भारतीय इतिहास के पन्नों में दफन कर दिए गये चक्रवर्ती सम्राट प्रियदर्शी अशोक के इतिहास को उजागर करने वाले जेम्स प्रिन्सेप और अलेक्ज़ेंडर कनिंघम जैसे शोधकर्ताओं को आभार जिन्होंने देशभर में फैले अशोक स्तंभ, शिलालेख और स्तूपों का व्यवस्थित अध्ययन करके सम्राट अशोक से जुड़े स्थलों की खोज और पहचान को उजागर किया।
सम्राट अशोक को बदनाम करने के लिए कई तरह की धारणाएँ गढ़ी गईं विशेष रूप से '99 भाइयों के हत्यारे' या 'चण्ड अशोक' जैसी छवियाँ मनुवादी इतिहासकारों द्वारा गढ़ कर बदनाम किया गया अशोक के शिलालेखों और अभिलेखों में सम्राट स्वयं को 'देवानंप्रिय पियदस्सी' कहते हैं इन स्रोतों में एक ऐसे शासक की छवि उभरती है जो 'धम्म' आधारित शासन, नैतिकता, करुणा और जनकल्याण को प्राथमिकता देता है कहीं भी उन्हें 'चण्ड अशोक' या किसी पारिवारिक नरसंहार से जोड़ने वाला प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिलता।
सम्राट अशोक मौर्य वंश के शक्तिशाली और प्रभावशाली शासक थे उनके शासनकाल में भारतीय उपमहाद्वीप का व्यापक राजनीतिक एकीकरण हुआ, प्रशासनिक ढाँचा मजबूत हुआ और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की पहचान सुदृढ़ हुई यही कारण है कि इस कालखंड में अखंड भारत की अवधारणा चरितार्थ हुई, चक्रवर्ती सम्राट प्रियदर्शी अशोक का शासनकाल भारतीय इतिहास के स्वर्णिम अध्यायों में दर्ज है।
सिंधु घाटी सभ्यता, नंदवंश और मौर्य काल की सामाजिक संरचना आज की जटिल जाति-व्यवस्था से भिन्न थी सम्राट अशोक कालीन वर्ण विहीन समाज में धम्मनुशासन शासन व्यवस्था लागू थी। अशोक ने 'धम्म' आधारित प्रशासनिक नीति ने सामाजिक विभाजन के बजाय बुद्ध के नैतिकता, सह-अस्तित्व, करुणा और जनकल्याण को शासन का आधार बनाया।
#सम्राट_अशोक
भारत में क्रांतिकारी समाजवाद के प्रमुख वैचारिक स्तंभ भगत सिंह घोर नास्तिक होते हुए भी क्रांतिकारी समाजवाद के प्रबल समर्थक थे, उनकी वैचारिक स्पष्टता का अंदाज़ा उनके लेख ‘मैं नास्तिक क्यों हूँ’ से लगाया जा सकता है।
#RajkumarBhati#AkhileshYadav#socialist
बहुजन चिंतक राजकुमार भाटी के द्वारा बाबा साहेब की 22 प्रतिज्ञाओं को दोहराने पर सवाल उठाने वालों को भगत सिंह के विचारों को याद करना चाहिए कि समाजवाद धर्म और नास्तिकता की बहस से आगे बढ़कर गरीबी, शोषण, असमानता और अन्याय के खिलाफ प्रतिकार है।
जब देश में जब अंधविश्वास और पाखण्ड की बहुलता होगी, तो संवैधानिक मूल्यों का पतन सुनिश्चित है, मध्य प्रदेश भाजपा सरकार @DrMohanYadav51
बताये किस नियम के तहत आरएसएस के अघोषित प्रवक्ता को गार्ड ऑफ़ आनर दिया जा रहा है?
@PMOIndia@AmitShah@indSupremeCourt
फुले, अम्बेडकर, पेरियार की तस्वीरें लगाकर और जयभीम बोलकर वोट बटोरने वाली राजनीतिक पार्टियों को आखिर बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर की 22 प्रतिज्ञाओं को मानने वालों से क्या समस्या है?
#फुले_अम्बेडकर_पेरियार#बाबासाहब_की_22_प्रतिज्ञाएं
PDA में D का महत्व केवल चुनाव जीतने तक ही सीमित नहीं है यह बाबा साहब के विचारों और उनके अनुवाइयों के आत्मसम्मान की रक्षा करना भी है, PDA में D का वही महत्व है जो शरीर में आत्मा का होता है और मकान में सीमेंट का होता है।
@proframgopalya1@rajkumarbhatisp
मंत्री ओपी राजभर पर अब्बास अंसारी का पलटवार !
अब्बास अंसारी ने कहा कि" BJP सुभासपा को निगलने का काम कर रही है। चाचा ने आरक्षण के मुद्दे को लेकर सुभासपा का गठन किया था। सुभासपा राजभर समाज के मुद्दों पर नहीं लड़ पा रही है।"
#सुभासपा#ओमप्रकाशराजभर
इलाहाबाद-झाँसी खंड स्नातक MLC चुनाव उत्तर प्रदेश में सेक्टर मजिस्ट्रेट बीजेपी का पर्चा लेकर घूम रहे हैं ये आरएसएस और BJP एजेंट के रूप में काम कर रहे है..?
@SpokespersonECI@ECISVEEP