दीन का मामला हो या दुनिया का, हमारी सारी ज��िंदगी ही सब्र का मुतालबा करती है। इबादतें एक ही दिन में दुरुस्त नहीं हो जातीं, अख़लाक़ एक ही दिन में अच��छा नहीं हो जाता,हर चीज़ अपने वक़्त पर होती है, हर चीज़ के लिए सब्र चाहिए होता है।
मैंने हमेशा ज़िंदगी में आने वाले हर इंसान को 100% वैल्यू दी, क्योंकि...
अलजेब्रा में सीखा था कि जिसकी कीमत का अंदाज़ा न हो, उसे हमेशा 100% मानो,
क्योंकि...
प्रोसेसिंग के आखिर में वह अपनी असल कीमत खुद बता देते हैं।
#respecteveryone
अगर आप किसी से नफरत करते हैं तो आप उसे अपने दिल पर अख्तियार दे देते हैं,
नफरत सुकन छीन लेती है,और रूह को बेचैन कर देती है,
मजबूत लोग नफरत नहीं पालते वो दुरगुज़र करना जानते हैं वो अपने जज़बात को संभाल कर खुद को बेहतर बनाने में लग जाते हैं।
#HatredVsCompassion#Strength#peace
ज़िन्दगी 𝗔𝗟𝗟𝗔𝗛 ने लिखी है, लोगों ने नहीं,
लोगों की बातें बदलती रहती हैं, मगर आपके क़दम अगर सच्चाई,नीयत और हौसले पर हो तो 𝗔𝗟𝗟𝗔𝗛 पूरी दुनियां को आपके रास्ते से हटा देता है।
𝗙𝗲𝗮𝗿 𝗿𝗲𝗽𝗹𝗮𝗰𝗲𝗺𝗲𝗻𝘁 𝗲𝘅𝗰𝗲𝗿𝗰𝗶𝘀𝗲 :
जब दिल में यह जुमला आए....
"लोग क्या कहेंगे?
आप फ़ौरन कहें :
"जो 𝗔𝗟𝗟𝗔𝗛 चाहेगा... वही होगा"
यह जुमला खौफ को , ईमान में बदल देता है।
अगर, आप justice नहीँ कर पा रहे हैं तो आपकी तालीम का कोई फायदा नहीँ...
आप कोई फैसला करते हैं बिना सही, गलत जाने...
बस फैसला कर देते हैं भले ही वह गलत हो...
तो अपकी एजुकेशन का कोई फायदा नहीँ चाहे आपके पास दुनियां की बड़ी -बड़ी डिग्रीयां ही क्यों ना,हों।
"अक़ल की करोड़ो दलीलें अल्लाह से एक गुनाह भी माफ नहीँ करा सकतीं, लेक���न निदामत का एक आंसू ज़िन्दगी भर के गुनाह माफ़ करवा सकता है"
"हालात-ए-सजदा की धीमी सिसकियाँ,
बारगाहे -ईलाही में बड़ा कोहराम मचाती हैं।"
#apologies #Allahuakbar
أَمْ لِلْإِنْسَانِ مَا تَمَنَّىٰ ﴿24﴾
भला कहीं इंसान को हर वह चीज़ मिल जाती है जिसकी वह तमन्ना करता है?
فَلِلَّهِ الْآخِرَةُ وَالْأُولَىٰ ﴿25﴾
नहीं बल्कि हर तमन्ना अल्लाह ही के हाथ में है, आखिरत की भी और दुनियां की भी।"
"जहाँ सब्र होता है वहां शिकवा नहीं किया जाता,
ईमान की सबसे बड़ी कुंजी एतबार है,
हम यकीन तो कर लेते हैं पर एतबार नहीं करते,
��म कह देते हैं कि अल्लाह हमारे साथ है
मगर हम कभी भी उसपर सच्चे दिल से एतबार नहीं करते।
हम अल्लाह को अपना आखिरी सहारा बनाते हैं
पहला क्यों नहीं???
"अगर हुदूद का ख्याल ना रखा जाए तो बदनज़मी, नाइंसाफ़ी, और तनाज़आत जन्म लेते हैं। इसीलिए हर ताल्लुक और हर रिश्ते में हुदूद मुतअय्यन करना और उनक��� एहतराम करना ही हकीक़ी अख़लाकियात और मुहज़्ज़ब मुआशरत की पहचान है।"
"अल्लाह भी हद में रहने वालों को पसंद करता है।"
अपने बच्चों को ख्वाबों को दुनिया में रहने की बजाए हकीकत पसंद बनाइए ताकी बचपन की हसीन वादियों से निकलकर जब वो प्रैक्टिकल लाइफ में कदम रखें तो वो हकीकत की दुनिया में रहकर जीना सीख सकें।
पनाह के लिए ख्वाबों की गोद ढूंढ���ी है,,
हयात सह न सकी अपने तजरुबात का कर्ब !!
अपने बच्चों को दर्द सहना सिखाइए उन्हें बताइए की जो रब पांव में कांटा चुभने पर भी अपने बंदों को बे तहाशा अज्र देता है वो आपकी सही गई कोई भी तकलीफ़, दुःख, दर्द फिर रायगा कैसे जाने देगा? आपकी सही गई हर तकलीफ़ का उसने बहुत सा अज्र रखा होगा।
नहीं होता और ये दुनिया देखने में मेहरबान नज़र आती है लेकीन मेहरबान है नहीं जो इसे मेहरबान समझने की गलती करता है उसे ये दुनियां अपना भयानक चेहरा दिखाती है जिसकी चोट से वो संभल नहीं पाते।