13 नवम्बर — विश्व दयालुता दिवस (World Kindness Day)
हज़रत मुहम्मद ﷺ ने फरमाया।
1️⃣ अल्लाह दयालु है, और दयालुता को पसंद करता है��
2️⃣ दयालुता ईमान की निशानी है; जिसके अंदर दयालुता नहीं, उसके अंदर ईमान नहीं।
3️⃣ अल्लाह उस पर दया नहीं करता जो लोगों पर दया नहीं करता।
4️⃣ अगर तुम चाहते हो कि तुम पर रहम किया जाए, तो दयालु बनो।
5️⃣ जो छोटों पर रहम (दयालुता) और बड़ों का आदर नहीं करता, वह हम में से नहीं है।
6️⃣ धरती वालों पर रहम करो, आसमान वाला तुम पर रहम करेगा।
7️⃣ तुम में से वह मोमिन नहीं है जिसका पेट भरा हो और उसका पड़ोसी भूखा हो।
8️⃣ हर जानदार पर दया करने में पुण्य है।
🌿 दयालुता ही इंसानियत की सबसे बड़ी पहचान है।
आपलोग हमारा एग्जिट पोस्ट पूछ-पूछ के परेशान कईले हैं! बोल रहे — “तुम बताओ कौन सरकार बना रहा है? सीएम कौन होगा?��
तो लीजिए फिर सुनिए —
हमारे सर्वे के हिसाब से Plurals Party बिहार की सबसे बड़ी पार्टी होगी, पर अकेले बहुमत का आंकड़ा नहीं छू पाएगी। इन्हें मजबूरन जनशक्ति जनता दल और जन सुराज का समर्थन लेना होगा।
तीनों पार्टी का ये नया गठबंधन Loktantrik Alliance for Welfare, Development & Awareness (L.A.W.D.A) कहलाएगा।
अनंत दा की आवाज में कहें तो "लवडा का सरकार रहेगा"।
यह गठबंधन साथ में 200+ का आंकड़ा छू लेगा।
पुष्पम प्रिया बिहार की नई मुख्यमंत्री होंगी,
पर���शान किशोर और तेजप्रताप जी डिप्टी सीएम होंगे।
इंडी गठबंधन और एनडीए को इतनी कम सीट आएंगी कि उनको अपनी कुर्सी लेकर विधानसभा जाना होगा। अंततः गुजरातियों को बिहार छोड़कर भागना होगा।
(बाकी, ये बिहार है — आपको सप्राइज कर सकता है। असली फैसला जनता करेगी। 14 को बने रहिएगा।)
#ExitPoll
सूडान: भूली हुई इंसानियत
सूडान इस वक्त दुनिया के सबसे बड़े मानवीय संकटों में से एक झेल रहा है। 2023 से चल रहे गृहयुद्ध में सेना और रेपिड सपोर्ट फोर्स (RSF) के बीच सत्ता की लड़ाई ने लाखों लोगों की ज़िंदगी तबाह कर दी है और डेढ़ लाख से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं। उत्तर दारफुर का शहर अल-फ़ाशर महीनों से घेराबंदी में है, जहाँ लोग भूख, प्यास और बीमारियों से मर रहे हैं।
कुछ दिन पहले तीन युवाओं को सिर्फ़ आटा और मैकरोनी ले जाने के अपराध में RSF के सैनिकों ने गोली मार दी — यह घटना इस युद्ध की बेरहमी और दुनिया की बेपरवाही का प्रतीक बन गई है।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार एक करोड़ से अधिक लोग भुखमरी के संकट में हैं और लगभग बारह ��िलियन लोग मानवीय मदद के इंतज़ार में हैं। लेकिन वैश्विक समुदाय अब भी चुप है, क्योंकि यह युद्ध न तो मीडिया की सुर्खियों में है और न ही राजनीति के एजेंडे में।
सूडान, जो कभी सभ्यताओं का संगम माना जाता था, आज खून, भूख और बेबसी की ज़मीन बन गया है — जहाँ एक थैला आटा और कुछ पैकेट मैकरोनी अब ज़िंदगी और मौत के बीच की रेखा बन गए हैं।
सूडान: भूली हुई इंसानियत
सूडान इस वक्त दुनिया के सबसे बड़े मानवीय संकटों में से एक झेल रहा है। 2023 से चल रहे गृहयुद्ध में सेना और र���पिड सपोर्ट फोर्स (RSF) के बीच सत्ता की लड़ाई ने लाखों लोगों की ज़िंदगी तबाह कर दी है और डेढ़ लाख से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं। उत्तर दारफुर का शहर अल-फ़ाशर महीनों से घेराबंदी में है, जहाँ लोग भूख, प्यास और बीमारियों से मर रहे हैं।
कुछ दिन पहले तीन युवाओं को सिर्फ़ आटा और मैकरोनी ले जाने के अपराध में RSF के सैनिकों ने गोली मार दी — यह घटना इस युद्ध की बेरहमी और दुनिया की बेपरवाही का प्रतीक बन गई है��
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार एक करोड़ से अधिक लोग भुखमरी के संकट में हैं और लगभग बारह मिलियन लोग मानवीय मदद के इंतज़ार में हैं। लेकिन वैश्विक समुदाय अब भी चुप है, क्योंकि यह युद्ध न तो मीडिया की सुर्खियों में है और न ही राजनीति के एजेंडे में।
सूडान, जो कभी सभ्यताओं का संगम माना जाता था, आज खून, भूख और बेबसी की ज़मीन बन गया है — जहाँ एक थैला आटा और कुछ पैकेट मैकरोनी अब ज़िंदगी और मौत के बीच की रेखा बन गए हैं।