सपा अच्छी पार्टी है केवल 2027 चुनाव में लड़ाई में नहीं है एक बार बीजे���ी हट जाएगी तो सपा का उभार होगा यह बात सपा का हर समर्थक जान गया है,
इसीलिए सपा का वोटर 2027 में बीजेपी को उखाड़ फेंकने के लिए बसपा के साथ आ गया है,
जय बसपा,
@IspeakVikash सिर्फ सपा भाजपा को टक्कर में दिखाकर माहौल बनाया जा रहा है, क्यों कि सपा जीतनी नहीं है, कही बसपा को वोट न चला जाए क्यों कि बसपा जमीन पर बहुत मेहनत कर रही है,
असली टक्कर बसपा की है भाजपा से
ग्रेटर नोएडा में आकाश आनंद की रैली, जेवर विधानसभा सीट से BSP प्रत्याशी का ऐलान, सतवीर सिंह नागर होंगे BSP के उम्मीदवार
#AkashAnand#BSP#SatveerSinghNagar#Jewar
जब BSP “देश का संविधान, देश की शान” को अपना घोषणापत्र बताती है, तो इसका वास्तविक अर्थ क्या है? क्या यह घोषणापत्र न बनाने का केवल एक बहाना है, या इसके पीछे संविधान को लेकर कोई स्पष्ट राजनीतिक और वैचारिक दृष्टिकोण है?
और क्या इस विषय पर विस्तार से बात करने के लिए मुझे एक वीडियो बनाना चाहिए?
बसपा कार्यकाल में SCP के फंड से यूपी के 4 जिलों में अंबेडकर नगर, कन्नौज, जालौन और सहारनपुर में मेडिकल कॉलेज बनाए गए थे
इन कॉलेज में Sc/st वर्ग के लिए 70% सीट आरक्षित थी। यह मेडिकल कॉलेज शिक्षा बजट नहीं बल्कि sc/st के बजट से चलते थे।
अगस्त 2025 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय की लखनऊ बेंच ने इन मेडिकल कॉ���ेज में अनुसूचित जाति और जनजाति के छात्रों को मिलने वाले 70% आरक्षण पर यह कह कर रो�� लगा दी कि आरक्षण की 50% सीमा से अधिक है।
लखनऊ के इको गार्डन में छात्र इस आरक्षण को फिर से बहाल करने के लिए गुहार लगा रहे हैं लेकिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के SC/ST से आने वाले सांसद विधायक चुप हैं।
सरकार की कमजोरी पैरवी के कारण उच्च न्यायालय में केस कमजोर पड़ा और यह फैसला आया।
अन्यथा आरक्षण के 50 परसेंट वाली सीमा के बाहर तो Ews आरक्षण भी आता है उस पर तो आज तक कोई रोक नहीं लगी।
भाजपा सरकार sc/st के फंड को फ��रीबीज में बांट कर कहती है कि वह दलित शोषितों का उत्थान कर रही है
लेकिन इस फंड का सबसे बड़ा सदुपयोग बसपा सरकार में हुआ जब ये विशेष मेडिकल कॉलेज बने और इनमें मिले 70% आरक्षण के कारण शोषित वंचित समाज के हजारों छात्र डॉक्टर बने।
इस बार BSP को जिताने के लिए 45% वोट का सपना देखिए और पूरी तैयारी रखिए।
BJP चाहती है कि BSP लगभग 10% वोट ही ले, ताकि वह आसानी से जीत सके, जैसा पहले भी होता रहा है। जैसे ही BSP 10–12% से ऊपर जाती हुई दिखाई देगी, BJP BSP का भयंकर विरोध शुरू कर देगी।
उस समय BSP को एक जाति की पार्टी बताने का प्रयास किया जाएगा और, अगर उससे भी काम नहीं चला, तो यह अफ़वाह फैलाई जाएगी कि कुछ मुस्लिम लोग BSP को वोट देने वाले हैं।
हमें किसी एक जाति या समुदाय के नहीं, बल्कि सभी समुदायों के वोट चाहिए।
बसपा मिशन-2027 🔥🔥🔥
आकाश आनंद ने आज हाथरस के सादाबाद से बसपा के चुनावी अभियान का आगाज कर दिया है। वह बहन जी के संदेशों को लेकर मतदाताओं से सीधा संपर्क बढ़ा रहे हैं।
बसपाइयों ने इसे X पर नंबर 2 पर ट्रेंड करवा दिया है। #बहन_ज��_का_संदेश
आज Pay back to Society के साप्ताहिक कार्यक्रम करे। जिसमे काफी की सहायता की गई। उस संवाद में पूछा कि
"क्या कारण है कि जो एससी अधिकारी बन गया वो रिटायर होते ही बसपा के पास नही आताज़ हालांकि श्री कृपा शंकर सरोज जी जैसे बुद्धिजीवी अपवाद हो सकते है"
मैने ही इसका उत्तर दिया कि;
मे अहमदाबाद में रहता था तब एक डोमेस्टिक हेल्पर जो एससी ही थी (साधारण भारतीय भाषा मे कामवाली) को रखा। वो एक गैर एससी जो इनकम टैक्स में अधिकारी था व मेरठ से ही थे के इंहा भी कार्य करती थी। मे उसे 200 रुपया ज्यादा देता था। मेरे इंहा वो एक महीने में 10 दिन की छुट्टी करती थी। वंही गैर एससी के इंहा वो छोटे बच्चे को भी साहब, तमीज से बात करती थी, छुट्टी 2 या 3 ही करती थी। उनके गुणगान गाती रहती थी। जबकिं में अकेला रहता था।।कोई ज्यादा काम नही था। क्योंकि में 8 दिन तो अपने होम टाउन आ जाता था। इससे अलग 7 छुट्टियां वो खुद करती थी।
इसका कारण?
एक मानसिक तौर पर ऐसी इमेज बना देना जिसमे में उसे चाहे 200 रुपये ज्यादा मिल रहे हो। 10 से 15 छुट्टियां मिल रही हो। उससे में इज्जत से बोल रहा हूँ।।लेकिन वो महत्व दूसरे एससी परिवार को दे रही थी।।
यह ही हाल एससी अधिकारियो का है। उन्हें;
1.बहनजी ने मामूली क्लर्क टाइप आईएएस/आईपीएस/पीसीएस/पीपीएस/अन्य की इमेज से महत्वपूर्ण पद दिए। जँहा उनक�� इमेज नेटत्व की नही थी, उन्हें नेतृत्व दिया। इससे यह इमेज भी पहली बार बनी की आरक्षण से आये अधिकारी भी अच्छा कार्य कर सकते है। उससे पहले यह इमेज थी कि यह लोग "आरक्षण से आये बोझ" है। जिला नही सम्भाल सकते है।।
2.लेकिन यह सभी अभी तक डीएनए की कमजोरी के कारण अभी तक यह स्वीकार नही कर सके है कि उनके ही समाज की और उसमे भी एक महिला, इतनी दबंग कैसे हो सकती है, चार बार मुख्यमंत्री कैसे बन सकती है, दुनिया की टॉप 10 में सशक्त महिला के तौर पर कैसे इमेज बना सकती है। देश की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी तक कैसे पहुच सकती है।
उन्हें विश्वास ही नही होता। क्योंकि उनका मानसिक टारगेट उस स्तर तक का नही है।। वो सोचते है कि उनके समाज के व्यक्ति की वाह वाही उनकी तौहीन है इससे अच्छा कोंग्रेस, भाजपा, सपा के गैर समाज को जिंदाबाद करे। जैसे मेरी डोमेस्टिक हेल्पर की स्तिथी थी। यह सोचते है कि बहनजी;
सुबह उठते ही उन सभी को गुडमार���निंग कहे।
फिर पूछे कि आज क्या क��ना है।
सलाह ले।
ओर सबसे बेस्ट;
"अपनी जगह पार्टी अध्यक्ष उन्हें बना दे"
क्योंकि वो बड़े कलर्क अथार्त आईएएस/आईपीएस/पीसीएस रह चुके है।।
विकास कुमार जाटव
@Mayawati
@AnandAkash_BSP
माननीय बहन जी ! आपको भावुक होने की कोई जरूरत नहीं है. भाई उमाशंकर सिंह तो सदैव हमारे दिल में रहेंगे. लेकिन अभी आपके और भी बहुत भाई जिंदा हैं, जो आपके साथ चट्टान बनकर खड़े हुए हैं. आप हमारी आन बान और शान हैं. इसलिए हम कसम खाकर कहते हैं कि आपको कभी धोखा नहीं देंगे.
@Mayawati@AnandAkash_BSP
बहन कुमारी मायावती जी के द्वारा 👇
रणधीर बेनीवाल
अशोक सिद्धार्थ
शमसुद्दीन राईन
जसवीर सिंह गढ़ी
जो लोग अपने दम पर 4 वोट ना दिला सके उनको पार्टी में कब तक जगह मिलती रहेगी,
यह बहन जी का फैसला अच्छा है अगला नंबर रमाकांत पिप्पल का होना चाहिए।।
आज भी जो भी वोट मिलता है बहन ���ुमारी मायावती जी के नाम पर और हाथी सिंबल के वजह से और प्रत्याशी अपना वोट लाते हैं और किसी में दम नहीं है अब आकाश आनंद लोकप्रिय होते जा रहे हैं वह वोट लेकर आएंगे युवा उनसे जुड़ रहा है।।
दगड़ू की सरकारी नौकरी लग गयी। आरक्षित शीट की आखरी वाली शीट पर सफलतापूर्वक कब्जा कर लिया। चलो दगड़ू की इस सफलता पर उनका साक्षात्कार हो जाये।
विकास : जय भीम दगड़ू जी।
दगड़ू : आइए विकास जी।
विकास : आपने आखिरकार सरकारी नौकरी प्राप्त कर ही ली।
दगड़ू : भगवान ने मेरी सुन ही ली। मेरी म���ँ ने सभी व्रत रखें, पिता धार्मिक स्थलों पर गए। पिछले साल में कांवड़ लेकर गया। आखिरकार सुन ही ली। मु��े नौकरी मिल ही गयी।
विकास : मतलब बिना मेहनत करे, ऐसा करने पर नौकरी लग जाएगी?
दगड़ू : अरे नही मेहनत के साथ साथ यह भी जरूरी है। बल्कि यह ज्यादा जरूरी है।।
विकास : आपका आरक्षित शीट पर और उसमे भी अंतिम शीट पर नम्बर आया है। यह आरक्षित शीट आप जिस समाज से है उंसके प्रतिशत के कारण मिली है। समाज ने सरकार को कहा कि हमारा इतना प्रतिशत है, यह हमें दो, इसपर हम अपने लोग भेजेंगे। इसलिए समाज ने आपको एक तरह से इस नौ��री पर अपने प्रतिनिधि के तौर पर भेजा है।।समाज के प्रति आप क्या करेंगे?
दगड़ू : सबसे पहले धार्मिक स्थल खुलवाऊंगा। उसे भव्य रूप दुँगा। इससे बड़ा और कौन सा सामाजिक कार्य है।। पूरे दिन गुणगान करेंगे। पुण्य मिलेगा ।
विकास : बाबा साहब के प्रति कुछ?
दगड़ू : 14 अप्रैल को 500 रुपया चन्दा दे दूँगा। चलिए छोड़िए। मुझे देर हो रही हैं काफी जरूरी जगह जाना है। हमारे परिवार के धार्मिक रहनुमा के पास जाना है। उनका ���शीर्वाद सबसे जरूरी है। उन्ही के आशीर्वाद से नौकरी लगी है।
विकास : में भी चलूं?
दगड़ू : चलिए। आपको भी पुण्य मिलेगा।
पहुच गए धार्मिक स्थल पर। धार्मिक रहनुमा कंही जा रहे थे। कई व्यक्ति साथ मे थे। दगड़ू आते ही पैरों में उल्टा लौटकर प्रणाम करने लगा।
दगड़ू : महाराज । आपके कारण नौकरी लग गयी। अपने चरणों मे जगह स्वीकार कीजिये।
धार्मिक व्यक्ति : हाँ हाँ ठीक है। थोड़ा दूर रहकर पैरों में गिरा करो। मुझे जल्दी है में जा रहा हूँ। देखा न मेरे समाज वाले मेरा इंतज��र कर रहे है।
दगड़ू : महाराज आशीर्वाद की कृपा करें। यह महंगे गिफ्ट, फल और 1 लाख रुपया दक्षिणा का स्वीकार करे।
धार्मिक व्यक्ति : अपने चेले को आवाज लगाते हुए। यह फल वग़ैरह अच्छी तरह धोकर व गिफ्ट को अच्छी तरह साफ करके अंदर रख दो। और हाँ (धीरे से कहते हुए) यह "एक लाख रुपया;
"हम जँहा आरक्षण हटाओ मुहिम के कार्यक्रम में जा रहे है वँहा कार्यक्रम संचालकों को आरक्षण हटाने के लिए दान दे देना"
दगड़ू : महाराज आपने इतना कीमती समय दिया। में भगवान से प्रार्थना करता हूँ कि जिस कार्य से आप जा रहे है वो सफल रहे।
धार्मिक व्यक्ति का चेला : विकास को कहते हुए की। काहे पीछे खड़े हो। सामने आकर महाराज के चरणों मे गिरकर आशीर्वाद लो । कल्याण हो जाएगा तुम्हारा।
विकास : में मनोबलयुक्त अम्बेडकरवादी हूँ।
यह बात सुनते ही धार्मिक व्यक्ति व उसके चेले खिसक लिए।
वैसे आपकी नजर मे बहुजन समाज की समस्या का धार्मिक रहनुमा व दगड़ू में से कौन जिम्मेदार है?
मेरी नजर में;
"दगड़ू जिम्मेदार है"
जय भ���म। जय भारत।
विकास कुमार जाटव
बसपा सुप्रीमो मायावती के बयान के बाद लखनऊ में बैठे एक टीवी चैनल के मालिक को दस्त लग गया हैं।
बेचारा जिसके कहने पर ख���र चलाया था उसकी भी कस के रिलाई हो गई हैं।
1. जैसाकि सर्वविदित है कि उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा आमचुनाव अब बहुत नज़दीक आ रहा है, जिसकी तैयारी हेतु मेरे खुद के द्वारा प्रदेश की पिछली कई राज्य स्तरीय बड़ी बैठकें लखनऊ पार्टी प���रदेश कार्यालय में ली गई हैं और आगे भी ज़रूरत के अनुसार ली जायेंगी, जिसमें पार्टी के उम्मीद्वार तय करने के लिए पार्टी के ख़ासकर प्रदेश व मण्डल स्तरीय पदाधिकारियों को ज़रूरी दिशा-निर्देश दिये गये हैं, जिसके तहत् ही अभी तक मेरे द्वारा उनका इन्टरव्यू आदि लेकर लखनऊ में लगभग 2 दर्जन से ज़्यादा उम्मीदवार तय/फाइनल कर दिये गये हैं और आगे भी सभी सीटों पर मेरे द्वारा ही उम्मीदवार तय किये जायेंगे, जिसके बारे में अब पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक श्री आकाश आनन्द को लेकर क़िस्म-क़िस्म के भ्रम फैलाये जा रहे हैं जिसमें रत्ती भर भी सच्चाई नहीं है।
2. जबकि अकेले यू.पी. में ही नहीं बल्कि पूरे देश में जहाँ-��हाँ भी समय-समय पर विधानसभा के आमचुनाव होते हैं, या देश में लोकसभा के भी आमचुनाव होते हैं तो वहाँ भी उम्मीदवारों को अन्तिम रूप मेरे द्वारा ही दिया जाता है।
3. यहाँ यह भी अवगत कराना है कि यू.पी. की जिन विधानसभा की सीटों पर पार्टी के उम्मीदवार तय कर दिये गये हैं तो वहाँ मेरी अनुमति से ही पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों द्वारा छोटी-बड़ी जनसभायें करके उनका ऐलान भी किया जा रहा है, जिसके तहत् ही कुछ सीटो�� के उम्मीदवार का ऐलान श्री आकाश आनन्द भी पार्टी की जनसभा करके करेंगे।
4. हालाँकि इससे पहले देश के कई राज्यों में अभी हाल ही में विधानसभा के आमचुनाव हुये हैं जहाँ मेरे दिशा-निर्देशन में ही चुनावी जनसभा लेने के लिए पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक श्री आकाश आनन्द को भेजा गया और पिछले लगभग एक वर्ष से इनकी पूरे देश में पार्टी संगठन की समीक्षा बैठकें व जनसभा आदि करने के लिए भी इनको भेजा जा रहा है और वे भी पूरी ईमानदारी व निष्ठा से अपनी ज़िम्मेवारी को निभा रहे हैं।
5. इसलिए उत्तर प्रदेश में भी इसी क्रम में इनकी भी कुछ सीटों पर पार्टी के तय किये गये उम्मीदवारों के ऐलान हेतु जनसभायें हो रही हैं। जबकि इससे पहले यू.पी. की राजधानी लखनऊ में दिनांक 9 अक्तूबर सन् 2025 को मान्यवर श्री कांशीराम जी की पुण्यतिथि पर पार्टी की ऐतिहासिक महारैली भी हुई, जिसमें श्री आकाश आनन्द को बोलने का मौक़ा दिया गया। साथ ही, इसके पूर्व यहाँ लोकसभा के हुये आमचुनाव में भी इनको पूरे प्रदेश में व देश के अन्य राज्यों में भी पार्टी की चुनावी जनसभायें लेने के लिए भेजा गया था, यह सब सोशल मीडिया आदि पर मौजूद है।
6. जबकि यह सब प��र्टी की रूटीन प्रक्रिया के तहत् हो रहा है। इसका श्री आकाश आनन्द के क़द को बढ़ाने व कम करने आदि से कोई लेना देना नहीं है और ना ही पार्टी के उम्मीद्वार भी तय करने से कोई लेना देना है। यह भी पार्टी के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों की तरह ही पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष के दिशा-निर्देशन में यू.पी. में कुछ स्थानों पर पार्टी के उम्मीद्वार के ऐलान के लिये जनसभा कर रहे हैं। लेकिन फिर भी इनके बारे में सोशल मीडिया आदि पर आए दिन अनाप-सनाप बातें करना यह ठीक नहीं है। पार्टी के लोग ऐसे सभी शरारती व जातिवादी तत्वों से हमेशा सावधान रहें।
नीट की काउंसलिंग होने वाली है।।
1.जो एससी उछल कूद कर रहे है। उनमे से कितनो ने एससी फंड से बनाये गए चार मेडिकल कॉलेज में "साबरा अहमद" की याचिका पर रद्द करे गए एससी के विशेष आरक्षण पर आवाज उठाई है?
2.क्या चन्देशखर ने कभी इसपर संसद में आवाज ७₹उठाई? साबरा अहमद नाम देखकर ही चन्द्रशेखर गायब हो लिए। एक शब्द इसपर कभी नही कहा। हाँ। अगर कंही मुस्लिम पक्ष न हो तो बताये। जनाब जोशीले भाषण देने पहुच जाएंगे। लेकिन इस मामले में उनके मुंह से एक शब्द नही निकला।।
2.में लगातार इसपर निर्णय के बाद से ही लिख रहा हूँ।।
बहनजी ने यह आरक्षण दिया।
बहनजी ने ही न्यायालय के निर्णय का विरोध किया।
बहनजी के ट्वीट से घबराकर राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट गयी।
3.यह मुद्दा केवल एक जाति का नही है। इससे चमार, पासी, बाल्मीकि, खटीक, धोबी, कोरी, व अन्य 64 जातीयो से सम्बंधित है। लेकिन इन सभी के जाति के नाम से बने सन्गठन जो भाजपा के काफी करीब है। उनमे से एक ने भी भाजपा की राज्य सरकार से नही पूछा कि इस बार कैसे एडमिशन होंगे।
3.अब जो नौशिखिया अपरिपक्व जंतर मंतर आंदोलन पर बहनजी को टारगेट कर रहे है उन मूर्खो में से एक ने भी इस मुद्दे को नही उठाया है। उन्हें पता ही नही की उन्हें कितनी सरकारी कॉलेज में शीट का नुकसान हुआ है।।क्योंकि उनका दिमाग;
"दुसरो के मुद्दों पर कंट्रोल होता है। उनके मुद्दे पर कोई उनके साथ खड़ा नही होता। जैसे साबरा अहमद जिसके समाज को।50% शीट आरक्षण में मिलती है वो प्रदेश के केवल 4 मेडिकल कॉलेज और वो कॉलेज जिनका निर्माण एससी वेलफेयर फंड से बहनजी ने किया में एक्स्ट्रा शीट बर्दास्त नही कर सकी। यादव वकील साहब के माध्यम से कोर्ट पहुचकर रद्द करवा दिया"
4.मेने व क���छ मित्र ने स्वयं कुछ हजार इस मामले से जुड़े कागज व अन्य लीगल हेल्प के लिए initial तौर पर खर्च कर दिए, लेकिन आगे लाखो रुपये का खर्च देखकर हमे वही रुकना पड़ गया। क्योंकि यह केवल हमारे गले मे बंधी घण्टी बन जाती।
5.अब यह नौशिखिया अपरिपक्व चाहते है कि बहनजी ही इसमे कोर्ट जाए। पार्टी, चुनाव रणनीति छोड़कर बहनजी ही कोर्ट जाए और वो जंतर मंतर पर डांस करे।
6.में इतनी बार इन मुद्दे पर लिख चुका हूं। लेकिन क्या ��जाल की कोई सन्गठन इसपर राज्य सरकार से पूछ लें कि क्या इस साल इन चारों मेडिकल कॉलेज में इलाहाबाद हाईकोर्ट की डबल बैंच के अनुसार एडमिशन होंगे या फिर सुप्रीम कोर्ट से विशेष रियायत की मांग करी गयी।।
7.यह समाज नौशिखिया है। अपरिपक्व है। में ऐसे ही नही कहता। इनके सामने से सरकारी कॉलेज की शीट घट रही है, जिसमे बहनजी के कारण कम से कम 3000 से ऊपर एक्स्ट्रा एमबीबीएस डॉक्टर सरकारी कॉलेज से कर सके। अब इन्हें एडजस्ट करके प्राइवेट निजी कॉलेज में दी जाएगी जँहा एससी की शीट खाली पड़ी रहती है क्योंकि उनके पास एक करोड़ रुपया नही होता है।
क्रेडिट पोस्ट- विकास कुमार जाटव @vkjatav84 जी
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@BhimArmy_BEM