आज का दैनिक भास्कर के अखबार ने अभी तक का सबसे बड़ा खुलासा किया है।
ये है हमारे देश की सबसे बड़ी समस्या। आप जातिवाद, धर्मवाद के चक्कर में पड़ कर लड़ रहे और इधर आपके नेता सब देश को खोखला कर रहे। जितना भी ट्विटर हैंडल जो जाति और धर्म के नाम पर अपना पक्ष रखते है सब आपको भटका रहे है
@BIHARSS1 और बच्चों को बाहर टायलेट के लिए जाते भी देखा है।
अब जब खुद पर पड़ेगा तो ताला भी खुलेगा और सफाई होगी। बहुत अच्छा निर्णय है। सबसे ज्यादा स्कूल की बच्चियों के साथ हो रहे परेशानी खत्म होगी।
@BIHARSS1 बहुत सही। मैने कई विद्यालयों में दो दो जगह शौचालय बना हुआ देखा है और उसमें तला लगा हुआ भी। पता न एक कोई योजना है जिसके अंतर्गत विद्यालय में बाहर से टीन शेड के दो टॉयलेट बने है। और पहले से जो रहता है सो अलग। टंकी की व्यवस्था भी देखी है। एक दो नहीं कई। लेकिन ये लोग ताला लगा देते है
@justshailendra बहुतों के आंसू निकल जाते है जब वहां दूर से ही डोंगा में पानी डलवा दिया जाता है। वही एक तरफ स्पर्श करने का सौभाग्य प्राप्त करते हुए दिखता है। बहुत भेदभाव है वहाँ। तीन तरफ से डोंगा और एक तरफ से सीधे अभिषेक बहुत बुरा लगता है।
ये सिर्फ प्रभावशाली लोगों को मिलता है।
देश अपने सबसे बुरे विदेश नीति के दौर से गुजर रहा है। बिना रीढ़ की ये सरकार है जिसमें अपने नागरिकों के मौत पर सिर्फ दुःख हो रहा।
यही अगर अमरीका का होता तो अभी तक गांव फाड़ देता , लेकिन यहां तो खुद की ..
केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने ट्वीट किया, "पलाऊ के झंडे वाले जहाज MT सेटेबेलो पर हुई दुखद घटना के बारे में जानकर बहुत अफ़सोस हुआ। दुख की बात है कि शुरू में लापता बताए गए तीन भारतीय नाविकों में से दो के शव मिलने के बाद उनकी मौत की पुष्टि हो गई है... मैंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि बचाए गए क्रू सदस्यों को तुरंत वापस लाया जाए और मृतकों के शवों को भी जल्द से जल्द वापस लाया जाए ताकि उनका अंतिम संस्कार किया जा सके।"
@ipsvijrk ये लोग दूसरे जिले की बात कर रहे हम दूसरे राज्य में जा कर दिए है। अरे जब पता है कि मेरा परीक्षा इतने बजे है तो हम उतना समय ले कर चलेंगे न, रात को पहुंचेगे या सुबह सुबह और फिर केंद्र पर। वही 4-5 घंटा बिताएंगे।
चूल्हा पर अदहन रख कर चावल खोजेंगे तो क्या होगा..
@ipsvijrk जितना भी कमेंट्स में ये बकवास कर रहे कि 200-500 km है कैसे होगा, ये सब अपना गलती दूसरे पर थोपना चाहते है। मैं भी परीक्षा देता हूं कभी भी मेरे साथ ऐसा नहीं हुआ है।
मैने 350+km सिर्फ घर से रेलवे स्टेश��� की दूरी है परीक्षा केंद्र का 30 और, अपने शिफ्ट से 2-3 शिफ्ट पहले आ जाते है।++
@Sachingupta इसके बाद ही तो रील का भौकाल मचाएंगे।
इस उम्र में सब कोई ऐसे ही लड़ता है। वर्तमान में हमारा देश जनसंख्या बहुल देश है। इतना कष्ट झेलने के बाद भी जब नौकरी लग जाती है तो दूसरे का कष्ट नहीं समझते।