#अंधश्रद्धाभक्ति_खतरा_ए_जान
क्या परमात्मा की भक्ति से कर्मबन्धन समाप्त हो जाता है? अगर नहीं तो भक्ति करने से क्या लाभ है? कौन है वह मालिक जो कर्मबन्धन समाप्त कर सकता हैं??
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गीता अध्याय 4 श्लोक 32 तथा 34 मे कहे तत्वज्ञान को एकमात्र जानने वाला एकमात्र त्तत्वदर्शी संत केवल संत रामपाल जी महाराज है|
जानिए तत्वदर्शी संत की पहचान
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��स पवित्र पुस्तक को पढ़कर सत्य से परिचित होकर अपना अनमोल मानव (स्त्री-पुरूष का) जीवन धन्य बनाओ | अपना कल्याण करवाओ-संत रामपालदासजी महाराजजी🙏👇
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@ashokgehlot51
श्री ब्रम्हा श्री विष्णु तथा श्री शिव जी की उत्पत्ति कैसे हुई संपूर्ण सृष्टि रचना की विस्तृत जानकारी के लिए कृपया पढ़िए पुस्तक 👇
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क्या पीले कपड़े पहनने से साधु बन जाते हैं?
क्या नग्न रहने से त्यागी या वैरागी बन सकते हैं?
क्या माला पहनने,तिलक लगाने से विद्वान बन जाते हैं?
सही जानकारी हेतु पढ़िए यह पुस्तक फ्री डाउनलोड करके🙏👇
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@anandmahindra#अंधश्रद्धाभक्ति_खतरा_ए_जान
बच्चे पाल-पोसकर बड़े कर देना ही मानव धर्म नहीं है।ये कार्य तो पशु-पक्षी भी भली-भांति कर रहे हैं।
परमात्मा ने हमें अपने स्वरूप जैसा बनाया है।ताकि हम इस देहि का लाभ उठाकर सत्भक्ति करके पर हो सकें।
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सूक्ष्मवेद में कहा है कि तीर्थ और धामों पर जाने स��� कोई पूण्य लाभ नही है असली तीर्थ तत्वदर्शी सन्त/सतगुरु का सत्संग है श्रीमद्देवीभागवत महापुराण के छठें स्कंध के अध्याय 10 में लिखा है की सर्वश्रेष्ट तीर्थ चितशुद्ध तीर्थ है
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क्या मूर्तिपूजा शास्त्रविरूद्ध साधना है? तो पवित्र शास्त्रो के अनुसार उस परमात्मा को पाने की सही विधि क्या है? कौन है वह संत जो ��स परमात्मा को पाने की सतभक्ति प्रदान करता हो????????
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भविष्यवक्ता नास्त्रेदमस, फ्लोरेंस और अन्य भविष्यवक्ता के अनुसार वह सायरन कौन है जो भारत को सोने की चिड़िया बनाएगा।जानिए इस पुस्तक के द्वारा👇🏻👇🏻
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सूक्ष्मवेद में शाश्त्र विरुद्ध धार्मिक क्रियाओं पर इस प्रकार तर्क किया गया है-
पुराण उठा फिर पंडित आए, पीछे गरुड़ पढ़ाई।
प्रेत शिला पर जा विराजे,पितरों पिंड भराई।
बहुर श्राद्ध खाने कूं आए, काग भए कलि माहिं।
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लोग कहते हैं गुरु की शरण में जाने से सभी सुख होते हैं फिर सतगुरु शब्द कहां से आया गुरु और सद्गुरु में क्या फर्क होता है क्या इस समय सृष्टि में कोई सतगुरु है वह तो कौन है जानने के लिए पढ़ें पुस्तक #अंधश्रद्धाभ��्ति_खतरा_ए_जान 👇
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पूर्ण परमात्मा शिशु रूप में सतलोक से आता है तथा कुंवारी गाय के दूध से उनका पालन पोषण होता है एकमात्र कबीर परमेश्वर ही है जो इ��� तथ्य पर खरे उतरते हैं अर्थात वही पूर्ण परमात्मा है
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सभी संतो ने आजतक यही बताया कि परमात्मा निराकार है, किन्तु वेदो व कुरान,गीता आदि में परमात्मा साकार है? तो क्या कारण है कि आजतक धर्मगुरू हमे मुर्ख बनाकर शास्त्रविरूद्ध साधना करवाते रहे???
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हम अपने दयालु परमात्मा को छोड़कर यहां आ गए काल के लोक में।
जानें कौन है सर्व सुखदाता,��ूर्ण परमात्मा जो विधि के विधान को बदल सकता है।
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खट्टरजी आपने सही नही किया आर्यसमाजियों के साथ मिलकर,करोंथा में बन रहे आश्रम तहस नहस कर।
आपको खुद मालूम है संत रामपालजी महाराज निर्दोष है फिरभी आप उनपर ये अन्याय कर रहे हो।
इतिह���स गवाह है संतो को सताने की सजा क्या होती है।
आप CM पद से इस्तीफा दे दे क्योंकि अब ये आपक�� बस की बात नही
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सूक्ष्मवेद में शाश्त्र विरुद्ध धार्मिक क्रियाओं पर इस प्रकार तर्क किया गया है-
कुल परिवार तेरा कुटम्ब कबीला,मसलित एक ठहराई।
बांध-पींजरी(अर्थी)ऊपर धर लिया,मरघट में ले जाई।
अग्नि लगा दिया जब लम्बा,फूंक दिया उस ठाहीं।
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जैसा दर्द आपने होवै,वैसा जान बिराने।
कहै कबीर वे जाऐं नरक में,जो काटें शीश खुरांनें।
बकरी के बच्चे का गला काटना शाश्त्र विरुद्ध साधना है।जानें सही भक्ति-विधि।
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सूक्ष्मवेद में शाश्त्र विरुद्ध धार्मिक क्रियाओं पर इस प्रकार तर्क किया गया है-
जै सतगुरु की संगति करते,सकल कर्म कटि जाई।
अमरपुरी पर आसन होता,जहाँ धुप न छांई।
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