जिन्दगी जैसी तवक़्क़ो थी नहीं कुछ कम है ।
हर घड़ी होता है अहसास कहीं कुछ कम है ।
घर की तामीर तसव्वुर ही में हो सकती है।
अपने नक्शे के मुताबिक ये जमीं कुछ कम है।
ये शहर वो है जिस में कोई घर भी खुश नहीं_
दाद ए सितम ना दे कि सितमगर भी खुश नहीं_
इसरार था उन्हें कि भूला दीजिये जफर_
हमनें भूला दिया तो वो इस पर भी खुश नहीं_
जफ़र इक़बाल