2 शब्द डबल इंजन सरकार के लिए 🤔🤔
बीमार वास्तविक पीड़ित कर्मचारी उम्मीद ही नहीं करे
दिव्यांग कर्मचारी भाई बहिन तक का तबादला नहीं हुआ ???
खूब लड़ो दो साल और है समय है जनता कर्मचारी सब देख रहें है चल क्या रहा है सरकार में ख़ुद MLA मंत्री दुखी है अधिकारियों के स्वर्णकाल से ।।
राजस्थान में पिछले दो महीनों में 18 प्रसूताओं की मौत होना अत्यंत गंभीर और चिंताजनक मामला है। ऐसे संवेदनशील विषय पर जिम्मेदारी स्वीकार कर स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का भरोसा देने के बजाय स्वास्थ्य मंत्री जिस प्रकार के बयान मीडिया के सामने दे रहे हैं, वह उनकी संवेदनहीन और गैर-जिम्मेदार मानसिकता को उजागर करता है।
मैं मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp से पूछना चाहता हूँ कि क्या वे अपने ऐसे गैर-जिम्मेदार स्वास्थ्य मंत्री को लेकर कोई टिप्पणी करेंगे ?
आखिर प्रदेश की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था, अस्पतालों की अव्यवस्था और लगातार हो रही मातृ मृत्यु पर मुख्यमंत्री कब तक मौन रहेंगे ?
धरातल पर जाँच करके देख लें — राजस्थान में मई से अब तक 18 प्रसूताओं की मौत हो चुकी है।
इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की है। चिकित्सा मंत्री जी को अपने विभाग की कोई चिंता नहीं है। विभाग की हालत बेहद खराब है — न कोई योजना ठीक से चल रही है, न कोई सुन रहा है।
उदाहरण: FSO डेपुटेशन पर लगे कर्मचारी भी मुख्यमंत्री साहब के आदेश, मुख्य सचिव के आदेश, कोर्ट के आदेश — सबकी धज्जियाँ उड़ा रहे हैं। भ्रष्टाचार की आड़ में ये सब हो रहा है। इससे बदतर और क्या हो सकता है?
विशेष बात: गर्भवती महिलाओं से संबंधित एक भी योजना वास्तव में धरातल पर नहीं चल रही है। जो योजनाएँ चल रही हैं, वे केवल कागजों में हैं।
कोई भी मीडिया मित्र अगर धरातल की सच्चाई दिखाना चाहे तो किसी भी जाँच केंद्र पर जाकर या फोन करके पूछ ले — “फ्री जाँच वाली माँ ���ाउचर योजना के त���त जाँच कर दोगे?” उनका जवाब सुनकर आपके होश उड़ जाएँगे।
भगवान ही मालिक है। एक वर्ष से लगातार अस्पताल में अनुभव ले रहा हूँ। आजादी के बाद अस्पतालों में जनता का इतना बुरा समय कभी नहीं आया। योजनाओं के भरोसे अस्पताल आने वाले दुखी लोग दिल से बद्दुआ देते हैं।
चिकित्सा मंत्री और विभाग शून्य पर है। जबकि पिछली सरकार में यह विभाग टॉप पर पहुँच गया था। यह प्रदेश और जनता जनार्दन का दुर्भाग्य है।
कंप्यूटर अनुदेशक की भर्ती परीक���षा का आयोजन कराकर सरकार सिर्फ घास काटना चाहती है 🤔🤔🤔🤔🤔🤔🤔🤔🤔कुछ महान अधिकारी अपने स्वर्णकाल का भरपूर फायदा उठा रहे है ।।
पिछले सरकार की भर्ती के ��ेष बैकलॉग पदों पर एग्जाम करवाकर वा वाई नहीं मिलेगी न इनके वोट यही सच्चाई है लेकिन सिस्टम ने आँखे बंद कर ली है 🤔🤔🤔🤔वोट लेने वालो का भी समय खराब चल है अधिकारियों के स्वर्णकाल में नेताओं की कैसे कोई सुन सकता है ।।
It के युवाओं में बहुत ताकत है लेकिन वो इसका उपयोग नहीं करना चाहते ।।
आने वाले चुनाव में और सोशल मीडिया के माध्यम से इस पीड़ा का जवाब जरूर देना है ।।
तानाशाही किसी भी शक्तिशाली सत्ता की स्थाई नहीं रही है और सत्ता का गुमान सही नहीं है जनता युवाओं के वोटो का अपमान प्रदेश में हो रहा है ।।
आज कंप्यूटर अनुदेशक की पीड़ा को लेकर एक सत्ता पक्ष के विधायक से पीड़ा शेयर की तो उल्टा उनकी पीड़ा सुनकर भरोसा ही नहीं हुआ वो भी इतने दुखी है उनके ख़ुद के न ट्रांसफर हुए न कोई अधिकारी सुनता है विपक्ष जैसा अनुभव कर रहे है ऐसे में युवाओं की कौन सुनेगा 🤔🤔🤔🤔🤔🤔ये जवाब आया उनका
राजस्थान सरकार के तबादला आदेश अब प्रशासनिक दस्तावेज़ कम और मज़ाक ज़्यादा बनते जा रहे हैं।
पहले तबादला सूची में एक दिवंगत पुलिसकर्मी का नाम सम्मिलित कर दिया ,उसके बाद सत्ता पक्ष के एक विधायक का नाम पटवारी के रूप में दर्ज कर उनका नाम भी तबादला सूची में शामिल कर दिया गया।
क्या सरकार बिना किसी जांच-पड़ताल के सिर्फ़ फाइलों पर मुहर लगा रही है ?
क्या अधिकारियों को यह तक पता नहीं कि कर्मचारी जीवित है या नहीं ?
यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की गंभीर विफलता है। ऐसी गलतियाँ लाखों कर्मचारियों के भविष्य और सरकार की विश्वसनीयता दोनों पर सवाल खड़े करती हैं।
मुख्यमंत्री @BhajanlalBjp जी बताएं,क्या यही आपका "सुशासन" और "गुड गवर्नेंस" है, जहाँ तबादला सूची भी बिना सत्यापन के जारी कर दी जाती है ?