पूरे विश्��� को शान्ति, प्रेम, सहिष्णुता, समानता और मानवता सन्देश देने वाले पैगम्बर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद साहब के जन्मदिवस ‘ईद-ए-मिलाद-उन-नबी’ के पवित्र अवसर की आप सभी को हार्दिक बधाई एवं मंगलकामनाएँ।
यह दिवस हम सबके जीवन में करुणा, सद्भाव और भाईचारे का प्रकाश फैलाए।
#EidMiladUnNabi
#EidMiladunNabiMubarak
#EidMubarak
ब्रिटिशकालीन भारत में अंग्रेजों ने जमींदारी जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से शासन किया और पहले से सामाजिक एवं राजनीतिक प्रभुत्व रखने वाले वर्गों को अपने शासन में सहयोगी बनाया। इसके परिणामस्वरूप धन, धरती और राजपाट पर कुछ विशेष वर्गों का वर्चस्व और मजबूत हुआ। 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ, लेकिन आजादी के बाद भी धन, धरती और सत्ता-संसाधनों पर समाज के एक बड़े वर्ग का वर्चस्व बना रहा और भूमि तथा संसाधनों का न्यायपूर्ण बंटवारा नहीं हो सका।
इसी असमानता को कम करने के उद्देश्य से स्वतंत्र भारत में भूमि सुधार लागू किए गए। लेकिन प्रभावी क्रियान्वयन की कमी, कानूनी एवं प्रशासनिक अड़चनों और प्रभाव���ाली भू-स्वामी वर्गों के प्रतिरोध के कारण भूमि सुधार अपने व्यापक उद्देश्यों को पूरी तरह हासिल नहीं कर सके। भूमि और संसाधनों की असमानता से पैदा हुआ असंतोष आगे चलकर कई उग्र सामाजिक-राजनीतिक आंदोलनों की पृष्ठभूमि बना, जिनमें नक्सल आंदोलन भी शामिल था।
ऐतिहासिक रूप से सामाजिक, राजनीतिक और शैक्षणिक अवसरों से वंचित समुदायों के प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने के लिए संविधान में आरक्षण का प्रा��धान किया गया। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को संविधान लागू होने के साथ ही आरक्षण का संवैधानिक प्रावधान मिला। वहीं, अन्य पिछड़ा वर्ग को केंद्र सरकार की नौकरियों और केंद्रीय शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण मंडल आयोग की सिफारिशों के आधार पर 1990 के दशक में लागू हुआ।
आरक्षण का संवैधानिक आधार मुख्यतः सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ापन तथा पर्याप्त प्रतिनिधित्व का अभाव है। इसके बावजूद आर्थिक रू��� से कमजोर वर्गों के लिए आर्थिक आधार पर EWS आरक्षण की व्यवस्था की गई। ऐसे में आज आवश्यकता है कि आरक्षण और प्रतिनिधित्व की पूरी व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का आंकड़ों के आधार पर मूल्यांकन किया जाए।
हम लंबे समय से सामाजिक-आर्थिक एवं जातिगत जनगणना की मांग कर रहे हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि देश की धन-संपत्ति, जमीन, शिक्षा, रोजगार, प्रशासन, राजनीति, मीडिया और अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों में विभिन्न सामाजिक समूहों की कितनी हिस्सेदारी है��� जब तक विश्वसनीय और व्यापक आंकड़े सामने नहीं आएंगे, तब तक सामाजिक न्याय और समान हिस्सेदारी की वास्तविक तस्वीर पूरी तरह सामने नहीं आ सकती।
हमारी मांग है कि जिसकी जितनी संख्या है, उसकी उतनी भागीदारी सुनिश्चित की जाए। महिलाओं को उनकी जनसंख्या के अनुपात में स्थानीय निकायों, संसद और विधानमंडलों में प्रभावी प्रतिनिधित्व मिले। OBC समाज को लोकसभा और विधानसभाओं में उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व म��ले। SC, ST और OBC के लिए राज्यसभा तथा विधान परिषदों में भी उचित ��र प्रभावी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए।
उच्च न्यायपालिका में प्रतिनिधित्व, पदोन्नति में आरक्षण, सरकारी योजनाओं और बजट में आबादी के अनुपात में हिस्सेदारी, सरकारी ठेकों और सरकारी खरीद में आरक्षण तथा निजी क्षेत्र में प्रतिनिधित्व की व्यवस्था पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए, ताकि सामाजिक न्याय केवल सरकारी नौकरियों तक सीमित न रहे।
निजी क्षेत्र में हमारे समाज के लोग केवल मजदूरी क��ने के लिए नहीं हैं। उन्हें प्रबंधन, निर्णय लेने वाली संस्थाओं और नेतृत्व के पदों पर भी उचित हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। आर्थिक विकास में भागीदारी तभी सार्थक होगी, जब विकास के साथ निर्णय लेने की शक्ति में भी समान भागीदारी सुनिश्चित हो।
मीडिया लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। इसलिए मीडिया संस्थानों में भी ऐतिहासिक रूप से वंचित समाजों की पर्याप्त भागीदारी और प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया ���ाना चाहिए, ताकि समाज के हर वर्ग की आवाज लोकतांत्रिक विमर्श में प्रभावी रूप से सामने आ सके।
यह लड़ाई किसी के अधिकार छीनने की नहीं, बल्कि ऐतिहासिक रूप से वंचित समाजों को उनके संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों के अनुरूप न्यायपूर्ण हिस्सेदारी दिलाने की लड़ाई है। हमारा लक्ष्य है-- धन, धरती, स��्ता और देश के महत्वपूर्ण संस्थानों में न्यायपूर्ण हिस्सेदारी तथा वास्तविक सामाजिक न्याय।
लोकतंत्र एक बार फिर शर्मसार!
दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 21 दिनों से शांतिपूर्ण अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक जी को सादा कपड़ों ��ें पहुँचे पुलिसकर्मियों द्वारा जबरन अस्पताल ले जाना तथा उनके साथियों के साथ मारपीट कर उन्हें हिरासत में लेना अत्यंत निंदनीय और लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा प्रहार है।
इससे पहले वन रैंक वन पेंशन की मांग को लेकर महीनों तक धरने पर बैठे पूर्व सैनिकों के साथ भी यही हुआ। देश का गौरव बढ़ाने वाली महिला पहलवानों के शांतिपूर्ण आंदोलन को भी इसी तरह बलपूर्वक हटाया गया। अब सोनम वांगचुक जी के सत्याग्रह के साथ भी वही व्यवहार किया जा रहा है।क्या शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार केवल सत्ता की सुविधा तक ही सीमित रह गया?
हम प्रकृति से प्रार्थना करते हैं कि सोनम वांगचुक जी को उत्तम स्वास्थ्य, शक्ति और दीर्घायु प्रदान करे।
#SonamWangchuk
रंगभेद, नस्लभेद व साम्राज्यवाद के खिलाफ आजीवन संघर्षरत रहे नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित भारत रत्न नेल्सन मंडेला जी की जयंती पर उन्हें शत शत नमन एवं विनम्र आदरांजलि।
#NelsonMandelaDay
जौहर विश्वविद्यालय पर बुलडोजर कार्रवाई का आदेश मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी की सांप्रदायिक राजनीति की पराकाष्ठा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय की 'बुलडोजर कार्रवाई' पर कई बार फटकार के बाद भी उत्तर प्रदेश सरकार इस तरह की कार्रवाइयों से बाज नहीं आ रही है।
जौहर विश्वविद्यालय के मामले में रामपुर विकास प्राधिकरण द्वारा प्रशासनिक स्तर पर यह आदेश पारित किया गया है। प्रशासनिक आदेश न्यायालय के अ��तिम निर्णय का विकल्प नहीं हो सकता। यदि विश्वविद्यालय इस आदेश से असहमत है, तो उसे सक्षम न्यायालय में अपनी बात रखने और न्याय प्राप्त करने का पूरा अधिकार है। ऐसे में अंतिम न्यायिक निर्णय से पहले किसी भी प्रकार की ध्वस्तीकरण की कार्रवाई माननीय सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना होगी।
विडंबना यह है कि यूजीसी द्वारा जारी फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची में उत्तर प्रदेश के अलीगढ़, प्रयागराज, गौतम बु���्ध नगर और राजधानी लखनऊ तक के संस्थान शामिल हैं, लेकिन उन पर कठोर कार्रवाई के बजाय एक स्थापित विश्वविद्यालय को बुलडोजर के निशाने पर खड़ा किया जा रहा है। यह सरकार की मंशा और दोहरे मापदंडों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
@UPGovt से हमारी मांग है कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए, विश्वविद्यालय को सभी वैधानिक एवं न्यायिक उपाय अपनाने का पूरा अवसर दिया जाए तथा न्यायालय के अंतिम निर्णय का सम्मान किया जाए।
राजस्थान के श्रीगंगानगर में 13 वर्षीय दलित नाबालिग बच्ची के साथ बंधक बनाकर 32 लोगों द्वारा किए गए सामूहिक दुष्कर्म की घटना अत्यंत भयावह और मानवता को शर्मसार करने वाली है।
पीड़िता के अनुसार, उसके साथ कभी तीन से चार और कभी इससे अधिक लोगों ने मिलकर दुष्कर्म किया।बार-बार होने वाले हमलों से जब भी उसे दर्द होता था, तो उसे शराब पीने के लिए मजबूर किया जाता था। यह अपराध क्रूरता की सभी सीमाओं को पार करने वाला है।
इससे भी अधिक शर्मनाक और आक्रोशजनक बात यह है कि घटना के खुलासे के 15 दिन बाद भी इस मामले में शामिल सभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। यह सरकार की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
मुख्यमंत्री @BhajanlalBjp जी, आखिर आधा महीना बीत जाने के बाद भी ब���की दरिंदे पुलिस की गिरफ्त से बाहर क्यों हैं?
हम @RajGovOfficial से मांग करते हैं कि 24 घंटे के भीतर फरार चल रहे सभी आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए। इस पूरे मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में कराई जाए और सरकार मजबूत पैरवी करते हुए दोष सिद्ध होने पर सभी आरोपियों को कठोरतम सजा दिलाना सुनिश्चित करे। पीड़ित दलित परिवार को तत्काल सुरक्षा, न्याय और उचित आर्थिक मुआवजा प्रदान किया जाए।
गत दिनों मध्यप्रदेश के रीवा जिले में कलेक्ट्रेट के सामने प��दल विहार कर रहीं जैन साध्वियों के साथ हुए सड़क हादसे में दो पूज्य साध्वियों के निधन व एक साध्वी के गंभीर रूप से घायल होने की खबर बेहद दुखद, पीड़ादायक और चिंताजनक ��ै।
@MP_MyGov से मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच की जाए तथा दोषियों के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
पूज्य साध्वियों को विनम्र आदरांजलि। इस दुखद घड़ी में हमारी गहन संवेदनाएँ उनके अनुयायियों के प्रति हैं। प्रकृति हम सभी को इस अपार दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करे तथा घायल आर्यिका माता के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना।
@CMMadhyaPradesh
@DrMohanYadav51
कानपुर जिले के सिविल लाइंस स्थित नाइट क्लब में एक सिख युवक के साथ हुई बर्बरता बेहद शर्मनाक और चिंताजनक है।
दस्तार खींचकर पीटना, बाल पकड़कर घसीटना, नाक की हड्डी तोड़ देना और थप्पड़ मारना सिर्फ मारपीट नहीं, बल्कि इंसानियत और धार्मिक सम्मान प�� हमला है।
मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी, जब पुलिस ऑफिस से चंद कदम दूर अपराधी खुलेआम हैवानियत करें, धमकियां दें और कानून का भय बिल्कुल खत्म दिखाई दे, तब प्रदेश की कानून व्यवस्था पर जनता भरोसा कैसे करे? क्या यही “कानून का राज” है, जिसके दावे लगातार किए जाते हैं?
@UPGovt दोषियों पर सख्त से सख्त धाराओं में कार्रवाई हो, पीड़ित युवक को न्याय मिले और ऐसी घटनाओं पर सरकार एवं प्रशासन स्पष्ट संदेश दे कि धार्मिक पह��ान और मान-सम्मान पर हमला किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उत्तर प्रदेश के जिला मिर्जापुर निवासी एवं मर्चेंट नेवी में सेकेंड अफसर पद पर कार्यरत मनीष द्विवेदी का अमेरिका के पेंसिल्वेनिया में लापता होना अत्यंत गंभीर और चिंताजनक मामला है।
मनीष 6 मई को शिप से बाहर गए थे, जिसके बाद से उनका कोई स्पष्ट पता नहीं चल पाया है, और अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी भी उपलब्ध नहीं कराई गई है।
यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि ��िदेश में काम कर रहे हर भारतीय नागरिक की सुरक्षा और अधिकारों से जुड़ा हुआ है। उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी बनती है।
@mygovindia से अपेक्षा है कि इस मामले को प्राथमिकता देते हुए तत्काल कूटनीतिक स्तर पर हस्तक्षेप किया जाए। मनीष द्विवेदी की स्थिति स्पष्ट की जाए और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। परिवार को समयबद्ध और पारदर्शी जानकारी उपलब्ध कराई जाए।
@PMOIndia
@narendramodi
@MEAIndia
@DrSJaishankar
हज यात्रा 2026 में हवाई किराये की अचानक वृद्धि से हजयात्रियों पर पड़े अतिरिक्त आर्थिक बोझ के संबंध में माननीय अल्पसंख्यक कार्य मं��्री @KirenRijiju जी को पत्र लिखा।
@mygovindia
@MOMAIndia @RijijuOffice
संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा सन 1999 में घोषित अंतरराष्ट्रीय दिवस "बुद्ध पूर्णिमा" की आप सभी को हार्दिक बधाई एवं मंगलकामनाएं।
तथागत बुद्ध के प्रज्ञा, शील, करुणा, सत्य, मैत्री, प्रेम, विश्वशांति, बंधुत्व एवं मानव कल्याण के सन्देश से समाज सदैव प्रेरित होता रहेगा।
जय भीम, नमो बुद्धाय।
��्रम मंत्री रहने के दौरान मजदूरों के लिए महंगाई भत्ता, स्वास्थ्य बीमा, काम के घंटे 12 से हटाकर 08 घंटे करना, महिलाओं के लिए मातृत्व अवकाश, ट्रेड यूनियन को बाध्यकारी मान्यता... आदि सब परम पूज्य बाबा साहेब की देन है।
मजदूर दिवस पर परम पूज्य बाबा साहेब को नमन। 🙏🙏
#LabourDay #thanksdrambedkar
उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती में कॉमन अभ्यर्थियों के कारण उत्पन्न रिक्त पदों को भरने एवं संशोधित परिणाम जारी करने के संबंध में @upprpb के अध्यक्ष महोदय को पत्र लिखा।
@UPGovt@Uppolice
पीलीभीत के बरखेड़ा क्षेत्र की ग्राम पंचायत मूसेपुर जयसिंह स्थित वृहद गौ संरक्षण केंद्र में दो दिन के भीतर 8 गोवंशीय पशुओं की भूख से तड़पकर मौत होना, केवल लापरवाही नहीं बल्कि सीधी-सीधी क्रूरता और प्रशासनिक विफलता का प्रमाण है।
तथाकथित स्वयंभू गौरक्षक मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी, आपके शासन में “गौशालाएं” भ्रष्ट���चार के नए स्त्रोत के रूप में दिखाई दे रही हैं। यह स्थिति बेहद चिंताजनक और गंभीर सवाल खड़े करने वाली है।
@UPGovt
@CMOfficeUP
“कांशीराम साहब आपकी नेक कमाई, आपने सोती कौम जगाई”
बहुजन नायक मान्यवर साहब कांशीराम जी की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन एवं विनम्र आदरांजलि व आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के छठवे स्थापना दिवस की आप सभी को हार्दिक बधाई एवं मंगलकामनाएं।
#आजाद_समाज_पार्टी_कांशीराम
मासिक धर्म अवकाश के मुद्दे पर पुनर्विचार करने के संबंध में माननीय मुख्य न्यायाधीश जी को पत्र लिखकर निवेदन ���िया।
महिलाओं के स्वास्थ्य, गरिमा और समान अवसर से जुड़े इस महत्वपूर्ण विषय पर संवेदनशील और प्रगतिशील दृष्टिकोण अपनाने की अपेक्षा है।
#SupremeCourtOfIndia
#SupremeCourt
#CJISuryaKant