनाया जा रहा है. हमारी साथी वंडर विहार, जो केवल प्रदर्शन को कवर करने गई थीं, उन्हें सोशल मीडिया पर अश्लील टिप्पणियों, गालियों और धमकियों का सामना करना पड़ रहा है.
मैं पूछना चाहती हूं, क्या इस देश में छात्र होकर अपनी आवाज उठाना अपराध है? क्या महिला होकर विरोध दर्ज कराना अपराध है?
छात्रों और महिलाओं पर हुआ यह हमला पूरी तरह गलत है. हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं और इस तरह की दमनकारी कार्रवाई से डरने वाले नहीं हैं.
#न_डरेंगे_न_दबेंगे
#हम_साथ_हैं
एक छात्र ने रोते हुए कहा —
“धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा काफ़ी नहीं है। हम चाहते हैं कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह भी इस्तीफ़ा दें।
पुलिस ने हमें कितनी बेरहमी से पीटा, यह सिर्फ़ हम ही जानते हैं।”