प्रधानमंत्री @narendramodi जी ने कहा था कि मैं चाहता हूँ 'हवाई जहाज में हवाई चप्पल वाले भी सफर कर सकें।'
प्रयागराज में कुम्भ के आयोजन के दौरान विमानन कंपनियों द्वारा हवाई किराए में बेतहाशा वृद्धि ने यात्रियों के लिए संकट पैदा कर दिया है। सामान्य श्रेणी के किराए को 700 प्रतिशत तक बढ़ाकर कंपनियों ने यात्रियों का शोषण किया है। नई दिल्ली से प्रयागराज का किराया ₹31,000 तक पहुँच चुका है, जबकि नई दिल्ली से लंदन का किराया केवल ₹24,000 है। यह अन्यायपूर्ण और असंगत किराए सरकार की खामोशी और उदासीनता की ओर इशारा करता है। ये सरकार द्वारा विमानन कंपनियों को लूट की खुली छुट है।
विमानन कंपनियों द्वारा की जा रही इस खुली लूट पर स��कार की चुप्पी बेहद निराशाजनक है। यह स्पष्ट रूप से यात्रियों के शोषण का मामला है। हम सरकार से मांग करते हैं कि—
1. हवाई किराए की अधिकतम सीमा तय की जाए, ताकि आम जनता को राहत मिले।
2. एयरलाइंस कंपनियों को किराया निर्धारण में पारदर्शिता अपनाने के लिए बाध्य किया जाए।
3. सस्ती उड़ानों की संख्या बढ़ाई जाए, जिससे हवाई यात्रा वाकई सबके लिए सुलभ हो।
4. इस मुद्दे पर संसद में बहस कराई जाए और एयरलाइंस कंपनियों से जवाब मांगा जाए।
पीएम मोदी जी ने "उड़े देश का आम नागरिक" (UDAN) योजना की शुरुआत इस उद्देश्य से की थी कि छोटे शहरों को हवाई मार्ग से जोड़ा जाए और किफायती किराए में आम लोगों को हवाई यात्रा की सुविधा मिले। लेकिन आज वास्तविकता इसके बिल्कुल उलट हो गई है। UDAN योजना का उद्देश्य यह थ��� कि आम नागरिक भी 2500 रुपये प्रति घंटे रुपये के सस्ते किराए में उड़ान भर सके, लेकिन अब तो *घरेलू उड़ानों के किराए ने अंतरराष्ट्रीय किराए को भी पीछे छोड़ दिया है। यह सरकार की नीतियों और जमीनी हकीकत के बीच की गहरी खाई को दिखाता है।
जब सरकार रेलवे में किराया नियंत्रण कर सकती है, पेट्रोल-डीजल के दाम तय कर सकती है, तो हवाई किराए पर अंकुश लगाने से क्यों पीछे हट रही है? क्या सरकार कुछ कॉरपोरेट्स के हितों की रक्षा के लिए जनता की जेब काटने देगी?
विमानन कंपनियों की इस लूट के खिलाफ मैंने लोकसभा में आवाज उठाई थी, और आज फिर मैं सरकार से पूछना चाहता हूँ— वह मुनाफाखोरी के साथ खड़ी है या देश की आम जनता के साथ?
@mygovindia @RamMNK
@DGCAIndia
चाइनीज मांझा, जो वर्तमान में व्यापक रूप से उपयोग हो रहा है, न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक है, बल्कि मानव जीवन और पक्षियों के लिए भी घातक सिद्ध हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा इस पर प्रतिबंध लगाने के बावजूद, इसका उपयोग खुलेआम जारी है।
इस मांझे में उपयोग किए जाने वाले नाय��ॉन और अन्य सिंथेटिक सामग्री न केवल गैर-बायोडिग्रेडेबल हैं, बल्कि इसके तेज धागे से हर वर्ष हजारों निर्दोष पक्ष�� और नागरिक गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं। उदाहरण के तौर पर, पिछले वर्ष, देशभर में 500 से अधिक पक्षी और 100 से अधिक नागरिक चाइनीज मांझे की वजह से दुर्घटनाओं का शिकार हुए। त्योहारों के दौरान यह समस्या और बढ़ जाती है, जब सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर दुर्घटनाओं की संभावना दोगुनी हो जाती है।
इसलिए, @mygovindia से विनम्र निवेदन है कि चाइनीज मांझे पर लगाए गए प्रतिबंध को सख्ती से लागू करवाने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जाएं:
1. प्रतिबंधित सामग्री की बिक्री और उपयोग पर कड़ी निगरानी रखी जाए।
2. प्रशासन और पुलिस विभाग को इस सामग्री के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने के निर्देश दिए जाएं।
3. जनता को इसके खतरों और पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों के बारे में जागरूक करने के लिए प्रभावी अभियान चलाए जाएं।
4. माता-पिता और स्कूलों में अध्यापकों द्वारा बच्चों को इस विषय ��र जागरूक करना आवश्यक है।
5. चाइनीज मांझे की "ऑनलाइन बिक्री" पर विशेष निगरानी की जाए।
6. दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
इसके साथ, सरकार को पारंपरिक और पर्यावरण-अनुकूल मांझे को प्रोत्साहित करने के लिए कदम उठाने चाहिए, ताकि नागरिक सुरक्षित रूप से अपनी परंपराओं का पालन कर सकें और पर्यावरण संतुलन बना रहे।
हमें विश्वास है कि सरकार इस गंभीर मुद्दे पर त्वरित और ठोस कदम उठाएगी, ताकि नागरिकों और पर्यावरण को इस खतरनाक समस्या से बचाया जा सके।
मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार रिश्वत खोरी और गरीबों की जमीन छीन कर अत्याचार कर रही है।
प्रशासनिक अधिकारी नेताओ की पैरवी करके गरीबों और दलित मुस्लिमों सहित आदिवासियों की जमीन छीनने का काम करते हैं तो संविधान का पाठ पढ़ाने के लिए आम जनता को सड़को पर आना पड़ता है। (आलोट रतलाम मप्र)