दलित युवाओं के भविष्य के नाम पर सरकारी धन की बंदरबाँट!
100 लोगों के बैठने की क्षमता वाले स्थान पर 250 से अधिक लोगों को प्रशिक्षण देने का दावा और निर्धारित 30% के बजाय 50% अग्रिम भुगतान! दो अधिकारी निलंबित, लेकिन संबंधित निजी संस्था पर कार्रवाई क्यों नहीं?
एक ओर सरकारी नौकरियों में NFS और लेटरल एंट्री के जरिए आरक्षित वर्ग के अवसर छीने जा रहे हैं, तो दूसरी ओर दलित युवाओं को कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने वाली योजनाओं में भ्रष्टाचार के चलते उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है।
आरक्षण में वर्गीकरण के मुद्दे पर बहुजन समाज को गुमराह किया गया, जबकि NFS, लेटरल एंट्री और रोजगार योजनाओं में भ्रष्टाचार व अनियमितताओं के जरिए बहुजन समाज के हक़-अधिकारों पर चोट की जा रही है।
आखिर बहुजन समाज के अधिकारों और दलित युवाओं के भविष्य के साथ कब तक खिलवाड़ होता रहेगा? जवाबदेही तय हो और दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो।
कोलकाता में भगदड़ की दुखद घटना में 17 लोगों की मृत्यु और कई लोगों के घायल होने की खबर से मन अत्यंत व्यथित है। यह हादसा बेहद पीड़ादायक है। अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के दुःख की कल्पना भी नहीं की जा सकती।
इस दुःख की घड़ी में हमारी संवेदनाएँ शोकाकुल परिवारों के साथ हैं। प्रकृति उन्हें यह अपार दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें। साथ ही, हादसे में घायल हुए लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं।
@cmowbgov से आग्रह है कि मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा, घायलों को निःशुल्क एवं बेहतर उपचार और प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाए। साथ ही, हादसे की निष्पक्ष जाँच कराकर जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाए तथा भविष्य में ऐसी त्रासदियों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।
उत्तर प्रदेश के उचित दर विक्रेताओं (राशन डीलरों) को मई माह से कमीशन का भुगतान न होना और बढ़े हुए कमीशन का शासनादेश जारी न किया जाना अन्यायपूर्ण है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत करोड़ों लोगों तक खाद्यान्न पहुँचाने की जिम्मेदारी निभाने वाले राशन डीलर महीनों से अपने मेहनताने का इंतजार कर रहे हैं।
उचित दर विक्रेताओं के कमीशन में 300 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की मांग को लेकर 26 मार्च को ही माननीय मुख्यमंत्री जी को पत्र लिखकर सरकार का ध्यान आकर्षित किया था। आपकी डबल इंजन सरकार ने 125 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की घोषणा तो की, लेकिन अब तक शासनादेश जारी नहीं हुआ औ��� भुगतान भी लंबित है।
मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी ,चुनाव से छह महीने पहले किए जा रहे वादे और आश्वासन सम्मानित जनता को चुनाव तक उम्मीदों के झूले में झुलाए रखने की कवायद मात्र हैं।
@UPGovt से अपेक्षा है कि बकाया कमीशन का भुगतान शीघ्र किया जाए और बढ़ी हुई दरों का शासनादेश जारी कर राशन डीलरों को राहत दी जाए।
@CMOfficeUP
@Manojpandeyweb
@SatishSharmaBBK
महान शिक्षाविद्, समाज सुधारक और आधुनिक ���िक्षा के प्रेरणास्रोत, मोहम्मडन एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेज (AMU) के संस्थापक, सर सैयद अहमद ख़ान जी की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन एवं विनम्र आदरांजलि।
AIIMS ऋषिकेश में SC/ST कर्मचारियों की पदोन्नति में आरक्षण संबंधी नियमों के अनुपालन तथा दिनांक 10.10.2026 के DPC आदेश की समीक्षा कर नियमानुसार Review DPC आयोजित कराने के संबंध में माननीय केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री @JPNadda जी को पत्र लिखा।
@mygovindia@MoHFW_INDIA
उत्तर प्रदेश के सीतापुर जनपद के कमलापुर थाना क्षेत्र के ग्राम लुधौरा में कल शाम दलित युवक मनोज कुमार की पीट-पीटकर हत्या किए जाने की घटना बेहद दुखद, शर्मनाक और चिंताजनक है।
पीड़ित परिजनों के अनुसार, जातिसूचक गालियां देते हुए लाठी-डंडों से हमला किया गया। बीच-बचाव करने पहुंचीं उनकी पत्नी और बेटी के साथ भी मारपीट की गई। अस्पताल ले जाते समय मनोज कुमार की मृत्यु हो गई।
इस गंभीर घटना के बावजूद अभी तक सभी आरोपियों की गिरफ्तारी न होना पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है।
@UPGovt हमारी मांग है कि सभी आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाए, मामले की निष्पक्ष जांच हो तथा दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
भीम आर्मी-आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) की स्थानीय टीम घटना के बाद से ही पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है। हम पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
इस दुःखद घड़ी में मेरी संवेदनाएँ शोकाकुल परिजनों के साथ हैं। प्रकृति उन्हें इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करे।
बिहार के पश्चिम चंपारण में 25 वर्षीय दिलशाद अंसारी की पुलिस हिरासत में मृत्यु बेहद दुखद और चिंताजनक है।
इस मामले में दिलशाद के परिजनों से मेरी बात हुई। उनके पिता अकबर अंसारी जी के अनुसार, सोमवार, 12 अक्टूबर को तड़के करीब 2 बजे पुलिस की टीम दो गाड़ियों से उनके घर पहुंची और पूछताछ ���े नाम पर दिलशाद को अपने साथ ले गई। परिवार को पहले उनके पैर में चोट लगने की सूचना दी गई, लेकिन बाद में उनकी मौत की खबर मिली। दिलशाद की पत्नी ने भी पुलिसकर्मियों पर मारपीट की बात कही।
@officecmbihar से हमारी मांग है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराई जाए, ताकि दिलशाद की मौत की वास्तविक परिस्थितियों का पता चले और दोषियों की जवाबदेही तय हो। दिलशाद के परिवार को न्याय मिलना चाहिए।
इस दुःख�� घड़ी में मेरी संवेदनाएँ शोकाकुल परिजनों के साथ हैं। प्रकृति उन्हें इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करे।
उत्तर प्रदेश सरकार ने परिषदीय विद्यालयों में बुनियादी सुविधाएँ और आधारभूत ढाँचा सुधारने के लिए जून 2018 में ऑपरेशन कायाकल्प शुरू किया था।
प्रदेश भर में करीब 8 साल में अनुमानित 12,000 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद रामपुर जिले में इस कार्यक्रम के अंतर्गत आने वाले आधे से ज्यादा, यानी लगभग 61 हजार बच्चे आज भी स्कूलों में फर्श पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं।
मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी, कुर्सियों पर सत्ता, स्कूलों में फर्श पर 61 हजार बच्चे! यही है आपके ऑपरेशन कायाकल्प का परिणाम?
और हाँ, एक सुझाव है! इन स्कूलों के नीचे ह��� खुदाई करवा दीजिए, शायद कुछ मिल जाए!
मांग बढ़ने पर किराया 25% तक बढ़ाने का प्रस्ताव! महंगाई की मार, सरका�� का फेस्टिव उपहार!
हवाई चप्पल वालों को हवाई जहाज में बैठाने का सपना दिखाने वाली सरकार को समझना चाहिए कि त्योहारों में घर लौटना गरीबों, मजदूरों, छात्रों और मध्यमवर्गीय परिवारों की जरूरत है, विलासिता नहीं। किराया बढ़ाने के बजाय अतिरिक्त ट्रेनें चलाना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
माननीय रेल मंत्री @AshwiniVaishnaw जी, रेलवे जनसेवा का माध्यम है, जनता की मजबूरी से कमाई का जरिया नहीं।
वाह रे जनसेवा!
बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर में गंगा नदी में नाव पलटने से 13 बच्चों की मृत्यु की हृदयविदारक घटना अत्यंत दुखद और चिंताजनक है। मासूम बच्चों की असमय मौत ने मन को व्यथित कर दिया है।
इस दुःख की घड़ी में हमारी संवेदनाएँ शोकाकुल परिवारों के साथ हैं। प्रकृति उन्हें यह अपार दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें। साथ ही, हादसे में घायल हुए लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हैं।
@officecmbihar को हादसे के कारणों की निष्पक्ष जाँच करानी चाहिए, पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा देना चाहिए, घायलों के समुचित एवं निःशुल्क उपचार की व्यवस्था करनी चाहिए और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ��ोस सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।
2 सितंबर 2026 को उपमुख्यमंत्री @brajeshpathakup जी ने वेतन संबंधी शासनादेश जारी करने का आश्वासन दिया था, जिसे 3 सितंबर तक जारी किया जाना था। लेकिन तय समयसीमा के 40 दिन बीत जाने के बावजूद शासनादेश जारी नहीं हुआ और आज अपनी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे बांड डॉक्टरों को हिरासत में ले लिया गया।
वादा सरकार ने किया, लेकिन न्याय मांगने वाले डॉक्टरों को हिरासत का सामना करना पड़ रहा है! यह न केवल चिंताजनक, बल्कि अन्यायपूर्ण भी है।
सरकार अपना वादा निभाए, वेतन विसंगति दूर करे और समान कार्य के लिए समान वेतन सुनिश्चित करने हेतु तत्काल शासना��ेश जारी करे।
@UPGovt #BondedDoctors #DoctorsProtest #SalaryDiscrimination
झारखंड के दुमका जिले के काठीकुंड थाना क्षेत्र में नौवीं कक्षा की 14 वर्षीय आदिवासी छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार और हत्या की घटना बेहद शर्मनाक और दुखद है।
9 अक्टूबर को हुई इस जघन्य घटना के बाद अभी तक किसी की भी गिरफ्तारी न होना कानून-व्यवस्था और बेटियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
@JharkhandCMO से हमारी मांग है कि इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तार�� सुनिश्चित की जाए। निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच हो, दोषियों को कानून के तहत कठोरतम सजा मिले और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया जाए।
@HemantSorenJMM
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के हजारों संविदा कर्मचारियों का लखनऊ के इको गार्डेन में आंदोलन के पांचवें दिन भी धरने पर बैठे रहना गंभीर चिंता का विषय है।
करीब 20 वर्षों से प्रद���श की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने वाले ये कर्मचारी आज भी नौकरी की अस्थिरता और सामाजिक सुरक्षा के अभाव से जूझ रहे हैं। स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले कर्मचारियों को अपने भविष्य की सुरक्षा के लिए संघर्ष करना पड़े, यह चिंताजनक है।
NHM संविदा कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में समान कार्य के लिए समान वेतन, सेवा नियमितीकरण, EPF, ग्रेच्युटी एवं स्वास्थ्य बीमा, पारदर्शी स्थानांतरण नीति और लंबित सेवा संबंधी समस्याओं का समयबद्ध समाधान शामिल है।
@UPGovt से मांग है कि कर्मचारियों की समस्याओं पर त��्काल वार्ता कर ठोस निर्णय लिया जाए और उन्हें सम्मानजनक वेतन, सामाजिक सुरक्षा एवं स्थायी भविष्य की गारंटी दी जाए।
आजाद समाज पार्टी (कांशीराम)-भीम आर्मी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के संविदा कर्मचारियों की सभी जायज मांगों का पूर्ण समर्थन करती है और उनके अधिकारों एवं सम्मान के लिए प्रतिबद्ध है।
उत्तर प्रदेश में हमारी सरकार बनने पर NHM संविदा कर्मचारियों की मांगों को प्राथमिकता के आधार पर ��ूरा करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
@CMOfficeUP
@brajeshpathakup @nhm_up
#UPNHM
#NHM #NHMprotest #NationHealthmission
#ASP_K_Mission2027
#UPMaangeChandraShekharAzad
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की 9 अक्टूबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति ने फॉर्म-7 के जरिए मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया की वैधता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए है���। साथ ही, इसके दुरुपयोग की आशंकाओं को भी गंभीर बना दिया है।
जारी आंकड़ों के अनुसार, 87,127 विलोपन अनुरोधों में से 85,854 (लगभग 98.5%) में नाम हटाने का स्पष्ट कारण दर्ज नहीं था। इसके अलावा, SIR की निर्धारित समयसीमा के बाद दाखिल 1,10,476 विलोपन अनुरोधों और एक ही व्यक्ति द्वारा कई मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आवेदन करने के मामलों पर भी सवाल उठे हैं।
तरबगंज और पीलीभीत विधानसभा क्षेत्रों में विलोपन अनुरोधों में ल���भग 90% मुस्लिम मतदाताओं से संबंधित होने की बात ��ामने आई है। तरबगंज में 'रेशमा' नाम से एक ही दिन, एक ही बूथ के 188 मतदाताओं के खिलाफ आपत्तियां दाखिल किए जाने का मामला भी प्रकाश में आया है। इसके अलावा, 198 ऐसे मामलों का उल्लेख है, जिनमें एक व्यक्ति के नाम से 10 से अधिक फॉर्म-7 दाखिल किए गए और कुल 4,740 मतदाताओं के नाम हटवाने का प्रयास हुआ। निर्वाचन कार्यालय ने इन मामलों को सीमित बताते हुए कहा है कि प्रदेश में लाखों आवेदनों की तुलना में इनकी संख्या बहुत कम ���ै। मामलों की संख्या कम बताकर गंभीर सवालों को खारिज नहीं किया जा सकता।
इससे पहले, बिना कानून मंत्रालय की अनुमति के फॉर्म-6 में बदलाव किए जाने के मामले में निर्वाचन आयोग ने 26 सितंबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया कि यह बदलाव माननीय उच्चतम न्यायालय की मंजूरी के बाद किया गया था। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि अब SIR से पहले वाला पुराना फॉर्म-6 ही मान्य होगा और जिन मतदाताओं के नाम मतदाता सूची ���े काटे गए हैं, वे दोबारा नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
लेकिन 5 अक्टूबर 2026 को माननीय उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया कि फॉर्म-6 में किए गए किसी भी संशोधन को न्यायालय ने ��ंजूरी नहीं दी थी।
मतदाताओं के अधिकारों से खिलवाड़ और देश की जनता को गुमराह करने वाले ऐसे लोकतंत्रद्रोही कृत्य को देशवासी कभी माफ़ नहीं करेंगे।
चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने, मतदाता डेटा के केंद्रीकरण और चुनावी सॉफ्टवेयर से जुड़े मामलों में “अनधिकृत” और “अवैध” कदम उठाए जाने की गंभीर आशंकाएँ सामने आने के बाद निर्वाचन आयोग द्वारा किए गए बदलावों ने अनेक सवाल खड़े किए हैं।
26 सितंबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति में निर्वाचन आयोग ने कहा कि माननीय उच्चतम न्यायालय की मंजूरी के बाद फॉर्म-6 में बदलाव किय��� गया। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि अब SIR से पहले वाला फॉर्म-6 मान्य है और जिन मतदाताओं के नाम काटे गए हैं, वे दोबारा नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। लेकिन 5 अक्टूबर 2026 को माननीय उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया कि फॉर्म-6 में किए गए किसी भी संशोधन को न्यायालय ने मंजूरी नहीं दी है। यह अपने आप में बेहद चिंताजनक है और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
@mygovindia से हमारी प्रमुख माँगें हैं:
1. SIR के बाद हुए सभी चुनाव रद्द किए जाएँ, ताकि मतदाता सूची में अनियमितताओं से प्रभावित चुनावी प्रक्रिया पर जवाबदेही तय हो सके।
2. इस पूरे मामले की जाँच माननीय मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली उच्चतम न्यायालय की पीठ की निगरानी में कराई जाए। यह पता लगाया जाए कि इस मामले में कौन-कौन लिप्त है, किसके निर्देश पर ये कदम उठाए गए और किन लोगों या राजनीतिक पक्षों को लाभ पहुँचाने के ��द्देश्य से ऐसा किया गया। ज्ञानेश कुमार सहित सभी संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जाँच हो और दोषियों की जवाबदेही तय की जाए।
3. वर्ष 2023 में चुनाव आयुक्तों से संबंधित कानून में किए गए बदलाव रद्द किए जाएँ। इस कानून के तहत चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में किए गए बदलावों के साथ-साथ धारा 16 में आधिकारिक कार्यों के संबंध में दिए गए कानूनी संरक्षण के प्रावधान की भी समीक्षा हो और इसे रद्द किया जाए, ताकि चुनाव आयुक्तों की जवाबदेही सुनिश्चित हो सके तथा कानून के तहत जाँच और कार्रवाई में अनुचित बाधाएँ न आएँ।
4. चुनाव आयुक्तों के चयन की प्रक्रिया निर्धारित करने के लिए संसद में विस्तृत चर्चा हो। राजीव कुमार के बाद ज्ञानेश कुमार मुख्य निर्वाचन आयुक्त बने। भविष्य में भी नियुक्तियों के जरिए निर्वाचन आयोग पर सत्ता का प्रभाव पड़ने की आशंका को समाप्त करने के लिए ऐसी पारदर्शी और न���ष्पक्ष व्यवस्था बनाई जाए, जिसमें किसी भी सरकार को अपनी पसंद के व्यक्तियों की नियुक्ति करके इस संवैधानिक संस्था की स्वतंत्रता प्रभावित करने का अवसर न मिले।
5. ईवीएम से चुनाव कराने की व्यवस्था समाप्त कर बैलेट पेपर से चुनाव कराए जाएँ, ताकि ��ुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित हो तथा मतदाताओं का चुनाव प्रणाली पर विश्वास मजबूत हो।
लोकतंत्र में मतदाता सूची के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ और निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर उठने वाले सवालों को हल्के में नहीं लिया जा सकता। देश की जनता को सच्चाई जानने का अधिकार है और इसकी जिम्मेदारी तय होना आवश्यक है।
“जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी” का नारा देकर सोए हुए समाज को जगाने वाले और “वोट हमारा, राज तुम्हारा नहीं चलेगा” के नारे से शोषित समाज में राजनीतिक चेतना पैदा करने वाले बहुजन नायक, मान्यवर साहब कांशीराम जी के परिनिर्वाण दिवस पर उन्हें कृ���ज्ञता पूर्ण नमन एवं विनम्र आदरांजलि। हम संकल्प लेते हैं कि आपके “बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय” के ��धूरे सपने को मंजिल तक पहुंचा कर ही दम लेंगे।